गुरुवार, 31 अक्टूबर 2019

केन्द्र के खिलाफ दिल्ली में धरना देगी मध्यप्रदेश सरकार

पी.सी.शर्मा 

मध्यप्रदेश  की कमलनाथ सरकार अब केंद्र सरकार के खिलाफ धरना देगी.  राज्य सरकार में कैबिनेट के सभी मंत्री इस धरने में शामिल होंगे. धरना दिल्ली में जंतर-मंतर पर दिया जाएगा.
यह जानकारी आज कमलनाथ मंत्रिमंडल की बैठक के बाद राज्य के जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने मीडिया से चर्चा करते हुए दी. उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक में केंद्र सरकार द्वारा अतिवृष्टि के लिए राहत पैकेज ना दे दिए जाने को लेकर चिंता जताई गई. साथ ही कहा गया कि केंद्र सरकार मध्यप्रदेश के साथ भेदभाव कर रही है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी 4 नवंबर को मध्यप्रदेश में जो प्रदर्शन करने जा रही है, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के घर के बाहर करना चाहिए ताकि केंद्र सरकार मध्य प्रदेश को राहत की राशि दे दें. शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर धरना देगी. हालांकि अभी  धरने की तारीख तय नहीं की गई है. 
उन्होंने बताया कि अतिवृष्टि की वजह से प्रदेश के 55 लाख किसान प्रभावित हुए हैं, इससे 16 हजार करोड़ रुपए की फसलों को नुकसान हुआ है. किसानों को मुआवजा देने के लिए सभी मंत्री अपनी एक महीने का वेतन देंगे.
नया हवाई जहाज खरीदेगी सरकार
जनसंपर्क मंत्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार पुराना हवाई जहाज बेचकर नया हवाई जहाज खरीदने के प्रस्ताव को आज राज्य मंत्रिमंडल ने  हरी झंडी दे दी है. सरकार 7 सीटर टेकस्टोन का नया हवाई जहाज खरेदेगी,  जिसकी किमत 59 करोड़ रुपए है. उन्होंने बताया कि पुरान जहाज करीब 9 करोड़ रुपए में बिकेगा.  राज्य सरकार के पुराने हवाई जहाज को बेचने संबंधी सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इसके बारे में निविदाएं फिर से आमंत्रित की जाएंगी और फिर विधिवत प्रक्रिया अपनायी जाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी.




भूरिया ने ली विधायक पद की शपथ



झाबुआ उपचुनाव मेंं जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कांतिलाल भूरिया ने आज राज्य विधानसभा में सादे समारोह में विधायक पद की शपथ ली. 
राज्य विधानसभा में आज एक सादे समारोह में झाबुआ उपचुनाव जीतकर आए कांतिलाल भूरिया ने विधायक पद की शपथ ली.  भूरिया को विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण समारोह का संचालन विधानसभा के प्रमुख सचिव ए.व्ही.सिंह ने किया. इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित कई कांग्रेस नेता उपस्थित रहे. भूरिया को विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने विधायक पद की शपथ दिलाई. 
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा के झाबुआ विधायक जीएस डामोर ने सांसद चुने जाने के बाद विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद झाबुआ विधानसभा सीट खाली हो गई थी. हाल ही में 21 अक्तूबर को झाबुआ में उपचुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस नेता कांतिलाल भूरिया ने बड़ी जीत हासिल करते हुए भाजपा के प्रत्याशी भानु भूरिया को 27 हजार मतों से हरा दिया था. 

जल सत्याग्रहियों के स्वास्थ्य में आई गिरावट

 घोगलगांव के बाद एक और गांव की काटी बिजली

मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले के औंकारेश्वर बांध में जलस्तर कम करने की मांग को लेकर जलसत्याग्रह कर रहे सत्याग्रहियों के स्वास्थ्य में गिरावट आने लगी है. लगातार 7 दिनों से पानी में रहने के कारण वे अब चर्म रोग के शिकार होते जा रहे हैं. 
खण्डवा जिले ग्राम कामनखेड़ा में नर्मदा आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का जल सत्याग्रह आज सातवें दिन जारी रहा. सभी जल सत्याग्रहियों के स्वास्थ्य स्वास्थ्य में गिरावट आती जा रही है सत्याग्रहियों को मुख्यत: बुखार व खुजली की शिकायत है और उनके पैरों की चमड़ी खराब होना प्रारंभ हो गई है. स्वास्थ्य में गिरावट के बावजूद सभी सत्याग्रहियों का संकल्प का है कि जब तक ओम्कारेश्वर बांध प्रभावितों के सभी अधिकार प्राप्त नहीं हो जाते तब तक उनका सत्याग्रह जारी रहेगा चाहे उनका संपूर्ण शरीर क्यों लगाई जाए गल जाए. सत्याग्रह के समर्थन में सत्याग्रह स्थल पर महिलाओं पुरुषों का बड़ी संख्या में संख्या में आना जारी है.
एक और गांव की काटी बिजली
खण्डवा जिले के ग्राम घोघलगांव के बाद एक और गांव  एखण्ड की बिजली काट दी गई है. उल्लेखनीय है कि ग्राम घोघलगांव की बिजली की 8 दिन पहले बिजली काट दी गयी थी, जिससे अंधेरे के साथ उनकी पानी की व्यवस्था भी ठप हो गयी है. अब एखण्ड गांव जहां के तमाम विस्थापितों का पुनर्वास होना बाकी है उसकी भी बिजली काट दी है. यह वही गांव है जहां कल विस्थापित दशरथ पिता चैना की मकान तोड़ते समय पानी मे डूबने से मौत हो गयी थी. जल सत्याग्रह कर रहे नर्मदा आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता आलोक अग्रवाल ने बिजली काटने की करवाई की निंदा करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश को बिजली देने वाली परियोजना से होने वाले प्रभावितों की ही बिजली काटी जा रही है. अपना सर्वस्व त्याग करने वाले  प्रभावितों के जीवन मे भी अंधेरा किया जा रहा है और घर मे भी.
मंत्री ने मिली आंदोलन की कार्यकर्ता
 नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता  चित्तरूपा पालित ने  मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल के साथ मुलाकात की और उनको संपूर्ण स्थिति से अवगत कराया.   पालित ने मंत्री  को बताया कि बांध में  2 मीटर पानी बढ़ने से किस प्रकार अनेक घरों में पानी भर गया है. गांव के रास्ते कट गए और सैकड़ों एकड़ जमीन टापू बन गई है. उन्होंने यह भी बताया कि अभी भी लगभग 2 हजार प्रभावितों का पुनर्वास नीति, राज्य सरकार के आदेशों एवं सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार पुनर्वास मिलना बाकी है. उन्होंने बघेल से आग्रह किया कि बांध का जलस्तर घटाया जाए और तेजी से सभी प्रभावितों का पुनर्वास किया जाए. समस्या के समाधान हेतु मंत्री  बघेल ने  के निर्देश पर  अधिकारियों के साथ आज बैठक  हुई है और समाधान होने तक बैठकों का दौर जारी रहेगा.

बच्चों में हम तामसी प्रवत्ति डालेंगे तो बच्चे नरभक्षि न बन जाएं

गोपाल भार्गव 
 आंगनबाड़ी में अंडे पर गर्माई सियासत, भाजपा ने किया विरोध

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आंगनबाड़ियों में कुपोषण से बचाने के लिए बच्चों को अंडे देने की तैयारी की जा रही है. वहीं सरकार के इस फैसले के विरोध में भाजपा मैदान में उतर आई है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि कमलनाथ सरकार प्रदेश की जनता के साथ पाप कर रही है.हमारी संस्कृति सनातन संस्कृति है, इसमें मांसाहार निषेध है.अगर हम बचपन से बच्चों को तामसी प्रवृत्ति डाल देंगे तो बच्चे आगे जाकर नरभक्षि न हो जाएं.
मध्यप्रदेश सरकार के आंगनबाड़ी केन्द्रों में अंडा वितरण का भाजपा ने विरोध तेज कर दिया है. इसे लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश की कमलनाथ सरकार जनता के साथ पाप कर रही है. उन्होंने सरकार के आंगनवाड़ियों में अंडा बांटने के प्रस्ताव पर कहा कि  हमारी संस्कृति सनात संस्कृति है, इसमें मांसाहार निषेध है. अगर बचपन से ही बच्चों में तामसी प्रवृत्ति डाल देंगे तो आगे जाकर वह नरभक्षि न हो जाएं. उन्होंने कहा कि बच्चों को पौष्टिक आहार देने के और भी कई तरीके हैं. आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले बच्चों के लिए अंडे देने का विचार कई बार आ चुका है. भाजपा सरकार के समय जब मैं मंत्री था, तब भी बच्चों को आंगनबाड़ियों में अंडे देने की बात सामने आई थी, लेकिन हमारी संस्कृति हमें शाकाहार का सेवन करने की दिशा प्रदान करती है, क्योंकि अंडा मांस का ही एक रुप है, इसलिए हमने इसकी अनुमति नहीं दी थी. उन्होंने कहा कि कुपोषित सरकार से इससे ज्यादा और क्या उम्मीद की जा सकती है. बच्चों को अंडा खिलाएगी जो नहीं खाता उन्हें जबरन खिलाएंगे. अंडे से पोषण नहीं मिला तो बकरे खिलाएगी यह सरकार.
उल्लेखनीय है कि 2013 में यूपीए सरकार ने मिड डे मील और आंगनबाड़ियों में बच्चों को अंडा देने की बात कही थी. मगर उस समय जिन राज्यों में भाजपा सरकार थी, उन्होंने इस बात को नहीं माना था, जबकि कई राज्यों में दूध और अंडे दिए जा रहे हैं. छत्तीसगढ़ में भी यह योजना पिछले महीने ही शुरू हुई है.
धार्मिक विश्वास के बीच कोई भी हस्तक्षेप नहीं करें
नेता प्रतिपक्ष के पहले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने भी इस फैसले का विरोध किया था. विजयवर्गीय ने बुधवार को अंडे बांटे जाने के प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि हम इसका विरोध करेंगे. उन्होंने कहा कि लोगों के धार्मिक विश्वास के बीच किसी को भी हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.
सरकार कहे अंडा खाओ यह उचित नहीं
शिवराज सिंह चौहान 



कमलनाथ सरकार के इस फैसले का राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी विरोध किया है. उन्होंने कहा कि कोई क्या खाए ये उसके विवेक पर निर्भर करता है, लेकिन सरकार कहे कि अंडा खाओ यह उचित नहीं है. आंगनवाड़ियों में अंडा खिलाने का हम घनघोर विरोध करते हैं. अंडे के कई विकल्प मौजूद हैं, पोषण आहार के लिए कई विकल्प हैं. आंगनबाड़ियों में अंडा नहीं परोसा जाना चाहिए. अंडा खिलाने का हम विरोध करेंगे. हमारे समय जब प्रस्ताव आया था अंडे का तो हमने इसको खारिज कर दिया था हम आंगनवाड़ियों में दूध देते थे.
मंत्री ने कहा मैं भी खाती हूं अंडा, खाने में कोई बुराई नहीं
इमरती  देवी 
महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने आज फिर आंगनबाड़ियों में अंडा वितरण करने का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि अंडा शाकाहारी है. जहां पर कुपोषण होगा, वहां सरकार मध्यान्ह भोजन में अंडा देगी. मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में जहां-जहां कुपोषण है, वहां पर अंडा दिया जाएगा. मंत्री इमरती देवी ने घोषणा की कि आदिवासी अंचल के बाद पूरे प्रदेश में सरकार अंडा बांटेगी . मंत्री  ने कहा कि मैं खुद भी अंडा खाती हूं , अंडा खाने में कोई बुराई नहीं है. विरोध कर रहे भाजपा नेताओं पर कटाक्ष करते हुए मंत्री इमरती देवी ने कहा कि विरोध करने वालों को होटल में जाकर देखा, वहां पर ये किस हाल में मिलेंगे, क्या खा रहे होंगे.

अब आसान नहीं होगा होर्डिंग, पोस्टर लगाना

पी.सी.शर्मा 

मध्यप्रदेश में सार्वजनिक स्थलों पर अब नेताओं के होर्डिंग्स, पोस्टर आदि लगाना आसान नहीं होगा. इसके लिए अनुमति लेनी होगी. बिना अनुमति के लगाए जाने वाले होर्डिंग्स, पोस्टर पर जुर्माना लगाया जाएगा.
यह फैसला आज राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया. मंत्रिमंडल की बैठक के बाद राज्य के जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि होर्डिंग्स , पोस्टर आदि लगाने संबंधी नियम बनेंगे.  इस संबंध में नियम बनाने की अनुमति मंत्रिपरिषद ने दे दी है. उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश आउटडोर विज्ञापन नियम 2017 को और सख्त बनाने के लिए एक प्रस्ताव को बैठक में मंजूरी दी है. इसमें नेताओं के स्वागत, जन्मदिन आदि के बैनर, पोस्टर, सड़कों और निजी मकानों पर लगाने के लिए अब नगर निगम से अनुमति लेनी होगी.   उन्होंने बताया कि नियमों में प्रावधान किया जाएगा कि नगर निगम या अन्य संबंधित विभाग से विधिवत अनुमति के बाद ही निर्धारित प्रारूप में होर्डिंग्स आदि लगाए जा सकेंगे. ऐसा नहीं करने वालों पर जुर्माने का प्रावधान भी किया जा सकता है. शर्मा ने कहा कि ऐसा शहरों का सौंदर्य आदि बरकरार रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है. इसकी प्रेरणा चंडीगढ़ से ली गई है.
उन्होंने कहा कि बैठक में उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के कार्यों  की 58 की उम्र के बाद समीक्षा की जाएगी. इसके बाद यह तय होगा कि संबंधित न्यायाधीश 60 साल की उम्र तक न्यायाधीश के रूप में कार्य कर सकेंगे अथवा नहीं. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य पुन निर्माण कोष का भी गठन किया गया है. यह कोष बनाने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना. प्राकृतिक आपदा के दौरान इस कोष के माध्यम से मदद की जाएगी.
जनसंपर्क मंत्री ने बताया कि बैठक में वरिष्ठ पत्रकारों को मिलने वाली सम्मान राशि को 7 हजार से बढ़ाकर 10 हजार किए जाने का फैसला भी किया गया.  उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगने वाले 2640 मेगावाट बिजली प्लांट के लिए कोयले खरीदी का प्रस्ताव पास किया गया, बिजली उत्पादन के लिए कोल इंडिया से ये कोयला खरीदा जाएगा.
मुख्यमंत्री का किया सम्मान

मुख्यमंत्री कमल नाथ को मंत्रालय में मंत्रिमंडल की बैठक में इंदौर में 17 और 18 अक्तूबर को हुई मैग्नीफिसेंट एमपी के आयोजन पर मंत्रिमंडल के सदस्यों ने बधाई दी. मंत्रिमंडल के सदस्यों ने कहा कि इस आयोजन ने मध्यप्रदेश में निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है और प्रदेश को कई निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. सदस्यों ने कहा कि यह आयोजन निश्चित रूप से प्रदेश के विकास विशेषकर रोजगार के क्षेत्र में उपलब्धियों का एक नया कीर्तिमान बनाएगा. मंत्रिमंडल के सदस्यों ने हाल ही में झाबुआ में हुए विधानसभा उप चुनाव में कांतिलाल भूरिया की विजय होने का श्रेय मुख्यमंत्री द्वारा पिछले साढ़े सात माह में जनहित में लिए गए निर्णयों को दिया. उन्होंने मुख्यमंत्री को इसके लिए बधाई दी.

मेहनती लोगों का मध्यप्रदेश नई उड़ान क्यों नहीं भर सकता?

कमलनाथ 
 स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री ने दी नागरिकों को शुभकामना
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश के स्थापना दिवस पर सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं दी है. उन्होंने कहा कि  हम सबके लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर है. मैं उन सभी बंधुओं को भी हार्दिक बधाई देता हूं जो विदेशों में बस गए हैं और अपने प्रदेश की खूबसूरत वादियों और सुनहरे पलों को याद करते हैं. मैं उन सबको भी नमन करता हूं, जिन्होंने मध्यप्रदेश के निर्माण में अपूर्व योगदान दिया है और उत्साहपूर्वक राज्य के नवनिर्माण में जुटे हुए हैं.
मुख्यमंत्री कमलनाथ  मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर अपने ब्लाग में लिखते हुए यह बात कही. उन्होंने लिखा है कि मध्यप्रदेश एक लंबा सफर तय कर चुका है. यह एक शानदार राज्य है. सिर्फ इसलिए नहीं कि यहाँ शांतिपूर्ण सांस्कृतिक विविधता है, मोहक जैव-विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य है या लुभावने स्मारक है. यह अपने शांतिप्रिय और मेहनती लोगों के कारण अद्वितीय है. सर्वधर्म समभाव मध्यप्रदेश की पहचान है. उन्होंने लिखा कि निस्संदेह, मध्य प्रदेश का सौंदर्य सबको सम्मोहित कर देता है. नर्मदा नदी का निर्मल प्रवाह, स्वतंत्र विचरण करते टाइगर, कान्हा नेशनल पार्क की अद्भुत सुंदरता, पत्थरों पर अंकित कविता खजुराहो, अद्भुत महेश्वरी और चंदेरी साड़ी, सांस्कृतिक विविधता और भी बहुत है यहां.
मुख्यमंत्री ने लिखा कि मैं समझता हूं कि हमने भविष्य की रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय बातों में अपना कीमती समय और ऊर्जा खर्च की. मध्यप्रदेश आगे क्यों नहीं बढ़ सकता जब यहां के लोग मेहनती है? हम हर क्षेत्र में उत्कृष्ट बन सकते हैं. हमारे विश्वविद्यालय उत्कृष्टता हासिल कर सकते हैं. हमारा पर्यटन तेजी से पनप सकता है . औद्योगिक विकास में हम नया मुकाम हासिल कर सकते हैं. हमारे उत्साही और प्रतिभाशाली युवा चमत्कार कर सकते हैं. हमारे किसान अपने कौशल से कमाल कर सकते हैं. हमें उनके लिए नए रास्ते बनाने होंगे. लोग अपने आत्म-विश्वास, अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और ज्ञान से आश्चर्यजनक परिवर्तन ला सकते हैं.
मध्य प्रदेश को एक शांतिपूर्ण राज्य बनाने का श्रेय यहां नागरिकों को जाता है. मध्य प्रदेश को एक उत्कृष्ट कार्य-योजना चाहिए. मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करते हुए मानव और प्राकृतिक संसाधनों के उत्कृष्ट प्रबंधन की जरुरत है. प्रदेश की सबसे बड़ी पूंजी यहां की युवा प्रतिभाएं हैं. उन्हें अवसरों की आवश्यकता है. यह हमारा कर्त्तव्य है कि हम उनके लिए अवसर पैदा करें. मध्य प्रदेश को आगे ले जाने में हर नागरिक की समान जिम्मेदारी है. हमने लोक विवेक का आदर किया है. अपनी नीतियों और निर्णयों में लोगों की अपेक्षाओं का ध्यान रखा है.
नए क्षितिज की उड़ान भरने तैयार  प्रदेश
मुख्यमंत्री ने लिखा कि आज मध्य प्रदेश नए क्षितिज में उड़ान भरने को तैयार है. हमारी अर्थ-व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत हमारा कृषि क्षेत्र है. अब हमें खेती में उद्यमिता को बढ़ावा देना होगा ताकि हमारे किसान आत्म-निर्भर बनें. उन्होंने लिखा कि अब आर्थिक गतिविधि से युवा जनशक्ति को जोड़ने और उनके लिए नौकरी के अवसर पैदा करना पहली प्राथमिकता है. औद्योगिक विकास का उद्देश्य नौकरी के अवसर बढ़ाना है. उन्होंने लिखा कि मुझे लोगों की शक्ति पर भरोसा है. मैं युवा पीढ़ी की प्रतिभा में विश्वास करता हूं. हमें अपने उद्यमियों पर भरोसा है. मैं सशक्त हो रही महिलाओं की प्रतिभा की प्रशंसा करता हूं. मध्यप्रदेश अब नई उड़ान भरेगा. यह हमारा संकल्प है.

बुधवार, 30 अक्टूबर 2019

मध्यप्रदेश में सिंधिया, दिग्विजय की अलग-अलग कांग्रेस

 किसान आत्महत्या के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ जिम्मेदार

मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में किसान द्वारा आत्महत्या करने को लेकर फिर से सियासत गर्मा गई है. भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने प्रदेश मेंं किसान आत्महत्या के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ को जिम्मेदार ठहराया है. वहीं उन्होंने कहा कि राज्य में सिंधिया और दिग्विजय सिंह की अलग-अलग कांगे्रस हैं. कब कौन किससे गठबंधन करता है, यह पता नहीं चलता.यही कांग्रेस के संस्कार हैं.
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने यह बात आज राजधानी भोपाल में मीडिया से चर्चा करते हुए कही. वे आज राज्यपाल लालजी टंडन से भाजपा प्रतिनिधिमंडल के साथ मिले. विजयवर्गीय ने कहा कि  प्रदेश में दिग्विजय सिंह की कांग्रेस अलग है, सिंधिया की कांग्रेस अलग है, इसलिए कब कौन किसके साथ गठबंधन करता है, समझ नहीं आता है. कांग्रेस में यह खेल चलता रहता है और यही कांग्रेस के संस्कार हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों की आत्महत्या के लिए सिर्फ कांग्रेस और मुख्यमंत्री कमलनाथ जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने 2 लाख तक की कर्जमाफी का अपना वादा पूरा नहीं किया. किसानों ने अपना बजट यह मानते हुए बनाया था कि उनका कर्जा माफ हो जाएगा, लेकिन कर्जा माफ नहीं हुआ, जिससे उनका बजट बिगड़ रहा है. उन्होंने कहा कि इसे लेकर पूरे प्रदेश के किसान सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे.
राज्य के कृषि मंत्री सचिन यादव ने कैलाश विजयर्गीय के आरोपों को नकारा है. उन्होंने कहा कि बीते 15 सालों में मध्यप्रदेश में करीब 21 हजार किसानों ने आत्महत्या की है.  यादव ने कहा कि भाजपा की सरकार के दौरान किसानों की आत्महत्याओं को देखते हुए कमलनाथ सरकार ने ऋणमाफी योजना शुरू की है, जिससे किसानों का कर्ज माफ हो सके. उन्होंने ये भी कहा कि जो भी सूदखोर किसानों को परेशान करते हैं, उनके खिलाफ सरकार सख्ती बरतेगी.
यह है मामला
राजधानी भोपाल के निकट रायसेन जिले के सिलवानी में एक बुजुर्ग किसान तुलसीराम साहू उम्र 60 वर्ष ने कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर ली. किसान द्वारा आत्महत्या करने का कारण साहूकार द्वारा कर्ज के लिए परेशान करना बताया जा रहा है. भाजपा ने आरोप लगाया है कि किसान कर्ज माफी का लाभ अब तक किसान को नहीं मिला था.

बदलाव के साथ जुड़े शिक्षा, शिक्षा और ज्ञान में हो तालमेल

 मुख्यमंत्री कमल नाथ द्वारा स्टीम शिक्षा पद्धति पर आयोजित दो दिवसीय कॉन्क्लेव का शुभारंभ

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र में आज बड़े परिवर्तन हुए है. हमारी शिक्षा बदलाव के साथ जुड़े, शिक्षा और ज्ञान में तालमेल हो, शिक्षक दक्ष हो और वे समाज सेवक के रूप में काम करें यह सबसे बड़ी चुनौती हमारे सामने है. 
मुख्यमंत्री कमल नाथ आज मिंटो हाल में सांईस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, आर्टस एवं मैथ्स (स्टीम) शिक्षा पद्धति पर आयोजित दो दिवसीय स्टीम कान्क्लेव 2019 का शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी किसी क्षेत्र में बदलाव हुआ है तो उसकी आलोचना हुई है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने 21वीं सदी के भारत की कल्पना करते हुए कम्प्यूटर क्रांति की शुरूआत की थी तब उसका विरोध यह कहकर किया गया था कि इससे बेरोजगारी बढ़ेगी, यह एक बेकार की कोशिश है. आज हम देख रहे है आईटी क्षेत्र में जो क्रांति हुई उससे न केवल बड़ी संख्या में हमारे युवाओं को रोजगार मिला है बल्कि आज पूरे विश्व में हमारे देश के लोग आईटी के क्षेत्र में छाये हुए हैं. नाथ ने कहा कि इसलिए हमें बदलाव के साथ जुड़ना होगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विश्व में हर क्षेत्र में परिवर्तन हुआ है. शिक्षा भी अछूती नहीं है. परिवर्तन के इस दौर में हमारे शिक्षकों का अपग्रेड होना जरूरी है नहीं तो हम अपनी भावी पीढ़ी को आज के और आने वाले समय के अनुकूल शिक्षित नहीं कर पाएंगे. 
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और ज्ञान को जोड़ा जाना बहुत जरूरी है तभी हम अपने बच्चों का सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास कर पाएंगे. उन्होंने मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और उसकी गुणवत्ता में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता प्रतिपादित की. नाथ ने कहा कि हमारे शिक्षकों को आत्मचिंतन करना चाहिए कि वे अपनी भावी पीढ़ी को किस तरह शिक्षित करें जिससे उसका भविष्य बेहतर हो सके. मुख्यमंत्री ने शिक्षकों का आव्हान किया कि वे अपने दायित्व को सरकारी नौकरी के रूप में बल्कि एक समाज सेवक की भूमिका के रूप में निभाएं. उन्होंने कहा कि सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रदेश शिक्षा की गुणवत्ता में अग्रणी राज्य बने. इसके लिए हमें कड़े कदम उठाना पड़े तो उठाएंगे.  मुख्यमंत्री ने स्टीम शिक्षा पद्धति की सराहना करते हुए कहा कि इससे हम अपने बच्चों के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास कर पाएंगे. वे रूचि के साथ पढ़ाई करें इससे उनका एक अलग तरीके से विकास होगा और वे आज के बदलाव से जुड़ सकेंगे.
प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा रश्मि अरूण शमी ने स्टीम शिक्षा पद्धति की मूल अवधारणा, उसके महत्व और कॉन्क्लेव के रूपरेखा की जानकारी दी. इस मौके पर मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती, माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष सलिना सिंह, स्टीम एजुकेशन की संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सी.ई.ओ.) जार्जट येकमेन, डी ऐंजा कॉलेज केलिफोर्निया यू.एस.ए. की बाल विकास एवं शिक्षा विषय की प्रोफेसर जयंती तांबे रॉय, स्टोरी ट्राइंगल फाउन्डेशन की संस्थापक अर्पणा अत्रैय, शिव नाडर फाउंडेशन के बाल शिक्षा विभाग की प्रमुख सुमिता मलिक, शंकर महादेवन अकादमी में पाठ्यक्रम विकास कार्य से जुड़े संगीतकार कार्तिक रमन और स्टीम रिसर्च लैब की विभागाध्यक्ष शहीन शाहीबोले उपस्थित थे.
चुनौतियों से निपटने में सक्षम करती है स्टीम शिक्षा पद्धति
स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कहा कि स्टीम शिक्षा पद्धति विज्ञान, तकनीकी, इंजीनियरिंग, गणित और कला की पढ़ाई को न केवल रूचिकर बनाती है बल्कि इससे हमारे बच्चों का भविष्य की चुनौतियों से निपटने में भी सक्षम करती है. उन्होंने कहा कि की देश में पहली बार मध्यप्रदेश में स्टीम शिक्षा पद्धति पर विचार के लिए दो दिवसीय कॉन्क्लेव हो रहा है जिसमें नवीनतम ग्लोबल अवधारणा पर विषय-विशेषज्ञ मंथन करेंगे. इसे कैसे लागू करें, पाठ्यक्रम में शामिल करें इस पर भी विचार होगा. मुझे विश्वास है कि इस कॉन्क्लेव के निष्कर्ष से हमारी शिक्षा पद्धति को नया आयाम हासिल होगा. डॉ. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री कमल नाथ प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता पर काम कर रहे हैं. हमारा प्रयास है कि हम अपने बच्चों को ऐसी शिक्षा दे सकें जो उनके भविष्य को उज्जवल बनाएं.

हनीट्रैप, वीडियो में दिखाई देने वालों से होगी पूछताछ


मध्यप्रदेश के बहुचर्चित हनीट्रैप मामले में अब उन नेताओं और अफसरों से एसआईटी पूछताछ करेगी, जो वीडियो में दिखाई दे रहे हैं. इस मामले में एसआईटी को मिले वीडियो क्लिप को भी हैदराबाद स्थित सीएफएसएल लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा.
बहुचर्चित हनीट्रैप मामले की जांच के लिए गठित  एसआईटी गोपनीय स्तर पर जांच में जुटी है. एसआईटी के प्रमुख राजेन्द्र कुमार इस मामले को लेकर गोपनीय तरीके से जांच कर रहे हैं. उन्होंने एसआईटी को मिले हार्डडिस्क, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन आदि डिजीटल सामग्री को अपने कब्जे में ले लिया है, इसके अलावा अब मामले में जांच में गिरफ्तार की गई महिलाओं से पूछताछ की तैयारी कर ली है. मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य, वीडियो क्लिप्स के बारे में एसआईटी अब उन नेताओं और अफसरों से सवाल-जवाब करेगी, जिनकी तस्वीरें वीडियो में दिखाई दे रही हैं.  वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों को यह क्लिप दिखाकर पुष्टि की जाएगी कि उसमें वह हैं या नहीं.  सूत्रों की माने तो इस मामले में एसआईटी आईएएस अधिकारियों से पहले पूछताछ करेगी, इसके बाद नेताओं से पूछताछ की जाएगी. इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि एसआईटी के हाथ जो वीडियो लगे हैं, उनमें नेताओं से ज्यादा संख्या आईएएस अधिकारियों है.
उल्लेखनीय है कि अधिकारियों  इंदौर पुलिस ने नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन, बरखा सोनी, आरती दयाल और मोनिका यादव को गिरफ्तार किया था. ब्लैकमेल करने की धमकी देकर आरती दयाल ने इंजीनियर से तीन करोड़ रुपए मांगे थे. उनके पास से कई पूर्व मंत्रियों, कुछ कारोबारियों और प्रदेश के एक दर्जन आईएएस अफसरों के आडियो-वीडियो मिले थे. एसआईटी अब इन वीडियो को दिखाकर नेताओं और अफसरों से यह पूछेगी कि आप संबंधित महिलाओं को पहचानते हैं या नहीं. जिन-जिन एनजीओ को अफसरों ने काम दिए हैं उनके आदेश की कापी भी गिरफ्तार महिलाओं के लैपटाप और मोबाइल में मिली हैं.

प्रत्यक्ष चुनाव की आत्मा को मारने का कर काम रही कांग्रेस


भोपाल नगर निगम को दो भागों में बांटने के खिलाफ भाजपा लगातार विरोध कर रही है, जिसके चलते भाजपा नेताओं न आज राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात कर भोपाल नगर निगम को दो भागों में बांटने के सरकार के फैसले का विरोध जताया. इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान ने कहा कि प्रत्यक्ष चुनाव लोकतंत्र की आत्मा है, कांगे्रस उस आत्मा को मारने का काम कर रही है.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के अलावा अन्य बड़े नेताओं ने राज्यपाल लालजी टंडन से राजभवन पहुंचकर मुलाकात की. साथ ही भाजपा नेताओं ने राज्यपाल को अलग-अलग शहरों में चलाए गए हस्ताक्षर अभियान के दस्तावेज भी सौंपे हैं. भाजपा ने नगर निगम को दो भागों में बांटने के विरोध में हस्ताक्षर अभियान चलाया था. राज्यपाल से मुलाकात के बाद मीडया से चर्चा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज हमने राज्यपाल से भेंटकर भोपाल नगर निगम के विघटन पर आपत्ति दर्ज कराई है. प्रत्यक्ष चुनाव लोकतंत्र की आत्मा है. कांग्रेस उस आत्मा को मारने और सांप्रदायिक आधार पर लोगों को बांटने का काम कर रही है. हम कांग्रेस को इस षड्यंत्र में सफल नहीं होने देंगे.
भाजपा द्वारा राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि नगर पालिक निगम अधिनियम की विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए यह बताया गया है कि नगर निगमों में बंटवारे की घोषणा के लिए राज्यपाल किसी पर निर्भर नहीं हैं, यह राज्यपाल के स्वविवेक पर आधारित है. इसकी विभिन्न धाराओं में प्रावधान है कि मंत्री परिषद, सचिव या कलेक्टर इस बारे में किसी भी प्रकार की अधिसूचना जारी नहीं कर सकते हैं, जिसके कारण भोपाल नगर निगम में दो नगर निगम के बंटवारे को लेकर जारी की गई अधिसूचना असंगत है. साथ ही जिन धाराओं का उल्लेख किया गया है वह नगर निगम के परिसीमन से जुड़ी हैं, लेकिन उसके बंटवारे से उनका कोई संबंध नहीं है. भाजपा नेताओं ने भोपाल नगर निगम को दो भागों में बांटने के निर्णय को अदूरदर्शी, असंगत, अप्रासंगिक, विकास की गति को रोकने वाला और खर्चिला बताया है. भाजपा ने राज्यपाल से मांग की है कि इस मामले में कलेक्टर ने जो अधिसूचना जारी की उसे खारिज किया जाए. 

20 साल से चल रहा है विधान परिषद गठन पर विचार



मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि विधान परिषद का गठन कोई नई सोच नहीं है, बल्कि 20 साल से प्रदेश में इस पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि विपक्ष तो हर चीज का विरोध करता है और यह उसका काम है.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधान परिषद को लेकर मीडिया से बात करते हुए कहा कि विधान परिषद  का गठन कोई नई सोच नहीं हैं. 20 साल से प्रदेश में इस पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि विधान परिषद में लोग जुड़े, प्रतिनिधि बनें, ये अच्छा है. विपक्ष के सवालों पर जवाब दे तुए उन्होंने कहा कि विपक्ष तो हर चीज का विरोध करता है ये उसका काम ही है. 
उल्लेखनीय है  विधान परिषद के गठन को लेकर कवायदें तेज हो गई हैं. मंगलवार को प्रदेश के मुख्य सचिव एस आर मोहंती ने अन्य विभाक के सचिवों व अधिकारियों के साथ बैठक की थी. वहीं भाजपा द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है.  भाजपा का आरोप है कि सरकार असंतोष को दबाने के लिए इसका गठन कर रही है.
किसान यूनियन भी कर रही विरोध
किसान यूनियन के नेता अनिल यादव का कहना है कि सरकार द्वारा विधान परिषद के गठन का रास्ता चुना गया है. वह किसानों के लिए काफी दयनीय स्थिति है. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की बात नहीं कर रही है,  वहीं दूसरी तरफ विधायकों को फायदा पहुंचाने और करोड़ों रुपए खर्च करने की बात कर रही है. ऐसे में प्रदेश का किसान चुप नहीं बैठेगा. यादव ने कहा प्रदेश में एक बड़ा आंदोलन होगा और कहा कि विधायकों को फायदा पहुंचाकर सरकार नहीं बनी है, बल्कि सरकार किसानों के बलबूते पर बनी हैं और उन्हीं के बलबूते पर टिकेगी. अगर सरकार नहीं मानी तो एक बार फिर मंदसौर जैसे हालात बनेंगे. उन्होंने कहा सरकार अपने फैसले को वापस ले और विधान परिषद का गठन ना करें.

मंगलवार, 29 अक्टूबर 2019

हुक्का लाउंज बंद कराने सड़क पर उतरे पूर्व विधायक



भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह  राजधानी में हुक्का लाउंज बंद कराने सड़क पर उतर आए. अपने समर्थकों के साथ पूर्व विधायक ने प्रदर्शन किया और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर हुक्का लाउंज बंद कराने की मांग की.
राजधानी में भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह ने हुक्का लाउंज बंद कराने की मुहिम तेज कर दी है. उन्होंने आज अपने समर्थकों क ेसाथ प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर तरुण पिथोड़े को ज्ञापन सौंपकर राजधानी में एक सप्ताह के अंदर हुक्का लाउंज बंद करने की मांग की. पूर्व विधायक ने चेतावनी दी है कि अगर एक सप्ताह के भीतर प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया तो वे मुख्यमंत्री, राज्यपाल और प्रधानमंत्री को ज्ञापन देकर राजधानी में हुक्का लाउंज बंद कराने की मांग करेंगे. इसके बाद भी अगर हुक्का लाउंज बंद नहीं किए गए तो वे जनआंदोलन करेंगे. 
उल्लेखनीय है कि राजधानी भोपाल की मध्य विधानसभा सीट के पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह ने पिछले दिनों अपने बेटी के घर से चले जाने के बाद कहा था कि हुक्का लाउंज के जरिए युवाओं को नशे का आदि बनाया जा रहा है. उन्होंने इस दौरान इसके खिलाफ जनआंदोलन चलाने की चेतावनी भी दी थी. सिंह ने  बेटी के घर से चले जाने के बाद कांग्रेस के नेताओं पर लव जेहाद का गंभीर आरोप भी लगाया था. उस समय भी लव जेहाद के पीछे सुरेंद्रनाथ सिंह ने हुक्का लाउंज को जिम्मेदार ठहराया था. सिंह ने भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ आज कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है.

राजधानी में सड़क पर घूमता दिखा मगरमच्छ


राजधानी भोपाल में भदभदा डैम के समीप देर रात सड़क पर मगरमच्छ घूमता दिखाई दिया, जिसका ने वीडियो बनाकर लोगों ने सोशल मीडिया पर डाल दिया. मगरमच्छ करीब आधे घंटे तक सड़क पर घूमता रहा, उसके बाद बड़ा तालाब में चला गया.
राजधानी में भदभदा डैम के समीप न्यायिक अकादमी टोल नाके के पास एक मगरमच्छ सड़क पर  आराम से घूमता दिखाई दिया. मगरमच्छ को कुछ लोगों ने देखा और उसका वीडियो बना लिया. इसके बाद वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया.  वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. हालांकि, मगरमच्छ टीम के हाथ नहीं लगा,  माना जा रहा है कि मगरमच्छ फिर से तालाब में चला गया है. वैसे राजधानी के बड़े तालाब में कई मगरमच्छ मौजूद हैं. कलियासोत डैम के बाहर भी कई बार मगरमच्छ देखे जा चुके हैं. हालांकि इन्हें पकड़ने की पहले भी कई बार कोशिशें की गई, लेकिन ये पकड़ में नहीं आ सके. बारिश के वक्त बड़े तालाब के आसपास अक्सर मगरमच्छ दिख जाते हैं. 
उल्लेखनीय है कि राजधानी में करीब एक महीने पहले भी कोलार डैम रोड पर  एक मगरमच्छ निकल आया था, उसे देखते ही सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था. आनन-फानन में लोगों ने वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद उसे रेस्क्यू किया गया. इसके अलावा कलियासोत बांध से लगे इंस्टिट्यूट आफ एक्सीलेंस के पास भी कुछ दिन पहले एक मगरमच्छ नजर आया था.

भाजपा के किसान आंदोलन के खिलाफ मंत्रियों ने खोला मोर्चा

कृषि मंत्री ने कहा किसानों को गुमराह कर रही है भाजपा

मध्यप्रदेश में किसानों और कृषि ऋण माफी को लेकर भाजपा और कांग्रेस एक बार फिर आमने-सामने  आ गई है. भाजपा ने जहां 4 नवंबर को किसान आक्रोश आंदोलन करने की तैयारी कर ली है, वहीं भाजपा के इस आंदोलन के खिलाफ राजय की कमलनाथ सरकार के मंत्रियों ने मोर्चा खोल दिया है. राज्य के कृषि मंत्री सचिन यादव ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह किसानों को गुमराह करने का काम रही है. यादव ने कहा कि भाजपा किसानों के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंक रही हैं. वहीं पंचायत मंत्री ने कहा है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अपना पद बचाने के लिए किसान आंदोलन कर रहे हैं.
राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के साथ ही किसानों की ऋण माफी को मुद्दा भाजपा लगातार उठा रही है. इस मुद्दे पर कई बार कांग्रेस को अपने ही नेताओं ने भी घेरा है. अब फिर से यह मुद्दा गर्माया है. भाजपा ने झाबुआ में मिली करारी हार के बाद फिर से प्रदेश की कमलनाथ सरकार को किसान ऋण माफी के मुद्दे पर घेरने की रणनीति बनाई है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा है कि  कांग्रेस सरकार जो प्रदेश में बिजली बिल हाफ करने का दावा करती थी, उसने बिजली ही साफ कर दी. सिंह के मुताबिक भाजपा 4 नवंबर को पूरे मध्यप्रदेश में किसान आक्रोश आंदोलन करेगी, जिसमे बिजली के बकाया बिल, फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा और किसान कर्जमाफी को लेकर सरकार के रवैये का विरोध किया जाएगा. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है और खुद मुख्यमंत्री को ये बात स्वीकार करनी चाहिए. 
वहीं कृषि ऋण माफी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस के नेता ही अपनी सरकार को घेरते रहे हैं. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई और चाचौड़ा से कांग्रेस के विधायक लक्ष्मण सिंंह ने तो इसे लेकर राहुल गांधी से किसानों से माफी मांगने की मांग तक कर डाली थी. इसके बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी बार-बार किसान कर्ज माफी को लेकर कमलनाथ सरकार को घेरते नजर आए हैं. 
किसान ने दिवाली पर की ऋण माफी पत्र की पूजा
प्रदेश के कृषि मंत्री सचिन यादव ने एक ट्वीट कर भाजपा को नसीहत देते हुए कहा कि भाजपा नेता अब ये स्वीकार करें कि जय किसान फसल ऋण माफी की योजना को लेकर वो सिर्फ किसानों को गुमराह कर रही है और राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम कर रहे है. जबकि प्रदेश का अन्नदाता ऋण माफी के बाद खुशहाल हो चुका है. कृषि मंत्री सचिन यादव ने ट्वीट के साथ एक तस्वीर भी पोस्ट की है जिसमें एक युवक किसान ऋण माफी के प्रमाण पत्र की पूजा करता नजर आ रहा है. यादव ने अपने ट्वीट में इस युवक के बारे में भी बताया है. कृषि मंत्री ने लिखा है कि ये खरगौन जिले के बड़वाह विधानसभा क्षेत्र के थरवर गांव का किसान मनोहर ठाकुर है. इनका 1 लाख 83 हजार रुपए  का ऋण माफ हुआ है और दिवाली पर मनोहर ठाकुर ने ऋण माफी के पत्र की पूजा कर मुख्यमंत्री कमलनाथ को तिलक लगाया.
अपने बचाव के लिए राकेश सिंह कर रहे आंदोलन
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल ने भाजपा पर हमला बोला.उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता कांग्रेस के सरकार के खिलाफ बयानबाजी करना छोड़ दें. जनता ये जानती है कि भाजपा ने उन्हें किस तरह से धोखा दिया है.  पटेल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें पद से हटाने की चर्चा शुरू हो चुकी है, इसलिए वे अपने बचाव में 4 नवंबर को पूरे प्रदेश भर में धरना प्रदर्शन करने जा रहे है. उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार किसान कर्ज माफी के नाम पर किसानों से वादा खिलाफी कर चुकी है, जिसके चलते शिवराज सरकार में सबसे अधिक किसानों ने आत्म हत्या की है. उन्होंने कहा कि भाजपा नेता कांग्रेस सरकार के खिलाफ झूठी बयानबाजी करना छोड़ दें. 

विधान परिषद गठन को लेकर भाजपा ने उठाए सवाल


विश्वास सारंग 
मध्यप्रदेश सरकार राज्य ने राज्य में विधान परिषद गठन को लेकर तेजी दिखानी शुरु कर दी है. वहीं इसे लेकर भाजपा सवाल उठा रही है. भाजपा ने आरोप लगाया है कि सरकार असंतोष को दबाने के लिए ऐसा कर रही है.
राज्य में कमलनाथ सरकार ने वचन पत्र में दिए वचन के अनुसार अब विधान परिषद गठन को लेकर तैयारी शुरु कर दी है. आज इसे लेकर राज्य के मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती ने अधिकारियों की बैठक भी ली और इसका प्रारुप भी तैयार किया. वहीं इसे लेकर भाजपा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि राज्य सरकार परिषद गठन के बहाने सरकार को लेकर पार्टी में उभर रहे असंतोष को दबाने का कार्य कर रही है. कमलनाथ सरकार इसके जरिए असंतुष्टों को मनाने की कवायद कर रही है.  सिंह ने कहा कि इस सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन बांटने के तक के लाले पड़े हैं, ऐसे में विधान परिषद का बजट कहां से लाएंगे. भाजपा  प्रदेशाध्यक्ष ने इस मुद्दे को जनता से जोड़ते हुए कहा कि इसका जनता पर सीधा असर पड़ेगा. विधान परिषद के गठन का बोझ भी जनता को ही उठाना पड़ेगा. सिंह ने विधान परिषद के गठन को लेकर कहा कि इस मामले में विपक्ष को विश्वास में लेने की जरूरत थी.
वहीं  पूर्व मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस की सरकार हठधर्मिता के साथ चल रही है. सरकार अपने असंतोष को छिपाने के लिए अलग-अलग प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि राजनैतिक रूप से इतना बड़ा फैसला बिना विपक्ष की सलाह के लेना निश्चित रूप से सरकार का गैर जिम्मेदाराना रुख है. सारंग ने कहा कि सरकार एक तरफ वित्तीय संकट की बात कहती है, तो वहीं दूसरी ओर अपने ऐशो-आराम और राजनीतिक असंतुष्टों को संतुष्ट करने के लिए विधान परिषद का गठन करने जा रही है. उनका कहना है कि अभी परिषद का गठन करना उचित नहीं है. लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत हो, इसके हम पक्षधर हैं, लेकिन वो विपक्ष जो 109 की संख्या में है, उससे बिना पूछे इस तरह का फैसला देना गलत है.

सोमवार, 28 अक्टूबर 2019

फिर शुरु हुई प्रदेश अध्यक्ष को लेकर अटकलें

भूरिया का नाम शामिल हुआ दौड़ में

मध्यप्रदेश में एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर अटकलें तेज हो गई है. हाल ही में झाबुआ से उपचुनाव जीत कर विधायक बने पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया का नाम इस पद के प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंंह वर्मा ने न केवल आगे बढ़ाया है, बल्कि यह भी कहा है कि इस पद के लिए भूरिया का नाम सबसे आगे है. वर्मा इसके पूर्व गृह मंत्री बाला बच्चन का नाम भी आगे बढ़ा चुके हैं. वर्मा के इस बयान से कांग्रेस में राजनीति गर्माने लगी है. वर्मा मुख्यमंत्री कमलनाथ समर्थक हैं. इस लिहाज से यह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ भी इस पद पर आदिवासी कार्ड खेलना चाहते हैं. 
मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर चर्चा तेज हो गई है. झाबुआ में हुए उपचुनाव के बाद अब पद के दावेदार सक्रिय होते नजर आ रहे हैं. इसके चलते आज सबसे पहले राज्य के लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंंह वर्मा ने इस पद के लिए हाल ही में झाबुआ से उपचुनाव जीतकर आए पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया का नाम आगे बढ़ाया है. वर्मा ने कहा कि कांतिलाल भूरिया प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे हैं.  इसके साथ ही मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को राम बताया है, और कहा है कि उन्होंने 15 साल का वनवास काटा है. वर्मा भूरिया के पहले राज्य के गृह मंत्री बाला बच्चन का नाम आगे बढ़ाते रहे हैं, वे लगातार प्रदेश में आदिवासी नेता को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बैठाने की मांग करते आ रहे हैं. 
ये भी हैं दावेदार
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए राज्य में भूरिया के पहले पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और गृह मंत्री बाला बच्चन सहित करीब आधा दर्जन नेता दावेदारी कर चुके हैं. मगर मामला अब भी अटका हुआ है. सिंधिया समर्थक लगातार सिंधिया को इस पद बैठते देखना चाहते हैं और वे कई बार शक्ति प्रदर्शन तक कर चुके हैं. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंंह पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के लिए सक्रिय हैं. 
कोई बना रहा मंत्री तो कोई उपमुख्यमंत्री
राज्य के लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंंह वर्मा के बयान के पूर्व उपचुनाव जीतने के बाद से कांतिलाल भूरिया को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही है. भूरिया समर्थक जहां उन्हें मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही राज्य में उपमुख्यमंत्री बनने की बात कह रहे हैं, तो कुछ समर्थक उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाए जाने को लेकर  अटकलें लगा रहे हैं. भूरिया के अधिकांश समर्थक इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा.

दो नगर निगम में बांटने को लेकर बंटने लगे कांग्रेस नेता

सज्जन सिंंह वर्मा 
मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने किया विरोध, कहा नहीं बंटने देंगे इंदौर को

मध्यप्रदेश में भोपाल सहित चारों महानगरों को दो-दो नगर निगम में बांटने के कमलनाथ सरकार के फैसले को लेकर अब कांग्रेस नेता ही बंटते नजर आ रहे हैं. भोपाल नगर निगम सहित चारों महानगरों को बांटने का विरोध जहां भाजपा कर रही थी, वहीं अब इसके विरोध में कांग्रेस नेता और मंत्री भी सामने आ रहे हैं.
मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार ने पहले भोपाल को दो नगर निगमों में बांटने का प्रस्ताव लाई और फिर इसकी प्रक्रिया को गति दी, तभी से इसका विरोध भाजपा ने तेज कर दिया था. नगर निगम भोपाल की परिषद की बैठक में तो इसे लेकर विरोध हुआ और दो नगर निगमों में भोपाल को बांटने का विरोध भी किया गया साथ ही विरोध में प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया. इस दौरान  विरोध करने वालों में कांग्रेस के पार्षद भी नजर आए. इसके साथ ही भोपाल के अलावा इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर नगर निगमों को भी बांटने की मांग स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने उठाई, मगर अब भाजपा क ेसाथ-साथ कांग्रेस नेता ही इसका विरोध करते नजर आ रहे हैं. 
कांग्रेस नेताओं के अलावा राज्य के लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंंह वर्मा ने तो इंदौर नगर निगम को दो भागों में बांटने का खुलकर विरोध कर दिया है. उन्होंने साफ कहा कि वे इंदौर नगर निगम को बंटने नहीं देंगे. वर्मा इस दौरान अपनी ही पार्टी ने उन नेताओं के खिलाफ नजर आए जो इंदौर नगर निगम को दो भागों में बांटने की मांग कर रहे थे. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से ऐसी कोई मांग नहीं है, यह कुछ लोगों की मांग थी, यह कुछ लोगों द्वारा उछाला गया प्रश्न था. उन्होंने कहा कि इंदौर के लोग चाहते हैं कि इंदौर मेट्रोपालिटीन शहर बने, जहां पर केन्द्र सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता मिले. उन्होंने कहा कि इंदौर प्रदेश का एकमात्र ऐसा शहर है, जो मेट्रोपालिटिन शहर बनेगा. यही वजह है कि हम दो नगर निगम में शहर को बंटने नहीं देंगे. वर्मा ने कहा कि सरकार की भी ऐसी कोई मंशा नहीं है.
तन्खा भी कर चुके हैं मांग
राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने जबलपुर के साथ-साथ इंदौर नगर निगम को दो नगर निगम में बांटने की मांग पूर्व में की थी. उन्होंने इसका एक प्रस्ताव भी शासन को भेजा है.  तन्खा ने इसे लेकर भाजपा द्वारा किए जा रहे विरोध को गलत भी बताया था. राज्यसभा सांसद द्वारा की गई इस मांग पर राज्य सरकार के नगर विकास मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने कहा था कि अगर लोगों की मांग आती है तो सरकार इस पर विचार करेगी.

शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2019

झाबुआ उपचुनाव में मिली हार के बाद भाजपा में उभरे मतभेद

 विधायक ने प्रदेश अध्यक्ष से मांगा इस्तीफा, संगठन ने दिया नोटिस

मध्यप्रदेश के झाबुआ विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा को मिली करारी हार के बाद संगठन में मतभेद उभरने लगे हैं. सीधी के विधायक केदारनाथ शुक्ला ने प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह से इस्तीफे की मांग कर डाली, जिसे लेकर संगठन ने विधायक को नोटिस थमा कर जवाब मांगा है. 
मध्यप्रदेश में झाबुआ उपचुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद अब संगठन में मतभेद उभरने लगे हैं. हार के लिए सीधी विधानसभा के विधायक केदारनाथ शुक्ला ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह को जिम्मेदार ठहराया है. शुक्ला ने गुरुवार को चुनाव परिणाम आने के बाद बयान दिया कि राकेश सिंह सही तरीके से प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहे हैं. वे प्रदेश अध्यक्ष के पद पर रहने के लायक नहीं हैं, उनके कारण ही मध्यप्रदेश में भाजपा चौपट हो रही है.उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व से मांग करते हुए कहा कि राकेश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाया जाना चाहिए. मेरे पास बहुत सारे ऐसे कारण हैं जो राकेश सिंह को हटाने के लिए काफी है. उचित समय आने पर फोरम के सामने बात रखूंगा.
विधायक शुक्ला का बयान आने के बाद संगठन सक्रिय हुआ और देर रात को ही प्रेस कांफे्रंस कर शुक्ला को कारण बताओ नोटिस देने की जानकारी मीडिया में दी. सांसद विष्णु शर्मा ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि केंद्र ने विधायक शुक्ला के बयान को अनुशासनहीनता माना है और इसलिए उन्हें नोटिस दिया गया है. नोटिस का जवाब आने पर अगली कार्रवाई की जाएगी. सांसद शर्मा ने कहा है कि झाबुआ चुनाव में टिकट वितरण से लेकर पूरी रणनीति किसी एक व्यक्ति ने नहीं बल्कि पूरे संगठन ने तय की थी. ऐसी स्थिति में हार के लिए कोई एक व्यक्ति जिम्मेदार नहीं हो सकता. शर्मा ने लोकसभा चुनाव में मिली सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के नेतृत्व में ही 29 में से 28 सीटें जीती हैं.  भाजपा उपचुनाव पहली बार नहीं हारी है, इससे पहले हम सत्ता में रहते हुए भी उप चुनाव हारे हैं. पार्टी की जीत और हार में सामूहिक नेतृत्व होता है.
गौरतलब है कि भाजपा ने झाबुआ विधानसभा सीट से उप चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी. पार्टी के सभी बड़े दिग्गज नेता जीत का दावा कर रहे थे. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर पार्टी अध्यक्ष राकेश सिंह भी झाबुआ में जीत का दावा कर रहे थे. यही नहीं नतीजों से पहले तक भाजपा नेताओं का दावा था कि झाबुआ उप चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार गिर जाएगी, लेकिन अब नतीजे आने के बाद पार्टी नेता कमलनाथ सरकार पर सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाते दिखाई दिए.
गौरतलब है कि भाजपा ने झाबुआ विधानसभा सीट से उप चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी. पार्टी के सभी बड़े दिग्गज नेता जीत का दावा कर रहे थे. पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान से लेकर पार्टी अध्यक्ष राकेश सिंह भी झाबुआ में जीत का दावा कर रहे थे. यही नहीं नतीजों से पहले तक भाजपा नेताओं का दावा था कि झाबुआ उप चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार गिर जाएगी,  लेकिन अब नतीजे आने के बाद पार्टी नेता कमलनाथ सरकार पर सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाते नजर आ रहे हैं. 
न नोटिस की चिंता, न मागूंगा माफी
सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला ने अपने बयान को लेकर कहा कि उन्होंने जो बात कही है, वह सच है. उन्होंने पार्टी द्वारा दिए गए नोटिस की चिंता नहीं है और न ही वे अपने बयान को लेकर माफी मांगेंगे.  उन्होंने कहा कि मुझे इस बात का पता था कि मेरे इस बयान के बाद मुझे नोटिस मिलेगा, मगर ये मेरे अपने व्यक्तिगत विचार हैं.  उन्होंने जो भी कदम उठाया है, वह सोच-समझ कर ही उठाया है.
शिवराज को किया दिल्ली तलब
 झाबुआ उपचुनाव में हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दिल्ली तलब किया गया है. जानकारी के अनुसार, चुनाव नतीजों के बीच ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गुरुवार दोपहर इंदौर से दिल्ली के लिए रवाना हो गए. इंदौर में वो संभागीय बैठक के लिए पहुंचे थे लेकिन इस दौरान उन्हें दिल्ली पहुंचने का संदेश मिला था. इसके बाद वे बैठक छोड़कर दिल्ली रवाना हो गए थे. 
कांग्रेस नहीं भाजपा में चलती है अनुशासनहीनता
भाजपा  विधायक केदारनाथ शुक्ला के द्वारा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के ऊपर सवाल उठाए जाने पर मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि प्रदेश के एक पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने भी केदारनाथ शुक्ला के लिए कमेंट किया है, कि ये कांग्रेस नहीं है जहां अनुशासनहीनता चलेगी, लेकिन मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि कांग्रेस में अनुशासनहीनता नहीं चलती है. गौरतलब है कि शुक्ला के बयान आने के बाद उन पर की गई कार्रवाई को लेकर पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा था कि भाजपा में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कार्यकर्ता को अनुशासन में रहना होगा. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में इस तरह की अनुशासनहीनता चलती है, भाजपा में नहीं.
अभी और भी दिखाएंगे आईना
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि झाबुआ चुनाव परिणाम आते ही भाजपा में सिर फुटव्वल जारी है. उन्होंने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय, विधायक केदार शुक्ला, रघुनंदन शर्मा और वरिष्ठ नेता मेहराज जैन ने संगठन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को अभी और भी कई नेता ऐसे हैं जो आईना दिखाने की तैयारी में हैं.

उम्र दराज नेताओं की उपेक्षा से खफा हुए मेघराज

मेघराज जैन 

विधायक केदार शुक्ला द्वारा प्रदेश नेतृत्व पर उठाए जा रहे सवाल के बाद अब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी संगठन के खिलाफ मोर्चा खोला है. वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद मेघराज जैन ने पार्टी के उम्रदराज नेताओं की हो रही उपेक्षा और चुनाव लड़ने के अलावा पद के लिए उम्र की सीमा तय करने पर भी संगठन पर सवाल उठाए हैं. 
विधायक केदार शुक्ला द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद अब भाजपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य मेघराज जैन ने पार्टी के काम काज के तौर तरीके पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि भाजपा धीरे-धीरे अपने निष्ठावान और अनुभवी कार्यकर्ता को दल के कार्य से अलग कर रही है और  बाहर से आए चमक दमक खेल वाले खिलाड़ी नेताओं को आगे कर रही है. जैन ने सोशल मीडिया के जरिए  बुजुर्ग राजनेताओं को किनारे किए जाने लेकर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि  वर्षो जनता के बीच पार्टी का झंडा जिसने उठाया जनता भी उसी को पहचानती है और  जब वो घर बैठा है, तो वो भी उदासीन हो जाती है, कौन अपना है किसे निकालना है, यह वहीं जानता थी. जैन ने कहा कि  अब उम्र की सीमा बांध दी 75 वाले चुनाव नहीं लड़ेंगे. खैर  यह ठीक है नया खून आना चाहिए. दल में है भी और योग्य  भी है, पर 50 पार पार्टी के जिला अध्यक्ष नहीं,  35 पार मंडल अध्यक्ष नहीं. जैन ने  कहा कि राजनीति में बरसों टांग घसिटने के बाद एक  मौका मिलता है. अब सब बंद सोच लो, कब तक और क्यों करना काम. सत्ता छोडों संगठन में ही काम नहीं, तो अब केवल वोटर है और पार्टी. अगला आदेश ये भी आएगा की इस उमर के बाद वोट भी नहीं. 
संवदहीनता होनी चाहिए समाप्त
पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने भी विधायक केदारनाथ शुक्ला के बयान का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि हार की जिम्मेदारी तय होनी ही चाहिए. साथ ही हार की समीक्षा भी की जानी चाहिए. शर्मा ने कहा कि पार्टी में इन दिनों जो वरिष्ठ नेताओं के बीच संवादहीनता को देखा जा रहा है, से भी समाप्त किया जाना चाहिए. गौरतलब है  कि रघुनंदन शर्मा पहले भी संगठन को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. वे 2018 में विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद लगातार पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर भी बयानबाजी करते रहे हैं.

गुरुवार, 24 अक्टूबर 2019

बांध में पानी भरना रोका, नहीं तो करेंगे जलसत्याग्रह

आलोक अग्रवाल 

नर्मदा बचाओ आंदोलन ने औंकारेश्वर बांध में 193 मीटर से ऊपर पानी भरने के चलते गांवों में पानी भरने के विरोध में 25 अक्तूबर से जलसत्याग्रह करने की चेतावनी दी है. जलसत्याग्रह कामनखेड़ा ग्राम में किया जाएगा. आंदोलन ने सरकार को चेतावनी दी है कि 25 अक्तूबर तक बांध का जल स्तर वापस 193 मीटर कर दिया जाए, नहीं तो ग्रामीणों का विरोध तेज हो जाएगा.
नर्मदा बचाओ आंदोलन के आलोक अग्रवाल ने बताया कि औंकारेश्वर बांध में गत 21 अक्तूबर 193 मीटर से ऊपर पानी भरना शुरु कर दिया गया है. बांध में पानी भरने से अनेक गांव, घर, जमीने पानी में डूब गई हैं. औंकारेश्वर बांध प्रभावितों ने निर्णय लिया है कि यदि पानी का स्तर वापस पूर्व के जल स्तर तक नहीं लाया गया तो इस डूब के खिलाफ 25 अक्तूबर से खंडवा जिले के डूब क्षेत्र के गांव कामनखेड़ा में प्रभावित जल सत्याग्रह करेंगे. उन्होंने कहा कि नर्मदा बचाओ आंदोलन मांग करता है कि बांध में जल स्तर को वापस पूर्व के स्तर पर लाया जाए और विस्थापितों का सम्पूर्ण पुनर्वास होने के बाद ही बांध में पानी भरा जाए. 
अग्रवाल ने बताया कि बांध में 193 मीटर से ज्यादा पानी भरना शुरु करने से ग्राम घोघलगांव के एकमात्र रास्ता पानी में डूब गया है. देवास जिले के ग्राम कोथमीर, धाराजी, नयापुरा के अनेक आदिवासी परिवार और उनकी जमीने पानी से घिर गये है. पानी लगातार बढ़ाया जा रहा है. औंकारेश्वर बांध प्रभावितों ने निर्णय लिया है कि यदि 25 अक्तूबर की सुबह तक बांध में जल स्तर वापस पूर्व के स्तर तक नहीं लाया जाता है, तो डूब में आ रहे ग्राम कामनखेड़ा में 25 अक्तूबर से जल सत्याग्रह किया जाएगा. 
उल्लेखनीय है कि औंकारेश्वर बांध प्रभावितों की गत 12 साल की लड़ाई में 37 दिन के उपवास के साथ डूब ग्राम घोघलगांव में 2012 में 17 दिन और 2015 में 32 दिन का जल सत्याग्रह किया गया था. विस्थापितों का दृढ निश्चय है कि वे अपने अधिकार लेकर रहेंगे.
यह है मामला
 औंकारेश्वर बांध के प्रभावित गत 12 वर्षों से अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. गत 13 मार्च 2019 को सर्वोच्च न्यायालय ने ओंकारेश्वर बांध के प्रभावितों के पक्ष में निर्णय देते हुए राज्य सरकार के पूर्व में घोषित पैकेज पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की बढ़ोतरी की थी साथ ही प्रभावितों द्वारा जमा की गई राशि पर भी 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्णय लिया गया था. इस आदेश के प्रकाश में राज्य शासन द्वारा 31 जुलाई 2019 को विस्थापितों को पुनर्वास अधिकार देने का आदेश दिया था. अभी सैकड़ों प्रभावितों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार यह पैकेज दिया जाना बाकी है. अनेक आदिवासी परिवारों की घर-जमीन टापू बनने से इसका अधिग्रहण बाकी है. इसके साथ ही सैकड़ों प्रभावितों को घर प्लाट एवं अन्य पुनर्वास की सुविधाएं दिया जाना भी बाकी हैं. कानून स्पष्ट है कि सभी प्रभावितों का पुनर्वास डूब आने के 6 माह पहले होना जरूरी है अत: बिना पुनर्वास के पानी भरने की कोई भी कार्रवाई पूर्णत: गैरकानूनी होगी.

अयोध्या मसले के फैसले को लेकर पुलिस सर्तक और मुस्तैद रहे

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अयोध्या मसले पर आने वाले सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को लेकर पुलिस पूरी तरह सजग, सर्तक एवं मुस्तैद रहे. सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए फैसले के हर पहलू को ध्यान में रखकर अभी से पुख्ता तैयारियां की जाएं.
इस आशय के निर्देश पुलिस महानिदेशक विजय कुमार सिंह ने वीडियो कांफे्रंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों को दिए.      पुलिस महानिदेशक सिंह ने कहा सभी पुलिस अधीक्षक अपने-अपने जिलों में सांप्रदायिक लिहाज से संवेदनशील व वल्नरेबल इलाकों की सूची तैयार कर वहां एहतियात बतौर सुरक्षा के विशेष इंतजाम मुकम्मल करें. संवेदनशील व धार्मिक स्थलों समेत अन्य स्थानों को सीसीटीवी कैमरों के दायरे में लाएं. जरूरत के मुताबिक ड्रोन कैमरों से भी वीडियो रिकार्डिंग कराई जाए. साथ ही जनमानस में इस बात का व्यापक प्रचार-प्रसार करें कि आप सब कैमरे की निगरानी में है. पुलिस व्यवस्था इस प्रकार से लगाई जाए, जिससे हर जगह पुलिस की प्रभावी मौजूदगी दिखाई दे. साथ ही कहा कि सोशल मीडिया की प्रभावी निगरानी रखें और अफवाओं पर अंकुश लगाएं. उन्होंने मजबूत सूचना तंत्र विकसित करने के लिए भी कहा.
अयोध्या मसले के फैसले को ध्यान में रखकर पुलिस महानिदेशक ने रेलवे स्टेशनों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश  दिए. सिंह ने नगर एवं ग्राम रक्षा समितियों के पुनर्गठन की कार्यवाही करने की बात भी वीडियो कांफ्रेंसिंग में कही. पुलिस महानिदेशक ने कहा हालांकि पिछले तीन वर्ष की तुलना में इस साल सांप्रदायिक घटनाओं में लोकसभा चुनाव के बावजूद बड़ी कमी आई है. फिर भी पूरी सतर्कता बरती जाए.
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गुप्तवार्ता  एस.डब्ल्यू.नकवी ने कहा कि अयोध्या मसले को ध्यान में रखकर एहतियात बतौर 40 बिंदुओं की एडवाइजरी जारी की गई है. साथ ही समय-समय पर त्यौहारों के मद्देनजर भी एडवाइजरी जारी की जाती रहीं हैं. इन सभी एडवाइजरी का पालन किया जाए. हर जिले में स्थानीय परिस्थिति को ध्यान में रखकर सुरक्षा प्लान भी बनाएं. उन्होंने कहा सोशल मीडिया पर अपलोड व शेयर की जाने वाली सांप्रदायिक पोस्ट पर नजर रखें. फेक न्यूज एवं अफवाहों से बचने के लिए मीडिया का भी सहयोग लें. अफवाह सामने आने पर उसका अधिकारिक खंडन किया जाए. सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट व अफवाहें रोकने के लिए सायबर सेल का उपयोग करें. क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक अपने जोन में सायबर लेबोरेट्री स्थापित कराएं.

कमलनाथ सरकार ने जनता के साथ छल करने का काम किया



कर्ज माफी के नाम पर कांग्रेस सरकार ने जनता के साथ छल करने का काम किया है. बिजली बिल हाफ करने का सरकार ने वादा किया था, मगर हजारों के बिल आ रहे हैं. किसानों, गरीबों को सस्ती बिजली नहीं मिली तो सरकार की र्इंट से र्इंट बजा देंगे.
यह बात भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन जिले के नवनिर्मित भारतीय जनता पार्टी, कार्यालय के लोकार्पण कार्यक्रम में कही.   उन्होंने कहा कि कर्जमाफी के नाम पर प्रदेश सरकार किसानों को छल करने का काम कर रही है. गरीबों को संबल योजना में 200 रुपए  प्रतिमाह में बिजली मिलती थी कांग्रेस ने बिजली का बिल हाफ करने का वादा किया था, लेकिन अब हजारों के बिल आ रहे हैं. किसानों और गरीबों को सस्ती बिजली नहीं मिली, तो सरकार की र्इंट से र्इंट बजा देंगे. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कमलनाथ सरकार अजब सरकार है. कांग्रेस ने हर पंचायत में गौशाला खोलने का वादा किया था, वह तो पूरा किया नहीं. अब दिग्विजय सिंह सड़क पर बैठी गायों की फोटो ट्वीट कर दबाव बनाते हैं और अपना काम निकाल लेते हैं. कांग्रेस को गौ माता से प्रेम नहीं है. यह तो इनके लिए वोट का साधन हैं.
हमारी सारी योजनाएं बंद कर दीं
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भाजपा की सरकार ने गरीबों को 1 रूपए किलो गेहूं, चावल और नमक दिया. बच्चियों को साइकिलें दी. गरीब बच्चों को सही शिक्षा मिले, इसलिए हमने छात्रावास खोले, स्कालरशिप दी, किताबें दी, स्मार्टफोन, लेपटाप दिए. 10 महीनों में कमलनाथ सरकार ने प्रदेश की सारी जनहितैषी योजनाएं बंद कर दी. उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ से सवाल किया कि इन गरीब बच्चों ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था? भोले-भाले, मासूम बच्चों को शिक्षा से वंचित कर दिया, सारी योजनाएं बंद कर दीं.  
 पाप की लंका जलकर होगी खाक
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश की सेवा करने वाले भाजपा के कार्यकर्ता मध्यप्रदेश में फिर से भाजपा को जिताकर सरकार बनवाएंगे. आने वाले समय में कमलनाथ सरकार की पाप की लंका जलकर राख हो जाएगी और मध्यप्रदेश में फिर से रामराज्य आ जाएगा. 

भाजपा का किसान आक्रोश आंदोलन 4 को,जलाएंगे बिजली बिलों की होली


किसानों की समस्याओं को लेकर मध्यप्रदेश भाजपा कमलनाथ सरकार के खिलाफ 4 नवंबर को किसान आक्रोश आंदोलन करेगी. आंदोलन के दौरान बिजली बिलों की होली जलाई जाएगी.
यह  बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद राकेश सिंह ने मीडिया से चर्चा करते हुए कही. उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसान बदहाल हैं, लेकिन प्रदेश सरकार को कतई उनकी चिंता नहीं है. बारिश से बर्बाद हुई फसलों का तत्काल मुआवजा दिया जाना चाहिए था, नहीं मिला. बिजली का बिल आधा करने की बात कही थी, लेकिन किसानों के बिजली बिल बढ़कर आ रहे हैं. किसान कर्जमाफी के झूठे वादे का भी शिकार हुए हैं. इसलिए भारतीय जनता पार्टी ने यह तय किया है कि किसानों की उपेक्षा के खिलाफ पार्टी 4 नवंबर को किसान आक्रोश आंदोलन करेगी. आंदोलन में प्रदेश के किसान और पार्टी कार्यकर्ता एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे तथा बिजली के बढ़े हुए बिलों की होली जलाइ जाएगी.
 सिंह ने कहा कि प्रदेश में कमलनाथ सरकार लगातार किसानों की अनदेखी कर रही है. विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने किसानों से कर्जा माफ करने का वादा किया था, लेकिन कर्जमाफी नहीं हुई. मुख्यमंत्री ने भी यह स्वीकार किया है कि कजार्माफी नहीं हुई है. भीषण बारिश के कारण फसलों को नुकसान हुआ, लेकिन किसानों की सुध लेने के लिए मुख्यमंत्री या सरकार का कोई मंत्री उनके खेतों तक नहीं पहुंचे. ना सर्वे हुआ, न मुआवजा मिला. बिजली के बिल भी अनाप-शनाप आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसानों की इस बदहाली और सरकारी उपेक्षा के प्रति आक्रोश व्यक्त करने के लिए 4 नवंबर को प्रदेश के प्रत्येक जिले में किसान आक्रोश आंदोलन किया जायेगा.
पद नाम बदलना सरकार की शिगूफेबाजी
सिंह ने प्रदेश सरकार द्वारा कलेक्टर पद का नाम बदलने के लिए की जा रही कवायद पर कहा कि यह सब सरकार की शिगूफेबाजी है. कभी यह कलेक्टर का पदनाम बदलते हैं,  कभी कलेक्टर बदलते हैं. इन्होंने जनहित की सारी योजनाएं बंद कर दी हैं. जो घोषणाएं चुनाव के पहले की थीं, उन्हें पूरा करना चाहिए. बेरोजगारों को भत्ता देना चाहिए. कर्मचारियों को केन्द्र सरकार के समान 5 प्रतिशत डीए दिया जाना चाहिए. लेकिन इस सरकार का प्रदेश के विकास से और जनता से कुछ भी लेना देना नहीं है.

बुधवार, 23 अक्टूबर 2019

मध्यप्रदेश सरकार जल्द बदलेगी कलेक्टर का पदनाम

पी.सी.शर्मा 
 दीपावली पर गरीबों के घर जाएगी सरकार, बांटेगी मिठाई

मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस बात के संकेत दिए थे कि सरकार जल्द ही कलेक्टर, पदनाम बदलेगी. इसके लिए आईएएस अधिकारियों से सुझाव भी मांगे गए थे. अब सरकार जल्द ही नाम परिवर्तन करने वाली है.
यह जानकारी आज राज्य के जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने मीडिया से चर्चा करते हुए दी. शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री कमलनाथ की मंशा के अनुसार यह पदनाम बदला जाएगा. शर्मा ने कहा कि कलेक्टर अंग्रेजों के जमाने का नाम है, इसलिए  कमलनाथ सरकार इस नाम को बदलना चाहती है, नाम बदलने के लिए सरकार विचार कर रही है, जल्द ही इस पर फैसला किया जाएगा.  उन्होंने कहा अंग्रेजों के समय जो राजस्व कलेक्टर करते थे उन्हें कलेक्टर कहा जाता था. अब सरकार इस में परिवर्तन करने जा रही है. नए नाम अच्छा होगा इसके लिए सुझाव लिए गए हैं. सरकार इस संबंध में जल्द ही फैसला करेगी और कलेक्टरों का नया पदनाम रखा जाएगा. कलेक्टर का पदनाम बदलने के पीछे सरकार का तर्क है कि यह नाम अंग्रेजों के जमाने का है. इसमें अब बदलाव की जरूरत है, नया नाम आधुनिक होना चाहिए इस पर विचार किया जा रहा है.  
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक दिन पहले ही मंगलवार को एक कार्यक्रम में यह कहा कि मध्यप्रदेश को विकसित करना है तो सोच बदलनी पड़ेगी. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि पिछले 50 साल से एक ही ढर्रा चल रहा है सरकारों के कामकाज में भी कोई बदलाव नहीं है और इसी के बाद अब सरकार सक्रिय हुई है.
दीपावली पर गरीब के घर पहुंचेगी सरकार
जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने कहा कि इस बार सरकार ने फैसला किया है कि दीपावली  पर गरीब के घर पहुंचेगी और गरीबों में कपड़े और मिठाई का वितरण किया जाएगा. शर्मा ने कहा कि दीपावली पर्व पर सरकार गरीबों और असहाय लोगों के घर जाएगी, उन्हें कपड़े और मिठाई दी जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने सबके साथ मिलकर दीपावली पर्व मनाने का फैसला लिया, ताकि दीप पर्व पर किसी करीब के घर सन्नाटा न फैला रहे. उन्होंने कहा कि सरकार यह कार्य आनंद विभाग के द्वारा करने जा रही है. उन्होंने बताया कि आनंद विभाग प्रदेश में दिवाली पर जाय आफ गिविंग अभियान चलाएगा. शर्मा ने लोगों से अपील भी की कि लोग मिट्टी के दीपक अपने घर खरीद कर लाएं. शर्मा ने कहा कि राज्य में चित्रकूट में दीपावली पर्व पर मेला लगता है, सरकार इस मेले को जल्द ही राज्य स्तरीय मेला घोषित करेगी. इस संबंध में वहां के विधायक निलांशु चतुर्वेदी से उनकी चर्चा हुई है. चतुर्वेदी इस मांग को लंबे समय से उठा रहे थे. सरकार ने उनकी मांग को मानते हुए यह फैसला लिया है.

शिवराज सिंह से मिले दिग्विजय के भाई लक्ष्मण, अटकलें हुई तेज


अपनी ही सरकार से नाराज चल रहे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के  विधायक भाई लक्ष्मण सिंह ने आज पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से उनके निवास पर हुई मुलाकात की. दोनों नेताओं की इस मुलाकात के बाद सियासी अटकलें तेज हो गई. हालांकि लक्ष्मण सिंह ने इस मुलाकात को सौजन्य भेंट बताया है.
गुना जिले के चाचौड़ा विधानसभा सीट से विधायक लक्ष्मण सिंंह ने मंगलवार को चाचौड़ा को जिला बनाने की मांग को लेकर बड़े भाई और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के निवास पर धरना दिया था. करीब 5 घंटे से ज्यादा चला यह धरना दिग्विजय सिंह से चर्चा के बाद खत्म हो गया था. इसके बाद आज बुधवार की सुबह फिर से लक्ष्मण सिंंह चर्चा में आ गए. आज सुबह वे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह के निवास पर पहुंचे और उनके बंद कमरे में मुलाकात की. इस दौरान उनके साथ कोई नहीं था. दोनों नेताओं की इस मुलाकात के बाद एक बार फिर सियासी अटकलें तेज हो गई हैं. हालांकि लक्ष्मण सिंह ने इस मुलाकात को सौजन्य भेंट करार दिया है. उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह हमारे विधानसभा के साथी हैं, इसलिए इस मुलाकात को कुछ और समझने की जरुरत नहीं है.
यहां उल्लेखनीय है कि लक्ष्मण सिंह कई बार अपनी ही सरकार के खिलाफ हमला बोल चुके हैं. इतना ही नहीं हाल ही में उन्होंने किसान कर्ज माफी को लेकर तो पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से किसानों से माफी मांगने की बात तक कह डाली थी. इन दिनों भी उनके पार्टी से नाराज होकर चलने की खबरें आए दिन आ रही हैं. कांग्रेस की सरकार बनने के बाद यह माना जा रहा था कि मंत्रिमंडल में लक्ष्मण सिंह को स्थान मिलेगा, मगर ऐसा नहीं हुआ. इसके बाद से वे लगातार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते रहे हैं. इतना ही नहीं लक्ष्मण सिंह की पत्नी भी कई अवसरों पर सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर निशाना साधती रही है. वे भी सरकार के खिलाफ सवाल खड़े करती रही हैं.

आपत्तिजनक बयान देकर फंसे पूर्व विधायक, प्रकरण हुआ दर्ज

सुरेन्द्र नाथ सिंह 

भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह के लिए उनका बयान मुसीबत बन गया. सिंह द्वारा लव जिहाद पर दिए बयान को लेकर राजधानी के हबीबगंज थाने में प्रकरण दर्ज किया गया है. 
भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह द्वारा मंगलवार को संस्था गौरवी के कार्यालय पहुंचकर लव जिहाद को लेकर दिए आपत्तिजनक बयान के बाद हबीबगंज थाना पुलिस ने उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है. पूर्व विधायक ने अपनी बेटी को लेकर मीडिया से बातचीत करते हुए आपत्तिजनक बयान दिया था, जिसे पुलिस ने संज्ञान में लेते हुए मामला दर्ज किया है. हबीबगंज पुलिस के अनुसार कमला नगर थाने में पूर्व विधायक सुरेंद्र नाथ सिंह ने 16 अक्तूबर को अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी. उनकी बेटी को पुलिस के द्वारा ढूंढ कर भोपाल लाया गया, इसके बाद जेपी अस्पताल परिसर में गौरवी सेंटर काउंसलिंग के लिए भेजा गया था. अपनी बेटी से मिलने के बाद सुरेंद्रनाथ सिंह ने अस्पताल परिसर में ही पत्रकारों से बातचीत के दौरान कई बार आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया.
गौरतलब है कि पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह ने लवजिहाद, धर्म परिवर्तन और आतंकी संगठन के बारे में बोलते हुए आपत्तिजनक बयान दिया था. सिंह का इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से लगातार प्रसारित किया भी किया गया. पुलिस ने पूर्व विधायक के इस बयान पर भारतीय दंड विधान की धारा 153 (क) और विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता, घृणा, वैमनस्य पैदा या सप्रवर्तन करने वाला बयान दिया है इसलिए भारतीय दंड विधान की धारा 505 (2) के तहत दंडनीय अपराध प्रथम दृष्टया पाया गया है, इसलिए उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया है.
यह बयान दिया था पूर्व विधायक ने
बेटी भारती के मुद्दे को लेकर पूर्व विधायक सुरेंद्र नाथ का बड़ा बयान सामने आया था. पूर्व विधायक सुरेंद्र नाथ ने बेटी भारती के साथ लव जिहाद का आरोप लगाया था. पूर्व विधायक सुरेंद्र नाथ ने कहा था बेटी का धर्म परिवर्तन करने की कोशिश की जा रही है. लव जिहाद का मतलब धर्म परिवर्तन होता है. ऐसा हुआ तो कत्ले आम होगा. पूर्व विधायक सुरेंद्र नाथ आरोप लगाते हुए कहा कि बेटी को नशे का आदि बनाया गया है. सुरेंद्र नाथ ने शासन को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि लव जिहाद का प्रयास किया तो वो मुझे नहीं जानते.

समाज के हर वर्ग को पार्टी संगठन से जोड़ें : चौहान

संगठन चुनाव: पूर्व मुख्यमंत्री ने किया प्रमुख कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन

लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली जीत में समाज के सभी वर्गों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. आज समाज का हर वर्ग भारतीय जनता पार्टी से जुड़ने के लिए आतुर है. बूथ स्तर तक समाज के सभी वर्ग पार्टी से जुड़े, इस बात की फिक्र हम कार्यकर्ताओं को करनी है. जिन समाजों का हमें कम समर्थन मिला है, संगठन पर्व के माध्यम से उन समाजों को जोड़ेंगे, तो संगठन और मजबूत होगा. 
यह बात पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराजसिंह चौहान ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में संगठन चुनाव को लेकर आयोजित की गई भोपाल एवं होशंगाबाद संभागों के प्रमुख कार्यकर्ताओं की बैठक में कही. बैठक में प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत, प्रदेश संगठन चुनाव अधिकारी हेमंत खण्डेलवाल, संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी विशेष रूप से उपस्थित थे. चौहान ने कहा कि हमारा आचरण और व्यवहार कार्यकर्ताआें को प्रेरित करता है, इसलिए मंडल चुनाव में निष्पक्षता के साथ निकलें और तेरा मेरा के भाव से दूर रहें. उन्होंने कहा कि मंडल में निवास करने वाले प्रमुख कार्यकर्ताओं से चर्चा कर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचें. मंडल इकाई में हर समाज की भारतीय जनता पार्टी में भागीदारी हो, इस बात पर विशेष ध्यान दें.  चौहान ने कहा कि मंडल अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी के काम की धुरी है. इसलिए ऐसे कार्यकर्ताओं का विशेष ध्यान रखें, जो मेहनती हो, दौड़- भाग करने वाला, जो समन्वय कर सके और जिसमें अपार नेतृत्व क्षमता हो. चौहान ने कहा कि नए कार्यकतार्ओं को मौका मिलेगा तो नया नेतृत्व उभरेगा, जितना नेतृत्व उभरकर आयेगा उतना ही पार्टी को फायदा होगा.
बैठक में पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष एवं संगठन चुनाव के प्रदेश प्रभारी  हेमंत खंडेलवाल ने रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि पूरे भारत में सबसे अधिक मतदान केन्द्रों का गठन मध्यप्रदेश में ही हुआ है. अभी तक मध्यप्रदेश में 94 प्रतिशत गठन पूरा हो चुका है. बैठक में भोपाल एवं होशंगाबाद संभाग के सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष, चुनाव प्रभारी, सह प्रभारी एवं प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित थे.
मंडल अध्यक्ष संगठन की महत्वपूर्ण कड़ी
प्रदेश संगठन महामंत्री  सुहास भगत ने कहा कि समाज ने आगे बढ़कर लोकसभा चुनाव लड़ा. समाज ने हमें अदभुत जीत दी है. इस जीत में सभी वर्गो का समर्थन मिला है. इस समर्थन का प्रतिबिंब संगठन पर्व में हो, सदस्यता में हो और स्थानीय प्राथमिक इकाइयों में दिखाई दे, इसका विशेष तौर पर ध्यान रखें. उन्होंने कहा कि सर्वस्पर्शी और सर्वव्यापी भाजपा के मंत्र को लेकर हम बूथ, मंडल और जिला केन्द्रों तक इकाइयों के गठन में इस बात का विशेष ध्यान दें. उन्होंने कहा कि मंडल अध्यक्ष और स्थानीय इकाइयों के गठन में कहीं कोई बात सामने आती है, तो उन्हें संवाद के माध्यम से हल करें. 

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2019

विधायक लक्ष्मण सिंह ने भाई दिग्विजय सिंह के निवास पर दिया धरना

लक्ष्मण सिंह

मध्यप्रदेश के गुना जिले की चाचौड़ा तहसील को जिला बनाने की मांग को लेकर मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के राजधानी भोपाल स्थित बंगले पर सिंह के विधायक भाई लक्ष्मण सिंह ने अपने समर्थकों के साथ धरना दिया. इस दौरान लक्ष्मण सिंह समर्थकों ने प्रदर्शन भी किया. 
मध्यप्रदेश के चाचौड़ा से कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने आज अपने समर्थकों के साथ बड़े भाई दिग्विजय सिंह के भोपाल स्थित शासकीय आवास पर चाचौड़ा को जिला बनाने की मांग को लेकर धरना दिया. धरने पर बैठे लक्ष्मण सिंह ने कहा कि हम तो बड़े भाई से समय लेने के लिए आए हैं. वे करीब 8 साल से चाचौड़ा नहीं गए हैं. उन्होंने कहा कि चाचौड़ा को प्रदेश का 53 वां जिला बनाए जाने की घोषणा खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ 26 जुलाई 2019 को  कर चुके हैंं, हम तो यहां पर भाई से स्वागत कार्यक्रम में शामिल होने के लिए समय देने की मांग करने आए हैं. हम यही चाहते हैं कि भाई दिग्विजय सिंह स्वागत कार्यक्रम की तिथि दे दें. 
दरअसल, चाचौड़ा तहसील को जिला बनाने की मांग पर कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह अड़े हुए हैं. उनके साथ चाचौड़ा से सैकड़ों कार्यकर्ता और विधानसभा क्षेत्र के व्यापारी, किसान और समर्थक पहुंचे हैं. बता दें विधानसभा चुनाव से पहले लक्ष्मण सिंह ने चाचौड़ा में खुले मंच से इस बात ऐलान किया था कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद चाचौड़ा को जिला बनाया जाएगा. अब सरकार को एक साल पूरा होने को है लेकिन अभी तक इस बारे में कोई प्रयास शुरू नहीं किए गए हैं. मजे की बात यह है कि लक्ष्मण सिंह खुद कांग्रेस के विधायक हैं और उनकी सरकार में उनकी ही बात नहीं सुनी जा रही है.
दिग्विजय ने  नहीं की बात
लक्ष्मण सिंह जब समर्थकों के साथ दिग्विजय सिंह के शासकीय आवास पर पहुंचे थे, तब दिग्विजय सिंह घर पर  नहीं थे. वे जब घर पर लौटे तब धरने पर बैठे भाई लक्ष्मण सिंह से बात भी नहीं की और सीधे घर के अंदर चले गए. मीडिया से उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि लक्ष्मण सिंंह उनके भाई हैं और वे यहां आ सकते हैं. चाचौड़ा को जिला बनाने की मांग पर वे मौन रहे.

लव जिहाद करने वाले मुझे नहीं जानते, होगा कत्लेआम

सुरेन्द्र नाथ सिंह 

भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह ने आज खुली चुनौती देते हुए कहा कि लव जिहाद फैलाया जा रहा है, मेरी बेटी के धर्म परिवर्तन की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि लोग मुझे नहीं जानते, अगर ऐसा होगा तो कत्लेआम हो जाएगा. सिंह की बेटी को राजधानी पुलिस महाराष्ट्र के जलगांव से भोपाल लेकर आई, उसका मेडिकल कराने के बाद गौरवी संस्था में काउंसलिंग भी की गई.
पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह की बेटी भारती सिंह को पुलिस महाराष्ट्र के जलगांव के निकट रावेर से भोपाल लेकर आई. यहां पर उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया और फिर काउंसलिंग की गई. इसके बाद उसे गौरवी संस्था में रखा गया. यह जानकारी मिलने पर पूर्व विधायक वहां पहुंचे और उनके समर्थकों ने हंगामा भी किया. सिंह ने यहां पर मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि लव जिहाद फैलाया जा रहा है, मेरी बेटी का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने लव जिहाद को रोकने की बात भी कही है. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि भोपाल के हुक्का लाउंज में ड्रग्स परोसी जा रही है और युवक-युवतियों को नशे का आदी बनाया जा रहा है. सिंह ने कहा कि धर्मपरिवर्तन हिंदुस्तान में नहीं चलेगा. उन्होंने कहा कि मेरी बेटी का धर्मपरिवर्तन कराने का दम इस धरती पर किसी में नहीं है, जो भी उसके आड़े आएगा, उसका संपूर्ण विनाश होगा.  उन्होंने कहा कि मेरी बेटी का पिछले चार साल से इलाज चल रहा है. सबसे पहले उसका इलाज जरूरी है, उसके मानसिक संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश की गई है, इसकी जानकारी है और वे लोग बचेंगे नहीं, क्योंकि वह लोग सुरेंद्र नाथ सिंह को नहीं जानते.
बेटी ने लगाया था परिजनों पर अत्याचार का आरोप
राजधानी भोपाल मध्य विधानसभा सीट के पूर्व विधायक सुरेंद्र नाथ सिंह की बेटी ने पिछले दिनों उच्च न्यायालय में परिवार वालों पर जबरदस्ती शादी के लिए अत्याचार का आरोप लगाया था. बेटी का आरोप है कि परिवार उसकी शादी एक विधायक के बेटे से करना चाहता है, इसके बाद पिता सुरेंद्र नाथ सिंह ने बेटी के आरोपों को सिरे से खारिज किया था और उसे डिप्रेशन का शिकार बताया था. 
पिता ने लिखवाई थी गुमशुदगी की रिपोर्ट
बेटी के घर से गायब होने पर भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्र नाथ सिंह ने कमला नगर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई थी. एफआईआर में उन्होंने बताया था कि उनकी 28 वर्षीय बेटी भारती सिंह लापता है, वह मानसिक रुप से अस्वस्थ है. रिपोर्ट दर्ज करने के बाद भारती ने फेसबुक के जरिए एक वीडियो बनाया और वायरल किया था, जिसमें परिवार द्वारा प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे, जिसके बाद पुलिस महाराष्ट्र से भारती को वापस भोपाल लाई और पूछताछ की है.

सरकार में मिलावट के लिए सिंधिया करें युद्ध, हम उनके साथ

सिंधिया के फिर उठाए सरकार पर सवाल, कहा कार्रवाई के बजाय दोषियों को छोड़ा जा रहा है
ज्योतिरादित्य सिंधिया 


पूर्व सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बार फिर कमलनाथ सरकार को घेरा है. मिलावट के लिए सरकार द्वारा चलाए गए अभियान शुद्ध के लिए युद्ध को लेकर उन्होंने प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई पर संदेह जताया और कहा कि मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. वहीं सिंधिया के इस बयान के आने के बाद राज्य के पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डा. नरोत्तम मिश्रा ने सिंधिया का समर्थन किया और कहा कि वे मिलावट के इस अभियान के लिए सरकार के खिलाफ युद्ध करें, हम उनके साथ हैं.
पूर्व सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बार फिर मध्यप्रदेश की कमलनाथ  सरकार को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है. सोमवार को ग्वालियर में फूड टेस्टिंग लैब के भूमिपूजन पर पहुंचे सिंधिया का कहना है कि मिलावट रोकने के लिए छापे मारे जाते हैं, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई होने के बजाय उन्हें छोड़ दिया जाता है.  सिंधिया ने कहा कि मिलावटखोरों के खिलाफ सरकार सख्ती नहीं कर रही है उन्हें छोड़ा जा रहा है. सिंधिया ने स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट की ओर इशारा करके कहा कि सिस्टम को पटरी पर लाने के लिए आपके आदेश के बगैर किसी मिलावटखोर को छोड़ा नहीं जाना चाहिए.   सिंधिया ने कहा कि मैं प्रदेश में कई कहानियां सुन रहा हूं. मिलावट को रोकने के लिए छापा पड़ता है, लेकिन उन्हें छोड़ दिया जाता है. उन्होंने स्वास्थ मंत्री तुलसी सिलावट को नसीहत देते हुए कहा कि मंत्रीजी आपसे निवेदन है कि मिलावट पर सख्त कार्रवाई हो मिलावटखोरों को जेल की सलाखों में पहुंचाया जाए. आप खुद भोपाल में बैठकर मानिटरिंग कीजिए, किसी को बख्शा ना जाए और आपके आदेश के बिना केस क्लोज नहीं होना चाहिए.
नरोत्तम मिश्रा 
पूर्व मंत्री ने दिया सिंधिया का साथ
पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सिंधिया के इस बयान के बाद उनका साथ देते हुए कहा कि सरकार में मिलावट के लिए सिंधिया को युद्ध करना चाहिए. हम उनके साथ हैं. मिश्रा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि मैं सिंधियाजी से कहूंगा कि सरकार में मिलावट के लिए वे युद्ध लड़ें. आज तक मुख्यमंत्री कमलनाथ ने स्वरोजगार विवाह योजना कोई आंकड़ा नहीं दिया.एक भी बेरोजगार नौजवान को बेरोजगारी भत्ता नहीं दिया. जब से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है, कू्ररता और अपराध की पराकाष्ठा हो रही है. हमने अपनी सरकार में महिलाओं सुरक्षा के लिए योजनाएं चलाई थी, अपराध कम हुए थे, लेकिन नौ माह की कमलनाथ सरकार में अपराध बढ़े हैं. मिश्रा ने दिल्ली में मुख्यमंत्री कमलनाथ की केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि राज्य सरकार ने अब तक अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए क्या किया और कितनी सहायता दी. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में किसानों के साथ अन्याय हो रहा है.
मंत्री को निर्देश देने का अधिकार मुख्यमंत्री या फिर हारे सांसद को
लोकेन्द्र पाराशर 

पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान पर भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी लोकेन्द्र पाराशर ने कटाक्ष किया है. मिलावटखोरी को लेकर कार्रवाई नहीं होने के सिंधिया के बयान पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि सिंधिया की स्थिति ‘अरे दीवानों... मुझे पहचानो...मैं हूं कौन’ की तरह हो गई है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस में सिंधिया को तबज्जो नहीं मिल रही है. उन्होंने कहा कि सिंधिया चुनाव हारने के बाद वजूद तलाशने की कोशिश में लगे हैं. उन्होंने सिंधियासे  पूछा कि मंत्री को निर्देश देने का अधिकार मुख्यमंत्री को है या हारे हुए सांसद को?