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| कांतिलाल भूरिया |
मध्यप्रदेश की झाबुआ विधानसभा सीट के लिए 21 अक्तूबर को होने वाले उपचुनाव को लेकर मुकाबला कड़ा हो गया है. भाजपा किसी भी तरह से कांग्रेस के गढ़ में सेंधमारी कर अपनी सीट को बरकरार रखना चाहती है, वहीं, पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया अपने गढ़ को बचाने के लिए पूरी ताकत से मोर्चा संभाले हुए हैं. कांग्रेस ने 10 मंत्रियों को ब्लाक स्तर पर तैनात कर जीत के लिए रणनीति तय की है, वहीं भाजपा की ओर से दिग्गज नेताओं ने मोर्चा संभाल रखा है. वरिष्ठ नेताओं की सभाएं लगातार हो रही हैं.
झाबुआ विधानसभा के लिए हो रहे उपचुनाव में दोनों ही दलों भाजपा और कांग्रेस जीत के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. जी.एस.डामोर द्वारा सांसद बनने के बाद इस्तीफा देने से रिक्त हुई सीट पर भाजपा फिर से कब्जा जमाना चाहती है, जबकि पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया अपने गढ़ को बचाने के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं. कांग्रेस की ओर से मैदानी मोर्चा राज्य के 10 मंत्रियों के अलावा इंदौर संभाग के कई नेताओं ने संभाल रखा है. कांग्रेस ने गृह मंत्री बाला बच्चन, सुरेन्द्र सिंह बघेल, तुलसी सिलावट, हर्ष यादव, जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल, सचिन यादव, विजयलक्ष्मी साधो, जयवर्धन सिंह और सज्जन सिंह वर्मा को यहां की कमान सौंपी है. ये सभी मंत्री लगातार झाबुआ विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं. इसके अलावा भाजपा की ओर से प्रदेश संगठन मंत्री सुहास भगत, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंंह और कुशल संगठन माने जाने वाले इंदौर के पूर्व महापौर कृष्ण मुरारी मोघे चुनाव की घोषणा के साथ ही यहां सक्रिय हैं. इनके अलावा अब पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय सहित अन्य वरिष्ठ नेता सक्रिय हैं. वे लगातार मतदाता के बीच पहुंचकर युवा प्रत्याशी भानू भूरिया के पक्ष में चुनाव प्रचार कर रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की चुनावी सभाओं के बाद से माहौल कुछ कड़ा हुआ है और कांग्रेस नेता भी चिंतित हुए हैं.
परिणाम को प्रभावित करेगा जातिगत समीकरण
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| भानू भूरिया |
झाबुआ विधानसभा चुनाव में हमेशा ही जातिगत समीकरण प्रभाव डालता रहा है. यही वजह थी कि भाजपा ने यहां पर कांतिलाल भूरिया के खिलाफ भानू भूरिया को प्रत्याशी बनाया है. दोनों भूरियाओं के मैदान में होने से इस बार जातिगत मतदाताओं के बंटने की आशंका दोनों ही दलों को हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में अब तक यह भी देखने को मिला है कि जाति के अलावा रिश्तेदारी एवं भाईचारा भी मतदान को प्रभावित करता है. इस बार मदताताओं को बांटने के लिए भाजपा उम्मीदवार खूब मेहनत कर रहे हैं और इसी का वे फायदा भी उठाना चाहते हैं. वहीं भाजपा ने कांतिलाल भूरिया का राणापुर क्षेत्र गढ़ माना जाता है, वहां पर भाजपा ने अपने इंदौर के नेताओं की टीम को सक्रिय कर दिया है. भाजपा किसी भी तरह से पूर्व मंत्री के इस गढ़ को भेदना चाहती है. वहीं भूरिया भाजपा की रणनीति को असफल करने के लिए मंत्रियों के साथ पूरी ताकत से मैदान में डटे हैं.


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