बुधवार, 18 सितंबर 2019

राजधानी में लगातार बारिश ने तोड़ा वर्षा का रिकार्ड

बुधवार की दोपहर तक सीजन में हुई 1688.9 मिलीमीटर दर्ज की

लगातार हो रही बारिश के चलते राजधानी भोपाल में आज बारिश का रिकार्ड टूट गया. राजधानी में आज दोपहर को अब तक 1688.9 मिलीमीटर बारिश होना दर्ज की गई.  इसके पहले 1980 में 1688.9 मिली मीटर बारिश होना दर्ज की थी.
राजधानी भोपाल में आज बुधवार को दोपहर 2.30 बजे तक 1688.9 मिली मिटर बारिश रिकार्ड की गई है. इसके साथ ही 2006 की सबसे ज्यादा बारिश 1686.4 का रिकार्ड भी पीछे रह गया है. बुधवार को राजधानी में सुबह रिमझिम बारिश से तर होती रही. दोपहर 12 बजे के बाद छाए घने बादलों ने शहर को एक बार फिर तर कर दिया. आज हुई इस बारिश ने राजधानी में बारिश का रिकार्ड तोड़ दिया है.वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्ष 1980 से 2019 के बीच उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार साउथ वेस्ट मानसून जून से सितंबर के बीच भोपाल में सर्वाधिक वर्षा 1688.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज हो चुकी है, जो सर्वाधिक बारिश 2006 में 1686.4 मिमी से आगे जा चुकी है.  रिकार्ड टूटने के लिए सुबह सिर्फ 4.4 मिली बारिश की जरूरत थी, जो दोपहर तक हुई बारिश से पूरी हो गई.  मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अभी तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में सबसे अधिक 1686.4 मिमी. बरसात वर्ष-2006 में हुई थी. इसके पूर्व 1980 में राजधानी में 1688.9 मिली मीटर बारिश होना दर्ज किया गया था.
मौसम विभाग के अनुसार वर्ष-1996 से 2019 तक प्रदेश में अभी तक सिर्फ दो बार ही रिकार्ड बरसात हुई है. वर्ष-2013 के बाद इस बार सामान्य से काफी अधिक बरसात हुई है. साथ ही बारिश का सिलसिला जारी हैं. इसी क्रम में  पिछले 10 दिन से प्रदेश में सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र अब ऊपरी हवा के चक्रवात में तब्दील होकर पूर्वी मप्र में सक्रिय है.
मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में पूर्वी मध्यप्रदेश पर एक ऊपरी हवा का चक्रवात बना हुआ है. साथ ही मानसून ट्रफ भी सीधी से होकर गुजर रहा है. वातावरण में भी बड़े पैमाने पर आद्रता मौजूद है. इससे रुक-रुक कर बरसात होने की उम्मीद बरकरार है. बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवात बन गया है.  इसके प्रभाव से 2 दिन बाद राजधानी सहित प्रदेश के कई स्थानों पर बरसात की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है. इस सीजन में करीब 12 कम दबाव के सिस्टम एक के बाद एक कर प्रदेश में आते रहे, इससे जुलाई के अंतिम सप्ताह के बाद लगातार बरसात का सिलसिला बना हुआ है. इससे इस वर्ष रिकार्ड बरसात दर्ज होने जा रही है.
राजधानी के मौसम को प्रभावित करने वाले 5 कारक
मध्य प्रदेश एवं भोपाल के मौसम को प्रभावित करने वाले कारक पहला पूर्वी पश्चिमी द्रोणिका मीन सी लेवल पर सौराष्ट्र से बंगाल की खाड़ी तक जा रही है जो महाराष्ट्र तेलंगाना कोस्टल आंध्र प्रदेश से होकर गुजर रही है. दूसरा हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बंगाल की खाड़ी एवं उससे लगे दक्षिणी आंध्र प्रदेश तटीय क्षेत्र पर बना हुआ है जो 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक स्थित है इसके आगामी 12 घंटे के दौरान कम दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना है. तीसरा हवा ऊपरी भाग में चक्रवात दक्षिण मध्य प्रदेश में बना हुआ है जो 900 मीटर की ऊंचाई तक है. चौथा दक्षिण मध्य प्रदेश से बंगाल की खाड़ी में द्रोणिका तटीय आंध्र प्रदेश तक हवा के ऊपरी भाग में 900 मीटर तक बनी हुई है. पांचवा एक अन्य कम दबाव का क्षेत्र अरब सागर उससे लगे दक्षिण गुजरात क्षेत्र में आगामी 20 तारीख के आसपास बनने की संभावना है

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