बुधवार, 9 अक्टूबर 2019

जनता नहीं पार्षद चुनेंगे महापौर

 राज्यपाल ने दी नगरीय  निकाय विधि संशोधन कानून को अपनी मंजूरी   

मध्यप्रदेश में नगर निगम महापौर  जनता नहीं, बल्कि पार्षद ही चुनेंगे. लंबी खींचतान के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ की राज्यपाल लालजी टंडन से हुई मुलाकात के बाद राज्यपाल ने नगरीय निकाय विधि संशोधन कानून को अपनी मंजूरी दे दी है. भाजपा द्वारा इस संशोधन का विरोध किया जा रहा था. 
नगरीय निकाय विधि संशोधन कानून को राज्यपाल लालजी टंडन द्वारा रोक दिए जाने के बाद सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव की स्थिति निर्मित हो गई थी. इसके चलते राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा सहित कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी सामने आने के बाद राज्यपाल की नाराजगी भी सामने आई थी.हालांकि बाद में खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ को आगे आकर राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकत कर स्थिति को स्पष्ट करना पड़ा. मुख्यमंत्री ने अध्यादेश पर चर्चाआ के संबंध में राज्यपाल को बताया कि जिन लोगों ने राजभवन की गरिमा के खिलाफ अध्यादेश को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाकर राज्यपाल पर दबाव बनाने का प्रयास किया है, वह उनके निजी विचार हैं. सरकार का उन विचारों से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में स्वस्थ मयार्दाओं का पालन जरूरी है. राज्यपाल को मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार संवैधानिक मयार्दाओं के प्रति प्रतिबद्ध है. राज्यपाल टंडन ने कमल नाथ द्वारा चर्चाओं की सम्पूर्ण परिस्थितियों और अध्यादेश के संबंध में दिए गए विवरण से संतुष्ट होकर अध्यादेश अनुमोदित करने का निर्णय लिया. इसके बाद उन्होंने मंगलवार को इस संशोधन कानून को मंजूरी दे दी.
भोपाल नगर निगम को दो भागों में बांटने की तैयारी
भोपाल कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने नगर निगम को दो भागों में बांटने का प्रस्ताव भी जारी कर दिया है इसके बाद भोपाल में अब दो नगर निगम बन जाएंगे. इसमें भोपाल ईस्ट और भोपाल वेस्ट नाम से दो नगरनिगम बनाए जाने की तैयारी की जा रही है. नगर निगम चुनाव से पहले भोपाल शहर को दो हिस्सों में बांटकर दो नगर निगम (भोपाल ईस्ट और भोपाल वेस्ट) बनाने का ड्राफ्ट सोमवार की रात कलेक्टर ने जारी किया. इस प्रस्ताव के तहत भोपाल ईस्ट के नाम से प्रस्तावित नई नगर निगम में 31 वार्ड होंगे, इसमें कोलार, बावड़िया, मिसरोद, बागमुगालिया, कटारा, भेल, अयोध्या नगर, भानपुर और करोंद का इलाका शामिल किया गया है. भोपाल वेस्ट नगर निगम में मौजूदा 85 में से 54 वार्ड शामिल होंगे, जिला प्रशासन ने प्रस्तावित ड्राफ्ट पर दावे-आपत्ति के लिए 7 दिन की समय सीमा तय की है, इसके बाद इसे मंजूरी के लिए सरकार को भेजा जाएगा, राज्यपाल की अनुमति मिलने पर ही दो निकायों के गठन की अंतिम अधिसूचना जारी होगी. भोपाल मेयर आलोक शर्मा का कहना है कि सरकार सियासी फायदे के लिए ये फैसला ले रही है इस मसले पर राज्यपाल से भी चर्चा की जाएगी.
भाजपा कर रही थी विरोध
नगरीय निकाय विधि संशोधन कानून का विरोध भाजपा द्वारा किया जा रहा था. महापौर आलोक शर्मा महापौर काउंसिल के पदाधिकारियों के साथ राज्यपाल से मिलकर इसका विरोध जता चुके थे. इसके बाद सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और शिवराज सिंह चौहान ने भी राज्यपाल से मिलकर इस अध्यादेश का विरोध किया था. इसके बाद मुख्यमंत्री ने अध्यादेश के बारे में सरकार का पक्ष रखा साथ ही कहा कि तन्खा का बयान उनकी निजी राय है इसे सरकार का मत नहीं माना जाए.

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