पिछड़ों को 27 फीसदी आरक्षण, कर्मचारियों को महंगाई भत्ता
लोकसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने के पहले मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने आरक्षण को लेकर बड़ा दांव खेला है. सरकार ने पिछड़े वर्ग का आरक्षण 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी कर दिया, वहीं सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा कर दी है. वहीं शासकीय कर्मचारियों के लिए 2 फीसदी महंगाई भत्ते के आदेश जारी कर दिए हैं. कर्मचारियों के लिए 1 जुलाई 2018 से महंगाई भत्ते में वृद्धि होगी. सियासी हलकों में कांग्रेस का यह बड़ा कदम माना जा रहा है.
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सागर में जय किसान ऋण महाफी योजना के कार्यक्रम में घोषणा की कि राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्गों के आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करेगी. उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से दुर्बल नागरिकों के लिए राज्य सरकार सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी लागू करेगी. उन्होंने कहा कि समाज में सभी वर्गों को आगे बढ़ने के अवसर मिले इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है. मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं से उन्होंने राज्य के अजाक्स और अपाक्स दोनों ही संगठनों को साधने का काम करते हुए भाजपा से यह मुद्दा छीन लिया है. अजाक्स द्वारा विधानसभा चुनाव के दौरान पिछड़े वर्ग को आरक्षण बढ़ाने की मांग की गई थी, जबकि सपाक्स द्वारा केन्द्र सरकार द्वारा कमजोर सामान्य वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण लागू करने की मांग सपाक्स के अलावा भाजपा लंबे समय से कर रही थी. मुख्यमंत्री की इस घोषणा को लोकसभा चुनाव के पहले सियासी कदम के रुप में देखा जा रहा है.सियासी हलकों में भी इस कदम को कांग्रेस का बड़ा दाव माना जा रहा है.
शासकीय कर्मचारियों को 2 फीसदी महंगाई भत्ता
राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए 2 फीसदी महंगाई भत्ते के आदेश जारी कर दिए हैं. कर्मचारियों के लिए 1 जुलाई 2018 से महंगाई भत्ते में वृद्धि होगी. सरकार ने फरवरी माह की शुरूआत में महंगाई भत्ते में वृद्धि करने के निर्णय को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी. सरकार के इस फैसले से प्रदेश के लगभग 10 लाख कर्मचारियों को लाभ होगा. बढ़ा हुआ भत्ता कर्मचारियों के मार्च के वेतन में जुड़कर आएगा. वहीं एरियर की राशि सरकार जीपीएफ खाते में जमा कराएगी. महंगाई भत्ता बढ़ने से राज्य सरकार के खजाने पर हर साल 1,098 करोड़ रुपए का भार आएगा. गौरतलब है कि महंगाई भत्ते की मांग कर्मचारियों द्वारा लंबे समय से की जा रही थी. अब सरकार के इस कदम से कर्मचारियों में नाराजगी दूर होगी. शासन के इस फैसले से राज्य के 8 लाख से ज्यादा कर्मचारियों में शासकीय, शिक्षक संवर्ग, पंचायत सचिव, पेंशन पाने वाले और स्थाई कर्मचारियों को फायदा पहुंचा है.
भाजपा चलाएगी पोल-खोल अभियान
भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष भगतसिंह कुशवाह ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस सरकार की नीयत में खोट है, इसी कारण केन्द्र द्वारा लागू गरीब सवर्णों के आरक्षण को लटकाने का भरसक प्रयत्न किया गया. उन्होंने कहा कि भारी दबाव पड़ने के बाद कमलनाथ ने गरीब सवर्णो के आरक्षण को लागू करने की बात तो स्वीकार कर ली है, लेकिन उसकी टाइमिंग स्वयं ही यह बताती है कि सरकार इस आरक्षण को लेकर ईमानदार नहीं है, वहीं दूसरी ओर पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का चुनावी शगुफा छोड़ दिया गया है. इसे शगुफा इसलिए कहना आवश्यक है, क्योंकि बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के इस विषय को आगे बढ़ाना नामुमकिन है. कुशवाह ने कहा है कि वे कमलनाथ सरकार की इस चालबाजी की पोल खोलने के लिए अभियान चलाएंगे.
लोकसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने के पहले मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने आरक्षण को लेकर बड़ा दांव खेला है. सरकार ने पिछड़े वर्ग का आरक्षण 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी कर दिया, वहीं सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा कर दी है. वहीं शासकीय कर्मचारियों के लिए 2 फीसदी महंगाई भत्ते के आदेश जारी कर दिए हैं. कर्मचारियों के लिए 1 जुलाई 2018 से महंगाई भत्ते में वृद्धि होगी. सियासी हलकों में कांग्रेस का यह बड़ा कदम माना जा रहा है.
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सागर में जय किसान ऋण महाफी योजना के कार्यक्रम में घोषणा की कि राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्गों के आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करेगी. उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से दुर्बल नागरिकों के लिए राज्य सरकार सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी लागू करेगी. उन्होंने कहा कि समाज में सभी वर्गों को आगे बढ़ने के अवसर मिले इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है. मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं से उन्होंने राज्य के अजाक्स और अपाक्स दोनों ही संगठनों को साधने का काम करते हुए भाजपा से यह मुद्दा छीन लिया है. अजाक्स द्वारा विधानसभा चुनाव के दौरान पिछड़े वर्ग को आरक्षण बढ़ाने की मांग की गई थी, जबकि सपाक्स द्वारा केन्द्र सरकार द्वारा कमजोर सामान्य वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण लागू करने की मांग सपाक्स के अलावा भाजपा लंबे समय से कर रही थी. मुख्यमंत्री की इस घोषणा को लोकसभा चुनाव के पहले सियासी कदम के रुप में देखा जा रहा है.सियासी हलकों में भी इस कदम को कांग्रेस का बड़ा दाव माना जा रहा है.
शासकीय कर्मचारियों को 2 फीसदी महंगाई भत्ता
राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए 2 फीसदी महंगाई भत्ते के आदेश जारी कर दिए हैं. कर्मचारियों के लिए 1 जुलाई 2018 से महंगाई भत्ते में वृद्धि होगी. सरकार ने फरवरी माह की शुरूआत में महंगाई भत्ते में वृद्धि करने के निर्णय को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी. सरकार के इस फैसले से प्रदेश के लगभग 10 लाख कर्मचारियों को लाभ होगा. बढ़ा हुआ भत्ता कर्मचारियों के मार्च के वेतन में जुड़कर आएगा. वहीं एरियर की राशि सरकार जीपीएफ खाते में जमा कराएगी. महंगाई भत्ता बढ़ने से राज्य सरकार के खजाने पर हर साल 1,098 करोड़ रुपए का भार आएगा. गौरतलब है कि महंगाई भत्ते की मांग कर्मचारियों द्वारा लंबे समय से की जा रही थी. अब सरकार के इस कदम से कर्मचारियों में नाराजगी दूर होगी. शासन के इस फैसले से राज्य के 8 लाख से ज्यादा कर्मचारियों में शासकीय, शिक्षक संवर्ग, पंचायत सचिव, पेंशन पाने वाले और स्थाई कर्मचारियों को फायदा पहुंचा है.
भाजपा चलाएगी पोल-खोल अभियान
भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष भगतसिंह कुशवाह ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस सरकार की नीयत में खोट है, इसी कारण केन्द्र द्वारा लागू गरीब सवर्णों के आरक्षण को लटकाने का भरसक प्रयत्न किया गया. उन्होंने कहा कि भारी दबाव पड़ने के बाद कमलनाथ ने गरीब सवर्णो के आरक्षण को लागू करने की बात तो स्वीकार कर ली है, लेकिन उसकी टाइमिंग स्वयं ही यह बताती है कि सरकार इस आरक्षण को लेकर ईमानदार नहीं है, वहीं दूसरी ओर पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का चुनावी शगुफा छोड़ दिया गया है. इसे शगुफा इसलिए कहना आवश्यक है, क्योंकि बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के इस विषय को आगे बढ़ाना नामुमकिन है. कुशवाह ने कहा है कि वे कमलनाथ सरकार की इस चालबाजी की पोल खोलने के लिए अभियान चलाएंगे.
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