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| मेघराज जैन |
विधायक केदार शुक्ला द्वारा प्रदेश नेतृत्व पर उठाए जा रहे सवाल के बाद अब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी संगठन के खिलाफ मोर्चा खोला है. वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद मेघराज जैन ने पार्टी के उम्रदराज नेताओं की हो रही उपेक्षा और चुनाव लड़ने के अलावा पद के लिए उम्र की सीमा तय करने पर भी संगठन पर सवाल उठाए हैं.
विधायक केदार शुक्ला द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद अब भाजपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य मेघराज जैन ने पार्टी के काम काज के तौर तरीके पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि भाजपा धीरे-धीरे अपने निष्ठावान और अनुभवी कार्यकर्ता को दल के कार्य से अलग कर रही है और बाहर से आए चमक दमक खेल वाले खिलाड़ी नेताओं को आगे कर रही है. जैन ने सोशल मीडिया के जरिए बुजुर्ग राजनेताओं को किनारे किए जाने लेकर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि वर्षो जनता के बीच पार्टी का झंडा जिसने उठाया जनता भी उसी को पहचानती है और जब वो घर बैठा है, तो वो भी उदासीन हो जाती है, कौन अपना है किसे निकालना है, यह वहीं जानता थी. जैन ने कहा कि अब उम्र की सीमा बांध दी 75 वाले चुनाव नहीं लड़ेंगे. खैर यह ठीक है नया खून आना चाहिए. दल में है भी और योग्य भी है, पर 50 पार पार्टी के जिला अध्यक्ष नहीं, 35 पार मंडल अध्यक्ष नहीं. जैन ने कहा कि राजनीति में बरसों टांग घसिटने के बाद एक मौका मिलता है. अब सब बंद सोच लो, कब तक और क्यों करना काम. सत्ता छोडों संगठन में ही काम नहीं, तो अब केवल वोटर है और पार्टी. अगला आदेश ये भी आएगा की इस उमर के बाद वोट भी नहीं.
संवदहीनता होनी चाहिए समाप्त
पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने भी विधायक केदारनाथ शुक्ला के बयान का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि हार की जिम्मेदारी तय होनी ही चाहिए. साथ ही हार की समीक्षा भी की जानी चाहिए. शर्मा ने कहा कि पार्टी में इन दिनों जो वरिष्ठ नेताओं के बीच संवादहीनता को देखा जा रहा है, से भी समाप्त किया जाना चाहिए. गौरतलब है कि रघुनंदन शर्मा पहले भी संगठन को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. वे 2018 में विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद लगातार पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लेकर भी बयानबाजी करते रहे हैं.

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