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| नरोत्तम मिश्रा |
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा सागर में रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर दिए बयान को लेकर भाजपा नेता मुख्यमंत्री से खफा हो गए हैं. भाजपा ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बयानबाजी तेज कर दी है. भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ को हीरो-हिरोइन के कार्यक्रम कराने और इन सब पर पैसा लुटाने से फुर्सत नहीं है.
पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा सागर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर दिए बयान को लेकर मुख्यमंत्री पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि कमलनाथ को खुद के गिरेबान में झांकना चाहिए. राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे राहुल गांधी के 10 दिन में कर्जा माफी के वादे को वे अभी तक पूरा नहीं कर पाए हैं, यह मुंह चलाने का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं. नौजवानों को 4 हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता न मिलना, कन्यादान योजना बंद होना और प्रदेश की खराब होती आर्थिक स्थिति मुंह चलाने का ही परिणाम है. वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छह माह में छह छक्के मारे हैं. मोदी ने धारा 370 खत्म की, ट्रिपल तलाक खत्म किया, सीएए लागू किया. ये सब बातें बताती है कि मोदी जब मुंह से कुछ बोलते हैं, वह सब कुछ अमली जामा पहनता है, जबकि कमलनाथ को केवल और केवल हीरो हीरोइन के कार्यक्रम कराने और इन सब पर पैसा लुटाने से फुर्सत नहीं है. वहीं भाजपा नेता और पूर्व मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के द्वारा दिया गया बयान दुर्भाग्यपूर्ण है. मोदी किसी की कृपा से प्रधानमंत्री नहीं बने हैं, ये कमलनाथ जी की निराशा है जो इस प्रकार का बयान दे रहे हैं. भाजपा नेता ने कहा कि राज्य सरकार की नाकामी छिपाने के लिए केंद्र सरकार पर ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपनी भाषा पर संयम रखना चाहिए.
पद की गरिमा को हल्का किया मुख्यमंत्री ने
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद की गरिमा को हल्का करते हुए देश के कर्मशील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बहुत ही ओछी टिप्पणी करते हुए कहा कि वो सिर्फ मुंह चलाते है. मैं मुख्यमंत्री कमलनाथ से कहना चाहता हूं कि अगर ऐसा है तो क्यों मोदी और उनकी सरकार के सामने हमेशा याचक की तरह खड़े रहते है? उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में सागर पहुंचे सेठ कमलनाथ ने सागर के ही सेठ परिवार के यहा जाना उचित समझा, लेकिन जिंदा जला दिए गए एक गरीब और दलित दिवंगत स्वर्गीय धन प्रसाद अहिरवार के यहां बैठने जाना एवं शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देना उचित नहीं समझा. इससे ही सरकार का असली चरित्र उजागर होता हैं.

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