गुरुवार, 19 अक्टूबर 2023

अपने वोट के जरिए दूसरे दलों को जमीन नहीं तलाशने देगी कांग्रेस

नाराज सपा और आप ने प्रत्याशी उतारे मैदान में 


भोपाल। राश्टीय स्तर पर कांग्रेस भले ही इंडिया गठबंधन के जरिए लोकसभा चुनाव लड़े, मगर मध्यप्रदेश में कांग्रेस को यह मंजूर नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पहले ही इशारा कर चुके थे कि वे कांग्रेस के वोट बैंक के जरिए दूसरे दलों को प्रदेश में जमीन नहीं तलाशने देंगे। इसके चलते पहले आम आदमी पार्टी फिर समाजवादी पार्टी ने नाराज होकर प्रदेश में उम्मीदवार मैदान में उतार दिए। हालांकि माना जा रहा है कि ये दल कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ेंगे। कांग्रेस इसकी परवाह किए बिना पूरे 230 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला कर चुकी है। 

कांग्रेस के साथ राश्टीय स्तर पर इंडिया गठबंधन करके आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी सहित अन्य दलों ने लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इसके चलते आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी लगातार मध्यप्रदेश में कांग्रेस से गठबंधन करके विधानसभा चुनाव लड़ने पर भी दबाव बनाते रहे, मगर कांग्रेस के प्रदेश संगठन ने इससे दूरी बनाए रखी। बताया जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ नहीं चाहते थे कि प्रदेश के विधानसभा चुनाव में वे इस तरह का कोई गठबंधन करें। इसके लिए उन्होंने शुरू से ही कड़ा रूख अपनाए रखा। कमलनाथ का साफ तर्क था कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस के वोट बैंक के जरिए दूसरे दलों को जमीन तलाशने नहीं देंगे। 

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी हो या फिर समाजवादी पार्टी दोनों ही दलों की प्रदेश में स्थिति कोई बेहतर नहीं है। दूसरे दलों के नाराज नेताओं के सहारे चुनाव में सपा जीत हासिल करती रहीं है। जबकि आम आदमी पार्टी तो अब तक प्रदेश में अपना खाता भी नहीं खोल पाई है। वहीं समाजवादी पार्टी का प्रदेश में लगातार ग्राफा भी गिरता जा रहा है। सपा के राश्टीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लोकसभा और उत्तर प्रदेश के चुनाव के पहले मध्यप्रदेश में अपने गिरते ग्राफ को उठाना चाहते थे, जिसके चलते वे लगातार कांग्रेस पर दबाव बना रहे थे। यही स्थिति आम आदमी पार्टी की रही थी। 

सपा का प्रदेश में इस तरह रहा प्रदर्शन

समाजवादी पार्टी ने मध्यप्रदेश में 1998 के विधानसभा चुनाव में पहली बार 94 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। इसमें से चार प्रत्याशी उसके जीते थे। इसके बाद 2003 में 161 स्थानों पर चुनाव लड़ा उसमें से 7, 2008 में 186 स्थानों पर चुनाव लड़ा, उसमें से 1, 2013 में 163 स्थानों पर चुनाव लड़ा, उसमें से कोई भी जीतकर विधानसभा नहीं पहुंचा था। इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में 52 स्थानों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे, जबकि उसका केवल एक प्रत्याशी ही जीत हासिल कर पाया था। 2018 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को 1.30 फीसदी वोट ही हासिल हुए थे। 

आम आदमी पार्टी को वोट प्रतिशत बढ़ाने की चाह

आम आदमी पार्टी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में 208 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। इस चुनाव में उसका एक भी प्रत्याशी जीतकर विधानसभा नहीं पहुंचा था। इस चुनाव में सिंगरौली विधानसभा सीट पर ही आप को 32 हजार से ज्यादा वोट मिले थे, इसके अलावा किसी भी विधानसभा क्षेत्र में उसका खासा प्रदर्शन देखने को नहीं मिला था। वहीं 2018 के विधानसभा चुनाव में आप को कुल 0.66 फीसदी मत हासिल हुए थे। इस लिहाज से देखा जाए तो आप को प्रदेश में नोटा से भी कम फीसदी वोट हासिल हुए थे। नोटा को इस चुनाव में 1.42 फीसदी मतदाताओं ने पसंद किया था। 


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