बुधवार, 3 अप्रैल 2019

बरैया, अर्गल में उलझा भिंड का प्रत्याशी

फूलसिंह बरैया 
 नाथ, सिंधिया की खींचतान का फायदा मिलेगा दिग्विजय को
मध्यप्रदेश की भिंड सीट पर प्रत्याशी को लेकर दिग्गज नेताओं के बीच खींचतान तेज हो गई है. हाल ही में कांग्रेस की सदस्यता लेने वाले बहुजन संघर्ष दल के फूलसिंह बरैया और कांग्रेस में आने के लिए के द्वार पर खड़े भाजपा के पांच बार सांसद रहे अशोक अर्गल को प्रत्याशी बनाने का मुख्यमंत्री कमलनाथ और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ताकत लगा रहे हैं. दोनों नेताओं के बीच चल रही रस्साकशी का फायदा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उठाने का पूरा प्रयास किया और बसपा में रहकर दलितों के मुद्दों को उठाने वाले देवाशीष जरारिया को प्रत्याशी बनाने की कवायद तेज कर दी.
अशोक अर्गल 
ग्वालियर-चंबल की भिंड-दतिया सीट को लेकर कांग्रेस जिताऊ उम्मीदवार की तलाश में जुटी थी, इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बहुजन संघर्ष दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष फूलसिंह बरैया को अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस की सदस्यता दिलाई. सदस्यता लेने के पहले कमलनाथ से बरैया टिकट का वचन ले चुके थे, मगर बीच में मामला तब गर्माया जब भिंड से वर्तमान सांसद भागीरथ प्रसाद का भाजपा ने टिकट काट दिया. इसके बाद नाराज भाजपा के पूर्व सांसद अशोक अर्गल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामनिवास रावत के माध्यम से दिल्ली में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से संपर्क बढ़ाया और कांग्रेस में शामिल होने की बात कही. वे कांग्रस में शामिल तो होना चाहते हैं, मगर सूची में पहले अपना नाम भी देखना चाह रहे हैं, इसके चलते मामला उलझा रहा. सिंधिया से संपर्क में रहकर वे अब भी टिकट की आस में जुटे हैं.
वहीं कमलनाथ बरैया को भिंड से प्रत्याशी बनवाना चाहते हैं. बरैया और अर्गल दोनों ही दलित वर्ग के नेता है, मगर बरैया का जमीनी कद अर्गल से ज्यादा बढ़ा होने का हवाला देकर मुख्यमंत्री उन्हें जिताऊ प्रत्याशी बताते हुए टिकट की पैरवी कर रहे हैं. बरैया को कांग्रेस में शामिल कराने में दिग्विजय सिंह समर्थक डा. गोविंद सिंह की अह्म भूमिका रही है, मगर दिग्विजय सिंह ने मौन रहकर अपने समर्थक के सहारे बरैया को आगे बढ़ा दिया, जब सिंधिया बरैया के खिलाफ नजर आए तो अब दिग्विज सिंह ने अपने पत्ते खोले और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया के माध्यम से युवा नेता और दलितों के मुद्दे उठाने वाले देवाशीष जरारिया का नाम करीब-करीब तय कर दिया है. 
कौन है देवाशीष जरारिया
देवाशीष जरारिया 

देवाशीष जरारिया वैसे तो दिल्ली में रहकर दलितों के मुद्दों को उठाते रहे हैं. वे दिल्ली में रहकर एलएलबी की पढ़ाई कर रहे हैं. वे बसपा के आईटी सेल से जुड़े रहे और इसका नेटवर्क भी उन्होंने खूब बढ़ाया था. बाद में दिग्विजय सिंह उन्हें विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस में शामिल कराने में सफल रहे हैं. सिंह ने देवाशीष के अलावा विधानसभा चुनाव में किसान नेता अर्जुन आर्य, केदार सिरोही के अलावा आदिवासियों की आवाज उठाने वाले डा. हीरा अलावा को भी कांग्रेस में शामिल कराया था. यह उनकी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था. इसके चलते अब उन्होंने जब बरैया और अर्गल के बीच मामला उलझा तो युवा नेता का नाम आगे बढ़ा दिया. यहां उल्लेखनीय यह भी है कि देवाशीष के पिता कर्मचारियों के अजाक्स संगठन के पदाधिकारी हैं और वे दिग्विजय सिंह के निकट के माने जाते हैं. 
जयस ने खरगोन में फंसाया पेंच
जय आदिवासी युवा संगठन जयस ने खरगौन संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के लिए प्रत्याशी चयन में पेंच फंसा दिया है. यहां पर गृह मंत्री बाला बच्चन अपनी पत्नी प्रवीणा बच्चन को मैदान में उतारना चाह रहे हैं, मगर जयस के पदाधिकारी डा. गोविंदा मुजाल्दा भी यहां से टिकट के दावेदार हैं. इसके अलावा रक्षा मुजाल्दा भी यहां से टिकट के लिए दावेदारी कर रही है. तीनों के बीच अब जयस का जिसको समर्थन मिलेगा, कांग्रेस उसे प्रत्याशी बनाएगी. सूत्रों की माने तो डा. गोविंद मुजाल्दा ने वीआरएस ले लिया है और उन्हें जयस का समर्थन मिलने की पूरी संभावना है.

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