भोपाल। प्रदेश में चुनाव लड़ने के लिए कहीं रिश्तेदार आमने-सामने हैं, तो कहीं पर पति-पत्नी भी चुनाव लड़ने मैदान में उतरे हैं। प्रदेश बालाघाट जिले में तो पति-पत्नी अलग-अलग दलों से अलग-अलग विधानसभा सीटों पर मैदान में उतर गए हैं।
प्रदेश में नामांकन भरने की तारीख समाप्त हो गई। इस दौरान कई नजारे भी दिखाई दिए जहां परिवार के सदस्यों ने आमने-सामने चुनाव लड़ने की तैयारी की है। कहीं भाई-भाई, कहीं चाचा-भतीजा तो कहीं अन्य रिश्तेदार मैदान में उतरे हैं। इसी तरह बालाघाट जिले में बालाघाट और परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में यह मुंजारे दंपति चुनाव मैदान में उतरे हैं। बालाघाट में कांग्रेस ने अनुभा मुंजारे को अधिकृत प्रत्याशी बनाया है, तो परसवाड़ा में पूर्व सांसद और अनुभा के पति कंकर मुंजारे कांग्रेस प्रत्याशी मधुकुमार के खिलाफ मैदान में उतरने के लिए नामांकन पर्चा भर चुके हैं। कंकर मुंजारे ने गौंडवाना गणतंत्र पार्टी से नामांकन पर्चा दाखिल किया है।
परिवार से बाहर ना जाए टिकट !
परिजनों ने टिकट के घोशित प्रत्याशियों के अलावा नामांकन भरा है। इस तरह का नाराज बालाघाट में दिखा। यहां पर पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन की पुत्री मासूम बिसेन को भाजपा प्रत्याशी घोशित किया था, मगर बीमारी के चलते खुद बिसेन ने यहां नामांकन भरा। इसके पीछे मूल कारण परिवार से बाहर टिकट किसी को ना जाए। इसी तरह के और भी स्थानों पर उदाहरण देखने को मिले हैं। भाजपा के हरसूद से प्रत्याशी विजय शाह के अलावा उनके बेटे दिव्यादित्य ष्शाह ने नामांकन भरा है। धार से नीना वर्मा भाजपा की प्रत्याशी हैं, मगर यहां उनके पति विक्रम वर्मा ने भी नामांकन भरा है। हालांकि ये नामांकन सिर्फ इसलिए भरे हैं कि त्रुटि के चलते अगर अधिकृत प्रत्याशी का नामांकन खारिज होता है तो परिवार से बाहर किसी को टिकट ना मिले। भाजपा के अलावा कांग्रेस प्रत्याशी भी परिवारवाद में उलझे हैं। कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे हुकुम सिंह कराड़ा के पुत्र राजकुमार कराड़ा ने शाजापुर से, लखन घनघोरिया के पुत्र यश घनघोरिया ने जबलपुर पूर्व से नामांकन पत्र भरा है। इंदौर एक से कांग्रेस प्रत्याशी संजय शुक्ला की पत्नी अंजलि ने भी नामांकन भरा है।

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