भाजपा के लिए चुनौती होगा चेहरा
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने कुछ इस तरह प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को अंजाम दिया है कि मुख्यमंत्री पद के चेहरों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस पद के लिए दावेदार भी बढ़ते जा रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनता के बीच जाकर अब यह पूछने लगे हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री बनना चाहिए या नहीं। इस बीच इस पद के लिए एक और दावेदार ने अपनी दावेदारी कर दी है। वे हैं भाजपा के वरिश्ठ नेता गोपाल भार्गव।
विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अभी 79 प्रत्याशियों की सूची जारी की है। इस सूची में अब तक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम नहीं है। वहीं नरेन्द्र तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते को मैदान में उतारा दिया है। इन सभी उनके समर्थक एक तरह से मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी मान रहे हैं। वहीं अब इस पद के लिए दूसरे नेताओं की दावेदारी भी सामने आ रही है। हाल ही में पूर्व नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिश्ठ नेता गोपाल भार्गव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस वीडियो में भार्गव एक सभा मंच से यह कह रहे हैं कि गुरु आदेश से अंतिम चुनाव लड़ने जा रहे हैं। पार्टी इस बार किसी को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट नहीं कर रही है, तो हो सकता है कि प्रभू इच्छा कुछ और हो। 2020 में हुए घटनाक्रम को लेकर भार्गव ने कहा कि वे मुख्यमंत्री पद के बराबर के पद पर नेता प्रतिपक्ष थे। कमलनाथ 113 विधायकों के नेता थे और वे 108 विधायकों के नेता थे। मगर उस समय संभव नहीं हो पाया। अब जगदम्बा की कृपा से शायद इस बार वह पद मिल जाए। भार्गव का यह बयान एक वायरल वीडियो में सामने आया है जिसमें वे नगर पालिका अध्यक्ष से लेकर विधायक-नेता प्रतिपक्ष बनने की बात कहते कहते सीएम बनने की इच्छा भी व्यक्त करते सुनाई दे रहे हैं।
गौरतलब है कि भार्गव ही नहीं राज्य के गृह मंत्री डा नरोत्तम मिश्रा भी खुद को मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रखे हुए है। वहीं पार्टी नेताओं की माने तो अगर केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव में उतारा गया तो वे भी इस पद के दावेदार ही होंगे। इस लिहाज से देखे तो भाजपा के दिल्ली में बैठे नेताओं ने इस बार विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए संकट खड़ा कर दिया है।
फग्गन भी नहीं हैं पीछे
आदिवासी नेता और केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते भी खुद को इस पद का दावेदार मानते हैं। आदिवासी वर्ग के बीच वे अपने समर्थकों द्वारा इसे लेकर संदेश भी भेज रहे हैं कि इस बार भाजपा आदिवासी नेतृत्व को कमान सौंपेगा। कुलस्ते खुद को एक तरह से मुख्यमंत्री पद का दावेदार बता रहे हैं। कुलस्ते समर्थक तो कुछ इस तरह का तर्क दे रहे हैं कि भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व में राश्टपति पद पर द्रोपदी मुर्मू को बैठाया, ठीक उसी तरह का फैसला मध्यप्रदेश में भी हो सकता है।

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