गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019

मध्यप्रदेश में आईएएस और आईपीएस के बीच टकराव की बनी स्थिति

आईएएस एसोसिएशन ने ईओडब्ल्यू के तौर तरीकों पर उठाए सवाल

मध्यप्रदेश में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है. केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर गए आईएएस विवेक अग्रवाल के खिलाफ आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) में दर्ज की गई शिकायत को लेकर आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष गौरी सिंह ने मुख्य सचिव एस.आर.मोहंती को पत्र लिखकर ईओडब्ल्यू के तौर तरीकों पर सवाल खड़े किए हैं. 
केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर गए राज्य के आईएएस विवेक अग्रवाल के खिलाफ स्मार्ट सिटी के टेंडर मामले को लेकर ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज की गई है. इस मामले में 300 करोड़ के टेंडर की शिकायत की गई है. टेंडर कमेटी के सदस्य सहित आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल की भी इस मामले में जांच की जा रही है. 
आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष गौरी सिंह ने इस मामले को लेकर मुख्य सचिव एस.आर.मोहंती को पत्र लिखकर जांच एजेंसी को आड़े हाथ लिया है. उन्होंने पत्र में कहा है कि जांच एजेंसिंया बिना पुख्ता सबूत के वरिष्ठ अधिकारियों की छवि को धूमिल करने का काम कर रही है. वे पहले तथ्यों को जांच बिना ही अधिकारियों के खिलाफ की गई शिकायत को मीडिया को जानकारी दे रही हैं, जो आपत्तिजनक है. उन्होंने पत्र में लिखा है कि जांच एजेंसियों के अहम पदों पर बैठे अधिकारी प्रसिद्धि पाने के लिए बिना जांच के ही मीडिया में अपना निष्कर्ष साझा कर रहे हैं. इससे अधिकारियों का मनोबल गिर रहा है और जांच भी प्रभावित हो रही है. कुछ मामलों में पक्षकार शिकायत करते हैं या कोर्ट में चले जाते हैं. जांच एजेंसियों से अपेक्षा होती है कि जांच होेने तक संस्था और व्यक्ति की छवि धूमिल नहीं होने दें. आईएएस एसोसिएशन की अध्यक्ष ने मुख्य सचिव से मांग की है कि वे जांच एजेंसियों के लिए एडवाइजरी जारी करें.
यहां उल्लेखनीय है कि स्मार्ट सिटी में ईओडब्ल्यू में दर्ज शिकायत पत्र में कहा गया है कि यह नगरीय प्रशासन विभाग से जुड़ा हुआ एक मामला है. वर्तमान प्रमुख सचिव इसे लेकर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं उचित व पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई है, लेकिन ईओडब्ल्यू विभाग से बगैर तथ्य मांगे ही मीडिया में सारी जानकारी दे दी. वहीं ईओडब्ल्यू के महानिदेशक सुशोभन बनर्जी ने इस मामले को लेकर कहा कि स्मार्ट सिटी  के 300 करोड़ रुपए के टेंडर की शिकायत दर्ज की गई है. इसमें टेंडर कमेटी के सदस्यों एवं आईएएस विवेक अग्रवाल की भी जांच की जा रही है, जो तथ्य जांच में सामने आएंगे, उसके बाद ही कार्रवाई की जाएगी.
यहां उल्लेखनीय है कि नगरीय प्रशासन के प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल के कार्यकाल में एचपीई कंपनी को 300 करोड़ का टेंडर मिला था. बीएसएनएल ने भी 250 करोड़ का टेंडर डाला था. एचपीई कंपनी के पास स्मार्ट सिटी बनाने का कोई अनुभव नहीं था. 300 करोड़ का टेंडर मिलने से छह दिन पहले कोलकाता में एचपीई कंपनी और पीडब्ल्यूसी कंसलटेंट कंपनी के बीच एक साथ काम करने का करार हुआ था. मसला ये है कि पीडब्ल्यूसी कंस्लटेंट कंपनी के सीनियर अधिकारी विवेक अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल हैं.
आम आदमी की तरह आईएएस एसोसिएशन को भी जांच पर करना चाहिए भरोसा
आईएएस एसोसिएशन की प्रतिक्रिया पर  आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा है कि आईएएस एसोसिएशन निजी मुद्दों को उठाकर गलत कर रहा है, उसे अपनी मांग वापस लेना चाहिए. उन्होंने कहा है कि हनीट्रैप, व्यापमं, ई टेंडर घोटाले, अवैध रेत खनन जैसे मामलों में तो आईएएस एसोसिएशन चुप्पी साधे रहती है, लेकिन जब कोई आईएएस जांच के दायरे में आते हैं, तो ये दबाव बनाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाती है. अजय दुबे ने मांग की है कि जिस तरह से आम आदमी जांच एजेंसी पर भरोसा करता है, उसी तरह से आईएएस एसोसिएशन को भी भरोसा करना चाहिए.
वन मंत्री ने छीने अपर मुख्य सचिव के अधिकार
मंग सिंघार 

आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच टकराव के साथ ही राज्य में मंत्री और आईएएस के बीच टकराव की भी खबरें सामने आई है. इस मामले ने भी तूल पकड़ लिया है. दरअसल राज्य के वन मंत्री उमंग सिंघार ने अपर मुख्य सचिव ए.पी. श्रीवास्तव के सारे अधिकारी छीनकर उनके अधीनस्थ अधिकारी को दिए हैं. इसमें श्रीवास्तव को सिर्फ मानीटरिंंग का जिम्मा सौापा है. इससे नाराज होकर एसीएस 31 अक्तूबर तक छुट्टी पर चले गए हैं. कार्य विभाजन में एसीएस का नाम अधीनस्थों के भी नीचे लिखा गया है. वहीं अधिकारी कह रहे हैं कि मंत्री ऐसा नहीं कर सकते, जबकि सिंघार का कहना है कि सरकार आफिसों के बिजनेस रुल के हिसाब से ही यह बंटवारा किया गया है, ताकि कामकाज तेजी से हो. मंत्री के इस आदेश के बाद पीएस लेवल के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है.
प्रजातंत्र में सबसे बड़ा होता है मंत्री: डा. गोविंद सिंह
डा. गोविंद सिंह 
राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री डा. गोविंद सिंह ने वन मंत्री उमंग सिंघार के द्वारा किए गए कार्य विभाजन का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि प्रजातंत्र में मंत्री सबसे बड़ा होता है. वह कार्य विभाजन कर जिसे चाहे जो अधिकार दे सकता है. उन्होंने कहा कि मंत्री अपनी इच्छा से कार्य विभाजन कर सकता है. विभाग का मंत्री सर्वोपरी होता है और जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को संविधान में संपूर्ण अधिकार है, यह कोई मुद्दा नहीं है. वहीं आईएएस एसोसिएशन द्वारा मुख्य सचिव को ईओडब्ल्यू की कार्य शैली को लेकर की शिकायत पर उन्होंने कहा कि आईएएस एसोसिएशन ने पत्र लिखकर इस मामले की शिकायत की है. इस मामले में एसोसिएशन और ईओडब्ल्यू के महानिदेशक से बात करेंगे. उन्होंने कहा कि उन्हें इस पूरे मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है, इस वजह से वे फिलहाल कुछ नहीं कहेंगे.

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