कांग्रेस नेता हुए चिंतित, भाजपा को बागियों से खतरा
भोपाल। विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के अलावा राज्य में छोटे दलों में भी बड़ी संख्या में प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। पिछले चुनावों की भांति निर्दलीय और बागियों की संख्या भी इस बार नजर आ रही है। इनके मैदान में होने से कांग्रेस नेताओं में बड़े नुकसान की चिंता सताने लगी है। इसके चलते बागियों की मान मनौव्वल कांग्रेस ने तेज कर दी है। वहीं भाजपा को बड़ी संख्या में उतरे अपने बागी नेताओं से बड़े नुकसान का भय सता रहा है। कुछ नेता तो कांग्रेस में जाकर भाजपा प्रत्याशी को सीधी टक्कर दे रहे हैं, तो कुछ बागी बनकर मैदान में तीखे तेवर दिखा रहे हैं।
विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दो ही दल ऐसे नजर आ रहे हैं, जिन्होंने सभी 230 सीटां पर हमेशा की तरह प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। इसके अलावा हर चुनाव की तरह इस चुनाव में भी छोटे दलों ने बड़ी संख्या में मैदान में उतरकर बड़े राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस की िंचता को बढ़ा दिया है। इन दलों में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी ने ज्यादा प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। साथ ही बहुजन समाज पार्टी ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरने का फैसला किया है। इसके चलते गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी करीब पचास स्थानों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। इन दलों के मैदान में उतरने से हर चुनाव की तरह कांग्रेस की चिंता ज्यादा बढ़ती नजर आ रही है। कांग्रेस को अपने परंपरागत वोट बैंक में सेंधमारी की चिंता है। इसे लेकर कांग्रेस नेता गंभीर भी नजर आ रहे हैं। इसके चलते उन्होंने नामांकन वापसी के पहले अलग-अलग क्षेत्रों में क्षेत्रीय और छोटे दलों से भी संपर्क साधना शुरू कर दिया है। साथ ही अपने दल के नाराज होकर मैदान में उतरे नेताओं को मनाने की कवायद तेज कर दी है। दूसरी ओर भाजपा को बड़ा नुकसान उसके ही नेता जो बागी बनकर या तो दूसरे दलों के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे हैं या फिर निर्दलीय मैदान में डटे हैं। दूसरे दलों में जाने वालों को तो भाजपा मना नहीं सकती, मगर जो निर्दलीय खड़े हुए हैं उन्हें मनाने का प्रयास भाजपा नेता करने में जुट गए हैं।
पहली बार मैदान में आजाद समाज पार्टी
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी ने भी अपने प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं। हालांकि इस पार्टी ने प्रदेश में पहली बार चुनाव मैदान में सक्रियता दिखाई हैं, मगर 80 सीटों पर उसने प्रत्याशी मैदान में उतारकर दलित और ओबीसी वर्ग के वोट बैंक में सेंधमारी का प्रयास किया है। इस पार्टी के प्रत्याशी भाजपा और बसपा के समीकरण बिगाड़ सकते हैं। कुछ हद तक ये कांग्रेस को भी नुकसान पहुंचाएंगे।
सपाक्स ने भी मौन रहकर उतारे प्रत्याशी
पिछले चुनाव में सपाक्स के कारण भाजपा को खासकर ग्वालियर-चंबल अंचल में खासा नुकसान पहुंचाने वाली सपाक्स पार्टी ने भी इस बार करीब 25 से ज्यादा स्थानों पर प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। इससे एक बार फिर भाजपा का समीकरण बिगड़ सकता है।
औबेसी ने भी ठोकी ताल
एआईएमआईएम के प्रमुख असुद्दीन ओबैसी ने भी प्रदेश में अपने दल के दो स्थानों पर प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। बताया जा रहा है कि बुरहानपुर के अलावा जबलपुर में एक-एक सीट पर पार्टी ने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। हालांकि पहले ओबैसी करीब दो दर्जन स्थानों पर प्रत्याशी मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे थे, मगर एनवक्त पर उन्होंने विचार बदल दिया। इससे कांग्रेस को जरूर राहत मिलती नजर आ रही है।
जयस को साधने में कामयाब रही कांग्रेस
आदिवासी वोट बैंक में सेंधमारी करने वाले जय युवा आदिवासी ष्शक्ति संगठन जयस को साधने में कांग्रेस को सफलता मिली है। कांग्रेस ने अपने विधायक और जयस के संरक्षक डा हीरालाल अलावा की सहायता से इस संगठन को साधा है। मगर जयस के टूटकर तीन भागों में बंटने के बाद कितनी सफलता हासिल होती है, यह परिणाम ही बताएगा। हालांकि डा अलावा ने इस बात का खुलासा कर दिया कि कांग्रेस से जयस का क्या समझौता हुआ है? उन्होंने सोशल मीडिया पर पत्र जारी कर कहा कि कांग्रेस पार्टी ने पांच प्रत्याशी जयस संगठन के मैदान में उतारे हैं, साथ ही सरकार बनने पर निगम-मंडलों में जयस संगठन से जुड़े कार्यकर्ता को पद दिया जाएगा। इसके अलावा जयस के खफा होकर मैदान में उतरे कार्यकर्ताओं को नाम वापस लेने की बात कहते हुए साफ कर दिया कि वे अगर संगठन की बात नहीं मानते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा के लिए संकट विंध्य जनता पार्टी और जनहित
विंध्य जनता पार्टी ने करीब चालीस स्थानों पर प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। भाजपा अलग होकर विधायक नारायण त्रिपाठी ने इस पार्टी का गठन किया है। पार्टी का पूरा फोकस विंध्य अंचल है। इस अंचल की तीस सीटों पर उनके प्रत्याशी भाजपा को नुकसान पहुंचाएंगे। वहीं आरएसएस के पूर्व प्रचारकों की जनहित पार्टी ने भी चुनिंदा स्थानों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। पूर्व प्रचारकों ने कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की बहू कृश्णा गौर के खिलाफ भी प्रत्याशी उतार दिए हैं। इसके बाद भाजपा में खलबली सी मची हुई है।




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