शुक्रवार, 8 दिसंबर 2023

मंत्रिमंडल गठन भी हुआ चुनौतीपूर्ण, वर्तमान मंत्री होने लगे चिंतित

बड़ी जीत के चलते बिगड़ रहा समीकरण, दिल्ली से ही तय होंगे नाम


भोपाल। भाजपा में विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरे को लेकर दिल्ली में लगातार मंथन हो चल रहा है, मगर अभी तक एक नाम तय नहीं हो पाया है। वहीं मुख्यमंत्री के अलावा मंत्रिमंडल में मंत्रियों के नामों को लेकर भी प्रदेश संगठन चिंतित हुआ है। साथ ही वर्तमान मंत्रियों के सामने भी अब मंत्री पद पाने की चिंता दिखाई देने लगी है। बड़ी जीत के चलते इस बार संगठन इस मामले में भी दिल्ली पर ही इसका फैसला छोड़ने की बात कहता नजर आ रहा है। 

प्रदेश में विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वर्तमान 34 मंत्रियों में से 32 को चुनाव लड़वाया था। दो मंत्री चुनाव नहीं लड़े थे। इनमें से 12 मंत्री चुनाव हार गए, अब 22 मंत्री फिर से विधानसभा चुनाव जीतकर आए हैं। वहीं दूसरी और पार्टी ने 97 वर्तमान विधायकों को टिकट दिया था, जिसमें से 72 चुनाव जीतकर आए हैं। वहीं 57 ऐसे चेहरे भी जीतकर आए हैं, जो तीन से लेकर पांच बार तक के विधायक हैं, जिन्हें अब तक मंत्रिमंडल से दूर रहना पड़ा है। इसके चलते भाजपा संगठन के सामने अब वर्तमान मंत्रियों को स्थान दिलाना आसान नहीं है। वहीं दूसरी और वर्तमान मंत्रियों की भी चिंता इस बात को लेकर बढ़ गई है कि वे इस बार मंत्री बन भी पाएंगे या नहीं। इसके चलते कुछ ने तो दिल्ली पहुंचकर मुख्यमंत्री की दावेदारी जताई ताकि वे मंत्री पद तो पा सकें। इस मामले में संगठन इस बार तटस्थ भूमिका का निर्वाह करने का मन बना चुका है। 

सूत्रों की माने तो संगठन ने दिल्ली और संघ पर यह फैसला छोड़ दिया है कि वे ही मुख्यमंत्री के बाद मंत्रिमंडल में चेहरों का चयन करें। ताकि संगठन पदाधिकारी और मुख्यमंत्री के सामने परेशानी खड़ी ना हो। संगठन के सामने सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि जो तीन से पांच बार के विधायक है, जिन्हें अब तक मंत्री पद नहीं मिला है, उनकी वरिश्ठता को देखते हुए उन्हें किस तरह नकारा जा सकता है। इस स्थिति को देख वर्तमान मंत्रियों मं आधे से ज्यादा का नाम मंत्रीमंडल की सूची में कटने के आसार नजर आ रहे हैं। 

सिंधिया समर्थकों की भी आसान नहीं रहा

इस बार मंत्रिमंडल में पिछली बार की तरह सिंधिया समर्थकों की राह भी उतनी आसान नहीं होगी। संगठन के पुराने विधायकों की उपेक्षा इस बार भाजपा नेता नहीं करना चाहेंगे इसके चलते सिंधिया के निकटतम मंत्रियों प्रद्युमन सिंह तोमर, तुलसीराम सिलावट, गोविंद राजपूत और डा प्रभुराम चौधरी के सामने भी संकट खड़ा हो सकता है। 

मुख्यमंत्री चयन के लिए नियुक्त किए पर्यवेक्षक

भाजपा ने मुख्यमंत्री पद के चयन के लिए प्रदेश में तीन पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। प्रदेश में यह जिम्मेदारी मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री हरियाणा, डा. के. लक्ष्मण, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ओबीसी मोर्चा और आशा लाकड़ा, राष्ट्रीय सचिव को सौंपी है। पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने के साथ ही प्रदेश में विधायक दल की बैठक 10 दिसंबर को बुलाई गई है। इस बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर सहमति बनाई जाएगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय मुख्यमंत्री पद का प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। हालांकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी ष्शर्मा का नाम भी इस दावेदारी में सामने आया है। वहीं मंत्री गोपाल भार्गव ने भी इस पद के लिए दावेदारी की है। 


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