शाह को नहीं है प्रदेश के नेताओं पर भरोसामध्यप्रदेश में भाजपा को विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद लोकसभा चुनाव में भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदेश के नेताओं पर भरोसा नहीं कर रहा है. प्रदेश के नेताओं से केवल फीडबेक लिया जा रहा है, इसके बाद चुनाव प्रभारी स्वतंत्रदेव सिंह और सह प्रभारी सतीश उपाध्याय ही प्रत्याशी चयन प्रक्रिया को पूरी कर रहे हैं. इनकी रिपोर्ट पर ही भाजपा के प्रत्याशी तय होंगे.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मध्यप्रदेश की 29 सीटों के लिए पूरी ताकत के साथ रणनीति में जुटें हैं. उन्हें इस चुनाव में मध्यप्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं पर ज्यादा भरोसा नहीं है. इसके लिए दो माह पहले से ही चुनाव प्रभारी स्वतंत्रदेव सिंह और सह प्रभारी सतीश उपाध्याय को प्रदेश की कमान सौंपकर साफ कहा था कि वे अपने स्तर पर रिपोर्ट तैयार करें. चुनाव की आचार संहिता लगने के बाद अब स्वतंत्रदेव सिंह की रिपोर्ट का शाह को इंतजार है. सिंह की रिपोर्ट पर ही शाह मध्यप्रदेश के प्रत्याशियों पर मोहर लगाएंगे. शाह पहले चरण के लोकसभा क्षेत्रों सीधी, शहडोल, जबलपुर, बालाघाट, मंडला और छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्रों के प्रत्याशियों के नाम जल्द घोषित करने की रणनीति बना चुके हैं. यहां के प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया स्वतंत्रदेव सिंह से चर्चा कर ही होगी. बताया जाता है कि सिंह ने अपनी रिपोर्ट में संघ की सलाह भी ली है.
सिंह की रिपोर्ट के आधार पर भाजपा वर्तमान सांसदों के नाम काटने की तैयारी कर रही है. सिंह और उपाध्याय ने बीते एक माह से ज्यादा समय हर लोकसभा क्षेत्र में बूथ स्तर तक पहुंचकर कार्यकर्ता और जिला पदाधिकारियों से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट में वर्तमान सांसदों के प्रति नाराजगी के कारणों का भी उल्लेख उन्होंने किया है.
रिपोर्ट में भीतरघातियों पर भी चिंता
स्वतंत्रदेव सिंह की रिपोर्ट में जहां सांसदों के प्रति कार्यकर्ता की नाराजगी की बात कही गई है, वहीं भीतरघातियों को लेकर भी चिंता जाहिर की है. सिंह ने अपनी रिपोर्ट में उन लोकसभा क्षेत्रों का जिक्र किया है, जहां पर भीतरघात की संभावना है. इस रिपोर्ट के आधार पर अब पार्टी भीतरघातियों के अलावा नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने का जतन करेगी. वैसे सिंह और उपाध्याय ने नाराज कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क कर उनकी नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया है.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें