सवाल पूछने में भी कम दिखी रूचि
भोपाल। विधानसभा पहुंचने वाले विधायकों की विधानसभा की बैठकों और अपने क्षेत्र के सवाल पूछने में रूचि कम ही नजर आती है। भाजपा के विधायक इसमें भी आगे रहे, जबकि कांग्रेस विधायकों ने बैठकों के साथ-साथ प्रश्न पूछने में भी कम ही रूचि दिखाई है। भाजपा के पांच ऐसे विधायक थे जो सदन की बैठकों में सर्वाधिक पहुंचे, जबकि कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं इस गिनती में नहीं है। वहीं सबसे ज्यादा प्रश्न पूछने वाले पांच विधायकों में चार भाजपा के और एक कांग्रेस का विधायक रहा।
मध्यप्रदेश में अगली विधानसभा के चुनाव के लिए उम्मीदवार सक्रिय हो गए हैं, मैदानी मोर्चे में उनकी सक्रियता नजर आने लगी है। वहीं अगर पिछली विधानसभा 2018 के चुनाव परिणाम पर नजर डाले तो प्रदेश के 230 विधायकों में से 5 विधायक ही ऐसे थे जो सदन की 79 बैठकों में से 77 बैठकों में शामिल हुए। बाकी विधायकों की इन बैठकों में इससे भी कम उपस्थिति रही है। अधिक उपस्थिति के मामले में भाजपा के विधायक अव्वल रहे। वहीं प्रश्न पूछने के मामले में सदन के पांच ऐसे विधायक थे जिन्होंने अपने क्षेत्र की समस्याओं सहित अन्य जनसमस्यों से संबंधित सवाल अन्य विधायकों की अपेक्षा ज्यादा पूछे। ये इनमें भी चार विधायक भाजपा के थे, जबकि कांग्रेस का एक ही विधायक ऐसा था जिसकी सवाल पूछने में ज्यादा रूचि नजर आई। सवाल पूछने वाले शीर्ष 5 विधायकों में 4 भाजपा व 1 कांग्रेस के हैं। सिलवानी के भाजपा विधायक रामपाल सिंह ने सबसे ज्यादा 390 सवाल पूछे हैं। दूसरे नंबर पर मंदसौर विधायक यशपाल सिंह ने 387, मनावर से कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने 383, सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा ने 381 व जावरा विधायक राजेंद्र पांडे ने 377 सवाल पूछे हैं।
छिंदवाड़ा जिले के विधायकों की स्थिति
छिंदवाड़ा जिले के विधायकों की स्थिति पर नजर डाले तो चौरई के विधायक सुजीत सिंह 79 बैठकों में से 64 बैठकों में ष्शामिल हुए, उन्होंने पांच साल में 68 प्रश्न ही पूछे हैं। वहीं सौसर विधायक विजय रेवनाथ चौरे 63 दिन सदन में उपस्थित रहे, उन्होंने 40 सवाल उठाए। पांढुर्णा के विधायक नीलेश उइके सदन में 58 दिन उपस्थित रहे, उन्होंने 32 सवाल पूछे। इसके अलावा सोहनलाल वाल्मिकी 48 दिन उपस्थित रहे, जबकि उन्होंने 211 सवाल पूछे। जुन्नारदेव के विधायक सुनील उइके सदन में 47 दिन उपस्थित रहे उन्होंने सबसे ज्यादा 242 सवाल पूछे। इसी तरह अमरवाड़ा के विधायक कमलेश प्रताप सिंह मात्र सदन में 27 दिन ही उपस्थित रहे। उन्होंने पूरे पांच साल में सदन की 79 बैठकों में केवल 2 ही प्रश्न पूछे हैं।

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