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मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी के साथ मिलकर खाता खोलने की तैयारी कर चुकी है. इसके चलते उसने विधानसभा चुनाव में जिस गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से गठबंधन किया था, उसे भी दरकिनार कर दिया है. सपा मध्यप्रदेश में इस बार किसी भी तरह से खाता खोलना चाहती है, यही वजह है कि उसका पूरा फोकस मात्र तीन सीटों पर ही है.
मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव के पहले राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदला नजर आ रहा है. आम आदमी पार्टी का संगठन एक तरह से मैदान छोड़ चुका है. वहीं हाल राज्य के क्षेत्रीय दलों का है. विधानसभा चुनाव में छोटे दलों ने अपना प्रदर्शन देखते हुए लोकसभा चुनाव में करीब-करीब मैदान से दूरी बना रखी है. आम आदमी पार्टी के अलावा आदिवासियों का नेतृत्व करने वाली गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की
सक्रियता तो दिखाई दे रही है, मगर वह गठबंधन के लिए कभी कांग्रेस तो कभी समाजवादी पार्टी के नेताओं से संपर्क में है. हालांकि समाजवादी पार्टी ने इस बार गोंगपा से गठबंधन न करके बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया है. सपा इस गठबंधन के तहत राज्य की 29 में मात्र तीन सीटों खजुराहो, टीकमगढ़ और बालाघाट से चुनाव मैदान में अपने प्रत्याशी उतारेगी. सपा का लक्ष्य है कि इस बार प्रदेश में वह किसी एक स्थान पर जरुर विजय हासिल करे. इसके तहत वह हर कदम उठा रही है और यही वजह है कि उसने गोंगपा का साथ छोड़ दिया है. यहां उल्लखनीय है कि बसपा के प्रत्याशी तो मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव जीते हैं, मगर सपा का अब तक एक भी प्रत्याशी मध्यप्रदेश से लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाया है.
एक सीट पर ही प्रत्याशी उतारने की मंशा है गोंगपा की
गोंगपा को जब सपा द्वारा दरकिनार सा किया गया तो गोंगपा ने भी 29 में से केवल 1 सीट मंडला में अपना प्रत्याशी मैदान में उतारने की रणनीति बनाई है. गोंगपा द्वारा इस सीट पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम को मैदान में उतारा जाएगा. इसके चलते पार्टी पदाधिकारियों की लगातार बैठकें हो रही है. साथ ही वह कांग्रेस के संकर्प में भी है. सूत्रों की माने तो कांग्रेस से गोंगपा गठबंधन कर मंडला से प्रत्याशी मैदान में उतारने की शर्त भी रख दी है. प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ से गोंगपा पदाधिकारियों की हुई चर्चा के बाद अब इस मामले में फैसला राष्ट्रीय नेतृत्व को लेना है.
जयस ने भी साधा मौन
भील आदिवासियों का नेतृत्व करने वाले संगठन जयस ने भी अब प्रत्याशी उतारने को लेकर मौन साध लिया है. जयस के संरक्षक और कांग्रेस विधायक डा. हीरालाल अलावा लोकसभा चुनाव की आहट के साथ ही कांग्रेस पर फिर से दबाव बनाकर कम से कम 3 सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारना चाह रहे थे, मगर इस बार कांग्रेस की ओर से उन्हें कोई खासा तब्बजो नहीं मिली है. डा. अलावा यह तो कह रहे हैं कि अगर गठबंधन नहीं हुआ तो वे अपने प्रत्याशी याने जयस संगठन के उम्मीदवारों को मैदान में उतारेंगे. मगर जैसे-जैसे आचार संहिता लगने का समय निकट आता जा रहा है डा. अलावा ने भी मौन सा साध लिया है. इसके पीछे यह बताया जा रहा है कि डा. अलावा को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने एक तरह से नसीहत दे दी कि वे मीडिया में ज्यादा बातें न करें.


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