मध्यप्रदेश के शिवपुरी में जिला अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है. अस्पताल में भर्ती एक मरीज की मौत के बाद 5 घंटे तक पड़ा रहा, कोई उसे उठाने नहीं गया. इतना ही नहीं शव पर आंखों के समीप चिंटियां रेंगती रही. घटना की जानकारी जब मुख्यमंत्री कमलनाथ को मिली तो उन्होंने घटना को गंभीरता से लिया और जांच के आदेश दिए हैं.
मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिला अस्पताल में बालचंद्र लोधी दो दिन पहले इलाज के लिए भर्ती हुए थे. वे क्षय रोग से पीड़ित थे. इालज के दौरान उनकी मौत हो गई, लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने सुध नहीं ली. आसपास के मरीजों ने इसे देखा और अस्पताल के स्टाफ को इसकी जानकारी दी. इसके बावजूद डाक्टर दिनेश राजपूत सहित पूरा स्टाफ वहां देखने नहीं गया और न ही किसी ने शव को हटाया. करीब 5 घंटे तक शव पलंग पर पड़ा रहा. इसके चलते मरीज की आंख पर चीटियां रेंगती दिखाई देने लगी. इसके बाद जब अन्य मरीजों के परिजनों ने नाराजगी जताई तब कहीं जाकर शव को वहां से हटाया गया.
मुख्यमंत्री कमलनाथ को जब इस घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने इस पर नाराजगी जताई और जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि ये घटना बेहद असंवेदनशीलता का परिचायक है. ऐसी घटनाएं मानवता व इंसानियत को शर्मसार करती हैं. इन्हें बर्दाश्त कतई नहीं किया जा सकता. जांच में दोषी व लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
वहीं इस घटना को पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दुखद और दर्दनाक बताया. उन्होंने ट्वीट किया कि मैंने स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट से चर्चा कर निवेदन किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जिससे प्रदेश में इस तरह की कोई दूसरी घटना न घटें.
कलेक्टर के 5 लोगों पर की कार्रवाई
शिवपुरी अस्पताल में शव पर चिटियां रेंगने की घटना के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ की नाराजगी को देख शिवपुरी की कलेक्टर अनुग्रह पी. ने इस मामले को लेकर 5 लोगों पर कार्रवाई की. कलेक्टर द्वारा जिला अस्पताल के सिविल सर्जन पी.के.खरे को संस्पेंड कर दिया गया है. इसके अलावा इलाज में लापरवाही बरतने पर डा. दिनेश राजपूत सहित स्टाफ की तीन नर्सों को भी सस्पेंड कर दिया गया है. बताया जाता है कि कमिश्नर के निर्देश पर कलेक्टर जांच करने पहुंची थी और उन्होंने यह कार्रवाई की. बताया जाता है कि कलेक्टर की इस कार्रवाई के बाद सिविल सर्जन डाक्टर खरे अचानक बीमार हो गए, उन्हें अस्पताल के आईसीयू में भर्ती करना पड़ा. डा. खरे का ब्लड प्रेशर लो हो गया था, जो स्थिर होता दिखाई दिया. इसके बाद आनन-फानन में उन्हेंं ग्वालियर रेफर किया गया.
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