बुधवार, 13 मार्च 2019

कांग्रेस के सामने चेहरों का संकट

 एक दर्जन सीटों पर नहीं मिल रहे जिताऊ उम्मीदवार

मध्यप्रदेश कांग्रेस के सामने लोकसभा सीटों पर जिताऊ उम्मीदवारों का संकट खड़ा हो गया है. पार्टी नेता भाजपा को कड़ी टक्कर देकर 24 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा तो कर रहे हैं, मगर जमीनी हकीकत यह है कि एक दर्जन से ज्यादा संसदीय क्षेत्रों में उसे सर्वे, बड़े नेताओं की राय के बाद भी जीत के योग्य प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं. इसके चलते कई स्थानों पर पार्टी को विधानसभा चुनाव में हारे प्रत्याशियों पर दाव खेलने को विवश होना पड़ रहा है.
प्रदेश कांग्रेस द्वारा लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में खूब फूंक-फंूक कर कदम रखा जा रहा है. प्रदेश इकाई के अलावा खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने सर्वे कराया है, वहीं बड़े नेताओं की राय के बाद भी हालात यह बन रहे हैं कि एक दर्जन से ज्यादा संसदीय क्षेत्रों में पार्टी का जिताऊ उम्मीदवार ही नहीं मिल रहे हैं. इसके लिए संगठन स्तर से भी कई बार फीडबेक लिया गया, मगर अब तक किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है. यही वजह है कि पार्टी ने 10 नामों पर तो सहमति बना ली, मगर शेष 19 लोकसभा सीटों के लिए उम्मीदवार पर जीत का भरोसा नहीं हो पा रहा है. 
कांग्रेस को बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में प्रत्याशी के लिए खूब मशक्कत करनी पड़ रही है, वहीं विदिशा, खरगोन, धार, मंदसौर, भिंड, देवास, मुरैना, सागर, टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, बालाघाट, खण्डवा, होशंगाबाद, बैतूल, शहडोल जैसी सीटों पर भी जीत का दमदार प्रत्याशी नजर नहीं आ रहा है. खजुराहो सीट पर भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाले डा. रामकृष्ण कुसमरिया को प्रत्याशी बनाने का मन पार्टी नेताओं ने बना लिया है, मगर अन्य स्थानों पर अब भी जीताऊ प्रत्याशियों की तलाश पार्टी द्वारा की जा रही है.
विधानसभा चुनाव हारे प्रत्याशियों पर दाव
कांग्रेस को जब जिताऊ प्रत्याशी नहीं मिल रहे तो विधानसभा चुनाव हारे प्रत्याशियों पर पार्टी दांव लगाने की तैयारी कर चुकी है. इसके तहत मुरैना से रामनिवास रावत, सतना से अजय सिंह, सीधी से डा. राजेन्द्र सिंह, खण्डवा से अरुण यादव का नाम करीब-करीब तय माना जा रहा है. इसके अलावा होशंगाबाद से सुरेश पचौरी, विदिशा से निशंक जैन, बालाघाट से रजनीश सिंह, दमोह से मुकेश नायक और इंदौर से सत्यनारायण पटेल भी टिकट के लिए प्रयास कर रहे हैं. ये दावेदार भी  विधानसभा चुनाव हार चुके हैं.

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