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| आलोक अग्रवाल |
नर्मदा बचाओ आंदोलन ने औंकारेश्वर बांध में 193 मीटर से ऊपर पानी भरने के चलते गांवों में पानी भरने के विरोध में 25 अक्तूबर से जलसत्याग्रह करने की चेतावनी दी है. जलसत्याग्रह कामनखेड़ा ग्राम में किया जाएगा. आंदोलन ने सरकार को चेतावनी दी है कि 25 अक्तूबर तक बांध का जल स्तर वापस 193 मीटर कर दिया जाए, नहीं तो ग्रामीणों का विरोध तेज हो जाएगा.
नर्मदा बचाओ आंदोलन के आलोक अग्रवाल ने बताया कि औंकारेश्वर बांध में गत 21 अक्तूबर 193 मीटर से ऊपर पानी भरना शुरु कर दिया गया है. बांध में पानी भरने से अनेक गांव, घर, जमीने पानी में डूब गई हैं. औंकारेश्वर बांध प्रभावितों ने निर्णय लिया है कि यदि पानी का स्तर वापस पूर्व के जल स्तर तक नहीं लाया गया तो इस डूब के खिलाफ 25 अक्तूबर से खंडवा जिले के डूब क्षेत्र के गांव कामनखेड़ा में प्रभावित जल सत्याग्रह करेंगे. उन्होंने कहा कि नर्मदा बचाओ आंदोलन मांग करता है कि बांध में जल स्तर को वापस पूर्व के स्तर पर लाया जाए और विस्थापितों का सम्पूर्ण पुनर्वास होने के बाद ही बांध में पानी भरा जाए.
अग्रवाल ने बताया कि बांध में 193 मीटर से ज्यादा पानी भरना शुरु करने से ग्राम घोघलगांव के एकमात्र रास्ता पानी में डूब गया है. देवास जिले के ग्राम कोथमीर, धाराजी, नयापुरा के अनेक आदिवासी परिवार और उनकी जमीने पानी से घिर गये है. पानी लगातार बढ़ाया जा रहा है. औंकारेश्वर बांध प्रभावितों ने निर्णय लिया है कि यदि 25 अक्तूबर की सुबह तक बांध में जल स्तर वापस पूर्व के स्तर तक नहीं लाया जाता है, तो डूब में आ रहे ग्राम कामनखेड़ा में 25 अक्तूबर से जल सत्याग्रह किया जाएगा.
उल्लेखनीय है कि औंकारेश्वर बांध प्रभावितों की गत 12 साल की लड़ाई में 37 दिन के उपवास के साथ डूब ग्राम घोघलगांव में 2012 में 17 दिन और 2015 में 32 दिन का जल सत्याग्रह किया गया था. विस्थापितों का दृढ निश्चय है कि वे अपने अधिकार लेकर रहेंगे.
यह है मामला
औंकारेश्वर बांध के प्रभावित गत 12 वर्षों से अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. गत 13 मार्च 2019 को सर्वोच्च न्यायालय ने ओंकारेश्वर बांध के प्रभावितों के पक्ष में निर्णय देते हुए राज्य सरकार के पूर्व में घोषित पैकेज पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की बढ़ोतरी की थी साथ ही प्रभावितों द्वारा जमा की गई राशि पर भी 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्णय लिया गया था. इस आदेश के प्रकाश में राज्य शासन द्वारा 31 जुलाई 2019 को विस्थापितों को पुनर्वास अधिकार देने का आदेश दिया था. अभी सैकड़ों प्रभावितों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार यह पैकेज दिया जाना बाकी है. अनेक आदिवासी परिवारों की घर-जमीन टापू बनने से इसका अधिग्रहण बाकी है. इसके साथ ही सैकड़ों प्रभावितों को घर प्लाट एवं अन्य पुनर्वास की सुविधाएं दिया जाना भी बाकी हैं. कानून स्पष्ट है कि सभी प्रभावितों का पुनर्वास डूब आने के 6 माह पहले होना जरूरी है अत: बिना पुनर्वास के पानी भरने की कोई भी कार्रवाई पूर्णत: गैरकानूनी होगी.

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