मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

बांध प्रभावितों को जमीन दिखाने का कार्य शुरु किया जाए

नर्मदा बचाओ आंदोलन का प्रतिनिधि मंडल नर्मदा घाटी मंत्री से मिला
राजधानी भोपाल में नर्मदा बचाओ आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल के नेतृत्व में नर्मदा बचाओ आन्दोलन के एक प्रतिनिधि मंडल ने नर्मदा घाटी मंत्री सुरेंद्र बघेल से मुलाकात की. बघेल ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश 13 मार्च के के संबंध में कहा कि ओंकारेश्वर बांध विस्थापितों को जल्द ही कृषि योग्य जमीन दिखाने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी और सभी प्रभावितों के पुनर्वास के लिये ठोस कदम उठाए जाएंगे. 
प्रतिनिधि मंडल में नर्मदा बचाओ आंदोलन की वरिष्ठ कार्यकर्ता चित्तरूपा पालित एवं ओंकारेश्वर व मान बांध के प्रतिनिधि शामिल थे. नर्मदा मंत्री  बघेल से बातचीत में अग्रवाल में बताया कि ओंकारेश्वर व नर्मदा के अन्य बांधों के विस्थापित गत तीस वर्षों  से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे है, परन्तु आज तक उन्हें पूरा न्याय नहीं मिला है. इसलिए जरूरी है कि सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए विस्थापितों के साथ मिलकर संयुक्त प्रक्रिया चलाये ताकि अपना सर्वस्व त्याग करने वाले विस्थापितों का समुचित पुनर्वास हो सके. नर्मदा मंत्री ने विस्थापितों के कष्ट के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के उपरांत एक संयुक्त प्रक्रिया चला कर वह स्वयं यह सुनिश्चित करेंगे कि हर बांध के विस्थापितों को उसके पुनर्वास के सम्पूर्ण हक प्राप्त हो. 
उल्लेखनीय है कि नर्मदा बचाओ आन्दोलन की अवमानना याचिका पर एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए 13 मार्च  को सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश दिया था कि ओम्कारेश्वर बांध प्रभावितों को सरकार 3 माह में उपजाऊ जमीन उपलब्ध कराये या फिर उनके दिए जाने वाले पुनर्वास पैकेज पर 90 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज राशी दी जाए. 
नर्मदा बचाओ आंदोलन के प्रतिनिधि मंडल में ओंकारेश्वर बांध प्रभावित अजय गोस्वामी, अंतर सिंह, कैलाश मंसारे, जाधव पटेल, सोहनलाल पटेल एवं मान बांध प्रभावित गोविंद रावत, रामकुवर रावत, शेरू जामसिंह, मांगीलाल, धनसिंह, नवलसिंह, रामसिंह ध्यानसिंह आदि शामिल थे.

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