प्रियंका को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजने की उठी मांग
मध्यप्रदेश कांग्रेस में बड़े नेताओं के बीच चल रही खींचतान का कारण राज्यसभा सीट बनी है. नेताओं के बीच चल रही इस कलह को दूर करने के लिए अब राज्य के दो मंत्रियों ने प्रियंका गांधी वार्डा को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजने की मांग कर डाली है. यह मंत्री पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और मुख्यमंत्री कमलनाथ समर्थक माने जाते हैं.
मध्यप्रदेश में इन दिनों वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री कमलनाथ के बीच तकरार बढ़ती जा रही है. सिंधिया लगातार सड़क पर उतरकर जनता के कामों को कराने की बात कह रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ भी उन्हें चुनौती दे चुके हैं कि वे सड़क पर उतर आएं. दोनों नेताओं के बीच छीड़ी बयानों की यह जंग अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा बन गई है. इस जंग की मूल वजह है राज्य से राज्यसभा जाने की तैयारी. मध्यप्रदेश में 9 अप्रैल को तीन सीटें राज्यसभा के लिए रिक्त हो रही है, जिसमें से दो सीटे कांग्रेस और एक सीट भाजपा के खाते में जा रही है. कांग्रेस की ओर से यह माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम तय हो सकता है. फिर भी सिंधिया लगातार दबाव बनाए हुए हैं.
हालांकि कांग्रेस में राज्यसभा जाने के लिए नेताओं की फेहरिस्त लंबी है. दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, मीनाक्षी नटराजन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के अलावा मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए विधायकी छोड़ने वाले दीपक सक्सेना का नाम भी राज्यसभा की दौड़ में शामिल हैं. कांग्रेस के खाते वाली दो सीटों पर आधा दर्जन नामों के चलते टकराव की स्थिति निर्मित हो गई है, जिसके कारण सिंधिया समर्थक लगातार दबाव बनाकर यह तय करना चाहते हैं कि एक सीट पर सिंधिया का नाम तय हो जाए.
इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समर्थक , जनसंपर्क मंत्री पी सी शर्मा और मुख्यमंत्री कमलनाथ समर्थक लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने राज्य से प्रियंका गांधी वार्डा को राज्यसभा भेजने की मांग कर डाली है. वर्मा ने प्रियंका गांधी को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजे जाने की मांग करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति-जनजाति का बाहुल्य है और यह वर्ग हमेशा गांधी परिवार की पसंद रहा है मंत्रियों की इस मांग के बाद राजनीतिक गणित बदल सकता है. कांग्रेस खेमे में इस मांग को सिंधिया के राज्यसभा जाने की कोशिशें को रोकने की रणनीति माना जा रहा है.
भाजपा में भी आधा दर्जन नेता सक्रिय
भारतीय जनता पार्टी के खाते में एक सीट राज्यसभा के लिए जाना है. इस सीट पर फिर से वर्तमान राज्यसभा सदस्य प्रभात झा प्रयास कर रहे हैं. झा के अलावा सत्यनारायण जटिया भी फिर से राज्यसभा जाना चाहते हैं और वे दिल्ली में प्रयासरत हैं. वहीं इन नेताओं की राह में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजवर्गीय परेशानी खड़ी कर रहे हैं. माना जा रहा है कि अमित शाह की पसंद विजयवर्गीय हैं. झा को लेकर अटकलें यह भी लगाई जा रही है कि पार्टी किसी ब्राह्मण नेता का नाम आगे नहीं बढ़ाना चाहती है. इसके पीछे माना जा रहा है कि हाल ही में ब्राह्मण नेता वी.डी. शर्मा को प्रदेश भाजपा की कमान सौंपा जाना. पार्टी नेता किसी आदिवासी नेता को राजयसभा भेजने की रणनीति तय कर रहे हैं. विजयवर्गीय के अलावा संघ से जुड़े और पूर्व महाधिवक्ता रविनंदन सिंह, विनोद गोटिया, लाल सिंह आर्य भी अपने दावे राज्यसभा के लिए कर रहे हैं. हालांकि भाजपा नेता फिलहाल कुछ कहते नजर नहीं आ रहे हैं और दावेदार दिल्ली में अपनी दावेदारी करते नजर आ रहे हैं.
मध्यप्रदेश कांग्रेस में बड़े नेताओं के बीच चल रही खींचतान का कारण राज्यसभा सीट बनी है. नेताओं के बीच चल रही इस कलह को दूर करने के लिए अब राज्य के दो मंत्रियों ने प्रियंका गांधी वार्डा को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजने की मांग कर डाली है. यह मंत्री पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और मुख्यमंत्री कमलनाथ समर्थक माने जाते हैं.
मध्यप्रदेश में इन दिनों वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री कमलनाथ के बीच तकरार बढ़ती जा रही है. सिंधिया लगातार सड़क पर उतरकर जनता के कामों को कराने की बात कह रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ भी उन्हें चुनौती दे चुके हैं कि वे सड़क पर उतर आएं. दोनों नेताओं के बीच छीड़ी बयानों की यह जंग अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा बन गई है. इस जंग की मूल वजह है राज्य से राज्यसभा जाने की तैयारी. मध्यप्रदेश में 9 अप्रैल को तीन सीटें राज्यसभा के लिए रिक्त हो रही है, जिसमें से दो सीटे कांग्रेस और एक सीट भाजपा के खाते में जा रही है. कांग्रेस की ओर से यह माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम तय हो सकता है. फिर भी सिंधिया लगातार दबाव बनाए हुए हैं.
हालांकि कांग्रेस में राज्यसभा जाने के लिए नेताओं की फेहरिस्त लंबी है. दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, मीनाक्षी नटराजन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के अलावा मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए विधायकी छोड़ने वाले दीपक सक्सेना का नाम भी राज्यसभा की दौड़ में शामिल हैं. कांग्रेस के खाते वाली दो सीटों पर आधा दर्जन नामों के चलते टकराव की स्थिति निर्मित हो गई है, जिसके कारण सिंधिया समर्थक लगातार दबाव बनाकर यह तय करना चाहते हैं कि एक सीट पर सिंधिया का नाम तय हो जाए.
इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समर्थक , जनसंपर्क मंत्री पी सी शर्मा और मुख्यमंत्री कमलनाथ समर्थक लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने राज्य से प्रियंका गांधी वार्डा को राज्यसभा भेजने की मांग कर डाली है. वर्मा ने प्रियंका गांधी को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजे जाने की मांग करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति-जनजाति का बाहुल्य है और यह वर्ग हमेशा गांधी परिवार की पसंद रहा है मंत्रियों की इस मांग के बाद राजनीतिक गणित बदल सकता है. कांग्रेस खेमे में इस मांग को सिंधिया के राज्यसभा जाने की कोशिशें को रोकने की रणनीति माना जा रहा है.
भाजपा में भी आधा दर्जन नेता सक्रिय
भारतीय जनता पार्टी के खाते में एक सीट राज्यसभा के लिए जाना है. इस सीट पर फिर से वर्तमान राज्यसभा सदस्य प्रभात झा प्रयास कर रहे हैं. झा के अलावा सत्यनारायण जटिया भी फिर से राज्यसभा जाना चाहते हैं और वे दिल्ली में प्रयासरत हैं. वहीं इन नेताओं की राह में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजवर्गीय परेशानी खड़ी कर रहे हैं. माना जा रहा है कि अमित शाह की पसंद विजयवर्गीय हैं. झा को लेकर अटकलें यह भी लगाई जा रही है कि पार्टी किसी ब्राह्मण नेता का नाम आगे नहीं बढ़ाना चाहती है. इसके पीछे माना जा रहा है कि हाल ही में ब्राह्मण नेता वी.डी. शर्मा को प्रदेश भाजपा की कमान सौंपा जाना. पार्टी नेता किसी आदिवासी नेता को राजयसभा भेजने की रणनीति तय कर रहे हैं. विजयवर्गीय के अलावा संघ से जुड़े और पूर्व महाधिवक्ता रविनंदन सिंह, विनोद गोटिया, लाल सिंह आर्य भी अपने दावे राज्यसभा के लिए कर रहे हैं. हालांकि भाजपा नेता फिलहाल कुछ कहते नजर नहीं आ रहे हैं और दावेदार दिल्ली में अपनी दावेदारी करते नजर आ रहे हैं.
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