भाजपा में घमासान, नाराज सांसदों उतरेंगे निर्दलीय मैदान में
मध्यप्रदेश भाजपा में टिकट वितरण के साथ ही टिकट से वंचित रहे सांसदों की नाराजगी अब भाजपा पर भारी पड़ रही है. बालाघाट के सांसद बोधसिंह भगत के बाद अब शहडोल के सांसद ज्ञानसिंंह ने नामांकन फार्म खरीदकर निर्दलीय रुप में मैदान में उतरने के संकेत दिए हैं. दोनों सांसद इतने खफा है कि संगठन पदाधिकारियों की बात भी नहीं मान रहे हैं. दोनों ने साफ कहा है कि पहले प्रत्याशी बदलो, फिर विचार किया जाएगा.
मध्यप्रदेश में भाजपा द्वारा 19 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा के बाद करीब आधा दर्जन स्थानों पर प्रत्याशियों का विरोध काफी है. इसमें बालाघाट से सांसद बोधसिंह और शहडोल से सांसद ज्ञानसिंह के टिकट काटकर यहां पर नए चेहरों के रुप में भाजपा ने प्रत्याशी मैदान में दिए हैं, मगर यहां से दोनों वर्तमान सांसद इतने खफा हैं कि दोनों ही ने मैदान में डटे रहने का मन बना लिया है. बोधसिंह भगत ने मंगलवार को नामांकन फार्म खरीद लिया था, तो बुधवार को ज्ञानसिंंह के समर्थक नामांकन फार्म खरीद लाए. इसके बाद ज्ञानसिंह ने साफ कह दिया कि वे निर्दलीय रुप से चुनाव लड़ेंगे. दोनों सांसदों ने इस बात का संकेत भी दिया है कि वे अब मैदान में हटने वाले नहीं है. इसके बाद भाजपा नेताओं की चिंता बढ़ गई है.
नहीं मना पाए संगठन महामंत्री सुहास भगत
बालाघाट के सांसद बोधसिंह भगत को मनाने के लिए प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत खुद बालाघाट पहुंचे. भगत ने जिला भाजपा अध्यक्ष हरीश रंगलानी के निवास पर बोधसिंंह भगत को बुलाकर पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन की उपस्थिति में चर्चा की. इसके बाद भी बोधसिंह ने साफ कह दिया कि पहले प्रत्याशी बदला जाए, तभी वे कुछ बात करेंगे. बोधसिंह को संगठन की ओर से प्रमुख जिम्मेदारी देने का वादा भी किया, मगर वे नहीं माने. भगत ने अब बोधसिंंह को मनाने की जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दी है. बताया जाता है कि चौहान ने बोधसिंह को भोपाल बुलाया है, वे यहां पर उन्हें समझाने का प्रयास करेंगे.
ज्ञानसिंह ने कहा जिंदा मक्खी नहीं निगल सकता
टिकट कटने से सांसद ज्ञानसिंह बेहद खफा है. भाजपा ने यहां पर प्रत्याशियों के नाम की घोषणा करने के दो दिन पहले कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुई हिमाद्री सिंह को प्रत्याशी बनाया है. ज्ञानसिंह इससे नाराज है. उनका कहना है कि जिसे उन्होंने उपचुनाव में हराया, अब उसे पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है. ज्ञानसिंह की नाराजगी को दूर करने के लिए स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रयास कर चुके हैं, मगर उन्होंने उनकी बात भी नहीं मानी है. इसके बाद संगठन की ओर से उनके विधायक पुत्र शिवनारायण पर भी दबाव बनाया गया, मगर उन्होंने अपने पुत्र की भी बात नहीं मानी. ज्ञानसिंंह को मनाने पहुंचे भाजपा के नेताओं को उन्होंने दो टूक जवाब दिया कि जिंदा मक्खी उनसे नहीं निगली जाती. इससे तो अच्छा है मर जाना. पहले प्रत्याशी बदलो, फिर कोई बात की जाएगी. उन्होंने कहा कि वे हिमाद्री का प्रचार तो नहीं करेंगे, साथ ही मैदान में निर्दलीय रुप से उतरने के भी संकेत उन्होंने दिए हैं.
यहां भी हैं टिकट के दावेदार नाराज
भाजपा में प्रत्याशियों के घोषणा के साथ ही राजगढ़ में रोडमल नागर के खिलाफ स्थानीय नेता नाराज है. यहां पर भाजपा नेता पहले ही प्रत्याशी बदलने की मांग कर चुके थे. इसके अलावा टीकमगढ़ में केन्द्रीय मंत्री वीरेन्द्र कुमार खटीक को लेकर भी वहां के नेता खफा हैं. पूर्व विधायक आर.डी. प्रजापति के अगुवाई में टीकमगढ़ के नेता उनका विरोध जता चुके हैं. इसके अलावा मंदसौर में सुधीर गुप्ता को विरोध भाजपा के वरिष्ठ नेता बंशीलाल गुर्जर कर रहे हैं. वहीं मुरैना से टिकट काटे जाने से सांसद अनूप मिश्रा भी खासे नाराज हैं. इसके अलावा भिंड से टिकट न दिए जाने को लेकर पूर्व सांसद अशोक अर्गल भी नाराज चल रहे हैं. वे लगातार कांग्रेस के संपर्क में हैं.
मध्यप्रदेश भाजपा में टिकट वितरण के साथ ही टिकट से वंचित रहे सांसदों की नाराजगी अब भाजपा पर भारी पड़ रही है. बालाघाट के सांसद बोधसिंह भगत के बाद अब शहडोल के सांसद ज्ञानसिंंह ने नामांकन फार्म खरीदकर निर्दलीय रुप में मैदान में उतरने के संकेत दिए हैं. दोनों सांसद इतने खफा है कि संगठन पदाधिकारियों की बात भी नहीं मान रहे हैं. दोनों ने साफ कहा है कि पहले प्रत्याशी बदलो, फिर विचार किया जाएगा.
मध्यप्रदेश में भाजपा द्वारा 19 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा के बाद करीब आधा दर्जन स्थानों पर प्रत्याशियों का विरोध काफी है. इसमें बालाघाट से सांसद बोधसिंह और शहडोल से सांसद ज्ञानसिंह के टिकट काटकर यहां पर नए चेहरों के रुप में भाजपा ने प्रत्याशी मैदान में दिए हैं, मगर यहां से दोनों वर्तमान सांसद इतने खफा हैं कि दोनों ही ने मैदान में डटे रहने का मन बना लिया है. बोधसिंह भगत ने मंगलवार को नामांकन फार्म खरीद लिया था, तो बुधवार को ज्ञानसिंंह के समर्थक नामांकन फार्म खरीद लाए. इसके बाद ज्ञानसिंह ने साफ कह दिया कि वे निर्दलीय रुप से चुनाव लड़ेंगे. दोनों सांसदों ने इस बात का संकेत भी दिया है कि वे अब मैदान में हटने वाले नहीं है. इसके बाद भाजपा नेताओं की चिंता बढ़ गई है.
नहीं मना पाए संगठन महामंत्री सुहास भगत
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| बोधसिंह भगत |
बालाघाट के सांसद बोधसिंह भगत को मनाने के लिए प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत खुद बालाघाट पहुंचे. भगत ने जिला भाजपा अध्यक्ष हरीश रंगलानी के निवास पर बोधसिंंह भगत को बुलाकर पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन की उपस्थिति में चर्चा की. इसके बाद भी बोधसिंह ने साफ कह दिया कि पहले प्रत्याशी बदला जाए, तभी वे कुछ बात करेंगे. बोधसिंह को संगठन की ओर से प्रमुख जिम्मेदारी देने का वादा भी किया, मगर वे नहीं माने. भगत ने अब बोधसिंंह को मनाने की जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दी है. बताया जाता है कि चौहान ने बोधसिंह को भोपाल बुलाया है, वे यहां पर उन्हें समझाने का प्रयास करेंगे.
ज्ञानसिंह ने कहा जिंदा मक्खी नहीं निगल सकता
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| ज्ञानसिंह |
यहां भी हैं टिकट के दावेदार नाराज
भाजपा में प्रत्याशियों के घोषणा के साथ ही राजगढ़ में रोडमल नागर के खिलाफ स्थानीय नेता नाराज है. यहां पर भाजपा नेता पहले ही प्रत्याशी बदलने की मांग कर चुके थे. इसके अलावा टीकमगढ़ में केन्द्रीय मंत्री वीरेन्द्र कुमार खटीक को लेकर भी वहां के नेता खफा हैं. पूर्व विधायक आर.डी. प्रजापति के अगुवाई में टीकमगढ़ के नेता उनका विरोध जता चुके हैं. इसके अलावा मंदसौर में सुधीर गुप्ता को विरोध भाजपा के वरिष्ठ नेता बंशीलाल गुर्जर कर रहे हैं. वहीं मुरैना से टिकट काटे जाने से सांसद अनूप मिश्रा भी खासे नाराज हैं. इसके अलावा भिंड से टिकट न दिए जाने को लेकर पूर्व सांसद अशोक अर्गल भी नाराज चल रहे हैं. वे लगातार कांग्रेस के संपर्क में हैं.


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