भोपाल। प्रदेश में मतगणना के पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों की नजरें दर्जन भर सीटों पर नाराज होकर मैदान में उतरे बागियों के चुनाव परिणाम पर टिकी हैं। इन बागियों ने चुनाव को रोचक बना दिया है। अब इनके परिणाम इनके भविष्य का फैसला करेंगे।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में बागियों की संख्या कम नहीं रही। हालांकि बगावत कर चुनाव मैदान में उतरने वालों संख्या करीब दर्जनभर रही है। मतदान के बाद इन बागियों की स्थिति और मुकाबले में दी कड़ी टक्कर ने भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों को चौंका दिया था। अब मतदान की रविवार को होने वाली मतगणना को लेकर चिंतित दोनों ही दलों ने फिर से बागियों को नजरें गढ़ाई है। दोनों ही दल अपने-अपने हिसाब से इन्हें साधने की कवायद भी कर रहे हैं।
गौरतलब है कि मुरैना सीट से भाजपा ने दो बार विधायक रहे पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह का टिकट काट दिया। इससे नाराज होकर सिंह ने बसपा का दामन थामा और उनके बेटे राकेश सिंह को बसपा ने टिकट दिया। इसी तरह गुन्नौर सीट पर अमिता बागरी सपा के टिकट पर चुनाव लड़ी। अमिता पहले भाजपा में थी, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद बगावत कर सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। अमिता के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी चुनाव प्रचार करने आए थे। वहीं टीकमगढ़ विधानसभा सीट का गणित भाजपा से बगावत कर निर्दलीय खड़े पूर्व विधायक केके श्रीवास्तव ने बिगाड़ दिया। इस सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी यादवेंद्र सिंह और केके श्रीवास्तव के बीच माना जा रहा है। इसी तरह लहार विधानसभा सीट से पूर्व भाजपा विधायक रसाल सिंह ने भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों को चुनाव में कड़ी टक्कर दी। वे बसपा के टिकट कर मैदान में चुनाव लड़े। यह सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह 30 सालों से इस क्षेत्र के विधायक है।
बुरहानपुर सीट पर पिछले चुनाव की तरह इस बार भी त्रिकोणीय संघर्ष रहा। इस बार इस सीट पर भाजपा के बागी हर्ष चौहान भाजपा उम्मीदवार अर्चना चिटनीस के लिए सिरदर्द साबित हुए। वहीं धार विधानसभा सीट पर भाजपा व कांग्रेस के बागियों ने मजबूती से चुनाव लड़ा। यहां बागी राजीव यादव ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया है। इंदौर जिले की महू विधानसभा सीट पर पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार कांग्रेस छोड़कर बागी हुए। यहां मुख्य मुकाबला दरबार और भाजपा उम्मीदवार उषा ठाकुर के बीच माना जा रहा है। गोटेगांव विधानसभा सीट पर टिकट बदले जाने से नाराज शेखर चौधरी बागी उम्मीदवार के रुप में मैदान में बने रहे। टिकट कटने से नाराज केदारनाथ शुक्ला ने चुनाव लड़कर भाजपा प्रत्याशी रीति पाठक के मुश्किलें पैदा की है तो आलोट सीट से पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू भी कांग्रेस उम्मीदवार मनोज चावला के लिए परेशानी का सबब बने।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें