शुक्रवार, 1 दिसंबर 2023

दो साल में 22 पीड़ितों की हुई मौत

  उच्च रक्तचाप, मधुमेह के शिकार हो रहे गैस पीड़ित


भोपाल। यूनियन कार्बाइड हादसे की 39 वीं बरसी के अवसर पर राजधानी के गैस पीड़ित संगठनों को गैस पीड़ितों की हो रही मौत और उनमें बढ़ती जा रही अलग-अलग कई तरह की बीमारियों की चिंता सता रही है। संगठन ने मौतों और बीमारियों को लेकर चिकित्सकीय धयान देने की बात कही है। गैस पीड़ितों खासकर उच्च रक्तचाप और मधुमेह से ज्यादा संख्या में पीड़ित हैं।
गैस त्रासदी की बरसी के पहले आज राजधानी भोपाल में सम्भावना ट्रस्ट क्लीनिक के चिकित्सकों ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि राजधानी में गैस पीड़ितों को कई बीमारियां आकोश में ले रही है। ट्रस्ट की योग चिकित्सक डॉ. श्वेता चतुर्वेदी ने बताया कि 1 जनवरी, 2022 से हमारे क्लीनिक में इलाज ले रहे 3832 गैस पीड़ितों में से 22 की मृत्यु हो गई है। पिछले दो वर्षों के 22 मृतकों में से 14 (64 फीसदी) को उच्च रक्तचाप की बीमारी बताई गयी थी, 10 (45 फीसदी) को मधुमेह बताया गया था। मधुमेह के 10 में से 8 मामलों में, मृतक को उच्च रक्तचाप और मधुमेह दोनों थे। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी)  सहित श्वसन संबंधी बीमारियाँ मृतकों में तीसरी सबसे आम बीमारी थीं। क्लीनिक के पंजीकरण सहायक नितेश दुबे ने कहा बताया कि हमारे क्लीनिक के आँकड़ों से पता चलता है, कि क्लिनिक में पिछले दो सालों में इलाज लेने वाले 6254 व्यक्तियों में से मधुमेह, कोरोनरी धमनी रोग, न्यूरोपैथी और गठिया की बीमारी गैर गैस पीड़ितों की अपेक्षा गैस पीड़ितों में तीन गुना ज़्यादा हैं द्य गैर गैस पीड़ितों की अपेक्षा गैस पीड़ितों में उच्च रक्तचाप, एसिड पेप्टिक रोग, अस्थमा, सीओपीडी, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस और चिंता की बीमारियाँ दोगुनी है।
गौरतलब है कि सम्भावना ट्रस्ट क्लिनिक सितम्बर 1996 से गंभीर रूप से प्रभावित आबादी के बीच चल रहा है। यहां अब तक 36,730 व्यक्तियों को दीर्घकालिक इलाज के लिए पंजीकृत किया गया है। क्लीनिक में इलाज का तरीका पंचकर्म सहित योग और आयुर्वेद के साथ आधुनिक चिकित्सा के एकीकरण पर आधारित हैं। इलाज के अलावा, यह क्लीनिक सामुदायिक स्वास्थ्य कार्य भी करता है, औषधीय पौधे उगाता है और आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन करता है।

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