पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में नर्मदा घाटी में गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाने किए गए वृक्षारोपण की जांच वन विभाग ने ई.ओ.डब्ल्यू (आर्थिक अपराध संगठन) को सौंप दी है. इसमें घोटाले के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तत्कालीन वनमंत्री और नोडल अधिकारियों को जवाबदार बनाया गया है. इस वृक्षारोपण में 450 करोड़ रुपए और अकेले वन विभाग के तहत 135 करोड़ का आरोप है.
वनमंत्री उमंग सिंघार ने आज संवाददाताओं को यह जानकारी देते हुए बताया कि कांगे्रस ने इस घोटाले की जांच कराने का वादा अपने चुनावी घोषणा पत्र में किया था. इसके बाद राज्य विधानसभा में वित्तमंत्री ने भी इस घोटाले की जांच कराने की बात कही थी. नर्मदा घाटी में हुए वृक्षारोपण में वन विभाग के साथ अन्य विभाग भी शामिल थे. हमने विभागीय जांच में वन विभाग के तहत किए गए वृक्षारोपण में गंभीर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार को पाया है. इसी के बाद वन विभाग ने ई.ओ.डब्ल्यू. को मामला सौंपने का तय किया.
वन मंत्री उमंग सिंघार ने बताया कि वनविभाग के तहत हुए वृक्षारोपण की जांच के तहत जब बैतूल में मैदानी जांच की गई तो पता लगा कि वहां के वन विभाग के कुछ अधिकारियों के द्बारा ही घोटाले को छिपाने की कोशिश की जा रही है. बैतूल के पाढई इलाके में हुए वृक्षारोपण को लेकर स्थानीय अधिकारियों के द्बारा बताया गया कि वहां 2 जुलाई 17 को कुल 15,623 पौधे रोपे गए, जिनमें से 11 हजार 140 पौधों को जीवित बताया गया. इस प्रतिवेदन का जब मैदानी परीक्षण किया गया, तो पाया गया कि वहां सिर्फ 9,985 ही गड़ढे थे, वहीं कुल 2343 पौधे ही जीवित पाए गए, जो कुल रोपित पौधों का 14.99 प्रतिशत ही थे. वनमंत्री ने कहा कि इसी तरह पूरे राज्य में वृक्षारोपण के नाम पर गड़बड़ी की गई. इसको लेकर वन विभाग के द्बारा तत्कालीन मुख्यमंत्री तत्कालीन वन मंत्री और तोडल अधिकारियों के खिलाफ मामला ईओडब्ल्यू को सौंपा गया है.

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