लोकसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस अपने ही विधायकों से लगातार घिरती जा रही है. किसी ने संभावित प्रत्याशी का विरोध किया है तो कोई अपने संगठन से जुड़े लोगों को टिकट के दिलाने के लिए पूरा ताकत लगाते हुए कांग्रेस पर दबाव बना रहा है. इसके चलते कांग्रेस में प्रत्याशी चयन प्रक्रिया में भी देरी होती जा रही है.मध्यप्रदेश में कांग्रेस के विधायक खुद ही संभावित प्रत्याशियों का विरोध करते हुए मैदान में उतरने लगे हैं. कांग्रेस को समर्थन देने वाले निर्दलीय विधायक ठाकुर सुरेन्द्र सिंह शेरा ने खण्डवा संसदीय क्षेत्र से प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव को टिकट देने का विरोध किया है, वे यहां तक कह गए कि अगर यादव को टिकट दिया तो वे अपनी पत्नी को निर्दलीय चुनाव लड़ा देंगे. शेरा की इस चेतावनी के बाद कांग्रेस के स्थानीय नेता भी उनके साथ आ गए और कांग्रेस यहां पर अब तक उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाई.
ठाकुर सुरेन्द्र सिंह के अलावा सतना से विधायक सिद्धार्थ कुशवाह ने भी सतना से संभावित प्रत्याशी राजेन्द्र सिंह का विरोध तेज कर दिया है. वे अपनी पत्नी प्रीति कुशवाह को टिकट दिलाना चाह रहे हैं. इस सीट पर जब अजय सिंह का नाम चला था तब सिद्धार्थ मौन थे, लेकिन अजय सिंह को सीधी से टिकट देने की बात चली तो सिद्धार्थ ने राजेन्द्र सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और वे अपनी पत्नी की दावेदारी करने दिल्ली तक जा पहुंचे.
जयस समर्थकों को टिकट दिलाना चाहते हैं हीरालाल
जय आदिवासी युवा संगठन (जयस) के संरक्षक और कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा भी जयस पदाधिकारियों को टिकट दिलाना चाह रहे हैं. वे कांग्रेस पर इसके लिए लगातार दबाव भी बना रहे है, मगर कांग्रेस की ओर से अब तक उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है. अलावा चार सीटों रतलाम-झाबुआ, धार, बैतूल और मंडला में जयस के पदाधिकारियों को प्रत्याशी बनाए जाने की मांग कर रहे हैं.
प्रत्याशी बदलवाने बना रहे दबाव दावेदार
होशंगाबाद संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस ने नये चेहरे के रुप में युवा शैलेन्द्र दीवान को प्रत्याशी बनाया है. दीवान अपने चुनाव प्रचार अभियान में जुट गए, मगर उनका भी अंदरुनी तौर पर विरोध है. यहां पर टिकट के दावेदारों ने कांग्रेस पर प्रत्याशी बदलने के लिए दबाव बनाना शुरु कर दिया है. होशंगाबाद से टिकट के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामेश्वर नीखरा के अलावा भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए सरताज सिंह टिकट के दावेदार थे. हालांकि दीवान को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ यह स्पष्ट कर चुके हैं कि जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखकर टिकट दिया गया है. लोधी समाज के मतदाताओं की संख्या का ेदेख उन्हें प्रत्याशी बनाया गया है. यहां उल्लेखनीय है कि भाजपा भी इस सीट पर लोधी समाज को देखते हुए प्रहलाद पटेल को प्रत्याशी बनाने पर विचार कर रही थी.
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