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| सज्जन सिंंह वर्मा |
मध्यप्रदेश में भोपाल सहित चारों महानगरों को दो-दो नगर निगम में बांटने के कमलनाथ सरकार के फैसले को लेकर अब कांग्रेस नेता ही बंटते नजर आ रहे हैं. भोपाल नगर निगम सहित चारों महानगरों को बांटने का विरोध जहां भाजपा कर रही थी, वहीं अब इसके विरोध में कांग्रेस नेता और मंत्री भी सामने आ रहे हैं.
मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार ने पहले भोपाल को दो नगर निगमों में बांटने का प्रस्ताव लाई और फिर इसकी प्रक्रिया को गति दी, तभी से इसका विरोध भाजपा ने तेज कर दिया था. नगर निगम भोपाल की परिषद की बैठक में तो इसे लेकर विरोध हुआ और दो नगर निगमों में भोपाल को बांटने का विरोध भी किया गया साथ ही विरोध में प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया. इस दौरान विरोध करने वालों में कांग्रेस के पार्षद भी नजर आए. इसके साथ ही भोपाल के अलावा इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर नगर निगमों को भी बांटने की मांग स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने उठाई, मगर अब भाजपा क ेसाथ-साथ कांग्रेस नेता ही इसका विरोध करते नजर आ रहे हैं.
कांग्रेस नेताओं के अलावा राज्य के लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंंह वर्मा ने तो इंदौर नगर निगम को दो भागों में बांटने का खुलकर विरोध कर दिया है. उन्होंने साफ कहा कि वे इंदौर नगर निगम को बंटने नहीं देंगे. वर्मा इस दौरान अपनी ही पार्टी ने उन नेताओं के खिलाफ नजर आए जो इंदौर नगर निगम को दो भागों में बांटने की मांग कर रहे थे. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से ऐसी कोई मांग नहीं है, यह कुछ लोगों की मांग थी, यह कुछ लोगों द्वारा उछाला गया प्रश्न था. उन्होंने कहा कि इंदौर के लोग चाहते हैं कि इंदौर मेट्रोपालिटीन शहर बने, जहां पर केन्द्र सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता मिले. उन्होंने कहा कि इंदौर प्रदेश का एकमात्र ऐसा शहर है, जो मेट्रोपालिटिन शहर बनेगा. यही वजह है कि हम दो नगर निगम में शहर को बंटने नहीं देंगे. वर्मा ने कहा कि सरकार की भी ऐसी कोई मंशा नहीं है.
तन्खा भी कर चुके हैं मांग
राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने जबलपुर के साथ-साथ इंदौर नगर निगम को दो नगर निगम में बांटने की मांग पूर्व में की थी. उन्होंने इसका एक प्रस्ताव भी शासन को भेजा है. तन्खा ने इसे लेकर भाजपा द्वारा किए जा रहे विरोध को गलत भी बताया था. राज्यसभा सांसद द्वारा की गई इस मांग पर राज्य सरकार के नगर विकास मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने कहा था कि अगर लोगों की मांग आती है तो सरकार इस पर विचार करेगी.

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