आयोग से शराब नीति अप्रैल से लागू करने मांगी अनुमति, शिवराज ने किया विरोधमध्यप्रदेश में शराब को लेकर मामला गर्मा गया है. सरकार 1 अप्रैल से नई आबकारी नीति लागू करना चाह रही है, इसके लिए चुनाव आयोग ने निर्वाचन आयोग से अनुमति मांगी है. इस नीति के लागू होने से देसी शराब की दुकान पर अंग्रेजी शराब भी बेची जा सकेगी. इस मामले का पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विरोध किया है. उन्होंने मांग की है कि आयोग को इसे अनुमोदित नहीं करना चाहिए.
मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में नई आबकारी नीति को लागू करने की तैयारी में है. इस नीति को 1 अप्रैल से लागू किया जाना है. लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लग जाने के कारण सरकार ने अब इसे लागू करने की अनुमति निर्वाचन आयोग से मांगी है. आबकारी विभाग ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को एक पत्र के साथ नीति की कापी भी दी है, जिसे प्रदेश निर्वाचन अधिकारी ने भारत निर्वाचन आयोग को भेज दिया है.
उल्लेखनीय है कि नई आबकारी नीति में एक अप्रैल से दुकानों के रेट बीते साल के मुकाबले 20 प्रतिशत बढ़ाने के बाद उनका नवीनीकरण किए जाने का प्रस्ताव है. जिन दुकानों के रेट नहीं बढ़ेंगे उनका ठेका निरस्त किया जाएगा. सरकार द्वारा यह कदम राजस्व बढ़ाने के चलते किया जा रहा है. इस नीति में इस बात का भी उल्लेख है कि जिन दुकानों का ठेका निरस्त होगा, उनकी नीलामी की प्रक्रिया भी नए सिरे से की जाएगी. इसके अलावा इस नई नीति में इस बात का भी प्रावधान किया गया है कि देसी शराब की दुकान पर अंग्रेजी शराब भी बेची जा सकेगी. इसके लिए दुकान के ठेकेदार को बकायदा आबकारी अधिकारी के पास आवेदन देना होगा, जिसे अनुमति के लिए कलेक्टर को भेजा जाएगा. कलेक्टर की अनुमति के बाद उसे विदेशी शराब नीति की अनुमति मिल जाएगी और वह देसी शराब के साथ अंग्रेजी शराब का विक्रय कर सकेगा.
शिवराज ने कहा कमलनाथ सरकार का अनर्थकारी कदम
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले का विरोध किया. उन्होंने कहा कि बीच चुनाव में कमलनाथ सरकार देसी शराब की दुकान पर विदेशी दारु बेचने की अनुमति देने का ऐलान करती है और चुनाव आयोग से नई आबकारी नीति लागू करने हेतु अनुमोदन मांगती है. उन्होंने कहा कि मेरे मुख्यमंत्री रहते हुए सरकारी आमदनी बढ़ाने हेतु ऐसे प्रस्ताव पहले भी आए थे, लेकिन मेरे लिए आमदनी से ज्यादा प्रदेश के युवा और उनका भविष्य जरूरी है, इसीलिए मैंने कभी ऐसे किसी प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया. ये एक अनर्थकारी कदम है और प्रदेश के भविष्य को नशे की गर्त में धकेलने की एक साजिÞश है. उन्होंने कहा कि मेरा आग्रह कमलनाथ सरकार से है कि ऐसे कदम न उठायें और यह प्रस्ताव निरस्त करें. साथ ही चुनाव आयोग से भी अपील करता हूं कि इस नीति को अनुमोदित न किया जाए.
भाजपा सरकार की नीति को आगे बढ़ाया
मध्यप्रदेश में देसी शराब दुकानों में विदेशी शराब मिलने का मामला गर्माया तो आबकारी मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर ने कहा है कि ये नई नीति नहीं है, बल्कि भाजपा सरकार की नीति को आगे बढ़ाया है. उन्होंने कहा कि भाजपा शासनकाल में इस नीति के स्वरूप में बदलाव किया गया था. फिलहाल आचार संहिता लागू होने के चलते सरकार सीधे लागू नहीं कर सकती. इसलिए राज्य सरकार ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को प्रस्ताव भेजा है. उन्होंने बताया कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने केंद्रीय चुनाव आयोग को प्रस्ताव आगे भेजा है. यहां उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीसरी बार मुख्यमंत्री बनते ही ऐलान किया था कि शराब की नई दुकानें नही खुलेंगी, लेकिन उसके बाद सरकार ने करीब ढ़ाई हजार देसी शराब की दुकानों से ही अंग्रेजी शराब बेचने का ऐलान कर दिया था. अब मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार है.
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