मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दिलाया विश्वास, कहा सभी दावों का किया जाएगा निराकरणमुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज लिखित वक्तव्य में नर्मदा आंदोलन की मेधा पाटकर को विश्वास दिलाया कि डूब प्रभावितों के पूर्ण पुनर्वास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. डूब प्रभावितों के सभी दावों का निराकरण किया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा है कि मैं मेधा पाटकर और सभी नर्मदा बचाओ आंदोलन के साथियों को आश्वस्त करता हूं कि मेरी सरकार डूब प्रभावितों के पूर्ण पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है. डूब प्रभावितों के सभी दावों और मुद्दों का संपूर्ण निराकरण नर्मदा घाटी के गांव-गांव में शिविर लगाकर किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने वक्तव्य में कहा है कि मैं मेधा पाटकर से आग्रह करता हूं कि वे अपना अनशन समाप्त करें और डूब प्रभावितों के मुद्दों के त्वरित निराकरण में हमारा सहयोग दें. उन्होंने आश्वस्त किया है कि हमारा पूरा प्रयास होगा कि बांध के गेट खोले जाएं एवं पूर्ण स्तर तक जल भराव वर्तमान में स्थगित रखा जाए.
इसके पूर्व रविवार को बड़वानी जिले की प्रभारी मंत्री विजयालक्ष्मी साधौ मेघा पाटकर को अनशन तोड़ने के लिए मनाने के लिए पहुंची थी. इस दौरान डा. विजयलक्ष्मी साधों ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से मेघा पाटकर की फोन पर बातचीत कराई थी. मुख्यमंत्रीसे बातचीत करते हुए मेघा पाटकर ने कहा कि अधिकारियों ने जो जवाब दिया है वो पिछली सरकार का ही है उसमें नया नहीं है, साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ से कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने इतने सालों तक झूठे शपथ पत्र कैसे दिए मगर इस बातचीत के बाद भी मेघा ने अनशन खत्म करने से इंकार कर दिया. हालांकि प्रभारी मंत्री विजय लक्ष्मी साधौ का कहना है कि 15 साल पहले जब वो नर्मदा घाटी विकास मंत्री थी तब उन्होंने पीड़ितों के हक के लिए काम किया.
अनशन स्थल तक पहुंचा नर्मदा का पानी, चिंतित हुई सरकार
बड़वानी जिले के छोटा बड़ोद में चल रहा नर्मदा चुनौती सत्याग्रह के तहत मेधा पाटकर का अनशन आज नौवें दिन भी जारी रहा. मेधा के अलावा अनशन पर बैठे 10 प्रभावितों के अनशन का आज 5 वां दिन था.
नर्मदा नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है, जिसके चलते अनशन स्थल के आसपास भी रविवार की रात से पानी भरने लगा है, इसके बाद भी अनशन स्थल पर डूब प्रभावित बड़ी संख्या में डटे हुए हैं. मेधा पाटकर के इस अनशन को देशभर से समर्थन भी मिल रहा है. अनशन स्थल पर पानी भरने के कारण मेधा पाटकर के साथ बैठे चार गांवों के प्रभावितों को लेकर प्रदेश सरकार की चिंता बढ़ी है, जिसके कारण सरकार की ओर से आज फिर मेधा पाटकर से अनशन समाप्त करने की अपील की गई है.
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