रविवार, 31 मार्च 2019

विंध्य में कांग्रेस ने उलझाया भाजपा, बसपा को

 भाजपा को उसी की रणनीति पर घेर रही कांग्रेस, बसपा को नहीं मिल रहे जिताऊ प्रत्याशी
मध्यप्रदेश में विंध्य अंचल में विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस अब लोकसभा चुनाव में भाजपा को उसकी ही रणनीति के तहत घेर रही है. कांग्रेस इस बार किसी भी तरह विंध्य में अधिक से अधिक सीटें हासिल करना चाह रही है. इसके चलते जोड़-तोड़ की राणनीति भी तेज हो गई है, जिसने भाजपा के अलावा बहुजन समाज पार्टी को भी चिंता में डाल दिया है.
मध्यप्रदेश में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने विंध्य अंचल में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी की है. कांग्रेस ने इस अंचल की चार सीटों में से अब तक केवल शहडोल सीट पर ही प्रत्याशी घोषित किया है, मगर उसकी रणनीति को देख भाजपा और बहुजन समाज पार्टी चिंतित हो गई है. विधानसभा चुनाव के दौरान से ही कांग्रेस ने इस अंचल के बसपा नेताओं को अपने साथ लिया था. इसके बाद अब भाजपा के नेताओं पर कांग्रेस की नजरें टिक गई है. इस रणनीति के तहत भाजपा को उसी की रणनीति में कांग्रेस ने फंसाने का काम तेज किया है.
सतना से दो भाजपा नेता धीरज पांडेय और रश्मि सिंह कांग्रेस में आ गए हैं. रीवा से विंध्य के कद्दावर भाजपा नेता और पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल के भाई विनोद शुक्ल ने भी कांग्रेस का हाथ थाम लिया है. कांग्रेस ने एक ही दिन में सीधी, सतना और रीवा के कई भाजपा नेताओं को तोड़कर कांग्रेस की सदस्यता दिलाई है, शायद यही कारण है कि कांग्रेस अब जीत के बड़े दावे कर रही है.  हालांकि भाजपा का दावा ये है कांग्रेस में शामिल होने वाले ये चेहरे पिटे हुए हैं.
यहां उल्लेखनीय है कि 2014 कि लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस विधायक नारायण त्रिपाठी को मतदान के एन वक्त पहले भाजपा में शामिल किया और सतना संसदीय क्षेत्र से अजय सिंह की हार को सुनिश्चित कर दिया था. इसके बाद से कांग्रेस के गढ़ में भाजपा ने जमकर सेंधमारी की, जिसके चलते बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इस अंचल में करारी हार का सामना करना पड़ा. अब भाजपा को कांग्रेस ने उसी के रणनीति के तहत माद देने की रणनीति पर काम तेज कर दिया है. 
बसपा की बढ़ाई चिंता
बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर इस अंचल की सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारने का फैसला किया है. बसपा सतना में तो प्रत्याशी घोषित कर पाई, मगर कांग्रेस की रणनीति में वह भी ऐसी उलझी की अब तक प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है. बसपा का इस अंचल में खासा वोट रहा है, मगर इस बार उसे भी झटके लग रहे हैं. उसके पूर्व विधायक बसपा को दामन छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं, तो कई कद्दावर नेता भी कांग्रेस में जा चुके हैं. इसके चलते बसपा को इस अंचल में जिताऊ प्रत्याशी ही नहीं मिल पा रहे हैं.

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