मध्यप्रदेश के आयकर आयुक्त ने कहा हाईकोर्ट ले स्वयं संज्ञान मेंमध्यप्रदेश के आयकर आयुक्त आर.के.पालीवाल ने हनी ट्रैप मामले में काली कमाई खर्च करने वालों के खिलाफ आयकर का मामला बनाने की बात कही है. आयकर आयुक्त ने मीडिया पर जहां गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं हाईकोर्ट से इस मामले को स्वयं संज्ञान में लेने की मांग की है.
प्रदेश के आयकर आयुक्त आर.के. पालीवाल ने अपने फेसबुक एकाउंट पर ‘हनी ट्रैप$ : कई जनव्यपारी आपराधिक पहलू ’ शीर्षक से को लेकर एक पोस्ट किया है. पोस्ट में पालीवाल ने लिखा है कि यह दुर्भाग्य पूर्ण है कि इस मामले में जांच कर रही पुलिस के कुछ सूत्रों द्वारा अधकचरी जानकारी मीडिया के माध्यम से लीक हो रही है और मीडिया का एक बड़ा हिस्सा इसे चटखारे लेकर सीरियल की तरह टीआरपी बढ़ाने के हथकंडे की तरह इस्तेमाल कर रहा है. कोई इन महिलाओं के फोटो छाप रहे हैं और कुछ इनके बारे में अभद्र टिप्पणी कर रहे हैं. यह सब भद्दी और सतही चीजें हैं. उन्होंने लिखा है कि यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस मामले की तह तक जाने की कोशिश न मीडिया कर रहा है और न सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग. सब इसमें नई^-नई सनसनी खोज कर फैला रहे हैं.
आयकर आयुक्त पालीवाल ने लिखा है कि जिस तरह इस मामले में बड़े नाम आ रहे हैं हाई कोर्ट द्वारा भी स्वयं संज्ञान लेकर इस मामले की सघन जांच केंद्र और प्रदेश सरकार की संयुक्त टीम से कराई जा सकती है या कोई कानूनी एनजीओ ऐसा करने के लिए कोर्ट में पीआईएल भी कर सकती है. यदि ऐसा हुआ तो संदेह के तमाम बादल दूर हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि अपराधिक मामलों के जानकार वकील आदि भी इस मामले में अपना विचार रख सकते हैं.
काली कमाई हनी ट्रैप में लगाई तो मामला भ्रष्टाचार का
पालीवाल ने लिखा है कि इस मामले में समाज की नैतिकता तो कटघरे में खड़ी ही है, लेकिन उससे भी जरूरी कुछ मुद्दे हैं जो और भी अहम हैं. मेरे विचार में इसमें निम्न आपराधिक मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि गिरफ्तार गैंग के मामले में एक तो ब्लैकमेलिंग का अपराध है और दूसरा इससे जो धन संपत्ति बटोरी है उस पर आयकर अदायगी का मामला बनता है. उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जिन दूसरे लोगों यथा आईएएस, आईपीएस और अन्य अधिकारी, मंत्री और सांसद एवं ठेकेदार आदि के नाम उछल रहे हैं उनके मामले में यह जांच जरूरी है कि उन्होंने इस गिरोह को सरकारी अनुदान और ठेके देकर जन धन का कितना नुकसान किया है और यदि इन्होंने अपनी काली कमाई इस पर खर्च की है तो यह भ्रष्टाचार और आयकर चोरी का मामला बनता है.
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