मध्यप्रदेश में ठंड के समय में मंदिरों में भगवान की मूर्तियों को गर्म कपड़े पहनाना और गर्मीयों में मंदिरों में कूलर लगाने का प्रचलन वैसे तो लंबे समय से चला आ रहा है। मगर वर्तमान में यह आम होता जा रहा है। प्रदेश में कई ष्शहरों और कस्बों से इस तरह की खबरें आती रही है। इस तरह की खबरों अब ठंड के तेज होने के साथ एक बार फिर सामने आने लगी है। मध्यप्रदेश की राजधानी राजधानी भोपाल के संकट मोचन हनुमान मंदिर में सभी भगवानों की प्रतिमाओं को ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़े पहनाए गए। मंदिर के पुजारी ने बताया कि भक्तों की मान्यता है कि जैसे हमें ठंड लगती है, वैसे ही भगवान को भी ठंड लगती है, इसलिए हनुमान जी समेत सभी देवी-देवताओं को स्वेटर और शॉल जैसे ऊनी कपड़े पहनाए गए हैं।
राजधानी भोपाल के अलावा दमोह के जानकी मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा का ठंड के मौसम के हिसाब से शृंगार किया गया। सभी देवताओं को ठंड से बचाने के लिए स्वेटर और शॉल पहनाए गए थे। इसी तरह छिंदवाड़ा और ग्वालियर समेत प्रदेश के कई अन्य मंदिरों में भी मूर्तियों को ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़े पहनाए गए हैं। वहीं उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में भगवान को गर्मी प्रदान करने के लिए अग्निकुंड भी स्थापित किया जा रहा है। इतना ही नहीं, प्रसाद के रूप में ठंड के मौसम में भगवान को गर्म भोजन भी चढ़ाया जा रहा है।
गौरतलब है कि करीब पांच हजार साल पहले श्री कृष्ण बलराम और सुदामा उज्जैन के संदीपनी आश्रम में गुरु संदीपनी से शिक्षा ग्रहण करने आये थे. जिसके बाद श्री कृष्ण ने उज्जैन के संदीपनी आश्रम में रहकर ही 64 दिन में 64 विद्या और 16 कला का ज्ञान सीखा था। यहा प्रतिदिन हज़ारो श्रद्धालु दर्शान करने आते है।
रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक पहनाए जाते हैं गर्म कपड़े
इंदौर के प्राचीनतम खजराना मंदिर में भी ठंड के दौरान भगवान गणेश का विशेष ध्यान रखा जाता है। ठंड के प्रारंभ होने के साथ ही यहां पर भगवान के वस्त्रों में बदलाव देखने को मिलता है। मंदिर में भगवान गणेश को रात में ही गर्म ऊनी वस्त्र पहनाए जाते हैं। मंदिर के पुजारी के अनुसार शीतकाल प्रारंभ होने के साथ ही गर्म कपड़े पहनाने का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है। भगवान गणेश को रात्रि 11 बजे गर्म कपड़े पहनाए जाते हैं जो सुबह 6 बजे तक धारण किए रहते हैं। इसके बाद उनके वस्त्र बदलकर अभिषेक पूजन आदि की प्रक्रिया प्रारंभ की जाती है।

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