सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

सोशल मीडिया पर छलका दर्द, किया डीजीपी बनने का दावा

मैथलीशरण गुप्त 
स्पेशल डीजी ने कहा पूरी क्षमता के साथ दे सकता हूं बेहतर पुलिस व्यवस्था

मध्यप्रदेश में पुलिस विभाग के मुखिया बनने के लिए राज्य के स्पेशल डीजी मैथलीशरण गुप्त का दर्द सोशल मीडिया पर छलका है. यह पहला अवसर है, जब किसी आईपीएस अधिकारी ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर पुलिस महानिदेशक पद के लिए दावा पेश किया हो. उन्होंने सोशल मीडिया पर मैं पुलिस सिस्टम को बदल सकता हूं, सरकार मेरी क्षमता को समझे.
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक वीके सिंह को हटाए जाने और राजेंद्र कुमार को प्रदेश पुलिस का नया मुखिया बनाए जाने की खबरों के बीच में स्पेशल डीजी मैथिली शरण गुप्त ने  अपने को डीजीपी बनाने का दावा ठोक दिया है. दावे के रूप में उनका एक मैसेज सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें वे खुद को किसी प्रदेश में डीजीपी बनाने के लिए सोशल मीडिया पर लाबिंग शुरू की हो. 
गौरतलब है कि वर्तमान  डीजीपी वीके सिंह से कमलनाथ सरकार नाराज है. यही कारण है कि यूपीपीएससी से डीजीपी के लिए जो 3 नामों का पैनल आया था उसे सरकार ने खारिज कर दिया. अब सरकार नए सिरे से डीजीपी पद के लिए नाम भेजेगी. सूत्रों के अनुसार  पैनल में शामिल मैथिलीशरण गुप्त को सरकार डीजीपी नहीं बनाना चाहती है, जबकि वीके सिंह से सरकार कई मामलों को लेकर नाराज चल रही है. विवेक जौहरी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. सरकार चाहती है कि 1985 बैच के आईपीएस अफसर राजेंद्र कुमार का नाम पैनल में शामिल कर यूपीपीएससी को भेजा जाए, क्योंकि यदि विवेक जौहरी का नाम यूपीपीएससी में नहीं जाता है तो राजेंद्र कुमार का नाम तीन नामों के पैनल में आ जाएगा. ऐसे में सरकार वीके सिंह, मैथिलीशरण गुप्त और राजेंद्र कुमार में से किसी को भी डीजीपी बना सकती है, लेकिन  मुख्यमंत्री कमलनाथ की पहली पसंद हनी ट्रैप के एसआईटी चीफ राजेंद्र कुमार हैं. वो उन्हें ही डीजीपी बनाना चाहती है.
मैसेज में यह लिखा स्पेशल डीजी ने
मैसेज में गुप्त ने लिखा है कि वे अपनी क्षमताओं का प्रकटीकरण राज्य सरकार के सामने नहीं करेंगे, लेकिन वह पूरी क्षमता रखते है कि वे एक बेहतर पुलिस व्यवस्था दें पाएं. स्पेशल डीजी पुलिस रिफार्म मैथिली शरण गुप्ता ने लिखा है कि पत्रकारों और सार्वजनिक हस्तियों को पुलिस की असली रक्षक और जनता के सहायक के रूप में बदलने की क्षमता के लिए आगे आना चाहिए. मुझमें क्षमता है राज्य में पुलिस की व्यवस्था को सुचारू करने की, इसमें पुलिस के साथ सामुदायिक सहभागिता के बड़े स्तर पर काम करना चाहता हूं. सामुदायिक सहभागिता करने वालों को इनाम दिया जाना चाहिए.  उन्होंने लिखा है कि वे अपनी क्षमताओं का प्रकटीकरण राज्य सरकार के सामने नहीं करेंगे, लेकिन वह पूरी क्षमता रखते है कि वे एक बेहतर पुलिस व्यवस्था दें पाएं.
वीके सिंह के बाद सीनियर अफसर है गुप्त और चौधरी
प्रदेश में डीजी रैंक के 12 पद हैं. फिलहाल प्रदेश काडर में 16 अफसर डीजी रैंक पर है, इनमें से चार प्रतिनियुक्ति पर हैं. इस वक्त डीजी रैंक के अफसरों के क्रम में सबसे ऊपर 1985 बैच के वीके सिंह हैं, इनके बाद इसी बैच के मैथिली शरण गुप्ता, संजय चौधरी हैं. 1985 बैच के अशोक दोहारे, राजेंद्र कुमार, महान भारत सागर हैं. वहीं 1986 बैच के शैलेंद्र श्रीवास्तव, केएन तिवारी, अनिल कुमार, पुरूषोत्तम शर्मा, संजय राणा और वर्ष 1987 बैच के विजय यादव हैं. वहीं ऋषि कुमार शुक्ला, विवेक कुमार जौहरी, आलोक कुमार पटैरिया और सुधीर कुमार सक्सेना प्रतिनियुक्ति पर हैं.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें