बैठा था, मगर उनके हाथों निराशा ही लगी है।
विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच ही कुछ माह पहले ही दल-बदल का खेल ष्शुरू हो गया था। इस दौरान कुछ वर्तमान विधायकों और कुछ पूर्व विधायकों का पाला बदलने का सिलसिला भी ष्शुरू हो चुका था। इनके अलावा कुछ कद्दावर नेताओं ने भी पाला बदलकर दल-बदल किया था। इस बार दल-बदल करने वालों की संख्या कांग्रेस से ज्यादा भाजपा में नजर आ रही थी। कांग्रेस नेता भी खुश थे, वहीं दल बदलने वाले और उनके समर्थकों की खुशी तो और बढ़ गई थी। कांग्रेस में आने वाले सभी नेताओं को उम्मीद थी कि कांग्रेस से उन्हें टिकट मिल जाएगा। मगर जैसे-जैसे टिकट वितरण को लेकर प्रक्रिया तेज हुई और कांग्रेस नेताओं ने इन्हें नकारना ष्शुरू हुआ तो इनकी चिंता भी बढ़ने लगी। पहले तो कुछ ने दबाव बनाया और टिकट की दावेदारी की। यहां तक की कुछ ने तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के निवास पर पहुंचकर शक्ति प्रदर्शन तक कर डाला। इसके बाद भी इन नेताओं को कुछ हासिल नहीं हुआ। कांग्रेस ने उन्हें दल-बदल करने वाले नेताओं को पूछा जिनकी उम्मीद जीत की थी या फिर संगठन उन्हें किसी कारण से अपने दल में लाना चाह रहा था। जिन्हें टिकट मिली वे तो खुश नजर आए, मगर कई नेताओं को कांग्रेस ने दरकिनार भी किया। इन नेताओं में कोलारस से वर्तमान विधायक वीरेंद्र रघुवंशी का सबसे ऊपर है। रघुवंशी कांग्रेस में आते ही अपने को शिवपुरी से प्रत्याशी मान रहे थे। मगर ऐसा हुआ नहीं। इसी तरह मैहर से विधायक रहे नारायण त्रिपाठी ने भी कांग्रेस की दूसरी सूची आती उसके पहले जमावट को खूब की और भाजपा के साथ-साथ विधायकी से भी इस्तीफा दे दिया, मगर उनकी राह में कांग्रेस के नेता ही रोड़ा बने और एन वक्त पर उन्हें ना तो टिकट की हरी झंडी मिली और ना ही उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। त्रिपाठी के अलावा निवाड़ी विधानसभा सीट से पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय रामनरेश यादव की बहू रोशनी यादव ने कांग्रेस की सदस्यता ले थी। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि उनका टिकट पक्का है, मगर कांग्रेस ने यहां पर अमित राय को प्रत्याशी बना दिया। इनके अलावा पर्वतारोही मेघा परमार भी सीहोर जिले की इछावर सीट से प्रत्याशी बनाए जाने की उम्मीद लगाए थी। मगर उनके नाम से भी कांग्रेस ने दूरी बनाए रखी। अब ये नेता चिंतित हैं और समर्थक मौन।
नारायण के अगले कदम पर टिकी निगाहें
मैहर से चार बार विधायक रहे नारायण त्रिपाठी को भाजपा छोड़ने के बाद कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा था। मगर कांग्रेस में भी उन्हें स्थान नहीं मिला। मैहर में भाजपा, कांग्रेस के अलावा सपा और बसपा ने भी अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। इसके बाद अब कयास यह लगाए जा रहे हैं कि वे अगला कदम क्या उठाएंगे? माना जा रहा है कि उन्होंने जिस दल विंध्य जनता पार्टी का गठन किया है, उसी के बैनर पर वे चुनाव लड़ेंगे। फिलहाल उन्होंने किसी तरह का कोई बयान नहीं दिया है।

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