अमित शाह ने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से कहा
भोपाल। तीन दिवसीय दौरे पर मध्यप्रदेश आए केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने नाराज नेताओं और बागी होकर मैदान में उतरे प्रत्याशियों को लेकर साफ कहा कि रूठे हुए फूफाओं से नाम वापस लेने के लिए आग्रह करें, मान जाएं तो ठीक, नहीं माने तो मनाने की ज्यादा जरूरत नहीं। सपा और बसपा के उम्मीदवारों की मदद जरूर करे।
केन्द्रीय मंत्री अमित शाह का जबलपुर से शुरू हुआ दौरा ग्वालियर में समाप्त हो गया। इंदौर से ग्वालियर पहुंचकर उन्होंने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की बैठक ली। इस बैठक में करीब तीन सौ से ज्यादा कार्यकर्ता और पदाधिकारी ष्शामिल हुए थे। बैठक में ग्वालियर-चंबल अंचल की सीटों पर भाजपा की स्थिति को लेकर उन्होंने चर्चा की और चुनावी तैयारियों की जानकारी लेते हुए जीत का मंत्र भी कार्यकर्ताओं को दिया। इस दौरान उन्होंने इस अंचल के नाराज नेताओं को मनाने की बात भी कही। कार्यकर्ताओं से शाह ने कहा कि अभी जो लोग पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ रहे हैं, उनसे जरूर संपर्क करें। उनको मनाने की कोशिश करें, जिससे वो अपना नाम वापस ले लें। अगर जरूरत हो तो मुझसे भी बात कराएं। उन्होंने कहा, अपने रूठे हुए फूफाओं (भाजपा के बागी नेता) को मनाने की ज्यादा जरूरत नहीं है। इसके अलावा उन्होंने सपा और बसपा के प्रत्याशियों की मदद करने पर जोर दिया। शाह ने कहा कि सपा और बसपा के उम्मीदवारों की मदद करो। उन्होंने कहा कि ये जितने मजबूत होंगे, उतना हमें फायदा होगा. यही कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगे। शाह ने कहा कि पार्टी ग्वालियर-चंबल अंचल में 2018 से उलट रिजल्ट चाहती है।
रूठो पर ज्यादा ऊर्जा बर्बाद मत करो
अमित ष्शाह ने कार्यकर्ताओं से चार बातों पर ध्यान रखते हुए मैदान में जुटने की बात कही। उन्होंने रूठो पर ज्यादा ऊर्जा बर्बाद मत करो, जब माहौल बदलेगा वे चुपचाप आकर काम करने लगेंगे। सपा-बसपा उम्मीदवारों की मदद करें. वो वोट काटेंगे तो जीत की राह आसान हो जाएगी। लाभार्थियों पर फोकस करें। मतदान के दिन खुद सपरिवार वोट करें और चार परिचित परिवारों के भी करवाएं।
दिल्ली दरबार और दरी बिछाने वाले कार्यकर्ता के बीच छिड़ी जंग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ सोशल मीडिया पर लिखा कि भाजपा के रणनीतिकार अपने ही चक्रव्यूह में फंस गए हैं। भाजपा के दिल्ली दरबार और दरी बिछाने वाले कार्यकर्ताओं में जंग छिड़ी है। यही वजह है कि जबलपुर में एक तरफ भाजपा नेता अमित शाह बड़ी-बड़ी रणनीति और संगठन की बातें करते रहे तो दूसरी तरफ वहीं के भाजपा महानगर अध्यक्ष ने पार्टी में लगातार हो रहे अपमान के कारण पद से इस्तीफा दे दिया। यह हाल अकेले जबलपुर का नहीं है, पूरे मध्य प्रदेश में भाजपा में इस बात पर रोष है कि प्रदेश में क्या सारे नेता अक्षम हो गए हैं जो दिल्ली उनके ऊपर थोपी जा रही है। मध्य प्रदेश में भाजपा अब सिर्फ भाषणों और विज्ञापनों में बची है, वह चुनाव लड़ने की रणनीति पर नहीं, बल्कि आपसी रण की नीति पर चल पड़ी है।

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