रविवार, 31 मार्च 2019

भाजपा प्रत्याशी का विरोध, कहा प्रत्याशी बदलो

मध्यप्रदेश में भाजपा द्वारा सांसदों के टिकट काटने के बाद उनके नाराज समर्थकों द्वारा किए जाने वाला विरोध थम नहीं रहा है. आज बालाघाट में सांसद बोधसिंह भगत समर्थकों ने भाजपा प्रत्याशी बनाए गए ढ़ालसिंह बिसेन के खिलाफ जिला भाजपा कार्यालय बालाघाट पहुंचकर जमकर हंगामा किया और ढ़ाल सिंह बिसेन वापस जाओ के नारे भी लगाए. 
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में टिकट वितरण के बाद भाजपा में बगावत के स्वर मुखर हो गए हैं. रविवार को भाजपा कार्यालय में लोकसभा चुनाव को लेकर अहम बैठक रखी गई थी. बैठक में कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी, मौजूदा सांसद बोध सिंह के समर्थकों ने लोकसभा प्रत्याशी ढालसिंह बिसेन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वापस जाओ के नारे लगाए. इस बीच पार्टी कार्यकर्ताओं ने घोषणा कर दी कि अगर बोधसिंह भगत को टिकट नहीं मिला तो लगभग 3 सैकड़ा से अधिक पार्टी कार्यकर्ता पदाधिकारी भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे. 

शिवराज पर फिर भरोसा, रुठों को मनाने की सौंपी जिम्मेदारी

धार,छिंदवाड़ा के नेताओं से बात करने के बाद अर्गल को मनाने के तेज किए प्रयास
मध्यप्रदेश भाजपा ने एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भरोसा जताया है और उन्हें रुठे टिकट से कटे सांसदों और दावेदारों को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी है. शिवराज लगातार नाराज चल रहे टिकट के दावेदारों और टिकट कटने से नाराज चल रहे  वर्तमान सांसदों से संपर्क कर उन्हें मनाने का प्रयास करने में जुट गए हैं.
 विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद से हार का ठिकरा भाजपा नेताओं द्वारा पूरी तरह से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान पर फोड़ा गया था, इसके बाद उन्हें केन्द्रीय नेतृत्व ने भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर दिल्ली बुला लिया. शिवराज सिंह चौहान का प्रदेश में कद घटने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थी, लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा द्वारा जारी की गई प्रत्याशियों की सूची में वर्तमान सांसदों के टिकट कटने और दावेदारों को टिकट न मिलने से जो नाराजगी दिखाई दी, उससे एक बार फिर प्रदेश और केन्द्रीय नेतृत्व चिंतित हुआ और नाराज चल रहे नेताओं को मनाने की जिम्मेदारी भी शिवराज को दी. शिवराज सिंह चौहान ने इसके लिए शनिवार से सक्रियता भी दिखानी तेज कर दी. उन्होंने शनिवार को धार और छिंदवाड़ा जिले के नेताओं को राजधानी भोपाल बुलाया और चर्चा की. इन दोनों ही स्थानों पर भाजपा अभी तक प्रत्याशी चयन नहीं कर पाई है. धार में वर्तमान सांसद सावित्री को लेकर विवाद है, तो छिंदवाड़ा के नेता स्थानीय प्रत्याशी की मांग उठा रहे थे. इन दोनों ही स्थानों के नेताओं से शिवराज ने संपर्क किया. छिंदवाड़ा के भाजपा नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के मनमोहन शाह बट्टी को टिकट दिए जाने की चर्चा के बाद से नाराज चल रहे थे. इन नेताओं की नाराजगी को दूर करने का प्रयास शिवराज सिंह चौहान ने किया. सूत्रों की माने तो छिंदवाड़ा में भाजपा को जिताऊ प्रत्याशी नहीं मिल रहा है. संभावना इस बात की जताई जा रही है कि भाजपा फिर से चंद्रभानसिंह पर दांव लगा सकती है.
चौहान आज भिंड पहुंचे थे. भिंड में वर्तमान सांसद डा. भागीरथ प्रसाद का टिकट काटकर संध्या राय को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है. इसके बाद से यहां पर पांच बार के सांसद रहे अशोक अर्गल नाराज चल रहे हैं. वे लगातार सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के संपर्क में हैं. माना जा रहा है कि अर्गल कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं, इस बात की चर्चा जब तेज हुई तो शिवराज सिंह ने उन्हें भी मनाने का प्रयास किया.
ज्ञानसिंह से की चर्चा, दिया आश्वासन
शहडोल से टिकट न मिलने से नारज चल रहे वर्तमान सांसद ज्ञानसिंह ने जब निर्दलीय रुप में चुनाव लड़ने की बात कह दी तो भाजपा नेताओं की चिंता और बढ़ गई. इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने ज्ञानसिंह से संपर्क किया और बातचीत की. उन्होंने ज्ञानसिंह को पुनर्विचार करने की बात कही. साथ ही कहा कि वे उनकी बात केन्द्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने का काम करेंगे. इसके अलावा ज्ञानसिंह के पुत्र विधायक शिवनारायण सिंह को से भी उन्होंने चर्चा कर पिता को समझाने का प्रयास किया. वहीं संगठन भी शिवनारायण पर इस बात को लेकर दबाव बना रहा है कि वे अपने पिता ज्ञानसिंह को मना लें.
स्वतंत्रदेव, सतीश कुमार फोन पर करा रहे बात
भाजपा के चुनाव प्रभारी स्वतंत्रदेव सिंंह मालवा, महाकौशल में और सह प्रभारी सतीश उपाध्याय विंध्य में रुठों को मनाने का काम कर रहे हैं. जब इन दोनों नेताओं के सामने समझाइश के बाद भी नाराज नेताओं की नाराजगी दूर  नहीं होती तो ये शिवराजसिंह चौहान को फोन कर उनसे सीधी बात नाराज नेताओं से कर रहे हैं. जब स्वतंत्रदेव सिंह और सतीश कुमार की समझाइश पर नाराज नेता नहीं मानने की बातें भाजपा संगठन को मिली तो उन्होंने शिवराज पर भरोसा जताते हुए यह काम उन्हें सौंपा है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता अब पार्टी के लिए स्वर्गवासी हो गए

भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा एक बार फिर पार्टी को कटघरे में खड़ा कर दिया है. लंबे समय से नाराज चल रहे शर्मा ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता तो अब पार्टी के लिए स्वर्गवासी हो गए हैं. हम स्वर्ग में रहकर भी पार्टी की 29 में से 29 सीटों पर भाजपा के विजय की कामना कर रहे हैं.
भाजपा में वरिष्ठ नेता लगातार अपनी उपेक्षा को लेकर खफा होते नजर आ रहे हैं. पहले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर इसे लेकर बयान देते रहे, मगर केन्द्रीय नेतृत्व की नाराजगी के बाद वे फिलहाल शांत हैं, गौर के अलावा विधानसभा चुनाव के वक्त से सरताज सिंह और रामकृष्ण कुसमरिया नाराज चल रहे थे, दोनों ने अब कांग्रेस का दामन थाम लिया है. पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा भी लंबे समय से अपनी उपेक्षा को लेकर नाराज है. वे कई बार पार्टी में इसे लेकर अपनी बात भी रख चुके हैं. अब शर्मा ने फिर से पार्टी पर हमला बोला है.
शर्मा का एक वीडियो इन दिनों वायरल हुआ,जिसमें उन्होंने जो बयान दिया उससे भाजपा कटघरे में खड़ी नजर आ रही है.  टिकट वितरण को लेकर पार्टी के अंदर चल रही उथल-पुथल को लेकर रघुनंदन शर्मा ने कहा कि कहा कि उनके जैसे नेता  कुछ नेता, भाजपा के नेताओं के लिए स्वर्गवासी हो गए हैं. जो कि स्वर्ग से दृष्टा के रूप में सब देख रहे हैं. पार्टी भले ही उन्हें स्वर्गवासी माने पर वो स्वर्ग से भी दृष्टा के रूप में यही कामना करते हैं कि मध्यप्रदेश में भाजपा 29 में से 29 सीटें जीते. उन्होंने कहा कि 'भाजपा में वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की हालत घर की खूंटी में टंगे उन पुराने कपड़ों की तरह हो गई है, जिनका इस्तेमाल केवल प्रदर्शन और दिखावा है, जबकि उनकी कोई कद्र नहीं होती, लेकिन हमारी हालत तो उससे भी गई गुजरी है. हमारे साथ तो ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, जैसे हम स्वर्गवासी हो गए हैं.'
उल्लेखनीय है कि यह कोई  पहली बार नहीं हुआ है कि रघुनंदन शर्मा ने पार्टी को कटघरे में खड़ा किया, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को मुंगावली और कोलारस विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार की वजह ठहराया था.इसके बाद शर्मा ने विधानसभा चुनाव मिली हार पर भी शिवराज सिंह को ही जिम्मेदार बताया था. 
दिग्विजय ने मारी अपने पैर पर कुल्हाड़ी
कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह को भोपाल से प्रत्याशी घोषित किए जाने पर रघुनंदन शर्मा ने कहा कि 'कांग्रेस ने भोपाल से दिग्विजय सिंह को टिकट देकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है. भोपाल लोकसभा सीट से दिग्विजय सिंह सबसे कमजोर प्रत्याशी हैं. भोपाल में राष्ट्रवादी ताकतें सबसे ज्यादा मजबूत और प्रबल हैं. भोपाल का जनमानस राष्ट्रवाद बनाम आतकंवाद का समर्थन करने वालों के सख्त खिलाफ है. अपने आप को हिंदू और राष्ट्रभक्त साबित करने में लगे दिग्विजय सिंह जीवन भर आतंकवाद की पीठ थपथपाते रहे हैं और अब खुद को हिंदू साबित करने का दिखावा कर रहे हैं.'

विंध्य में कांग्रेस ने उलझाया भाजपा, बसपा को

 भाजपा को उसी की रणनीति पर घेर रही कांग्रेस, बसपा को नहीं मिल रहे जिताऊ प्रत्याशी
मध्यप्रदेश में विंध्य अंचल में विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस अब लोकसभा चुनाव में भाजपा को उसकी ही रणनीति के तहत घेर रही है. कांग्रेस इस बार किसी भी तरह विंध्य में अधिक से अधिक सीटें हासिल करना चाह रही है. इसके चलते जोड़-तोड़ की राणनीति भी तेज हो गई है, जिसने भाजपा के अलावा बहुजन समाज पार्टी को भी चिंता में डाल दिया है.
मध्यप्रदेश में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने विंध्य अंचल में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी की है. कांग्रेस ने इस अंचल की चार सीटों में से अब तक केवल शहडोल सीट पर ही प्रत्याशी घोषित किया है, मगर उसकी रणनीति को देख भाजपा और बहुजन समाज पार्टी चिंतित हो गई है. विधानसभा चुनाव के दौरान से ही कांग्रेस ने इस अंचल के बसपा नेताओं को अपने साथ लिया था. इसके बाद अब भाजपा के नेताओं पर कांग्रेस की नजरें टिक गई है. इस रणनीति के तहत भाजपा को उसी की रणनीति में कांग्रेस ने फंसाने का काम तेज किया है.
सतना से दो भाजपा नेता धीरज पांडेय और रश्मि सिंह कांग्रेस में आ गए हैं. रीवा से विंध्य के कद्दावर भाजपा नेता और पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल के भाई विनोद शुक्ल ने भी कांग्रेस का हाथ थाम लिया है. कांग्रेस ने एक ही दिन में सीधी, सतना और रीवा के कई भाजपा नेताओं को तोड़कर कांग्रेस की सदस्यता दिलाई है, शायद यही कारण है कि कांग्रेस अब जीत के बड़े दावे कर रही है.  हालांकि भाजपा का दावा ये है कांग्रेस में शामिल होने वाले ये चेहरे पिटे हुए हैं.
यहां उल्लेखनीय है कि 2014 कि लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस विधायक नारायण त्रिपाठी को मतदान के एन वक्त पहले भाजपा में शामिल किया और सतना संसदीय क्षेत्र से अजय सिंह की हार को सुनिश्चित कर दिया था. इसके बाद से कांग्रेस के गढ़ में भाजपा ने जमकर सेंधमारी की, जिसके चलते बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इस अंचल में करारी हार का सामना करना पड़ा. अब भाजपा को कांग्रेस ने उसी के रणनीति के तहत माद देने की रणनीति पर काम तेज कर दिया है. 
बसपा की बढ़ाई चिंता
बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर इस अंचल की सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारने का फैसला किया है. बसपा सतना में तो प्रत्याशी घोषित कर पाई, मगर कांग्रेस की रणनीति में वह भी ऐसी उलझी की अब तक प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है. बसपा का इस अंचल में खासा वोट रहा है, मगर इस बार उसे भी झटके लग रहे हैं. उसके पूर्व विधायक बसपा को दामन छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं, तो कई कद्दावर नेता भी कांग्रेस में जा चुके हैं. इसके चलते बसपा को इस अंचल में जिताऊ प्रत्याशी ही नहीं मिल पा रहे हैं.

सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक बन गया चौकीदार शब्द : उपाध्याय

 चौकीदार शब्द देशवासियों के लिए सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक बन गया है. कांग्रेस पार्टी समेत विपक्षी दलों ने देश के चैकीदार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ दुष्प्रचार किया और चौकीदार को अपमानित करने वाली भाषा का प्रयोग किया, तो देश का जनमानस कांग्रेस के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है.
 यह बात भारतीय जनता पार्टी दिल्ली प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष व मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव के सह प्रभारी सतीश उपाध्याय ने सतना में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही. उपाध्याय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के अभियान से जुड़कर आज हर कोई अपने को चैकीदार मान रहा है.  उपाध्याय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 16 मार्च को मैं भी चौकीदार अभियान की शुरूआत की थी. उन्होंने चौकीदार शब्द को परिभाषित करते हुए कहा था कि आज हर कोई जो गरीबी, भ्रष्टाचार, गंदगी, आतंकवाद और सामाजिक बुराईयों से लड़ रहा है, वह चौकीदार है. जो देश के प्रगति के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है वह चौकीदार है. उपाध्याय ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग मैं भी चौकीदार का समर्थन कर रहे हैं. यह अभियान जन आंदोलन बन चुका है. मैं भी चौकीदार इस हैशटेग को अब तक 30 लाख बार ट्वीट किया गया और 1,680 करोड़ इम्प्रेशंस हुए हैं.
उजागर हुआ कांग्रेस की प्रदेश सरकार का झूठ
उपाध्याय ने कहा कि शांति का टापू कहा जाने वाला मध्यप्रदेश कांग्रेस सरकार आने के बाद से अपराधिक गतिविधियों के लिए जाना जाने लगा है. सतना जिले में मासूम बच्चों का अपहरण और हत्या हुई. चोरी, डकैती की घटनाएं बढ़ी हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वो लोग जिन्होंने गरीबों को अंत्येष्टि में दी जाने वाली सहायता राशि बंद कर दी, प्रदेश में सम्बल योजना बंद कर दी, किसानों से ऋण माफी के नाम पर छल किया, वो अब गरीबी हटाओ का नारा देकर 72 हजार देने का चुनावी सिगुफा फैला रहे हैं. उनहोंने कहा कि कांग्रेस का झूठ बेनकाब हो चुका है.

शुक्रवार, 29 मार्च 2019

विधायक ने दिया इस्तीफा, तो हाथ पकड़कर ले गए मंत्री

पांचीलाल मेड़ा 
 मुख्यमंत्री से की बंद कमरे में की मुलाकात, पूछा कारण, कार्रवाई का दिलाया भरोसा
मध्यप्रदेश के धरमपुरी से कांग्रेस के विधायक पांचीलाल मेड़ा ने आज शराब माफिया से दुखी होकर मुख्यमंत्री कमलनाथ को इस्तीफा देने की पेशकश की. वे मीडिया में यह जानकारी दे ही रहे थे कि राज्य के एक मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर आए और उनका हाथ पकड़कर खींचा और मीडिया से चर्चा करने के बजाय वहां से उन्हें ले गए. इसके बाद बंद कमरे में मुख्यमंत्री कमलनाथ से उनकी चर्चा हुई और कार्रवाई का आश्वासन भी मिला, इसके बाद मामला शांत हो गया. हालांकि कांग्रेस नेता और विधायक दोनों ही अब इस मामले में मौन साधे हुए हैं.
धरमपुरी से विधायक पांचीलाल मेड़ा आज राजधानी पहुंचे और क्षेत्र के शराब माफिया के खिलाफ मोर्चा खोला. वे अपने साथ मुख्यमंत्री को संबोधित इस्तीफा लिखकर भी लाए थे. इस्तीफा देने के पूर्व वे मीडिया में इसकी जानकारी दे रहे थे, तभी इसका पता मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर को चला तो वे वहां पहुंचे और मेड़ा का हाथ पकड़ा और खींचकर ले गए. इस दौरान मेड़ा अपनी बात तो नहीं रख पाए, मगर वे मुख्यमंत्री को देने वाले इस्तीफे की कापी जरुर मीडिया में दे गए. तोमर के साथ गृह मंत्री बाला बच्चन भी वहां पहुंचे. इसके बाद तोमर उन्हें मुख्यमंत्री के पास ले गए, जहां बंद कमरे में चर्चा हुई. बताया जाता है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मेडा से चर्चा की और आश्वस्त किया कि वे उनकी शिकायत पर कार्रवाई की जाएगी. 
मेड़ा का कहना है कि स्कूल के पास बनीं दो शराब दुकानों को हटाने के लिए मैंने अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की थी. इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों को भी की थी. इसके बाद भी उन पर कार्रवाई नहीं है. मुख्यमंत्री को लिखे इस्तीफ में उन्होंने बताया कि शराब दुका के ठेकेदार धामनोद एवं सुन्द्रेल द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और जातिसूचक शब्दों का प्रयोद किया. मेरे खिलाफ षडयंत्र रचा गया, जिससे मैं बहुत आहत हुआ. उन्होेंने लिखा कि शराब की दुकान धामनोद एवं सुन्द्रेल को हटाने की कार्यवाही की जाए और राधेश्याम राय अतिरिक्त जिला अधिकारी धार के द्वारा भी हटाया जाए. इनका भी शराब माफिया के साथ अवैध परिववहन एवं बिक्री में पूर्ण सहयोग किया जा रहा है. मेड़ा ने लिखा कि मेरे एवं मेरी पार्टी के कार्यकर्ता के खिलाफ जो रिपोर्ट लिखी गई है, उसे वापस ली जाए एवं जिन्होंने मेरे खिलाफ थाना धामनोद में नारेबाजी की एवं गाली गलौच की उनके खिलाफ वीडियो फुटेज से जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए.
मुख्यमंत्री के साथ पहुंचे कार्यक्रम में
बंद कमरे में हुई चर्चा के बाद विधायक पांचीलाल मेड़ा मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ आदिवासी विकास परिषद के एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे. इस कार्यक्रम में सांसद कांतिलाल भूरिया भी शामिल हुए. इसके अलावा ओंमकार सिंह मरकाम भी उपस्थित रहे. कार्यक्रम के दौरान मंच पर मेड़ा गृह मंत्री बाला बच्चन के बाजू में बैठे रहे.

अपने ही विधायक उलझा रहे कांग्रेस को

लोकसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस अपने ही विधायकों से लगातार घिरती जा रही है. किसी ने संभावित प्रत्याशी का विरोध किया है तो कोई अपने संगठन से जुड़े लोगों को टिकट के दिलाने के लिए पूरा ताकत लगाते हुए कांग्रेस पर दबाव बना रहा है. इसके चलते कांग्रेस में प्रत्याशी चयन प्रक्रिया में भी देरी होती जा रही है.
मध्यप्रदेश में कांग्रेस के विधायक खुद ही संभावित प्रत्याशियों का विरोध करते हुए मैदान में उतरने लगे हैं. कांग्रेस को समर्थन देने वाले निर्दलीय विधायक ठाकुर सुरेन्द्र सिंह शेरा ने खण्डवा संसदीय क्षेत्र से प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव को टिकट देने का विरोध किया है, वे यहां तक कह गए कि अगर यादव को टिकट दिया तो वे अपनी पत्नी को निर्दलीय चुनाव लड़ा देंगे. शेरा की इस चेतावनी के बाद कांग्रेस के स्थानीय नेता भी उनके साथ आ गए और कांग्रेस यहां पर अब तक उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाई. 
ठाकुर सुरेन्द्र सिंह के अलावा सतना से विधायक सिद्धार्थ कुशवाह ने भी सतना से संभावित प्रत्याशी राजेन्द्र सिंह का विरोध तेज कर दिया है. वे अपनी पत्नी प्रीति कुशवाह को टिकट दिलाना चाह रहे हैं. इस सीट पर जब अजय सिंह का नाम चला था तब सिद्धार्थ मौन थे, लेकिन अजय सिंह को सीधी से टिकट देने की बात चली तो सिद्धार्थ ने राजेन्द्र सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और वे अपनी पत्नी की दावेदारी करने दिल्ली तक जा पहुंचे.
जयस समर्थकों को टिकट दिलाना चाहते हैं हीरालाल
जय आदिवासी युवा संगठन (जयस) के संरक्षक और कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा भी जयस पदाधिकारियों को टिकट दिलाना चाह रहे हैं. वे कांग्रेस पर इसके लिए लगातार दबाव भी बना रहे है, मगर कांग्रेस की ओर से अब तक उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है. अलावा चार सीटों रतलाम-झाबुआ, धार, बैतूल और मंडला में जयस के पदाधिकारियों को प्रत्याशी बनाए जाने की मांग कर रहे हैं.
प्रत्याशी बदलवाने बना रहे दबाव दावेदार
होशंगाबाद संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस ने नये चेहरे के रुप में युवा शैलेन्द्र दीवान को प्रत्याशी बनाया है. दीवान अपने चुनाव प्रचार अभियान में जुट गए, मगर उनका भी अंदरुनी तौर पर विरोध है. यहां पर टिकट के दावेदारों ने कांग्रेस पर प्रत्याशी बदलने के लिए दबाव बनाना शुरु कर दिया है. होशंगाबाद से टिकट के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष  सुरेश पचौरी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामेश्वर नीखरा के अलावा भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए सरताज सिंह टिकट के दावेदार थे. हालांकि दीवान को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ यह स्पष्ट कर चुके हैं कि जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर टिकट दिया गया है. लोधी समाज के मतदाताओं की संख्या का ेदेख उन्हें प्रत्याशी बनाया गया है. यहां उल्लेखनीय है कि भाजपा भी  इस सीट पर लोधी समाज को देखते हुए प्रहलाद पटेल को प्रत्याशी बनाने पर विचार कर रही थी.

गोविंदा ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात, इंदौर से चुनाव लड़ने की अटकलें

फिल्म अभिनेता और पूर्व सांसद गोविंंदा आज मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल पहुंचे और मंत्रालय में मुख्यमंत्री कमलनाथ से उन्होंने मुलाकात की. गोविंंदा की इस मुलाकात के बाद इस बात की अटकलें तेज हो गई कि कांग्रेस उन्हें इंदौर से प्रत्याशी बना सकती है, हालांकि उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत थी.
मुख्यमंत्री कमलनाथ और अभिनेता गोविंदा की आज शुक्रवार को हुई मुलाकात के सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं. कमलनाथ से मंत्रालय में करीब आधा घंटे तक गोविंदा और मुख्यमंत्री कमलनाथ के बीच चर्चा हुई. गोविंदा से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे तो मुख्यमंत्री को बधाई देने आए थे, उनकी यह मुलाकात गैर राजनीतिक मुलाकात थी. उन्होंने इस बात पर भी मौन साधे रखा कि वे कांग्रेस की ओर से मध्यप्रदेश में प्रचार करेंगे या नहीं. गोविंदा ने राजनीति में आने से साफ मना कर दिया. गोविंदा ने कहा कि उन्होंने अपने व्यक्तिगत काम को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की है. उन्होंने कहा कि अपनी नई फिल्म के प्रोजेक्ट से सिलसिले में भी वो यहां आए और मुख्यमंत्री से मुलाकात की है.
यहां उल्लेखनीय है कि गोविंदा की इस मुलाकात के बाद से इस बात के कयास लगाए जाने लगे कि कांग्रेस उन्हें इंदौर से प्रत्याशी बना सकती है. पहले सलमान खान का भी नाम इस सीट के लिए चला था, मगर बाद में उन्होंने मना कर दिया था. 

आप ने की नई कार्यकारिणी गठित

 आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश ने  64 सदस्यीय नई राज्य कार्यकारिणी की घोषणा की है. अलोक अग्रवाल की अध्यक्षता में बनी इस कार्यकारिणी में 3 उपाध्यक्ष, 3 संगठन मंत्री, 6 संगठन सचिवों सहित अनेक पदाधिकारियों शामिल हैं. 
आम आदमी पार्टी की बैठक में राज्य की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है. साथ ही कार्यकारिणी की पहली बैठक में लोकसभा चुनाव के लिए प्रदेश के 3 हजार कार्यकर्ताओं को दिल्ली भेजने का फैसला लिया है. बैठक में  कहा गया कि इस चुनाव में देश के लोकतंत्र को खत्म कर रही मोदी-शाह की जोड़ी हटाना सबसे बड़ी आवश्यकता है. अत: मध्य प्रदेश में आम आदमी पार्टी भाजपा प्रत्याशी को हराने वाले सबसे ताकतवर उम्मीदवार का समर्थन करेगी.
बैठक में फैसला लिया गया कि प्रदेश में आने वाले नगरीय निकाय व् पंचायत चुनावों को पूरे प्रदेश में पूरी ताकत से लड़ा जाएगा. इसके अलावा आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश में लोक सभा चुनाव नहीं लड़ेगी और अपनी पूरी ताकत दिल्ली में राष्ट्रीय संयोजक  अरविन्द केजरीवाल के नेत्रत्व में लडेÞ जा रहे लोक सभा चुनाव में लगाई जाएगी. इस हेतु प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में 3000 कार्यकर्ता दिल्ली जाएंगे. 
दिल्ली लोकसभा चुनाव अभियान समिति का भी गठन किया गया. समिति में आलोक अग्रवाल (अध्यक्ष),  अमित भटनागर पदस्थ किया है. इसके अलावा  एक पोलिटिकल अफेयर्स समिति का गठन किया गया, जिसमें आलोक अग्रवाल, अमित भटनागर, परिणीता राजे,  रानी अग्रवाल, युवराज सिंह,    हिमांशु कुलश्रेष्ठ,  पंकज सिंह,    इंद्र विक्रम सिंह, मुकेश जायसवाल, आई ए खान, सोमिल शर्मा, जीतेन्द्र चौरसिया, प्रकाश डीकोस्टा, मुकेश उपाध्याय,  बालेन्दु शुक्ला को पदस्थ किया है.
राज्य अनुशासन समिति में इंद्र विक्रम सिंह, एड आई ए खान (सचिव), एडवोकेट साधना पाठक को पदाधिकारी बनाया गया है. इसके अलावा  प्रदेश सचिव सोशल मीडिया  सतीश राय को, प्रदेश सह सचिव सोशल मीडिया शादाब खान,         प्रदेश सचिव यूथ विंग आनंद मिश्रा को पदस्थ किया है. 


मुख्यमंत्री ने अपनी और बेटे की सुविधा से तैनात किए पुलिस अफसर

कमलनाथ 
भारतीय जनता पार्टी ने शिकायत की है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने गृह जिले छिंदवाड़ा से उपचुनाव लड़ रहे हैं एवं उनके बेटे नकुलनाथ लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार हैं. उन्होंने अपनी और अपने बेटे नकुलनाथ की सुविधा को देखते हुए अधिकारियों की पदस्थापना की है.
भाजपा ने निर्वाचन आयोग को शिकायत कर बताया कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी और अपने बेटे की सुविधा की दृष्टि से जिले में पुलिस अधीक्षक से लेकर निचले स्तर तक के पुलिस अधिकारी अपनी मनमर्जी से तैनात किए हैं. शिकायत के साथ इन अधिकारियों की जानकारी भी आयोग को दी गई है. पत्र में कहा गया है कि  मनोज कुमार राय को पुलिस अधीक्षक छिंदवाड़ा पदस्थ किया गया है जो पुलिस अधीक्षक के रूप में उनका प्रथम जिला है. मनोज कुमार राय पुलिस अधीक्षक छिंदवाड़ा के पद पर पदस्थापना के पीछे यह तथ्य है कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ वाराणसी में पूर्व में चुनाव लड़ चुके  अजय राय के नजदीकी रिश्तेदार है. इसके साथ ही कमलनाथ के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी  संजय श्रीवास्तव के अभिन्न मित्र हैं. इसके अलावा पुलिस निरीक्षक सियाराम सिंह गुर्जर, सतीश पटेल और प्रशांत यादव को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से स्थानांतरित कर अपने जिले छिंदवाड़ा में पदस्थ किया है. 
भाजपा ने शिकायत में कहा कि पुलिस मुख्यालय ने यह नियम बनाया है कि किसी भी पुलिस अधिकारी को नक्सल प्रभावित क्षेत्र से बाहर 2 वर्ष की सेवा पूर्ण करने के पहले पदस्थ नही किया जाएगा. पत्र में कहा गया है कि इन पुलिस अधिकारियों की पदस्थापना नियम विरूद्ध और छिंदवाड़ा में कमलनाथ और नकुलनाथ को निर्वाचन में लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है. अत:  मनोज कुमार राय पुलिस अधीक्षक, छिंदवाड़ा को निर्वाचन कार्य से पृथक रखा जाये और उनका छिन्दवाड़ा से पुलिस मुख्यालय का पदस्थी आदेश जारी कर कंडिका चरण-2 में वर्णित चुनाव अवधि के दौरान पदस्थ पुलिस अधिकारियों को निर्वाचन कार्य से पृथक रखे जाने का आदेश प्रदान करें.

राहुल गांधी से माफी मांग कर घर बैठें दिग्विजय

 दिग्विजयसिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए जिन-जिन लोगों और वर्गों का नुकसान किया है, जिन्हें परेशान किया है, उनकी सूची बहुत लंबी है. दिग्विजयसिंह अपने इन कर्मों के लिए किस-किस से माफी मांगेंगे. अब उनके लिए यही बेहतर होगा कि वे राहुल गांधी से माफी मांग कर घर बैठें. 
यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं सांसद आलोक संजर ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह द्वारा राजधानी भोपाल में सरकारी कर्मचारियों से माफी मांगने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही.  पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह लोकसभा चुनाव में भोपाल सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. जनसंपर्क के दौरान उन्होंने प्रदेश सरकार के कर्मचारियों से अपने पिछले व्यवहार के लिए माफी मांगी थी. इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं सासंद आलोक संजर ने कहा है कि सरकारी कर्मचारियों को परेशान करना मि. बंटाढ़ार का एक कारनामा था, उन्होंने प्रदेश की जनता पर और भी कई जुल्म किए थे. उन्होंने प्रदेश की अधोसंरचना की दुर्गति कर दी थी, जिससे प्रदेश बरसों पीछे चला गया. उन्होंने दो घंटे की बिजली के लिए प्रदेश के लोगों से 10-10 घंटे इंतजार कराया. 
उन्होंने सरकारी नौकरियों पर रोक लगाकर उस समय के युवाओं की एक पूरी पीढ़ी को दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने सिंचाई सुविधाओं में अड़ंगा लगाकर प्रदेश की कृषि के विकास को रोक दिया. उन्होंने अपनी सोशल इंजीनियरिंग के फॉमूर्ले से पूरे समाज का बंटाढ़ार कर दिया था. संजर ने कहा कि प्रदेश को बरबादी के रास्ते पर ले जाने वाले दिग्विजयसिंह किस-किस से माफी मांगेंगे. यदि वे ऐसा कर भी लें, तो प्रदेश की जनता को उनके कार्यकाल के दौरान हुई आम लोगों की दुर्गति अभी भी याद है और वह उन्हें कभी माफ नहीं करेगी.

गुरुवार, 28 मार्च 2019

चुनाव लड़ने नहीं, प्रचार करने जरुर आऊंगी भोपाल: उमा भारती

 दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन द्वारा दी चुनौती पर दिया जवाब

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आज फिर पूर्व मुख्यमंत्री और भोपाल संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह पर हमला बोला है. उन्होंने दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह द्वारा उमा भारती को भोपाल से चुनाव लड़ने की दी चुनौती को लेकर कहा कि वे चुनाव लड़ने नहीं, बल्कि चुनाव प्रचार करने जरुर भोपाल आएंगी. उन्होंने कहा कि दिग्जिवय सिंह को तो कोई भी भाजपा का कार्यकर्ता भोपाल से हरा देगा.
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भोपाल से दिग्विजय सिंह को कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से लगातार सिंह पर हमला बोल रही है.  उमा भारती ने आज दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह द्वारा बुधवार को उमाभारती को भोपाल से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी, इस पर उमा भारती ने आज ट्वीट कर उसका जवाब दिया है. भारती ने कहा कि दिग्विज सिंह के पुत्र और मेरे भतीजे जयवर्धन सिंह ने मुझे भोपाल से दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दी है, उन्हें तो भाजपा को कोई भी कार्यकर्ता हरा देगा. इसलिए मंै भोपाल चुनाव लड़ने नहीं, बल्कि चुनाव प्रचार करने जरुर आऊंगी. भोपाल की जनता को दिग्विजय सिंह की बातों का स्मरण जरुर कराऊंगी. 
उमा भारती ने ट्वीट कर लिखा है कि यह तो अच्छा हुआ कि भोपाल की जनता के साथ अन्याय करने वाले खुद जनता के दरबार में पेश हो जाएंगे अब भोपाल संसदीय क्षेत्र के नागरिक प्रचंड मतों से उन्हें हराकर बदला चुकाएगी. उमा ने कई ट्वीट किए और अपने मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल के दौरान जो योजनाओं का क्रियांवयन किया उनका भी उल्लेख किया है.
कमजोर प्रत्याशी साबित होंगे शिवराज
शिवराज सरकार के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त भाजपा नेता इंद्रेश गजभिए ने कहा कि भोपाल लोकसभा सीट पर शिवराज सिंह चौहान कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह के सामने कमजोर प्रत्याशी साबित होंगे. दिग्विजय सिंह एक मजबूत उम्मीदवार हैं, उनके खिलाफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मैदान में उतारना चाहिए. पत्रकारों से चर्चा करते हुए गजभिए ने कहा कि उन्होंने इस आशय का पत्र भी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लिखा है. गजभिए ने बताया कि उन्होंने खुद भी बालाघाट और देवास संसदीय क्षेत्र से अपने टिकट के लिए दावेदारी की है, मगर पार्टी ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है.

कर्मचारियों के वेतन अटकने का संकट टला


प्रदेश के साढ़े 6 लाख कर्मचारियों के वेतन पर आया संकट टल गया है. अब संचालनालय कोष एवं लेखा के साफ्टवेयर में मोबाइल नंबर दर्ज नहीं होने के बाद भी कर्मचारियों को मार्च महीने की वेतन मिल जाएगा.
 मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी अधिकारियों को मौखिक निर्देश दिए हैं कि किसी भी वजह से कर्मचारी को वेतन से वंचित नहीं रखा जाए. वहीं नंबर अपडेट कराने के लिए कर्मचारियों को तीन महीने की मोहलत दी जाए, लेकिन इस दौरान किसी का भी वेतन नहीं रोका जाए. उल्लेखनीय है कि कोष एवं लेखा आयुक्त के एक आदेश की वजह से कर्मचारियों को वेतन देने के मामले में गफलत पैदा हो गई थी. इस आदेश में कहा गया था कि जिन कर्मचारियों के मोबाइल नंबर आईएफएमआईएस में दर्ज नहीं होंगे, उन्हें मार्च महीने का वेतन नहीं मिल पाएगा. इस आदेश में लिखा था कि मोबाइल नंबर अपडेट होने के बाद ही कर्मचारियों को वेतन मिल पाएगा.  इसे लेकर कर्मचारी संगठनों ने नाराजगी जताई थी और कहा था कि किसी और की गलती का खामियाजा कर्मचारी क्यों भुगते. विरोध के बाद खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने  वित्त विभाग के अधिकारियों को निर्देश देकर इस आदेश को रद्द कराया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि वो कर्मचारियों को मोहलत देकर उनका नंबर अपडेट कर लें.


तीसरा मोर्चा नहीं दिख रहा मैदान में

भाजपा-कांग्रेस पर दबाव बनाने वाले आदिवासी संगठन और राजनीतिक दल भी हुए शांत
लोकसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश में इस बार तीसरा मोर्चा मैदान में सक्रियता नहीं दिखा पा रहा है. बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी वैसे तो गठबंधन के सहारे मैदान में उतरने का फैसला कर चुके हैं, मगर दोनों ही दल अब तक चुनाव के लिए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सक्रिय नहीं कर पाए हैं. सपा का तो संगठन ही गायब है, जिसके चलते कार्यकर्ता बिखरा हुआ है. वहीं आम आदमी पार्टी मैदान से बाहर हो चुकी है.
विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और भाजपा पर दबाव बनाने वाला तीसरा मोर्चा लोकसभा चुनाव के पहले ही बिखरा हुआ नजर आने लगा है. करीब आधा दर्जन तीसरा मोर्चा के दलों का मैदान से गायब होना भाजपा और कांग्रेस के लिए एक तरह से अच्छे संकेत भी हैं. राज्य में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने विधानसभा चुनाव में जमकर भाजपा, कांग्रेस पर दबाव बनाया था, मगर परिणाम के निराशा हाथ लगी तो लोकसभा चुनाव में ये दल शांत नजर आ रहे हैं. बसपा और सपा गठबंधन के सहारे मैदान में उतर रहा है, 26 सीटों पर बसपा और 3 पर सपा के प्रत्याशी मैदान में उतारने का समझौता हुआ है, मगर अब तक दोनों दलों ने मात्र 3 संसदीय क्षेत्रों में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया पूरी की है. इसके अलावा दोनों ही दलोंं का कार्यकर्ता मैदान में नजर नहीं आ रहा है. बसपा का कार्यकर्ता इस बार पूरी तरह शांत नजर आ रहा है, तो सपा का अपना संगठन ही नहीं है. विधानसभा चुनाव के बाद भंग की सपा की कार्यकारिणी का भी अब तक गठन नहीं हुआ है, जिसके चलते उसका कार्यकर्ता बिखर गया है.
गोंगपा,जयस को नहीं मिला सहारा
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और जय आदिवासी युवा संगठन (जयस) को कांग्रेस और भाजपा का सहारा नहीं मिल पा रहा है. दोनों ही दलों ने कांग्रेस पर गठबंधन के लिए दबाव तो बनाया, मगर उन्हें इस दबाव में सफलता हासिल नहीं हुई है, जिसके चलते ये दल अब मौन हो गए हैं. जयस तो भाजपा से संपर्क कर रहा है, वहीं गोंगपा ने सपा से संपर्क किया, मगर उसे वहां से भी सफलता हासिल नहीं हुई.
आप ने छोड़ा मैदान
आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव में मैदान छोड़ चुकी है. विधानसभा चुनाव में 208 प्रत्याशी मैदान में उतारे, मगर सभी की जमानतें जब्त हो गई. इसके बाद लोकसभा चुनाव में इस दल ने भी दूरी बना ली है.
सपाक्स केवल बैठकों तक सीमित
एट्रोसिटी एक्ट के बाद सपाक्स संगठन का गठन हुआ और विधानसभा चुनाव में भाजपा पर खासा दबाव बनाया, मगर इस बार यह संगठन भी मैदान में उतना सक्रिय नजर नहीं आ रहा है, जितना की विधानसभा चुनाव के दौरान सक्रिय था. सपाक्स द्वारा 15 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारने की बात तो कही जा रही है, मगर चुनावी रणनीति के लिए केवल बैठकों का दौर ही चल रहा है. फिलहाल मैदान में इस दल की भी सक्रियता नजर  नहीं आ रही है.

पांच बार के सांसद अर्गल दे सकते हैं भाजपा को झटका

अशोक अर्गल 
सिंधिया के संपर्क में, कमलनाथ की हरी झंडी का इंतजार
भारतीय जनता पार्टी से टिकट न मिलने से नाराज पांच बार के सांसद अशोक अर्गल कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. वे टिकट न मिलने से नाराज है और कांग्रेस के पूर्व विधायक रामनिवास रावत के माध्यम से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के संपर्क में हैं. मुख्यमंत्री कमलनाथ की हरी झंडी होते ही वे कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं. 
भाजपा द्वारा भिंड संसदीय क्षेत्र से वर्तमान विधायक डा. भागीरथ प्रसाद का टिकट काटकर भाजपा ने संध्या राय को उम्मीदवार बनाया है. यहां से भाजपा के पूर्व सांसद अशोक अर्गल टिकट की दावेदारी कर रहे थे, मगर पार्टी द्वारा उन्हें मौका नहीं दिया गया. अर्गल मुरैना से सांसद रह चुके हैं. वे पांच बार सांसद चुने गए हैं. परिसीमन में मुरैना सीट सामान्य होने के बाद वे भिंड से 2009 में वे सांसद रहे हैं. इसके पूर्व वे मुरैना से लगातार चार बार सांसद रहे हैं. वर्ष  2014 के लोकसभा चुनाव  में एनवक्त पर भाजपा ने कांग्रेस प्रत्याशी डा. भागीरथ प्रसाद को तोड़कर भाजपा में शामिल किया और उन्हें टिकट दिया था. इस बार वर्तमान सांसद का टिकट भी कटा तो अर्गल यहां से दावेदार थे, मगर उन्हें टिकट नहीं दिया गया. इसके बाद से वे संगठन से नाराज चल रहे हैं. 
अर्गल के कांग्रेस में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं. वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रामनिवास रावत के माध्यम से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात कर चुके हैं. इस संबंध में सिंधिया ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से चर्चा की है. फिलहाल इस मामले में कमलनाथ की हरी झंडी का इंतजार है.
बरैया भी हैं कांग्रेस के संंपर्क में
भिंड को लेकर कांग्रेस भी उलझ गई है. कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह समर्थक मंत्री डा. गोविंद सिंह यहां से बहुजन संघर्ष दल के प्रदेश अध्यक्ष फूलसिंह बरैया को कांग्रेस का टिकट दिलाना चाहते हैं. वे दिल्ली में वरिष्ठ पदाधिकारियों से इसे लेकर संपर्क कर चुके हैं. अब अर्गल की सक्रियता से बरैया और अर्गल में से किसे कांग्रेस अपने पाले में लाकर टिकट देगी इसका फैसला कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री कमलनाथ पर छोड़ दिया है.

कमलनाथ ने किया धर्मस्थल का उपयोग, भाजपा ने की शिकायत

 मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने गृह जिले में आयोजित एक धर्मस्थल के कार्यक्रम का उपयोग चुनाव प्रचार के काम किया है. इस काम में जिला निर्वाचन अधिकारी ने भी उन्हें परोक्ष सहयोग दिया है.
 उक्ताशय की शिकायत भारतीय जनता पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से की है. शिकायत में जिला निर्वाचन अधिकारी को हटाए जाने की मांग भी की गई है. भारतीय जनता पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से की गई शिकायत में मुख्यमंत्री कमलनाथ पर एक मंदिर के कार्यक्रम का उपयोग प्रचार के लिए करने तथा आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है. शिकायत में कहा गया है कि भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा छिंदवाडा विधानसभा क्षेत्र का उप-निर्वाचन एवं लोकसभा क्षेत्र के लिए निर्वाचन कार्यक्रम घोषित किया जा चुका है. तदनुसार 2 अप्रैल को निर्वाचन की अधिसूचना जारी होने वाली है तथा 29 अप्रैल को मतदान किया जाना है. 
भाजपा ने शिकायत में कहा है कि कमलनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के साथ ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी हैं, चुनावी दोरे पर स्थान स्थान जाकर जनता को संबोधित भी कर रहे हैं. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पांढुर्णा नगर में एक चुनावी सभा को संबोधित किया. यह चुनावी सभा धार्मिक स्थल, नवदुर्गा मंदिर समिति द्वारा आयोजित की गई थी. सभा स्थल पर जो बैनर लगाये गये थे उनमें एक बैनर पर लिखा था मंदिर समिति स्वागत करता है, तथा दूसरे बैनर पर लिखा था वक्त है बदलाव का क्षेत्रीय कांग्रेस कमेटी छिंदवाड़ा. इस बैनर पर एक ओर सोनिया गांधी का चित्र था तो दूसरी तरफ कमलनाथ का चित्र था और साथ ही माता दुर्गा का चित्र भी लगा था जो संलग्न फोटो में दिखाई देता है. 
शिकायती पत्र में कहा गया है कि इस सभा में कमलनाथ ने लोकसभा के लिए नकुलनाथ के पक्ष में एवं विधानसभा के लिए स्वयं के पक्ष में मतदान करने के लिए मतदाताओं से आग्रह किया था. इस सभा की अध्यक्षता पूर्व विधायक दीपक सक्सेना के द्वारा की गई थी. पत्र में कहा गया है कि कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ने जानबूझकर उक्त कार्यक्रम की वीडियोग्राफी नहीं कराई गई. शिकायती पत्र में इस सभा के दौरान शासकीय सेवकों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया है. पार्टी के प्रतिनिधि मंडल ने अपनी शिकायत के साथ साक्ष्य के रूप में कार्यक्रम के फोटोग्राफ भी संलग्न किए हैं. पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री कमलनाथ, दीपक सक्सेना तथा मंच पर उपस्थित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन की कार्रवाई तथा जिला निर्वाचन अधिकारी को तत्काल हटाए जाने की मांग की गई है. पार्टी के प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ नेता शांतिलाल लोढ़ा और एस.एस. उप्पल शामिल थे. 

चलती ट्रेन से 3 करोड़ की चोरी करने वाले पकड़ाए

रेलवे पुलिस ने चलती ट्रेन से हुई तीन करोड़ रुपए की चोरी के मामले का पदार्फाश किया है. हवाला की यह रकम भोपाल से मुंबई भेजी जा रही थी. खंडवा के पास पुलिस की वर्दी पहने लोगों ने चेकिंग के नाम पर रुपए से भरा बैग उड़ा लिया. पुलिस ने चोरी गई राशि में से डेढ़ करोड़ बरामद कर लिए हैं. आरोपियों ने रुपए घर में कूलर, मिट्टी के घड़े में छिपा दिए थे. 
एडीजी (रेल) अरुणा मोहन राव ने बताया, भोपाल के विकास यादव ने 19 मार्च को खंडवा जीआरपी थाना में शिकायत दर्ज कराई थी. उसमें बताया कि वह 12-13 मार्च को महानगरी एक्सप्रेस से इटारसी से दादर रवाना हुआ था. वह ट्रेन के एस-10 नंबर कोच में बैठा था. छनेरा स्टेशन के पास चार युवक आए. उनमें से एक सब इंस्पेक्टर की वर्दी में था, जबकि दो सिपाही की वर्दी में थे. चारों चेकिंग के बहाने कोच के गेट तक ले आए और बैग चोरी कर लिया. बैग में 5 लाख रुपए नकद रखे थे. विकास ने बताया था कि यह रुपए वह भोपाल निवासी चिंटू तेजवानी के कहने पर मुंबई ले जा रहा था.
केस दर्ज कर रेलवे पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और सायबर सेल के जरिए अहम सुराग हासिल कर लिए. जीआरपी थाना प्रभारी बीएस कौरव ने दमोह निवासी अक्षय कुंदवानी और चचेरे भाई देवेश  को हिरासत में भी ले लिया. इस बीच मंगलवार को अहमदाबाद निवासी मेहुल पटेल खंडवा जीआरपी थाना पहुंचे. उन्होंने शिकायत दर्ज कराई कि 12-13 मार्च को वह भी अपनी कंपनी मेकटेल के तीन करोड़ रुपए लेकर महानगरी एक्सप्रेस में सफर कर रहे थे. उनका बैग भी वर्दी पहने गिरोह ने चोरी कर लिया था. पुलिस ने जब अक्षय और देवेश से पूछताछ की तो उन्होंने साथी पचोर निवासी संजय जाटव, इटारसी निवासी नारायण आहूजा और भोपाल निवासी मोनू सिंधी के साथ मिलकर वारदातों को अंजाम दिया है.
पुलिस ने संजय जाटव और नारायण आहूजा को भी गिरफ्तार कर उनसे 1 करोड़ 51 लाख 60 हजार रुपए बरामद कर लिए हैं. संजय के पिता देवीलाल जाटव रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर हैं. संजय ने उनकी पुरानी वर्दी को वारदात के लिए इस्तेमाल किया था. संजय वर्तमान में अक्षय कुंदवानी के साथ इंदौर की फर्म इंफ्राबुल में काम कर रहा था. देवेश का दमोह में सीमेंट का कारोबार है.

बुधवार, 27 मार्च 2019

भोपाल जीते तो प्रदेश में 20 सीटें जीतना तय

दिग्विजय सिंह 

भोपाल संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने कहा कि भोपाल सीट जीते तो मध्यप्रदेश में 20 सीटें जीतना तय है. उन्होंने कहा कि मुझे चुगली और चमचागिरी पसंद नहीं है, मेरा नारा मत लगाओ, कांग्रेस का झंडा अपने घर लगाओ. 
दिग्विजय सिंंह ने ये बातें आज प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में शक्ति एप के प्रशिक्षण और लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर हुई बैठक के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही. सिंह आज ही भोपाल पहुंचे हैं.  उन्होंने कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि वे मेरा नारा न लगाएं, उसके बजाय अपने घरों पर कांग्रेस का झंडा लगाएं. उन्होंने कहा कि हमारे पर लाखो ंकी संख्या में कार्यकर्ता हैं. अगर हमारा कार्यकर्ता अपने परिजनों के वोट ही कांग्रेस प्रत्याशी को डलवा देगा तो हमारा प्रत्याशी जीत जाएगा. सिंह ने कहा कि भोपाल, इंदौर और विदिशा हमारे लिए कठिन सीटें हैं, मगर इन सीटों पर अगर हम जीते तो प्रदेश में 20 सीटों पर कांग्रेस को जीत हासिल होगी. उन्होंने संघ पर भी निशाना साधा और कहा कि संघ तो सांस्कृतिक संगठन हैं, मुझसे बैर क्यों, मैं भी तो हिन्दू हूं. सिंह ने कहा कि मैं चुगली और चमचागिरी से नफरत करता हूं. कार्यकर्ताओं से कहा कि किसी की चुगली मत करो, कोई मेरी बुराई करे तो उसी वक्त पकड़ो. वाट्स ग्रुप बनाओ और सोशल मीडिया पर भाजपा के झूठ के प्रचार की सफाई कर डालो. 

संतों का लिया आशीर्वाद, फिर दरगाह पर चढ़ाई चादर

मध्यप्रदेश की भोपाल संसदीय सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह ने भोपाल में अपनी सक्रियता बढ़ाने के पहले जैन संत आचार्य विद्यासागर, शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद से आशीर्वाद लिया और उसके बाद रायसेन स्थित दरगाह पहुंचकर चादर चढ़ाई. इसके बाद वे चुनावी रणनीति में सक्रिय हो गए. भोपाल में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी उन्होंने की.
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंंह प्रत्याशी घोषित होने के बाद आज भोपाल पहुंचे. इसके पहले जबलपुर में उन्होंने जैन संत आचार्य विद्यासागर और फिर झोतेश्वर पहुंचकर शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद से आशीर्वाद लिया. इसके बाद रायसेन स्थित पीर फतेह उल्लाह शाह की दरगाह पहुंचे और यहां पर चादर चढ़ाई. इस दौरान उनके साथ कांग्रेस नेता मौजूद रहे. सिंह आज भोपाल पहुंचे और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी की.
दिग्विजय नहीं कांग्रेस लड़ रही चुनाव
राजधानी भोपाल पहुंचने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए दिग्विजय सिंंह ने कहा कि भोपाल से दिग्विजय सिंह नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी चुनाव लड़ रही है, आने वाली 23 तारीख को पता चल जाएगा कि जीत किसकी हुई है. उन्होंने कहा कि वो आज ही भोपाल पहुंचे हैं, तो उन्हें सोचने समझने का समय चाहिए. इसलिए आज वो किसी भी प्रश्न का कोई जवाब नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि वो गुरूवार आपसे मिलेंगे और आपके सभी प्रश्नों के उतर देंगे.
भाई ने कहा शिवराज को ससम्मान जैत छोड़ आएंगे 
दिग्विजय सिंह का परिवार भी एक तरह से चुनावी मैदान में तैयारियों में जुट गया है. सिंह के भाई और विधायक लक्ष्मण सिंह ने कहा कि भोपाल से दिग्विजय सिंह ही जीतेंगे. भाजपा के संभावित उम्मीदवार शिवराज सिंह चौहान को लेकर उन्होंने तंज कसा कि हार के बाद शिवराज सिंह को ससम्मान हम जैत छोड़ने जाएंगे. उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव में भोपाल सीट पर कांग्रेस वर्षों से चल रहे सूखे को समाप्त करेगी. 

टिकट से वंचित नाराज नेताओं ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किल

मान-मनौव्वल भी हुई शुरु, ज्ञानसिंह के यहां पहुंची प्रत्याशी हिमाद्री सिंह
मध्यप्रदेश में भाजपा द्वारा पहली सूची जारी करने के बाद टिकट के दावेदारों में उपजा असंतोष भाजपा के लिए संकट बन गया है. जिन सांसदों का टिकट कटा वे तो नाराज हैं, ही साथ ही टिकट के दावेदार जिन्हें टिकट नहीं मिला, वे भी खासे नाराज हो गए हैं. नाराज नेताओं को मनाने का सिलसिला भी शुरु हो गया है. इसके तहत शहडोल से भाजपा प्रत्याशी हिमाद्री सिंह खुद आज नाराज चल रहे सांसद ज्ञानसिंह को मनाने पहुंची, मगर उनकी मुलाकात नहीं हो सकी.
भाजपा ने पहली सूची जारी कर 15 लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी घोषित किए थे, इसमें 5 वर्तमान सांसदों शहडोल से ज्ञानसिंंह, मुरैना से अनूप मिश्रा, बैतूल से ज्योति धुर्वे,  उज्जैन से चिंतामण मालवीय और भिंड से भागीरथ प्रसाद का टिकट काटा गया है. टिकट कटने से अनूप मिश्रा और ज्ञानसिंह खासे नाराज चल रहे हैं. ज्ञानसिंह ने तो निर्दलीय के रुप में मैदान में उतरने की घोषणा भी कर दी. इसके बाद संगठन ने मान मनौव्वल का दौर शुरु किया. वैसे ज्ञान सिंह को मनाने की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री राजेन्द्र शुक्ल को सौंपी गई है. वहीं आज शहडोल से भाजपा प्रत्याशी हिमाद्री सिंह ने भी ज्ञानसिंह को मनाने पहुंची, मगर उनकी मुलाकात नहीं हो सकती. ज्ञानसिंह इस बात से खफा हैं कि वे उपचुनाव में लड़े और जीते भी, इसके बाद पार्टी ने आश्वस्त किया था, उसके बाद भी उनका टिकट काटा गया. 
ज्ञानसिंह के अलावा अनूप मिश्रा भी खासे नाराज चल रहे हैं. अनूप मिश्रा मुरैना से सांसद थे और उनके स्थान पर केन्द्रीय नेतृत्व ने नरेन्द्र सिंह तोमर को मैदान में उतारा है. ग्वालियर में किसे टिकट मिलेगा इसके पत्ते अभी पार्टी ने नहीं खोले हैं, जिसे लेकर मिश्रा भी नाराज चल रहे हैं. मिश्रा के अलावा भिंड से अशोक अर्गल भी टिकट के दावेदार थे. पांच बार सांसद रह चुके अर्गल के बजाय भिंड से पार्टी ने संध्या राय को प्रत्याशी बनाया है. इसके चलते अर्गल नाराज हैं और वे कांग्रेस नेताओं से संपर्क में भी है. सूत्रों की माने तो नाराज अर्गल कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं. भिंड से वर्तमान सांसद भागीरथ प्रसाद भी खासे नाराज चल रहे हैं.उन्होंने भी अपना टिकट कटने पर संगठन पर सवाल उठाए हैं.
मंदसौर से सांसद सुभाष गुप्ता को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है. गुप्ता संघ के कोटे से प्रत्याशी बनाए गए हैं. गुप्ता का विरोध यहां पर भाजपा के वरिष्ठ नेता बंशीलाल गुर्जर खुद कर रहे हैं. गुर्जर लंबे समय से टिकट की मांग कर रहे थे, मगर उन्हें टिकट नहीं दिया गया. इससे वे खफा है. गुर्जर समर्थकों ने भी मौन साध रखा है. गुप्ता के प्रति विरोध को देख संघ भी संगठन से खफा है. संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने भी मंगलवार को भाजपा नेताओं से की चर्चा में अपनी नाराजगी जताई है.

संघ ने दिग्विजय के लिए तेज की घेराबंदी

दिग्विजय सिंह 
 भाजपा नेताओं को भैयाजी जोशी के आते ही बढ़ी सियासी हलचल
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल  संसदीय सीट पर भाजपा अपनी बादशाहत को बरकरार रखने के लिए अब संघ की रणनीति पर काम कर रही है. संघ ने दिग्विजय को घेरने के लिए भाजपा नेताओं से चर्चा की और दिग्विजय सिंह और शिवराज सिंह के मुख्यमंत्रित्वकाल के कामों को मुद्दा बनाने की बात कही. इसके अलावा संघ भाजपा के अंदर चल रही खींचतान से भी खफा नजर आया और नेताओं को साफ कहा कि प्रदेश में लोकसभा चुनाव को गंभीरता से लें और आपसी खींचतान को दूर रखें.
कांग्रेस ने राजधानी भोपाल में दिग्विजय सिंह को मैदान में उतारने के बाद अब संघ सीधे तौर पर दिग्विजय सिंह को हराने की रणनीति तय करने में जुट गया है. इसके तहत संघ सरकार्यवाही भैयाजी जोशी खुद भोपाल पहुंचे. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा सहित पार्टी के पदाधिकारियों से सीधे चर्चा की और चुनावी रणनीति पर बातचीत की. इस बातचीत में वे पार्टी के अंदर चल रही खींचतान से भी नाराज नजर आए. खासकर मंदसौर में संघ के प्रत्याशी सुधीर गुप्ता के खिलाफ पार्टी पदाधिकारियों द्वारा किए जा रहे विरोध पर उनकी नाराजगी ज्यादा दिखी. इस दौरान उन्होंने साफ संकेत दिए कि चुनाव के पहले खींचतान को बंद कर दिया जाए. भैयाजी जोशी ने संघ पदाधिकारियों से भी चर्चा की और मैदानी जमावट में जुटने की बात कही. गुरुवार को भी जोशी राज्य की कठिन सीटों को लेकर भाजपा पदाधिकारियों और नेताओं से बैठक कर चर्चा करेंगे और वहां की रणनीति बनाएंगे.
मुद्दों को लेकर किया सक्रिय
भाजपा नेताओं से चर्चा के दौरान  भैयाजी जोशी ने इस बात के संकेत दिए कि भोपाल संसदीय सीट पर दिग्विजय सिंह और शिवराज सिंह के शासनकाल के मुद्दों पर गंभीरता दिखाएं. दोनों के शासनकाल के कामों की तुलना करें और जनता के बीच जाकर यह बताएं कि दिग्विजय सिंह ने किस तरह से बंटाढ़ार किया और शिवराज ने किस तरह विकास किया. जोशी के निर्देश के बाद  भाजपा इस मुद्दे पर काम की तैयारी में जुट गई है.
नोटा के विरोध में चलाएगा अभियान
विधानसभा चुनाव में कई स्थानों पर नोटा को लेकर चलाए गए अभियान के चलते भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था. इस बार लोकसभा चुनाव के दौरान इस अभियान को रोकने के लिए संघ ने रणनीति बनाई है. संघ पूरे प्रदेश में नोटा के विरोध में अभियान चलाने वाला है. संघ जल्द ही मतदाताओं के बीच जाएगा और नोटा के विरोध में मतदाता को जागरुक करेगा. नोटा के पीछे विरोध के लिए संघ का तर्क है की नोटा का विकल्प जनता को पसंद का उम्मीदवार नहीं मिलने पर करने लिए था, लेकिन कई बार नोटा पर वोट करने देने पर खराब उम्मीदवार चुनाव जीत जाते हैं. संघ का मानना है कि जनता को नोटा के बजाय कम बेहतर उम्मीदवार पर वोट करने के लिए प्रेरित करेंगे.

मोबाइल नहीं तो वेतन नहीं, कर्मचारियों ने विरोध भी किया तेज

आयुक्त कोष एवं लेखा ने समस्त कोषालय अधिकारियों को निर्देश जारी किए है कि प्रदेश के कर्मचारियों का मार्च माह का वेतन जिसका भुगतान अप्रैल में किया जाना है का आहरण तब ही किया जाए, जब कर्मचारियों का मोबाइल नंबर आईएफएमआईएस के कर्मचारी विवरण में दर्ज हो जाएं.
आयुक्त कोष एवं लेखा के इस फरमान से प्रदेश के हजारों कर्मचारियों का वेतन अटक जाएगा, क्योंकि अनेक विभागों के आहरण एवं संवितरण अधिकारियों ने अपने कर्मचारियों के मोबाईल नंबर एवं इमेल कर्मचारी विवरण में दर्ज नही किये है. मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के महामंत्री लक्ष्मीनारायण शर्मा ने इस तुगलकी फरमान का विरोध कर कर्मचारियों के वेतन न रोके जाने की मांग की है.
 महामंत्री शर्मा ने बताया कि लगभग 40 प्रतिशत कर्मचारियों के मोबाइल नंबर एवं ईमेल की प्रविष्टी आईएफएमआईएस के कर्मचारी विवरण में दर्ज नहीं है, इस कारण लगभग एक लाख से ज्यादा कर्मचारी अप्रैल माह में वेतन से वंचित रह जाएंगे और उनहें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा. शर्मा ने बताया कि आई एफ एम आई एस के साफ्टवेयर में अनेक खामिया है जिस कारण से कर्मचारियों के मोबाइल नंबर एवं ईमेल की प्रविष्टी नही हो पा रही है.  शर्मा ने बताया कि आयुक्त कोष एवं लेखा ने कर्मचारियों को सीधे ही मोबाइल नंबर एवं इ मेल की प्रविष्टी करने के निर्देश भी दिए है पर साफ्टवेयर की खामियों के चलते ऐसा करना संभव नहीं हैं. शर्मा ने आयुक्त कोष लेखा को ज्ञापन प्रेषित कर अनुरोध किया है कि कर्मचारियों के वेतन का न रोका जायें तथा सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को निर्देशित किया जायें कि वे मोबाइल नंबर एवं ईमेल की प्रविष्टी अभियान चला कर करें.

मंगलवार, 26 मार्च 2019

आचार्य विद्यासागर की शरण में पहुंचे दिग्विजय

चुनाव के मैदान में उतरने से पहले कांग्रेस-भाजपा दोनों ही दलों के दिग्गज धार्मिक आस्था के केंद्रों में अपनी हाजिरी लगा रहे हैं. भोपाल लोकसभा से उम्मीदवार पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आचार्य  विद्यासागर के दर्शन कर उनसे आशीर्वाद लिया. 
इस दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह किसी को चुनौती नहीं देते हैं बल्कि लोग खुद उन्हें चुनौती मान लेते हैं. दिग्विजय सिंह ने कहा कि किसी भी लोकसभा सीट में किसी से भी टक्कर ले सकते हैं. भोपाल लोकसभा सीट से शिवराज सिंह चौहान के नाम पर दिग्विजय से ने कहा वो शिवराज सिंह चौहान का स्वागत करेंगे. इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने अरुण जेटली पर निशाना साधते हुए कहा कांग्रेस ने कभी गरीबों से छल नहीं किया बल्कि बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही देश की जनता के साथ छल करते हैं. जबलपुर से लोकसभा के प्रत्याशी राकेश सिंह राकेश सिंह ने नर्मदा पूजन कर अपने चुनाव प्रचार का आगाज किया है.

साले के साथ मिलकर की थी छोटे भाई की हत्या


राजधानी पुलिस ने एक युवक की हत्या की गुत्थी सुलझा ली है. पुलिस के अनुसार युवक की हत्या उसके बड़े भाई ने अपने साले और  चाचा ससुर के साथ मिलकर की थी. हत्या रुपयों के विवाद को लेकर की थी.
पुलिस के अनुसार राजधानी के निकट युवक की लाश सड़क किनारे मिली थी. इसके बाद लाश की शिनाख्त विक्रम यादव के रुप में हुई थी. इसके बाद युवक के मोबाइल के आधार पर पुलिस ने विक्रम के बड़े भाई हेमराज यादव को हिरासत में लिया. हेमराज से पूछताछ की तो उसने इस बात को कबूल किया कि उसने अपने चाचा ससुर जगदीय और साले कन्हैया के साथ मिलकर अपने भाई विक्रम की हत्या की थी. पुलिस के अनुसार हेमराज ने बताया कि विक्रम हमेशा हेमराज से शराब पीने के लिए रुपयों की मांग करता था, नहीं देने पर वह परेशान करता रहता था. पुलिस ने बताया कि विक्रम में दो साल पहले अपने हिस्से की जमीन में से कुछ जमीन 7 लाख में बेची थी, इसके बाद फिर उसने थोड़ी जमीन और 1 लाख रुपए में बेची थी. ये सारे रुपए उसने शराब पीने और अय्याशी करने में लूटा दिए. इसके बाद वह हेमराज को लगातार रुपए देने के लिए दबाव बनाता और परेशान करता था. रोज-रोज की इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए हेमराज ने अपने चाचा और साले के साथ मिलकर भाई विक्रम को मारने की योजना बनाई थी. इसके बाद भाई को कार से ब्यावरा से लाकर देशी कट्टे से गोली चलाकर उसकी हत्या कर दी थी. पुलिस हेमराज से पूछताछ कर रही है.

दिग्विजय से बड़ा हिन्दूवादी नेता पूरी भाजपा में नहीं

दिग्विजय सिंह 
मध्यप्रदेश के मंत्री और कांग्रेस विधायक आरिफ अकील ने कहा कि दिग्विजय सिंह से बड़ा हिन्दूवादी नेता पूरी भाजपा में नहीं है. अकील ने कहा कि दिग्विजय के लिए मैं अपनी जान भी दे सकता हूं.  
मंत्री अकील आज सीहोर जिला मुख्यालय दिग्विजय सिंह के चुनाव की रणनीति के तहत जायजा लेने पहुंचे थे. यहां पर उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से चर्चा की और कांग्रेस के पक्ष में चुनाव प्रचार में जुटने को कहा. अकील ने कहा कि भाजपा तो इस बार भोपाल में मुंगेरीलाल के सपने देख रही है. उन्होंने कहा कि दिग्विजय के खिलाफ भाजपा में कोई चेहरा  नहीं है, इस वजह उनके तोते उड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि इस बार इस सीट पर भाजपा को जीत नहीं मिल रही है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती देते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह के खिलाफ खुद नरेन्द्र मोदी या फिर अमित शाह को भोपाल से चुनाव लड़ना चाहिए, उन्हें भी हार का सामना करना पड़ेगा.  
यहां उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह को कांग्रेस का प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से मंत्री आरिफ अकील, पी.सी.शर्मा और विधायक आरिफ मसूद सहित कांग्रेस नेताओं ने सक्रियता बढ़ा दी है. इसके अलावा दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धनसिंह खुद भोपाल में सक्रिय हो गए हैं.
संजर का भी मुकाबला  नहीं कर पाएंगे दिग्विजय
केन्द्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि भोपाल लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे दिग्विजय सिंह वर्तमान सांसद आलोक संजर से भी नहीं जीत पाएंगे. उमाभारती ने आज ट्वीट कर कहा कि मैंने देखा कि दिग्विजय सिंह मोदी को चुनौती दे रहे हैं. यह बात हास्यापद है. वह जब मुख्यमंत्री थे तब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह सतना से बसपा के कुशवाह से हारे थे, फिर उसके बाद होशंगाबाद से भाजपा के सरताज सिंह से चुनाव हारे थे. जब दिग्विजय सिंह और अर्जुन सिंह मिलकर के कुशवाह और सरताज का मुकाबला नहीं कर पाए तो यहां आलोक संजर का मुकाबला दिगिवजय कैसे कर पाएंगे. उन्होंने कहा कि दिग्विजय को हराने के लिए  पार्टी को किसी को भेजने की जरुरत नहीं है. भोपाल सीट पर तो भाजपा का साधारण कार्यकर्ता ही काफी है.

एक ने पैदल और दूसरे ने की विज्ञापन के माध्यम से की नर्मदा यात्रा

राज्य के नगरीय निकाय मंत्री और दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह ने आज पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह ने वास्तविक रुप से पैदल चलकर नर्मदा की यात्रा की है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विज्ञापनों के माध्यम से यह यात्रा पूरी की है. सिंह ने कहा कि भोपाल से भाजपा किसे टिकट देगी, यह भाजपा का मामला है, मगर यह सच है कि हम उसका पूरी ताकत के साथ मुकाबला करेंगे. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चुनाव मैदान में कोई किसी का पिता या बेटा नहीं होता, बल्कि प्रत्याशी होता है. हम सब कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं और कांग्रेस की जीत के लिए मैदान में हैं. उन्होंने कहा कि जब कोई राष्ट्रीय स्तर का नेता किसी सीट से मैदान में होता है तो कई सीटों और समीकरणों को वह प्रभावित करता है. यही वजह है कि भाजपा नेता दिग्विजय सिंह के भोपाल से मैदान में उतारने जाने के बाद से अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं, उनकी बयानबाजी से कोई फर्क नहीं पड़ता है.
अरुण यादव से खफा कांग्रेसी
प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव के खिलाफ खंडवा संसदीय क्षेत्र के कांग्रेस नेता लामबंद हो गए हैं. कांग्रेस नेताओं ने यादव के खिलाफ मोर्चा खोलकर साफ कह दिया कि खण्डवा संसदीय क्षेत्र में इस बार बाहरी प्रत्याशी नहीं चलेगा. खण्डवा संसदीय क्षेत्र का मतदाता जो हो उसे पार्टी टिकट दे. विरोध कर रहे खण्डवा के कांग्रेस नेताओं पूर्व विधायक राजनारायण सिंह, कांग्रेस कमेटी के महासचिव परमजीत सिंह नारंग, बुरहानपुर के निर्दलीय विधायक सुरेन्द्र सिंह शेरा आदि नेता हैं. शेरा ने तो यहां तक चेतावनी दे दी है कि अगर पार्टी ने यादव को टिकट दिया तो वे अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में उतार देंगे. उल्लेखनीय है कि खण्डवा के कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यादव ने खण्डवा संसदीय क्षेत्र के नेताओं की सदैव उपेक्षा की है. वे जब अध्यक्ष रहे तो यहां के नेताओं को संगठन में पीछे धकेला है.

कठिन सीटों पर चेहरों का टोटा

 कांग्रेस के पास नेता 3, कठिन सीटें ज्यादा, भाजपा भी जूझ रही जिताऊ प्रत्याशी के लिए 

मध्यप्रदेश में कांग्रेस के सामने कठिन सीटों पर जिताऊ प्रत्याशियों का संकट खड़ा हो गया है. भोपाल संसदीय सीट से दिग्विजय सिंह को उतारने के बाद उसके सामने विदिशा, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और सागर, भिंड जैसी सीटों पर जिताऊ प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं. वहीं भाजपा को भी छिंदवाड़ा, गुना और रतलाम-झाबुआ जैसी सीटों पर संघर्ष करना पड़ रहा है.
लोकसभा चुनाव को लेकर प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया दोनों ही दलों भाजपा और कांग्रेस में चल रही है. दोनों ही दल इस बार चुनाव में कठिन सीटों पर जिताऊ प्रत्याशी उतारना चाह रहे हैं, मगर दोनों के सामने कठिन सीटों पर वे प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं, जो जीत के भरोसा इन दलों को दे सकें. भोपाल में दिग्विजय सिंह को कांग्रेस ने उतारकर भाजपा को चुनौती दे दी है. अब कांग्रेस के लिए विदिशा, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और भिंड जैसी कठिन सीटों के लिए वे चेहरे नहीं मिल रहे हैं, जिन पर वह जीत का भरोसा करे. ग्वालियर से जरुर सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी का नाम चला, मगर अभी तक उनके नाम की घोषणा नहीं हुई है. इसके अलावा अन्य सीटों पर कांग्रेस के पास ऐसे नेता नहीं है, जो कठिन सीटों पर भाजपा को चुनौती देकर कांग्रेस को जीत दिला सकें. अब कांग्रेस दूसरे दलों के नाराज नेताओं को अपने पाले में लाकर यहां से लाकर चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति बना रही है.  कांग्रेस के पास सुरेश पचौरी, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा, रामेश्वर नीखरा जैसे नेता भी हैं, मगर इन नेताओं को मैदान में उतारकर कांग्रेस जीत के प्रति आश्वस्त नहीं है. पचौरी और नीखरा का इतिहास हार का बनता जा  रहा है, वहीं विवेक तन्खा मैदानी जमावट में कमजोर साबित हुए हैं.
भाजपा के लिए भी है संकट
कांग्रेस के अलावा भाजपा के सामने भी यही संकट बना हुआ है. भाजपा छिंदवाड़ा, गुना और रतलाम-झाबुआ के अलावा राजगढ़ संसदीय क्षेत्र को कठिन सीट मानती है, मगर वर्षों बीत गए, भाजपा को यहां पर जिताऊ चेहरा नहीं मिल पा रहा है. इस चुनाव में भी भाजपा लगातार ऐसे प्रत्याशी की खोज कर रही है, जो यहां से जीत दिला सकें, मगर अब तक उसे कोई नेता नहीं मिला है, इसके चलते भाजपा ने छिंदवाड़ा में भारतीय गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के मनमोहन शाह बट्टी पर डोरे डाले हैं, मगर उनके नाम पर भाजपा में विरोध तेज हो गया है. इसके अलावा गुना और रतलाम-झाबुआ में भाजपा की खोज अब भी जारी है. राजगढ़ सीट पर भाजपा जरुर जीती है, मगर वह तब जब दिग्विजय सिंह परिवार का सदस्य वहां से चुनाव मैदान में नहीं उतरा है. इस बार दिग्विजय  सिंह तो भोपाल से मैदान में हैं, मगर वे राजगढ़ संसदीय सीट पर भी पूरा जोर लगा रहे हैं.

राष्ट्रीय लेवल का एक और झूठ परोस गए राहुल गांधी


लोकसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश में जुबानी जंग भी अब तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को फिर से सबसे बड़ा झूठ बोलने वाला बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का एक और राष्ट्रीय लेवल का झूठ उनके द्वारा की गई घोषणा के रुप में सामने आया है.
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान ने राहुल गांधी द्वारा 72 हजार रुपए गरीबों को देने के वादे को लेकर यह बात कही. उन्होंने कहा कि  मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के मतदाता कांग्रेस के झूठे वादों से अभी उबर नहीं पाये और उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष एक और राष्ट्रीय लेवल का झूठ परोस गए हैं. चौहान ने कहा कि राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव के वक्त मध्यप्रदेश के किसानों से वादा किया था कि वे किसानों का कर्ज 10 दिन में माफ नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री बदल देंगे. अब तक न तो किसानों का कर्ज माफ हुआ और न ही राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को बदला. भोपाल सीट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हम तो भाजपा के कार्यकर्ता हैं.कौन क्या करेगा, कौन मैदान में उतरेगा, इसका फैसला पार्टी करेगी. उन्होंने इस बात का दावा किया कि भाजपा इस बार भी अपने गढ़ भोपाल में अधिक से अधिक मतों से जीत हासिल करेगी. उन्होंने कहा कि चुनाव में हम कांग्रेस की सरकार के झूठे वादों को जनता के बीच ले जाएंगे, जनता को यह बताएंगे कि कांग्रेस सरकार ने विधानसभा चुनाव में क्या वादे किए थे, उन वादों को सरकार कितना पूरा कर पाई है. हम एक-एक झूठे वादे को जनता को बताएंगे.
किसानों के मुद्दे पर शिवराज सिंह ने कहा कि प्रदेश की कमलनाथ सरकार वादों पर खरी नहीं उतरी है. सरकार ने किसानों की धान खरीदी ठीक से नहीं की है. हम गेहूं खरीदी पर ध्यान रख रहे हैं. किसानों का गेहूं ठीक से खरीदा जाए, इस पर भाजपा पूरा ध्यान रख रही है, गेहूं खरीदी में अगर गड़बड़ी होती है तो हम सरकार के खिलाफ मैदान में उतरेंगे.

सोमवार, 25 मार्च 2019

कांग्रेस उतारेगी प्रियदर्शनी सिंधिया को मैदान में


भाजपा सिंधिया की बुआ या फिर मामी पर लगाएगी दाव
प्रियदर्शनी 
मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने कठिन सीटों पर दिग्गजों को लड़ाने की रणनीति के तहत अब ग्वालियर सीट से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी राजे का मैदान में उतारने की रणनीति बनाई है. इसके लिए ग्वालियर जिले की ग्रामीण और शहर दोनों इकाईयों ने संयुक्त रुप से एकमत होकर एक प्रस्ताव भी पारित किया है और इसे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को भेजा गया है.
ग्वालियर लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी राजे सिंधिया को टिकट देने का प्रस्ताव पास किया है.  ग्रामीण और शहर कांग्रेस की हुई संयुक्त बैठक में सभी ने एकमत से प्रस्ताव पास किया. इसे अब राहुल गांधी को भेजा गया है, ज्योतिरादित्य सिंधिया को उत्तरप्रदेश  का प्रभार मिलने के बाद प्रियदर्शनी राजे सिंधिया को गुना से मैदान में उतारने के कयास लगाए जा रहे थे. प्रियदर्शनी राजे सिंधिया ने गुना का दौरा भी किया था, लेकिन फिर सियासी समीकरण बदले और गुना से ज्योतिरादित्य को ही पार्टी ने टिकट देने का फैसला किया है और अब ग्वालियर से प्रियदर्शनी राजे सिंधिया को टिकट देने की मांग के प्रस्ताव का पूरी पार्टी ने समर्थन किया है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रियदर्शनी राजे ही ग्वालियर से दमदार प्रत्याशी है.
कमलनाथ ने भी किया आग्रह
दिग्विजय सिंह को भोपाल से चुनाव मैदान में उतारने के बाद अब मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सिंधिया से आग्रह किया है कि वे प्रियदर्शनी को ग्वालियर से चुनाव मैदान में उतारें और खुद ग्वालियर सीट से चुनाव लड़ें. इसके बाद सिंधिया के कहने पर ही ग्वालियर शहर और ग्रामीण इकाई ने प्रियदर्शनी के ग्वालियर से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव बनाया और राहुल गांधी को भेजा है. 
भाजपा उतारना चाहती है बुआ या फिर मामी को
भाजपा भी ग्वालियर संसदीय सीट को लेकर गंभीर है. भाजपा यहां से ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ यशोधरा राजे सिंधिया या फिर उनकी मामी पूर्व मंत्री मायासिंह को मैदान में उतारना चाह रही है. भाजपा द्वारा सीधे तौर पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इसके लिए कवायद कर रहे हैं. हालांकि अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली है. प्रदेश पदाधिकारियों को मानना है कि दोनों में से किसी एक को मैदान में उतारकर यहां पर चुनाव को और भी कठिन बनाने का प्रयास किया जाएगा.

प्रत्याशी की घोषणा के बाद विरोध हुआ तेज

 कार्यकर्ता की उपेक्षा का लगाया आरोप, सिंगरौली भाजपा जिला अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा
मध्यप्रदेश भाजपा में प्रत्याशियों के घोषणा के बाद विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं. वर्तमान सांसदों को  फिर उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर विरोध के चलते सिंगरौली के जिला भाजपा अध्यक्ष ने तो अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया और पार्टी पर कार्यकर्ता की उपेक्षा का आरोप भी लगाया.
मध्यप्रदेश में भाजपा द्वारा प्रत्याशी चयन के पहले सर्वे और कार्यकर्ता की सिफारिश पर टिकट वितरण की बात कही जा रही थी, मगर जहां से वर्तमान सांसदों का विरोध था, वहां पर उन्हें फिर से प्रत्याशी बनाया गया. इसे लेकर प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही विरोध भी तेज हो गया है. सिंगरौली में सांसद रीति पाठक को लेकर विरोध था साथ ही सर्वे में भी वे संगठन के मापदंड पर खरा नहीं उतरी थी. इस लिहाज से उनका टिकट कटना तय माना जा रहा था. रीति पाठक का विरोध करने सिंगरौली जिले के कार्यकर्ता भोपाल पहुंचे थे और संगठन को अपनी बात से अवगत भी करा दिया था, मगर जब भाजपा की सूची जारी हुई तो रिती पाठक को फिर से प्रत्याशी बनाया गया. इसके बाद जिला भाजपा अध्यक्ष कांति देव सिंह ने इसका विरोध फिर किया. जिला अध्यक्ष के साथ वहां के कार्यकर्ताओं ने भी विरोध जताया और संगठन पर कार्यकर्ता की उपेक्षा के आरोप भी लगाए. इतना ही नहीं दुखी होकर जिला अध्यक्ष ने तो अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया. कांति देव सिंह का कहना है कि कार्यकर्ता चाहते थे कि टिकट में बदलाव हो और किसी दूसरे चेहरे टिकट दिया जाए. मगर संगठन ने अपने मौजूद सांसद रीति पाठक को ही टिकट दिया है. 
मंदसौर में सुधीर गुप्ता का विरोध
मंदसौर संसदीय क्षेत्र से भाजपा ने फिर से सुधीर गुप्ता को मैदान में उतारा है. गुप्ता के नाम की घोषणा होते ही उनका विरोध भी तेज हो गया है. गुप्ता का विरोध भाजपा प्रदेश महामंत्री बंशीलाल गुर्जर ने किया है. बंशीलाल गुर्जर यहां से टिकट की मांग कर रहे थे. गुर्जर के अलावा क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं ने भी गुप्ता का विरोध जताया है. जावरा में तो कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए गुप्ता का पुतला तक फूंक दिया. मंदसौर से बंशीलाल गुर्जर के अलावा वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा भी यहां से टिकट के दावेदार थे. शर्मा भी लंबे समय से संगठन से नाराज चल रहे हैं. नाराज गुर्जर ने तो यहां तक कह दिया कि वे चार बार से टिकट की मांग कर रहे हैं, मगर संगठन उनके न जाने क्या कमजोरी समझ रहा है, जिसके चलते उनके नाम पर विचार तक नहीं किया जा रहा है. गुर्जर के अलावा विधायक राजेन्द्र पांडे और  ओमप्रकाश सखलेचा भी गुप्ता के प्रत्याशी बनाए जाने से नाराज हैं.
वीरेन्द्र को टिकट देने का विरोध
टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र से भाजपा द्वारा केन्द्रीय मंत्री वीरेन्द्र कुमार को फिर से प्रत्याशी बनाया जा रहा है. यहां पर उनका विरोध पहले भी था, मगर उनके नाम की घोषणा के साथ विरोध और तेज हो गया है. वीरेन्द्र कुमार का पूर्व विधायक आर.डी. प्रजापति ने किया था. उन्होंने राजधानी में संगठन पदाधिकारियों के सामने विरोध करते हुए अपनी दावेदारी तक पेश की थी. इसके अलावा विधायक हरिशंकर खटीक, पूर्व विधायक उमा यादव सहित अन्य नेताओं ने भी वीरेन्द्र कुमार का विरोध किया था, मगर उसके बाद भी उन्हें संगठन ने टिकट दिया. इसके बाद से इन नेताओं में नाराजगी कुछ ज्यादा नजर आ रही है. 
अनूप, अर्चना भी हैं नाराज
मुरैना से सांसद अनूप मिश्रा का टिकट काटकर केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को दिया गया है. मिश्रा ने ग्वालियर से टिकट की मांग की थी, मगर भाजपा की पहली सूची में ग्वालियर को होल्ड पर रखा है. सूची में मिश्रा का नाम न होने पर वे नाराज बताए जा रहे हैं. मिश्रा को अभी ग्वालियर से उम्मीदवार की घोषणा का इंतजार है, अगर उन्हें टिकट नहीं मिला तो वे भी संगठन के खिलाफ अपने समर्थकों के साथ विरोध कर सकते हैं. वहीं खंडवा संसदीय क्षेत्र से भाजपा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान सांसद नंदकुमार सिंह चौहान को प्रत्याशी बनाया है. यहां से पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस दावेदारी कर रही थी, मगर उन्हें मौका नहीं मिला है. इसके चलते वे एक बार फिर नाराज नजर आ रही हैं. 

न्यायालय ने मांगा सरकार से तीन माह में जवाब

संविदा कर्मचारियों को नियमित नहीं किए जाने को लेकर उच्च न्यायालय ने सरकार से तीन माह में जवाब मांगा है. न्यायालय ने संविदा कर्मचारियों द्वारा लगाई याचिका की सुनवाई करते हुए यह जवाब मांगा है. 
मध्यप्रदेश संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि मध्यप्रदेश सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्था विभाग द्वारा जिला सहकारी  बैंकों में डाटा एंट्री आपरेटरों के पदों पर नियमित पदों पर नई भर्ती की जा रहीं हैं तथा पहले से संविदा पर कार्यरत डाटा एंट्री आपरेटरों को नियमित नहीं किया जा रहा है, उसके बाद आयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं द्वारा 1 मार्च  को आदेश जारी किया गया है कि 30 जून 2019 तक आपकी सेवाएं अंतिम हैं के निर्णय के विरोध में मध्यप्रदेश सहकारिता विभाग के अंतर्गत जिला सहकारी बैंक राजगढ़ में संविदा पर कार्य करने वाले कम्प्युटर आपरेटर खुशहाल सिंह, जगदीश गुर्जर, रवि सोजनिया, नीरज मालाकार, राकेश प्रजापति, उमेश बरेठा, गोपाल नागर, लोकपाल सिंह, संदीप यादव जो कि  कम्प्युटर आपरेटरों के पद जिला सहकारी बैंकों में कार्यरत थे के द्वारा नियमित पदों पर पहले कार्यरत संविदा कर्मचारियों को प्राथमिकता दिये जाने के सबंध में लगाई गई याचिका में कर्मचारियों के वकील विवेक फड़के के द्वारा की गई पैरवी में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर हाईकोर्ट बैंच के जज विवेक रूसिया ने मध्यप्रदेश सरकार से पूछा है कि जब सरकार ने 5 जून 2018 को समस्त विभागों के संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की नीति बनाई है तथा विभाग में पद भी नियमित खाली पद भी मौजूद हैं, विभाग उन पदों पर अन्य लोगों की नियमित भर्ती कर रहा है तो वर्षो से डाटा एन्ट्री आपरेटर जो संविदा पर जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों में कार्य कर रहे हैं ऐसे संविदा कर्मचारियों को 5 जून 2018 में मध्यप्रदेश शासन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा बनाई गई नियमितीकरण की नीति के अनुसार उनको नियमित क्यों नहीं किया जा सकता है, इसका जवाब 90 दिन में सरकार एक स्पीकिंग आर्डर जारी कर कारण सहित बताए.

रविवार, 24 मार्च 2019

भोपाल तय करेगा दिग्विजय का कद

दिग्विजय सिंह 
मध्यप्रदेश की भोपाल सीट से कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह को मैदान में उतारकर उनका सीधा मुकाबला भाजपा से ज्यादा संघ से करा दिया है. संघ को सदैव निशाने पर रखने वाले दिग्विजय सिंह के खिलाफ अब भोपाल में संघ अपनी रणनीति के तहत भाजपा का प्रत्याशी तलाश रहा है. संघ ने उनके नाम की घोषणा के साथ ही सक्रियता भी दिखाई. इसके चलते साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का नाम भी भोपाल से प्रत्याशी के रुप में सामने आया है. हालांकि दिग्विजय के लिए भोपाल चुनौती जरुर है साथ ही यहां से उनका राजनीतिक भविष्य भी तय होगा.
प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कठिन सीटों पर चुनौती के तहत दिग्विजय सिंह पर भोपाल संसदीय सीट से दांव खेला है. सिंह अगर जीते तो केन्द्र में सक्रिय रहेंगे और प्रदेश में उनका ज्यादा ध्यान नहीं रहेगा और हारे तो सिंह की जो आज संगठन में स्थिति है, वे उससे भी ज्यादा कमजोर साबित होंगे. कुल मिलाकर दिग्विजय के लिए लोकसभा का यह चुनाव उनके कद को तय करेगा. यही  वजह है कि सिंह ने नपे-तुले अंदाज में अभी अपने पत्ते खोले हैं. वे अपने नाम की घोषणा के साथ ही समर्थकों से लगातार संपर्क में है. भोपाल संसदीय क्षेत्र में आरिफ अकील और पी.सी.शर्मा दो मंत्री उनके समर्थक हैं. वैसे पचौरी समर्थक आरिफ मसूद भी उनके पक्ष में ही खड़े नजर आएंगे. साथ ही अल्पसंख्यक समुदाय सिंह के साथ नजर आएगा. इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर और वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश सारंग से उनके संबंध भी जगजाहिर हैं.
वहीं संघ परिवार जिसका दखल भोपाल संसदीय सीट पर रहा है, वह इस बार ज्यादा सक्रिय नजर आएगा. संघ अब यहां से अपनी पसंद का प्रत्याशी मैदान में उतारना चाहता है. सिंह शुरु से ही संघ को लेकर बयानबाजी कर सुर्खियों में रहे हैं, जिसके चलते संघ उनके नाराज रहा है. संघ इस बार उन्हें हराने के लिए पूरी ताकत से मैदान में जुट गया है. संघ की ओर से प्रज्ञा ठाकुर का नाम भी प्रत्याशी के लिए शनिवार को ही सामने आया है. इसके अलावा संघ भोपाल में ऐसा प्रत्याशी मैदान में उतारना चाहता है कि यह सीट भी भाजपा के पक्ष में रह जाए और दिग्विजय सिंह को वह हार भी दिला सके. 
जीते तो दिल्ली, हारे का घर बैठेंगे
16 साल के राजनीतिक संन्यास की समाप्ति ऐसी होगी दिग्विजय सिंह ने भी नहीं सोचा था. मगर मुख्यमंत्री कमलनाथ के चक्रव्यूह में वे कुछ इस तरह उलझ गए कि अब मना भी नहीं कर सकते. चुनावी राजनीति में उनकी वापसी के साथ यह चुनाव उनके लिए चुनौती बन गया है.  अगर दिग्विजय यह चुनाव हारते हैं तो कमलनाथ ही कांग्रेस के मध्यप्रदेश के नंबर-1 नेता बन जाएंगे. कमलनाथ सरकार और प्रदेश संगठन में दिग्विजय का दखल भी कम हो जाएगा. साथ ही दिग्विजय चुनावी राजनीति के मामले में हाशिए पर जा सकते हैं. वैसे कमलनाथ को दोनों स्थितियों में फायदा है. दिग्विजय जीते तो दिल्ली चले जाएंगे, हारे तो घर बैठेंगे.

शिवराज, कैलाश ने घेरा दिग्विजय को, बेटा आया समर्थन में

दिग्विजय सिंह 
शिवराज ने कहा अब दिग्विजय का बंटाढ़ार, कमलनाथ-सिंधिया की चाल में फंसे दिग्गी: कैलाश
मध्यप्रदेश में भोपाल संसदीय क्षेत्र के लिए दिग्विजय सिंह को प्रत्याशी घोषित किए जाने पर विपक्ष ने सिंह को आड़े हाथों लेना शुरु कर दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान और पूर्व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. शिवराज ने कहा कि अब दिग्विजय का बंटाढ़ार तय है, तो कैलाश ने दिग्विजय सिंह, मुख्यमंत्री कमलनाथ और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की चाल में फंस गए हैं.
दिग्विजय सिंह को भोपाल से प्रत्याशी बनाए जाने पर भाजपा नेता उन पर लगातार कटाक्ष कर रहे हैं. भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला और तंज कसते हुए कहा कि   भोपाल से उनका बंटाढ़ार होना तय है. दिग्विजय सिंह भाजपा के सामने कोई चुनौती नहीं है. शिवराज ने 29 सीटों पर जीत का दावा किया है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने  खुद के भोपाल से चुनाव लड़ने के फैसले को पार्टी पर छोड़ा है. पार्टी जैसा चाहेगी वैसा किया जाएगा. उन्होंने कहा है कि भाजपा में बदला लेने की प्रवृत्ति नहीं है. भोपाल के लिए प्रत्याशी सोच समझकर उतारा जाएगा. उन्होंने राहुल गांधी को दुनिया का सबसे बड़ा झूठा बताया है. उन्होंने कहा वो जैसे हैं वैसा दूसरों को बताने की कोशिश करते हैं. शिवराज ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ में कहा कि उनका पराक्रम और पारदर्शिता अपने आप में उदाहरण है.
 भोपाल से चुनाव लड़ना चाहते हैं कैलाश
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश ने दिग्विजय पर चुटकी लेते हुए कहा कि सिंधिया और कमलनाथ ने दिग्विजय को फंसा दिया है. भोपाल सबसे मजबूत सीट है, उनका बंटाधार होना तय है.  विजयवर्गीय ने दिग्विजय को चुनौती दी है कि पार्टी अगर मौका दें तो वे भोपाल से दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि दिग्विजय के खिलाफ लड़ने में बड़ा मजा आएगा. 
जयवर्धन ने बताया चुनौतियां स्वीकार करने वाला नेता
प्रदेश में कांग्रेस के लिए सबसे कठिन लोकसभा क्षेत्र माने जाने वाले भोपाल से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के मैदान में उतरने पर उनके बेटे जयवर्धन सिंह ने शेरो-शायरी से पिता का हौसला बढ़ाया है. जयवर्धन सिंह ने पिता के साथ अपनी फोटो जारी करते हुए एक शेर ट्वीट किया है कि अगर फलक को जिद है, बिजलियां गिराने की,  तो हमें भी जिद है, वहीं पर आशियां बनाने की. सर्वत्र दिग्विजय, सर्वदा दिग्विजय. जयवर्धन ने अपनी पोस्ट के जरिए दिग्विजय को चुनौतियों को स्वीकार करने वाला नेता बताया है. 
मालवा से क्यों नहीं लड़ सकते ग्वालियर के नेता
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भी दिग्विजय सिंह के भोपाल से चुनाव लड़ने का समर्थन किया और नाम न लेते हुए सीधे तौर पर सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमला भी बोला है. अजय सिंह ने कहा कि अगर दिग्विजय सिंह भोपाल से चुनाव लड़ सकते हैं तो ग्वालियर-चंबल के नेता मालवा से चुनाव क्यों नहीं लड़ सकते हैं. 
पाकिस्तान में बंट रही होगी मिठाई
हुजूर के विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह को भोपाल से टिकट मिलने पर भोपाल के कांग्रेस नेताओं में कोई उत्साह नहीं है. भोपाल की जनता भी खुश नहीं है, यह जरुर है कि उनके (दिग्विजय सिंह) के भोपाल से चुनाव लड़ने पर पाकिस्तान में जरुर मिठाईयां बंट रही होगी. उन्होंने कहा कि भोपाल की जनता राष्ट्रवादी है और वह उस व्यक्ति का विरोध करती है जो आतंकवादियों का समर्थक हो और शहीदों का मजाक उड़ाए.
हम जिताऊ प्रत्याशी ही मैदान में उतारेंगे
मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने दिग्विजय सिंह को भोपाल से प्रत्याशी बनाए जाने पर कहा कि दिग्विजय सिंह हमारे लिए चुनौती नहीं है. वे कांग्रेस के लिए चुनौती हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि हम भोपाल में जिताऊ प्रत्याशी ही मैदान में उतारेंगे. शिवराज सिंह चौहान को भोपाल से प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि इसका फैसला पार्टी हाईकमान को लेना है, वे नहीं लेंगे. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि हम अपने लक्ष्य पर खरा उतरेंगे और 25 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करेंगे.

बिजली कटने के मामले की जांच के दिए निर्देश


कमलनाथ 
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ग्राम बेहटा निवासी किसान अवध नारायण सिसोदिया द्वारा कल बिजली कनेक्शन कटने को लेकर जहरीला पदार्थ खाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए भोपाल के जिÞलाधीश को इस पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए है.
उन्होंने कहा इस पूरे मामले की जांच हो. क्या पीड़ित किसान की सुनवाई नहीं हुई? क्या किसान का बिजली का बिल अधिक आया? क्या उसे जानबूझकर परेशान किया गया? इन सारे बिंदुओं पर जांच की जाए. इस मामले में जो भी अधिकारी दोषी हो या किसी भी अधिकारी की लापरवाही सामने आए तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाए.
 साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विद्युत विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश भर में कहीं भी किसी भी आम नागरिक व किसान की अधिक बिजली बिल संबंधी कोई भी शिकायत हो तो तत्काल उसका निराकरण किया जावे. किसी भी आम नागरिक व किसान भाईयो को अधिक बिजली बिल संबंधी शिकायतों को लेकर बिजली विभाग के कार्यालयों के चक्कर न लगाना पड़े, परेशान न होना पड़े. यह ध्यान में रखें. इस तरह की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए.

शुक्रवार, 22 मार्च 2019

जिला महामंत्री पर एफआईआर

भारतीय जनता युवा मोर्चा के भोपाल जिला महामंत्री प्रमोद शर्मा तथा अन्य के विरूद्ध आदर्श आचरण संहिता के उल्लंघन पर सहायक रिटर्निंग अधिकारी भोपाल मध्य द्वारा थाना एम.पी.नगर में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.
    उल्लेखनीय है कि लोकसभा निर्वाचन 2019 की तिथियों की घोषणा के साथ ही आदर्श आचरण संहिता लागू हो गई है. 19 मार्च को पैदल मार्च के दौरान वीडियो फुटेज एवं फोटोग्राफ्स के माध्यम से यह तथ्य सामने आया कि प्रमोद शर्मा तथा अन्य ने इस दौरान विरोध प्रदर्शन में जानवरों का उपयोग किया तथा बैनर्स में आदर्श आचरण संहिता का उल्लंघन करने वाले स्लोगन का प्रयोग किया. कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. सुदाम खाड़े ने सर्वसंबंधितों को निर्देशित किया है कि आदर्श आचरण संहिता का उल्लंघनकर्ता कितना भी बड़ा, प्रभावशाली अथवा किसी भी हैसियत का हो, उसके विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित करें.

संजर ने कहा दिग्विजय हारेंगे 4 लाख से ज्यादा वोटों से

दिग्विजय सिंह 
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के बाद अब भोपाल के सांसद आलोक संजर ने दिग्विजय सिंह को चुनौती दी है कि वे भोपाल से चुनाव लड़ें. संजर ने दावा किया है वे यहां से 4 लाख से ज्यादा वोटों से हारेंगे.
लोकसभा चुनाव अब करीब आ गया गया है. राजनीतिक पार्टियां जोरों से चुनावी अभियान में लगी हुई हैं. एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. इसी बीच अब भोपाल सांसद आलोक संजर ने भी दिग्विजय सिंह को भोपाल से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है. आलोक संजर ने कहा है की दिग्विजय सिंह भोपाल से चुनाव लड़कर दिखाएं, उन्हें भोपाल से 4 लाख वोटों से हराकर बीजेपी रवाना कर देगी. आलोक संजर ने कहा कि टिकट मांगने का हक सबको है पर जिसे भी टिकट मिलेगा उसके बाद सभी लोग मिलकर उम्मीदवार को जिताने का काम करेंगे.
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ ही दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भी दिग्विजय सिंह को भोपाल से चुनाव लड़ने की चुनौती देते हुए कहा कि 'यहां से कांग्रेस के बड़े नेताओं से लेकर नवाब तक हार चुके हैं. और अगर दिग्विजय सिंह यहां आना चाहते हैं तो आ जाएं, दो-दो हाथ हो जाएं.

शिवराज ने कहा डूब मरो, जनता माफ नहीं करेगी

शिवराज सिंह चौहान 
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रमुख सलाहकार सैम पित्रोदा द्वारा पुलवामा हमले और वायुसेना की एयर स्ट्राइक को लेकर दिए गए बयान पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि यह बयान सेना के पराक्रम पर उंगली उठाने वाला और आतंकवाद का समर्थन करने वाला है.
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर पित्रोदा के बयान पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सलाहकार, मार्गदर्शक सैम पित्रोदा का बयान देश को केवल आहत करने वाला नहीं, बल्कि शर्मनाक है. राजनीतिक लाभ के लिए कोई सेना के पराक्रम पर उंगली उठाए और आतंकवाद का समर्थन करे, इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ हो ही नहीं सकता, डूब मरो,  जनता माफ नहीं करेगी.
कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को सुरक्षा बल पर आतंकवादी हमला हुआ था. इस हमले का जिक्र करते हुए पित्रोदा ने कहा है कि ऐसी घटनाएं हर समय होती हैं और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद सीमा पार विमानों को भेजकर भी प्रतिक्रिया दे सकती थी, लेकिन यह दुनिया से निपटने का सही तरीका नहीं है.
पित्रोदा ने साथ ही एयर स्ट्राइक में मारे गए आतंकियों की संख्या पर भी सवाल उठाया है. वायु सेना ने पुलवामा में सुरक्षा बल पर हमले के बाद सीमा पार बालाकोट में आतंकियों के ठिकाने पर हमला कर बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराया था.