मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

संघ कार्यालय की सुरक्षा हटाने सियासत हुई तेज, फिर लौटाई सुरक्षा

दिग्विजय ने जताया विरोध, सुरक्षा लौटाने के बाद कमलनाथ ने कहा दोहरा आचरण नहीं रखा

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में संघ कार्यालय समिधा से सुरक्षा बल को हटा लिए जाने को लेकर सियासत गर्मा गई है. सियासी पारा कुछ ऐसा चढ़ा कि भाजपा, संघ के साथ कांग्रेस के भोपाल से प्रत्याशी दिग्विजय सिंह भी इससे खफा नजर आए. उन्होंने इसको अनुचित बताया और मुख्यमंत्री कमलनाथ से अनुरोध किया कि पुन: सुरक्षा उपलब्ध कराएं. जब इस मामले को लेकर विरोध तेज हुआ तो दोपहर होते-होते मुख्यमंत्री कमलनाथ ने संघ कार्यालय पर सुरक्षा वापस लौटाने के निर्देश दे दिए, साथ ही कहा कि उन्होंने दोहरा आचरण नहीं रखा है.
राजधानी स्थित संघ के समिधा कार्यालय पर  की सुरक्षा में एसएएफ  के जवान तैनात थे. कार्यालय के बाहर बना एसएएफ कैम्प हटा लिया गया. इस मामले में पुलिस के आलाअधिकारी कुछ भी खुलकर बोलने से बचते रहे. हालांकि कुछ अफसर दबी जुबान बताते रहे कि अधिकृत रूप से समिधा कार्यालय को सुरक्षा दी ही नहीं गई थी.  पूर्ववर्ती सरकार शिवराज सिंह चौहान की के दौरान संघ कार्यालय समिधा को सुरक्षा दी गई थी. संघ कार्यालय के बाहर चौबीस घंटे सशस्त्र बल तैनात रहता था. एसएएफ  ने समिधा के बाहर एक अस्थाई कैम्प बनाया हुआ था. जिसमें सशस्त्र जवान संघ कार्यालय पर सुरक्षा की दृष्टि से निगाह रखते थे. अब यह कैम्प और सुरक्षा समिधा से हटा ली गई है. इस मामले को लेकर अब भाजपा पूरी तरह से कांग्रेस की कमलनाथ सरकार पर हमलावर है. 
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने समिधा से सुरक्षा हटाये जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया है कि भोपाल स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय से सुरक्षा का हटाया जाना मुख्यमंत्री कमलनाथ  का बेहद ही निंदनीय कदम है. कांग्रेस द्वारा शायद फिर किसी हमले की योजना बनाई गई है, अगर किसी स्वयंसेवक को खरोंच भी आई तो भाजपा इसका जवाब देगी.वहीं भाजपा की ओर से कहा गया कि कमलनाथ सरकार का यह प्रतिशोध भरा कदम है. भाजपा ने कहा है कि संघ इस तरह के कदमों से न तो डरता है, न ही रुकता है और न ही झुकता है.
दिग्विजय भी हुए नाराज
भोपाल संसदीय सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी और राष्ट्रीय महामंत्री दिग्विजय सिंह भी सरकार के इस कदम से खफा नजर आए. उन्होंने ट्वीट कर इस मामले पर नाराजगी जताई. सिंह ने ट्वीट कर कहा कि भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय से सुरक्षा हटाना बिल्कुल उचित नहीं है, मैं मुख्यमंत्री कमलनाथ से अनुरोध करता हूं कि तत्काल पुन: पर्याप्त सुरक्षा देने के आदेश दें. 
सुरक्षा हटाए जाने का पक्षधर नहीं: कमलनाथ
प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जब इस मामले को लेकर विरोध तेज हुआ तो दोपहर को संघ कार्यालय स्थित सुरक्षा वापस लौटा दी. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को शिकायत मिली थी, इस आधार पर संघ कार्यालय ही नहीं, बल्कि 6 स्थानों पर सुरक्षा हटा ली थी. इसके बाद जब उनकी जानकारी में यह बात आई कि संघ कार्यालय से सुरक्षा हटाई गई है, तो उन्होंने वहां पर सुरक्षा वापस लौटाने के निर्देश अधिकारियों को दिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि संघ से भले ही हमारे वैचारिक मतभेद रहे हों, संघ हमारा विरोध करता हो, लेकिन मैं उनके कार्यालय से सुरक्षा हटाने का पक्षधर  नहीं हूं.
संघ किसी की सुरक्षा का मोहताज नहीं: शिवराज
संघ कार्यालय से सुरक्षा हटाए जाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि संघ ने कभी सुरक्षा नहीं मांगी. संघ किसी की सुरक्षा का मोहताज नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार को लगा कुछ आतंकवादी संगठनों से खतरा है इसलिए सरकार में रहते हुए  हमने सुरक्षा प्रदान की थी  और बिना कारण बताए केवल एक सतही कारण बता कर के चुनाव में बल की आवश्यकता है. पूर्व मुख्यमंंत्री ने कहा कि  चुनाव में अगर बल की जरूरत है तो सब नेताओं की सुरक्षा हटाएंगे क्या? उन्होंने कहा कि इस तरह की दुर्भावना सुरक्षा के मामले में रखना, छोटे मन का प्रतीक है,  लेकिन सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए. शिवराज सिंह ने कहा कि  सरकार बदलने से क्या सुरक्षा बदलती है. उन्होंने कहा कि मैं निंदा भी करता हूं  और यह अपेक्षा भी करता हूं , कोई संगठन या व्यक्ति हो सुरक्षा के मामले में कम से कम सरकार अपनी जवाबदारी निभाएगी.
संघ ने कहा कि घटना घटित होती है तो जवाबदारी सरकार की
सरकार के इस कदम पर संघ भी खफा है. संघ की ओर से कहा गया कि हमने कभी सरकार से सुरक्षा मांगी नहीं, सरकार ने सुरक्षा दी और उसी ने हटा ली. संघ पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार को यह बताना चाहिए कि सुरक्षा दी क्यों, और हटा क्यों दी ? यदि किसी भी प्रकार का कोई घटनाक्रम घटित होता है तो उसकी जवाबदारी भी राज्य सरकार की होगी. संघ का कहना है कि भले ही देशभर में आदर्श आचार संहिता लागू है, लेकिन आदर्श आचार संहिता सुरक्षा हटाने को लेकर कभी भी नहीं कहती, बल्कि आचार संहिता के दौरान तो सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जाती है.
सुरक्षा दी थी, तो जारी रखना थी
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने कहा कि  सरकार ने अगर  सुरक्षा दी थी तो जारी रखना था.  मंत्रियों के यहां भी सुरक्षा व्यवस्था है तो संघ कार्यालय से क्यों हटाई.  चुनाव आयोग को आवश्यकता थी तो सभी मंत्रियों के यहां से भी सुरक्षा हटानी थी. दिग्विजय सिंह द्वारा सुरक्षा हटाए जाने का विरोध किए जाने का  गौर ने स्वागत किया. 





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