मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भोपाल में संघ कार्यालय से हटाई गई सुरक्षा को फिर से बहाल कर दिया गया है. आज बुधवार से संघ कार्यालय के सामने एक अस्थायी चौकी भी बना दी गई और जेवान भी तैनात कर दिए गए.
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आरएसएस कार्यालय समीधा से सुरक्षा हटाए जाने पर विवाद पैदा हो गया था और भाजपा ने कमलनाथ सरकार को घेरा था. इसके बाद कमलनाथ सरकार ने पुरानी सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने के निर्देश जारी कर दिए और संघ कार्यालय के बाहर अस्थाई चौकी बनाई गई. उल्लेखनीय है कि सोमवार देर रात समिधा की सुरक्षा हटा दी गई थी जिसके बाद राज्य ही क्या केंद्र तक सियासी उठापटक शुरू हो गई थी. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने तो यह तक कह दिया था कि 'अगर सिमी का किसी आतंकी संगठन द्वारा कोई घटना घटित होती है तो मैं कांग्रेस को ही जिम्मेदार समझूंगा.' वहीं शिवराज सिंह ने कहा था कि 'ऐसे सुरक्षा नहीं हटानी चाहिए, सरकारें बदलने से कोई सुरक्षा नहीं बदलती, लेकिन ये छोटे मन वाला घटिया फैसला है, जिसकी मैं निंदा करता हूं.' इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इसका विरोध किया था. इसके बाद मुख्यमंत्री ने यहां पर फिर से सुरक्षा देने का फैसला लिया और आज से जवान भी तैनात कर दिए गए.
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आरएसएस कार्यालय समीधा से सुरक्षा हटाए जाने पर विवाद पैदा हो गया था और भाजपा ने कमलनाथ सरकार को घेरा था. इसके बाद कमलनाथ सरकार ने पुरानी सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने के निर्देश जारी कर दिए और संघ कार्यालय के बाहर अस्थाई चौकी बनाई गई. उल्लेखनीय है कि सोमवार देर रात समिधा की सुरक्षा हटा दी गई थी जिसके बाद राज्य ही क्या केंद्र तक सियासी उठापटक शुरू हो गई थी. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने तो यह तक कह दिया था कि 'अगर सिमी का किसी आतंकी संगठन द्वारा कोई घटना घटित होती है तो मैं कांग्रेस को ही जिम्मेदार समझूंगा.' वहीं शिवराज सिंह ने कहा था कि 'ऐसे सुरक्षा नहीं हटानी चाहिए, सरकारें बदलने से कोई सुरक्षा नहीं बदलती, लेकिन ये छोटे मन वाला घटिया फैसला है, जिसकी मैं निंदा करता हूं.' इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इसका विरोध किया था. इसके बाद मुख्यमंत्री ने यहां पर फिर से सुरक्षा देने का फैसला लिया और आज से जवान भी तैनात कर दिए गए.

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