रविवार, 20 अक्टूबर 2019

बांध में पानी भरा तो करेंगे जल सत्याग्रह


नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं औंकारेश्वर बांध में पानी भरने पर जल सत्याग्रह करने की चेतावनी दी है. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण को दी चेतावनी में कहा है कि   प्राधिकरण अपना आदेश वापस ले, नहीं तो नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा जल सत्याग्रह किया जाएगा.
नर्मदा बचाओ आंदोलन के आलोक अग्रवाल ने बताया कि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा 21 अक्तूबर से औंकारेश्वर बांध में 196.6 मीटिर तक पानी भरने के आदेश दिए गए हैं. डूब प्रभावित क्षेत्रों में तहसीलदारों ने प्राधिकरण के आदेश के पर चेतावनी भी दे दी है, जगर प्रभावित परिवारों का पुनर्वास अब तक नहीं हुआ है. नर्मदा आंदोलन चेतावनी दी है कि बिना पुनर्वास बांध में पानी भरने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध किया जाएगा. यदि बांध में पानी भरा जाता है तो डूब क्षेत्र में फिर से एक बार जल सत्याग्रह प्रारंभ किया जाएगा और अपने संपूर्ण अधिकार मिलने तक लोग संघर्ष जारी रखेंगे. आंदोलन से जुड़े लोगों ने मांग की हे कि सरकार तत्काल विस्थापितों के सभी पुनर्वास के अधिकारों को प्रदान करें और विस्थापितों के संपूर्ण पुनर्वास के बाद ही बांध में पानी भरने की कोई कार्रवाई की जाए.
यह है मामला
औंकारेश्वर बांध के प्रभावित गत 12 वर्षों से अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं गत 13 मार्च  को सर्वोच्च न्यायालय ने औंकारेश्वर बांध के प्रभावितों के पक्ष में निर्णय देते हुए राज्य सरकार के पूर्व में घोषित पैकेज पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की बढ़ोतरी की थी साथ ही प्रभावितों द्वारा जमा की गई राशि पर भी 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्णय लिया गया था. इस आदेश के प्रकाश में राज्य शासन द्वारा 31 जुलाई को विस्थापितों को पुनर्वास अधिकार देने का आदेश दिया था. अभी सैकड़ों प्रभावितों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार यह पैकेज दिया जाना बाकी है. इसके साथ ही सैकड़ों प्रभावितों को घर प्लाट एवं अन्य पुनर्वास की सुविधाएं दिया जाना भी बाकी हैं. कानून स्पष्ट है कि सभी प्रभावितों का पुनर्वास डूब आने के 6 माह पहले होना जरूरी है अत: बिना पुनर्वास के पानी भरने की कोई भी कार्रवाई पूर्णत: गैरकानूनी होगी.

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