शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2023

कांग्रेस में नेता तो अनेक, चेहरा केवल एक

कमलनाथ को छोड़ मैदान से दूर हैं बड़े नेता, भाजपा के दिग्गज लगातार ले रहे सभाएं


भोपाल। विधानसभा चुनाव के लिए चल रहे नामांकन के सिलसिले के बीच मैदानी प्रचार भी तेज हो चला है। मगर कांग्रेस अब तक मैदानी प्रचार में भाजपा से पिछड़ी नजर आ रही है। भाजपा के प्रदेश के नेताओं ने मैदान में पूरी ताकत लगा दी और सभाएं करना तेज कर दिया है। दूसरी और कांग्रेस नेता अब भी टिकट वितरण मामले में उलझे हैं। हालात यह है कि कांग्रेस में नेता तो कई हैं, मगर एक मात्र चेहरा मैदान में सक्रिय नजर आ रहा है। कमलनाथ अकेले ही मैदानी सभाओं में सक्रिय नजर आ रहे हैं। 

मध्यप्रदेश में कांग्रेस लगातार प्रदेश में अपनी सरकार बनाने का दंभ भर रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के अलावा कांग्रेस के अन्य नेता इसे लेकर रोजाना दावे भी कर रहे हैं। वहीं दूसरी और मैदानी सक्रियता इन नेताओं की कम ही नजर आ रही है। कांग्रेस में दिल्ली से आने वाले नेता भी सिर्फ प्रदेश कांग्रेस कार्यालय तक सिमट कर रह गए हैं। ये नेता आते हैं और प्रेस कांफ्रेंस कर चले जाते हैं। मैदान में ये नेता नजर नहीं आ रहे। प्रदेश में भी आधा दर्जन कांग्रेस के बड़े नेता हैं, जो फिलहाल अपने-अपने क्षेत्रों में ही घिरे नजर आ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की बात करें तो उन्होंने सभाओं से दूरी बनाए रखी है। यह पहली बार नहीं हुआ है,  वे पिछले चुनाव में भी सभाओं से दूर ही रहे थे। हां अपने समर्थकों के लिए उन्होंने सभाएं जरूर की थी। इस बार भी वे रूठों को मनाने के लिए सक्रिय होने की बात कहकर अधिकांश समय भोपाल में ही रह रहे है। सिंह के अलावा वहीं पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी नाराज बताए जा रहे हैं। भोजपुर सीट से उनके समर्थक को टिकट नहीं दिया तो वे घर बैठ गए हैं। नेता प्रतिपक्ष डा गोविंद सिंह अपने ही घर में घिरे नजर आ रहे हैं। वे लहार से बाहर नहीं आए। आस-पास की सीटों के प्रत्याशियों के नामांकन भरवाने वे जरूर गए। वहीं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह विंध्य को छोड़कर अपने विधानसभा क्षेत्र चुरहट में ही सीमट गए हैं। वे पिछला चुनाव हार गए थे, इसके चलते इस बार वे कोई चूक नहीं होने देना चाहते हैं। विंध्य की अन्य सीटों पर उनकी सक्रियता नही ंके बराबर है। अरूण यादव को कोई खास जिम्मेदारी नहीं मिली है, इसके चलते वे निमाड़ की सीटों के बजाय अपने भाई सचिन यादव के विधानसभा क्षेत्र कसरावद तक ही सीमित हैं। आदिवासी चेहरा कांतिलाल भूरिया का पूरा फोकस अपने बेटे डा विक्रांत भूरिया को चुनाव जीताना है। वे झाबुआ में ज्यादा वक्त दे रहे है। बाकि मालवा की सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार अपने भरोसे मैदान में नजर आ रहे हैं। इन नेताओं के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ही एक ऐसे कांग्रेस नेता रहे जो अब तक सभाओं में सक्रिय नजर आए हैं। उन्होंने महाकौशल और उसके आसपास के क्षेत्र में सभाओं का सिलसिला तेज कर दिया है। बाकि नेताओं ने मैदानी सभाओं से दूरी बनाए रखी है। 

भाजपा के दिग्गजों ने कूच दिया आधा प्रदेश


भाजपा का पूरा संगठन और नेता इन दिनों मैदान में नजर आ रहा है। कहां किस नेता को पहुंचना है यह संगठन तय कर रहा है। वे नेता संगठन के तय स्थान और दिन पर पहुंचकर ना केवल सभाएं कर रहे, बल्कि पार्टी के उम्मीदवारों के नामांकन भरवाने में भी नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद प्रत्याशी चयन के बाद से कई स्थानों पर सभाएं कर चुके हैं। इसके अलावा वे प्रतिदिन सभाएं लेने पहुंच रहे हैं।  वहीं केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ग्वालियर-चंबल तो केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल महाकौशल में लगातार सक्रिय है। वे अपने विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ अपने प्रभार वाले अंचलों में सभाएं ले रहे हैं। फग्गन सिंह कुलस्ते मंडला और आसपास के क्षेत्र में तो कैलाश विजयवर्गीय अपनी सीट के अलावा मालवा की अन्य सीटों पर भी पहुंच कर सभाएं कर रहे हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी ग्वालियर-चंबल अंचल में सक्रियता दिखाई है। खुद प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा प्रदेशभर में अलग-अलग जिलों में पहुंचकर सभाएं कर रहे हैं। 


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