रविवार, 22 सितंबर 2019

उम्मीदवार तय करना कांग्रेस के लिए मुसीबत, भाजपा ने भी नहीं खोले पत्ते

  मुख्यमंत्री कमलनाथ हुए सक्रिय, रुठे जयस को मनाया

मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर चुनावी मौसम आया है. झाबुआ में लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों की सक्रियता बढ़ गई है. कांग्रेस ने रुठे जय युवा आदिवासी संगठन  मतदान की घोषणा के साथ ही मना लिया है, यह उसके लिए राहत की खबर है, मगर चिंता अभी भी उम्मीदवार चयन को लेकर है. कांतिलाल भूरिया और जेवियर मेड़ा में तालमेल बैठाना अभी कांग्रेस के लिए मुसीबत बना हुआ है. वहीं भाजपा ने यहां पर मैदान में किसे उतरना है, इसका फैसला नहीं किया है, मगर भाजपा जीत के लिए कड़ी टक्कर देने का मन बना चुकी है.
मध्यप्रदेश में झाबुआ विधानसभा के लिए  21 अक्तूबर को होने वाले मतदान की घोषणा के साथ ही सियासी पारा भी चढ़ने लगा है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल  इस सीट को अपने पक्ष में रखना चाहते हैं, इसके लिए सक्रियता भी बनाए हुए हैं. कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री कलमनाथ के लिए यह उपचुनाव अग्निपरीक्षा से कम  नहीं है, ऐसे में यह उपचुनाव साफ संकेत दे रहा है कि इस सीट का नतीजा सूबे की राजनीतिक का नया समीकरण तय करेगा. विधायकोंं की कम संख्या को लेकर भाजपा कांग्रेस पर  लगातार दबाव बनाती रही है, इसके चलते दोनों ही दल यहां पर जीत के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान में नजर आएंगे. 
मुख्यमंत्री कमलनाथ जीत के लिए उपचुनाव की तारीख 21 अक्तूबर की घोषणा के साथ ही सक्रिय भी हो गए हैं. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को चुनौती देने वाले जय युवा आदिवासी संगठन (जयस)  को मना लिया है. यह उसके लिए राहत की खबर है. जयस के संरक्षक और कांग्रेस के विधायक डा. हीरा अलावा ने उपचुनाव की घोषणा के पहले साफ कर दिया था कि जयस  झाबुआ में अपना प्रत्याशी मैदान में उतारेगा. इसके लिए वे एक महापंचायत भी कर चुके थे. इस महापंचायत के लिए उन्होंने अपनी ताकत भी दिखाई थी. इसके बाद शनिवार को जब उपचुनाव की तारीख तय हुई तो फिर डा. अलावा ने कांग्रेस पर दबाव बनाते हुए यह घोषणा कर दी थी कि वे जयस का प्रत्याशी उपचुनाव में मैदान में उतारेंगे. मगर आज मुख्यमंत्री कमलनाथ से हुई मुलाकात के बाद यहां पर चुनावी दृश्य ही बदलता नजर आ रहा है. मुलाकात के बाद डा. अलावा ने खुद मीडिया में साफ कर दिया कि वे अब झाबुआ में प्रत्याशी मैदान में नहीं उतार रहे हैं, बल्कि कांग्रेस को समर्थन करेंगे. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी सभी मांगों को मान लिया है. साथ ही आदिवासियों से जुड़े हुए सभी हितों पर बातचीत के लिए तैयार हो गए है.उन्होंने बताया कि  मुख्यमंत्री के सामने बात रखते हुए कहा कि क्षेत्र से हो रहे पलायन को रोका जाए. आदिवासियों को उनका अधिकार मिले. इसके अलावा अन्य मांगे भी उन्होंने रखी, जिसे पर मुख्यमंत्री ने अपनी सहमति दी है. इसके बाद हमने तय किया है कि झाबुआ में जयस कांग्रेस के पक्ष में काम करेगा.
भूरिया, मेड़ा में से तय होगा प्रत्याशी
जयस को मनाने के बाद कांग्रेस नेताओं में अब भी इस बात की चिंता है कि कांतिलाल भूरिया और जेवियर मेड़ा में से किसे प्रत्याशी बनाया जाए. पिछले चुनाव में कांतिलाल भूरिया के पुत्र डा.विक्रांत भूरिया को कांग्रेस ने टिकट दिया था, मगर कांग्रेस से बागी होकर जेवियर मेड़ा ने यहां पर डा. भूरिया को हराने का काम किया और भाजपा को जीत हासिल हुई थी. मेड़ा अब भी टिकट के लिए भोपाल से दिल्ली तक प्रयासरत हैं. वहीं भूरिया भी टिकट के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं. वे अपना टिकट न मिलने पर पुत्र को टिकट दिलाने का भी प्रयास कर रहे हैं. कांग्रेस के लिए यही चिंंता का कारण है. वैसे माना जा रहा है कि इस बार मेड़ा टिकट पाने में सफल हो सकते हैं, क्योंकि सोनिया गांधी से उनकी नजदीकी का फायदा उन्हें मिल सकता है.
भाजपा नहीं खोल रहे पत्ते
भारतीय जनता पार्टी झाबुआ सीट पर अपना कब्जा तो बरकरार रखना चाहती है, मगर यहां पर उसका प्रत्याशी कौन होगा. इसके पत्ते अभी खोले नहीं हैं. भाजपा का पूरा संगठन यहां पर जुटा है, मगर कांग्रेस को टक्कर देने वाले प्रत्याशी का नाम सामने नहीं आया है. भाजपा किस पर दांव लगाती है, इसका अभी तक कोई अंदाजा नहीं है. लेकिन वह यहां पर दमदार प्रत्याशी उतराने की जुगत में है. क्योंकि भाजपा अपनी जीती हुई सीट को बरकरार रखने की पुरजोर कोशिश करेगी.

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