बुधवार, 29 मई 2019

तेज हुई कमलनाथ मंत्रिमंडल के विस्तार की अटकलें

 बजट सत्र के पहले कर सकते हैं विस्तार, सपा, बसपा और निर्दलियों को साधने की कवायद

मध्यप्रदेश में कमलनाथ मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एक फिर चर्चा तेज हो गई है. भाजपा द्वारा अल्पमत की सरकार का मुद्दा बार-बार उठाने को देखते हुए कमलनाथ बजट सत्र से पहले विधायकों को साधने की कवायद करते हुए विस्तार कर सकते हैं. इस विस्तार में छह विधायकों को मंत्री बनाए जाने की  चर्चा चल पड़ी है. विस्तार में  सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों को शामिल किया जा सकता है.
कमलनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा अब तेज हो गई है. माना जा रहा है कि जून माह में बजट सत्र के पहले यह विस्तार हो सकता है.  मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है. सूत्रों की माने तो मंत्रिमंडल विस्तार में 6 विधायकों को स्थान मिल सकता है. इसमें एक सपा, एक बसपा और एक निर्दलीय को मंत्री बनाने की बात कही जा रही है. वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ विधायकों जिन्हें पहले मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था, जिसके चलते वे नाराज हैं, उनमें से दो विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है. एक निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल पहले से ही मंत्रिमंडल में शामिल किए गए हैं.
कुछ की होगी छुट्टी
मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा के साथ ही वर्तमान मंत्रिमंडल में से कुछ मंत्रियों को हटाने की चर्चा भी तेज हो गई है. लोकसभा चुनाव में जिन मंत्रियों का परफार्मेंस ठीक नहीं रहा है, उन्हें मंत्री पद से हटाया जा सकता है. इस संबंध में मुख्यमंत्री ने चुनाव के पहले ही यह बात मंत्रियों को स्पष्ट कर दी थी. हालांकि चुनाव परिणाम के बाद यह भी सामने आया है कि 22 मंत्री ऐसे हैं, जो अपने विधानसभा क्षेत्रों और प्रभार वाले जिलों में कांग्रेस को बढ़त नहीं दिला सके हैं. सूत्रों की माने तो मंत्रिमंडल विस्तार के चलते वर्तमान मंत्रियों महेन्द्र सिंह सिसोदिया, प्रियव्रत सिंह, लाखन सिंह, हर्ष यादव के अलावा सुखदेव पांसे को हटाने पर विचार किया जा रहा है. इन मंत्रियों के स्थान पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता के.पी.सिंह, बिसाहुलाल , एंदल सिंह कंसाना के अलावा एक निर्दलीय सुरेन्द्र सिंह ठाकुर और एक-एक सपा-बसपा के विधायकों को मंत्री बनाने की कवायद की जा रही है. 
कुछ से छीने जाएंगे खास मंत्रालय
मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान लोकसभा चुनाव में मिली हार का सीधा असर विस्तार पर दिखाई देगा. कुछ मंत्रियों को छुट्टी होना तय है तो कुछ से अच्छे विभाग भी छीने जाने की बात सामने आ रही है. मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बीच हुई बैठकों में यह तय हुआ है कि स्वयं कमलनाथ, दिग्विजय सिंह के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों को पूर्व में जो अच्छे मंत्रालय दिए गए थे, वे वापस लेकर दूसरे मंत्रियों को दिए जाएंगे. 

विधायक बना सांसद, कांग्रेस को राहत

 प्रधानमंत्री से चर्चा के बाद तय होगा सांसद रहे या फिर विधायक 

मध्यप्रदेश में कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में भाजपा ने करारी हार तो दे दी, मगर उसके एक विधायक के जीतने से खुद भाजपा के लिए संकट खड़ा हो गया है. भाजपा अपने विधायक से अगर इस्तीफा दिलाती है तो कांग्रेस स्वत: ही 115 विधायकों के साथ बहुमत में आ जाएगी. कांगे्रस के लिए यह स्थिति छह माह के लिए बनेगी. इसके बाद उपचुनाव होने पर फिर कांग्रेस पर संकट बरकरार रहेगा.
मध्यप्रदेश में भाजपा ने रतलाम-झाबुआ से विधायक जी.एस.डामोर को मैदान में उतारा था. डामोर ने कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया को हरा कर चुनाव जीत लिया. पहले तो भाजपा जीत की खुशी मना रही थी, मगर जब लगातार राज्य की कांग्रेस सरकार को गिराने की बात भाजपा नेताओं द्वारा तेज की गई तो यह बात उसके लिए मुसीबत बनती नजर आने लगी. संख्या बल के हिसाब से देखा जाए तो कांग्रेस के पास वर्तमान में 114 विधायक है, जबकि भाजपा के 109 विधायक है. इस स्थिति में डामोर विधायकी छोड़कर सांसद बनते हैं तो यह भाजपा के लिए मुसीबत खड़ी करने वाली बात होगी. भाजपा का एक विधायक कम होते ही संख्याबल 229 के हिसाब से कांग्रेस स्वत: ही 115 विधायकों के साथ बहुमत में आ जाएगी. इस स्थिति में भाजपा के कांग्रेस की सरकार गिराने के मंसूबे को झटका लगेगा. हालांकि यह स्थिति छह माह याने उपचुनाव तक के लिए रहेगी. इसके बाद फिर कांग्रेस के लिए संकट खड़ा हो सकता है.
यहां उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं और वर्तमान में उसे एक निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल ने समर्थन दिया है, जिसे मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. इसके अलावा सपा के एक, बसपा के दो और निर्दलीय तीन का भी कांग्रेस को समर्थन मिला हुआ है.
डामोर मिल चुके हैं मोदी से
विधायक से सांसद बने जी.एस.डामोर को लेकर भाजपा नेता चिंतित नजर आने लगे हैं. वैसे डामोर के पास अभी फैसला लेने के लिए करीब 12 दिन का समय है. वे किस सदन में जाना चाहते हैं. डामोर इस मुद्दे को लेकर एक बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर चुके हैं. फिलहाल मोदी ने इस मामले में उन्हें कोई जवाब नहीं दिया है और शांत रहने को कहा है. डामोर का कहना है कि राष्ट्रीय संगठन जो आदेश करेगा, वे उसके अनुरुप फैसला लेंगे. वहीं प्रदेश संगठन इस मामले को लेकर चिंतित जरुर है, मगर राष्ट्रीय नेतृत्व के फैसले का इंतजार वह भी कर रहा है.
तकनीकी पक्ष पर विचार के बाद लेंगे फैसला
डामोर के मामले को लेकर प्रदेश संगठन भी तकनीकी पक्ष की जानकारी ले रहा है. खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि इस मामले में तकनीकी पक्ष की जो राय सामने आएगी, उसके हिसाब से हम कुछ कहने की स्थिति में है.फिलहाल हमारे पास 12-13 दिन हंै, इस मुद्दे पर विचार करने के. राष्ट्रीय नेतृत्व से भी इस मामले को लेकर मंथन किया जाएगा. 30 मई को प्रधानमंत्री की शपथ के बाद ही पार्टी इस मुद्दे पर अपना फैसला लेगी.

ध्यान भटकाने छापे की कार्रवाई को किया सार्वजनिक

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा सार्वजनिक हुए दस्तावेजों की होनी चाहिए जांच

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार कई घोटालों पर बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है, जिसके चलते आयकर छापे की कार्रवाई को सार्वजनिक कर ध्यान भटकाने का काम किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक हुए इन दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज यह बात पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कई घोटालों पर बड़ी कार्रवाई करने की जा रही है. उसी से ध्यान भटकाने के लिए आयकर विभाग के छापे की कार्रवाई को सार्वजनिक किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि  आयकर छापों को लेकर लगातार सामने आ रहे बयानों से भाजपा की सोच उजागर होती है. यह बड़े दुख की बात है. समय आने पर भाजपा का चरित्र और चेहरा सब सामने आएगा.
मुख्यमंत्री ने एक बार फिर दावा किया कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है. गाजियाबाद में बेटे नकुलनाथ की जमीन रद्द होने के सवाल पर कहा कि हमने कोई अतिक्रमण नहीं किया. ये सब राजनैतिक प्रयास हैं. उन्होंने दावा किया कि गाजियाबाद डेवलपमेंट अथारिटी ने कोई नोटिस जारी नहीं किया है.  सारा निर्माण कार्य 30 साल पुराना है. ये पूरा मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है.

राजधानी में सड़कों पर उतरा किसान, बहाया दूध



राजधानी में आज फिर आम किसान यूनियन के नेतृत्व में किसान सड़क पर उतरे. किसानों ने दूध सड़कों पर बहाया और सब्जियां फेंक कर विरोध किया. वहीं राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से चर्चा के बाद हड़ताल वापस ले ली. मुख्यमंत्री ने कर्जमाफी के निराकरण के लिए एक समिति बनाने की बात किसान नेताओं से चर्चा में कही. यह समिति तय वक्त के अंदर किसानों के मामले निपटाएगी.
आम किसान यूनियन और राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने किसानों के मांगों को लेकर पहले चरण में आज से आंदोलन की चेतावनी दी थी. इसके तहत आम किसान यूनियन के अनिल यादव के नेतृत्व में प्रदेश में किसान सड़क पर उतरे. इस बार मालवा के साथ किसानों की नाराजगी का असर राजधानी भोपाल में भी देखने को मिला. मंगलवार को कृषि मंत्री सचिन यादव के साथ जब बातचीत विफल हो गई तो अनिल यादव के नेतृत्व में आज सुबह से आंदोलन शुरु हुआ. राजधानी में कुछ किसानों ने प्रदर्शन किया और दूध सड़कों पर बहाया. साथ ही सब्जियां भी सड़कों पर फेंक कर विरोध जताया.  भोपाल में जरूर भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानों ने प्रदर्शन किया. प्रतीकात्मक रूप में एक किसान को दूध से नहलाकर विरोध जताया.  वैसे राजधानी मेें ज्यादा असर नजर नहीं आया, सब्जियों और दूध की आपूर्ति पिछले दिनों की तरह सामान्य तौर पर जारी है. आंदोलनकारी किसानों का दावा है कि देवास, धार, उज्जैन, राजगढ़ में आंदोलन के चलते सब्जियों और दूध की आपूर्ति प्रभावित हुई है. वहीं  प्रदेश के महानगर ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर में हर जगह शांति है. 
मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद कक्काजी ने वापस ली हड़ताल
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने 1 जून से प्रस्तावित हड़ताल वापस ले ली है. संगठन ने ये फैसला मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ हुई बैठक के बाद लिया. इस बैठक में मुख्यमंत्री ने कर्ज माफी के अलावा किसानों की अन्य मांगों पर जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसके बाद किसान यूनियन ने ये फैसला लिया. बैठक मुख्यमंत्री कमलनाथ के अलावा कृषि मंत्री सचिन यादव, वित्त मंत्री तरुण भनोत के अलावा कई विभागों के प्रमुख सचिव मौजूद थे. बैठक में तय हुआ कि किसानों की कर्जमाफी के लिए एक निराकरण समिति बनाई जाएगी, जो तय वक्त के अंदर इस मसले को हल करेगी. बैठक में संगठन ने किसानों के मुद्दे पर सात दिन का विशेष सत्र बुलाने की भी मांग की है. भूमि अधिग्रहण कानून खत्म करने की मांग भी उठाई गई.

सोशल मीडिया का बढ़ता चलन पत्रकारिता की बड़ी चुनौती

 चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा में मीडिया की बड़ी भूमिका

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने सोशल मीडिया को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि सोशल मीडिया का बढ़ता चलन पत्रकारिता की बड़ी चुनौती बन गया है. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती तो यही है कि इनसे निपटने के लिए सरकार के पास कोई उपाय नहीं है. नतीजतन सूचनाओं का अंबार तो है, लेकिन उसकी विश्सवनीयता नहीं है.
हिन्दी पत्रकारिता दिवस  30 मई की पूर्व बेला में आज पत्रकारिता से जुड़े दो महत्वपूर्ण विषयों पर माधवराव सप्रे संग्रहालय में व्याख्यान हुए. इनमें पहला व्याख्यान समकालीन पत्रकारिता की चुनौतियां विषय पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का रहा तथा  मध्यप्रदेश कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत ने चुनाव और मीडिया, साख का सवाल विषय पर  दूसरा व्याख्यान दिया. इस अवसर पर मंगला अनुजा के शोध ग्रंथ  आधी दुनिया की पूरी पत्रकारिता का विमोचन भी हुआ.
समकालीन पत्रकारिता की चुनौतियां विषय पर हरिवंश की राय थी कि सातवें दशक तक प्रिंट मीडिया का ही दौर था, लेकिन जबसे  सोशल मीडिया जैसे दूसरे माध्यमों ने प्रवेश किया है, पत्रकारिता की चुनौतियां बढ़ती ही चली गई हैं.  उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती तो यही है कि इनसे निपटने के लिए सरकार के पास कोई उपाय नहीं है. नतीजतन सूचनाओं का अंबार तो है, लेकिन उसकी विश्सवनीयता नहीं है. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में पूंजी का प्रवेश भी एक बड़ी चिंता का विषय है. बाजारवाद ने विचार को पीछे धकेला है. कभी पत्रकारिता जुनून होती थी. इसमें आदर्श और मूल्यों का स्थान होता था, आज यह लगभग अप्रासंगिक हो गए हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए मालिक या पत्रकारों को दोष देना ठीक नहीं. बाजार की विवशताएं इनके साथ भी हैैं. हरिवंश ने तकनीक बदलाव को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया.
शक्ति का सही उपयोग करे तो निष्पक्षता पर नहीं उठेंगे सवाल
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत ने चुनाव और मीडिया, साख का सवाल विषय पर विचार रखते हुए कहा कि भारत के चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा  दूसरे देशों में भी है. इसमें भारतीय मीडिया की बड़ी भूमिका कही जा सकती है. जब पत्रकार चुनाव आयोग की छोटी-छोटी गलतियां सामने लाता है तो आयोग सतर्क रहता है,  इससे उसकी छवि बनी रहती है. अपने इस कथन के समर्थन में उन्होंने हाल के चुनावों में हुई  घटनाओं का जिक्र करते हुए पिछले कई उदाहरणों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के पास अपार शक्ति है इसका यदि सही तरीके से उपयोग किया जाए तो उसकी निष्पक्षता पर सवाल ही नहीं उठ सकते हैं.
त्रिपुरा के चुनाव ने ईवीएम की विश्वसनीयता को किया मजबूत
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त रावत ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठने वाली शंकाओं पर अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए बताया कि त्रिपुरा के चुनावों में आयोग वहां पर पुरानी मशीनों का ही उपयोग कर रहा था इस पर विपक्षी दल की आपत्ति थी कि यह मशीनें पिछले कई चुनावों से एक ही सरकार को चुन रही हैं, लेकिन आयोग ने दृढ़ता का परिचय देते हुए उन्हीं मशीनों से चुनाव कराये नतीजे में वर्षों पुरानी सरकार का तख्ता पलट गया.  आयोग के इस निर्णय ने ईवीएम की विश्वसनीयता में और भी वृद्धि की.

सेवानिवृत्ति की कार्रवाई नहीं करेगी सरकार


 सरकार ने चुनाव ड्यूटी के दौरान अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के लिए राहत भरा फैसला लिया है. यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए बेहद अहम है, जिनके खिलाफ सेवानिवृत्ति की अनुशंसा की गई थी. दरअसल लोकसभा चुनाव के दौरान हजारों कर्मचारियों ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए चुनाव ड्यूटी से अवकाश मांगा था. इनमें से सैकड़ों कर्मचारी ड्यूटी पर अनुपस्थित रहे थे.
प्रदेश के विभिन्न कलेक्टरों ने ड्यूटी के दौरान गैर हाजिर रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ शासन को अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए पत्र लिखा था. इसके तहत करीब एक हजार कर्मचारियों को हटाने के लिए पत्र लिखा गया था. आचार संहिता खत्म हो जाने के बाद कमलनाथ सरकार ने कर्मचारियों के खिलाफ ऐशी किसी कार्रवाई से इंकार कर दिया है. सामान्य प्रशासन मंत्री गोविंद सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव ड्यूटी में स्वास्थ्य के आधार पर अनुपस्थित रहने वाले अधिकारी और कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने जैसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस मुद्दे पर मंत्री गोविंद सिंह का बयान सामने आया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय ठीक नहीं है. इस तरह का कोई भी फैसले पर सरकार मुहर नहीं लगाएगी. वहीं शासन के इस फैसले का कर्मचारी संघ ने स्वागत किया है. इस मुद्दे को लेकर कर्मचारी संघ ने सामान्य प्रशासन मंत्री से मुलाकात भी की थी.

सोमवार, 27 मई 2019

मुख्यमंत्री ने कहा एक मंत्री 5-5 विधायकों पर रखें नजर

 विधायकों को साधने की कोशिश, मंत्री लगातार रहे संपर्क में, करते रहे संवाद

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा द्वारा लगातार सरकार को अल्पमत की सरकार करने के लगाए जा रहे आरोपों को देखते हुए विधायकों को साधने का काम तेज कर दिया है. मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है कि एक मंत्री पांच-पांच विधायकों पर नजर रखे और उनसे संपर्क करते हुए लगातार संवाद करते रहें.
लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद प्रदेश सरकार को अल्पमत की सरकार कहकर गिराने की बात भाजपा  नेताआें द्वारा कहे जाने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ सक्रिय हो गए हैं. मुख्यमंत्री ने रविवार को मंत्रियों और विधायकों की अलग-अलग बैठकें ली. इन बैठकों में विधायकों के साथ बीती रात को हुई बैठक में जब यह बात सामने आई कि मंत्री, विधायकों से मिलते ही नहीं या मिलते हैं तो उनकी सुनते नहीं हैं. इस पर मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को सख्त निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्रों में  सक्रिय रहें साथ ही विधायकों की समस्याओं पर ध्यान दें. वहीं मंत्रियों को निर्देशित किया है कि वे पांच-पांच विधायकों पर नजरें रखें. विधायकों संपर्क रखते हुए उनसे लगातार संवाद बनाएं रखें. 
बैठक में 119 विधायक उपस्थित रहे, जिनसे मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सीधे वन-टू-वन चर्चा की. इस दौरान विधायकों की बातों को उन्होंने सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी बातों को सुना जाएगा. इसके बाद मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिए कि सभी विधायकों की बातों को सुना जाए और वचन पत्र के बिन्दुओं को जल्द से जल्द पूरा करने का काम किया जाए. बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी उपस्थित रहे उन्होंने भी विधायकों से चर्चा की और उनकी नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया. 
विधायकों को अपने जैसा पावर देकर रखें
मंत्रियों को 5-5 विधायकों की जिम्मेदारी को लेकर गृह मंत्री बाला बच्चन ने कहा कि मंत्रियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने जैसा पावर विधायकों को दें. उन्होंने कहा कि विकास के कामों को रुकना नहीं चाहिए.उन्होंने दावा किया कि सारे विधायक मुख्यमंत्री के साथ है, सरकार पूरे पांच साल चलाएंगे. विपक्ष भ्रम फैला रहा है. गृह मंत्री का दावा सारे विधायक मुख्यमंत्री कमलनाथ के समर्थन में राजभवन तक परेड करने को भी तैयार हैं. 

कांग्रेस की सरकार एक महीने भी चल पाएगी इस पर है शक

 नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने स्थिरता पर फिर उठाए  सवाल

मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार की स्थिरता पर नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार एक माह भी चल पाएगी इसे लेकर शक है. उन्होंने कहा हम कुछ भी नहीं करेंगे, उनके कर्म ही उन्हें ले डूबेंगे. उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ी तो फ्लोर टेस्ट कराया जाएगा. 
राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के बयान को सिरे से नकार दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार कोई खतरा नहीं है. चार बार हम फ्लोर टेस्ट दे चुके हैं. फिर भी विपक्ष चाहता है तो हम उसके लिए फिर से तैयार हैं.  उल्लेखनीय है कि एग्जिट पोल के बाद से कमलनाथ सरकार की अस्थिरता को लेकर भाजपा नेताओं द्वारा सवाल खड़े किए जा रहे हैं. वैसे गोपाल भार्गव ने ही सबसे पहले इसे लेकर बयान दिया था, लेकिन इसके बाद संगठन उनसे नाराज हो गया था. खुद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान भी भार्गव के इस बयान से खफा थे. इसके बाद संगठन की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भी शिकायत की गई थी. इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी यह बात कही थी कि सरकार हम नहीं गिराएंगे, बल्कि कांग्रेस के विधायक ही सरकार गिरा देंगे.
वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भार्गव के इस बयान को नकार दिया है. उन्होंने कहा कि हम चार बार फ्लोर टेस्ट दे चुके हैं और अगर जरुरत पड़ी तो फिर सरकार बहुमत साबित करने के लिए तैयार है. मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा अनर्गल प्रलाप कर रही है. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार को कोई खतरा नहीं है.
बसपा विधायक ने कहा 50 करोड़ का दिया आफर
बहुजन समाज पाटी की विधायक रमाबाई ने भाजपा पर  आरोप लगाए हैं. रमाबाई ने भाजपा पर विधायकों को खरीदने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के लोग कई विधायकों को पैसे और मंत्री पद का प्रलोभन दे रहे हैं. रमाबाई ने कहा कि भाजपा हर किसी को प्रस्ताव दे रहे हैं. केवल मूर्ख लोग ही उनके प्रभाव में आएंगे. मुझे भी फोन आया था और मंत्री पद तथा पैसे की पेशकश की गई थी. वे कई लोगों को 50-60 करोड़ रुपए आफर कर रहे हैं. रमाबाई काफी लंबे समय से कमलनाथ सरकार से असंतुष्ट चल रही है. पति पर लगे हत्या के आरोपों के बाद वो काफी समय तक गायब सी हो गईं थी. रविवार को उन्होंने मुख्यमंत्री के निवास पर आयोजित कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भाग लिया. उन्होंने  कहा कि मंत्रिमंडल के विस्तार की बात की जा रही है जिसका फैसला मुख्यमंत्री को करना है. कांग्रेस सरकार को समर्थन से संबधित सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मेरा समर्थन कांग्रेस को जारी रहेगा.

मंत्रालय से शुरु होगा अधिकारियों की पदस्थापना का सिलसिला


राज्य में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त होते ही अब फिर से अधिकारियों की पदस्थापना का सिलसिला शुरु होगा. यह सिलसिला मंत्रालय से शुरु होने की बात सामने आ रही है. मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने पसंद के अधिकारियों को मैदान में भेजने की तैयारी कर चुके हैं.
राज्य में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते अधिकारियों की पदस्थापना का सिलसिला रुक गया था. लोकसभा चुनाव के बाद रविवार को विधायकों की बैठक में फिर यह मुद्दा सामने आया कि अधिकांश विधायक अधिकारियों की कार्यशैली से खफा हैं. इसकी शिकायत भी मुख्यमंत्री से कल बैठक के दौरान विधायकों ने की. इन शिकायतों को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गंभीरता से लिया और इस बात के संकेत दिए कि विधायकों की पसंद को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों की पदस्थापना की जाएगी. इन पदस्थापनाओं का सिललिसा मंत्रालय से शुरु होगा. सूत्रों की माने तो मंत्रालय में मुख्यमंत्री अपनी पसंद के अधिकारियों की पदस्थापना करेंगे इसके बाद वे मैदान में भी अपनी पसंद के हिसाब से ही अधिकारियों की पदस्थापना करेंगे, ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक तरह से किया जा सके.
सूत्रों की माने तो मंत्रालय स्तर पर कृषि विभाग के प्रमुख सचिव राजेश राजौरा को कृषि विभाग से हटाकर उद्योग विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है. इसके अलावा नर्मदा विकास प्राधिकरण में पदस्थ पंकज अग्रवाल की भी अच्छी पदस्थापना होने की बात सामने आ रही है. वहीं प्रमुख सचिव सहकारिता अजीत केसरी को पद से हटाने को लेकर भी मुख्यमंत्री गंभीर बताए जा रहे हैं. अजीत केसरी को कृषि विभाग का प्रमुख सचिव बनाया जाएगा. मुख्यमंत्री कृषि विभाग में कर्ज माफी को लेकर गंभीर हैं और वे चाहते हैं कि समय सीमा में किसानों का कर्ज माफ हो सके. ताकि भाजपा के पास यह मुद्दा न रहे. 

मंत्री ने माना अब भी हो रहा है प्रदेश में अवैध खनन


राज्य के खनन मंत्री प्रदीप जायसवाल ने यह माना कि राज्य में अब भी अवैध रुप से खनन हो रहा है. यह खनन नई रेत नीति लागू करने पर ही रुक पाएगा.
खनन मंत्री जायसवाल ने मीडिया से चर्चा करते हुए यह बात स्वीकार की. उन्होंने कहा कि अवैध उत्खनन को रोकने के लिए अमले की भी कमी है. इसके लिए वे पुलिस का सहयोग भी लेने पर विचार कर रहे हैं. जायसवाल ने कहा कि पंचायतों से खनन का संचालन वापस लेने पर भी विचार किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि पंचायतों की आड़ में अवैध उत्खनन हो रहा था, अब पंचायतों को मिलने वाली राशि सरकार पंचायत को देगी. उन्होंने कहा कि नर्मदा में मशीन से उत्खनन नहीं कराया जाएगा. बड़ी खदान में आवश्यकता के अनुसार मशीन लगाई जाएगी. उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर पुलिस द्वारा अवैध रुप से वसूली करने के लिए गाड़ियों को रोके जाने की शिकायतें भी मिली है, इन शिकायतों को लेकर वे मुख्यमंत्री से चर्चा कर यह प्रयास करेंगे कि पुलिस का हस्तक्षेप हो, वह अवैध खनन को रोकने के लिए विभाग की टीम के साथ काम करें, लेकिन अवैध वसूली जैसी शिकायतों को रोका जाए इसके लए अमानवीय तरह से कार्य न किए जाएं.

रविवार, 26 मई 2019

प्रदेश कांग्रेस में होगा बदलाव, सिंधिया के लिए लामबंद होने लगे उनके समर्थक

पूर्व अध्यक्षों ने भी बढ़ाई सक्रियता, करेंगे दावेदारी

मध्यप्रदेश में कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब प्रदेश संगठन में बदलाव को लेकर घमासान मच गया है.  इस पद के लिए मंत्री, नेता और कार्यकर्ताओं ने वरिष्ठ नेताओं के सामने मुखर होकर अपनी बात रखनी शुरु कर दी है. बदलाव की आहट को देखते हुए इस पद के लिए दावेदारों ने भी सक्रियता दिखानी तेज कर दी है. वहीं सिंधिया समर्थक मंत्री इमरती देवी के अलावा राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी भी यह मांग कर रहे हैं कि ज्योतिरादित्य सिंंधिया को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी जाए.
कांग्रेस की हार को लेकर जहां मंथन तेज हुआ है, वहीं यह बात भी उठने लगी है कि प्रदेश अध्यक्ष को बदला जाए. हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं, इस बात को प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी दीपक बावरिया ने स्वीकार भी किया है. वहीं इसका खंडन भी खुद मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा शनिवार की रात को किया गया, मगर यह बात तय है कि संगठन को संगठित रखने और मजबूती देने के लिए बदलाव के लिए अब नेता, कार्यकर्ता मुखर हो रहे हैं. इस बदलाव के लिए वैसे तो कोषाध्यक्ष गोविंद गोयल, चाचौड़ा के विधायक लक्ष्मण सिंंह ने दो दिनों से सोशल मीडिया अपनी बात रखी भी. इसके बाद राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने भी यह मांग की कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश की कमान सौंपी जानी चाहिए. वहीं राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने भी बदलाव को लेकर कहा है कि वक्त के साथ संगठन में बदलाव होना जरुरी है. पटवारी ने कहा कि वैसे यह मामला हाईकमान के ऊपर है, वह बदलाव करे या नहीं, मगर वे इस पद के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया को सही व्यक्ति मानते हैं. सिंधिया इस पद पर रहकर प्रदेश संगठन को मजबूती दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि इस पद पर वैसे युवा को मौका मिलना चाहिए, ताकि संगठन को मजबूती मिल सके.
दावेदारों ने बढ़ाई सक्रियता
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदले जाने की संभावना को देखते हुए कुछ दावेदार भी सक्रिय हो गए हैं. दो पूर्व अध्यक्ष सुरेश पचौरी और अरुण यादव भी इस पद के लिए सक्रियता बढ़ाए हुए हैं. वहीं उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी की नजर भी इस पद पर टिकी हुई है. हालांकि उन्होंने मीडिया से कहा कि उनका नाम इस पद के लिए रेस में नहीं है. वहीं सिंधिया के विश्वस्त और मुरैना से चुनाव हारे रामनिवास रावत और दिग्विजय सिंह समर्थक अजय सिंह का नाम भी इस पद के लिए चर्चा में है. 

नकुल नाथ ने कहा छिंदवाड़ा नहीं पूरे प्रदेश का रखूंगा पक्ष



मध्यप्रदेश की छिंदवाड़ा संसदीय सीट से चुनाव जीते नकुलनाथ अब प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हो गए हैं. नकुल नाथ आज राजधानी भोपाल पहुंचे थे. 
मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा संसदीय सीट पर ही कांग्रेस को जीत हासिल हुई है. इसके अ  लावा सभी 28 सीटों पर हार मिली है. छिंदवाड़ा के सांसद नकुलनाथ आज राजधानी भोपाल में थे, उन्होंने मीडिया से चर्चा की. इस दौरान उन्होंने बताया कि वे छिंदवाड़ा ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का पक्ष संसद में रखेंगे. उन्होंने कहा कि विधायकों की बैठक में जो भी समस्याएं सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों की सामने आएंगी, उन समस्याओं को वे संसद में रखेंगे. उन्होंने कहा कि उनके पिता ने 1980 से छिंदवाड़ा का जो विकास किया, उस विकास की यात्रा को वे आगे बढ़ाएंगे, वहां के विकास को वे 2019 में दो गुना रफ्तार से आगे ले जाएंगे. नकुल नाथ ने प्रदेश में कांग्रेस को मिली हार को लेकर कहा कि मोदी अंडर करंट था, जिसे हम पहचान नहीं पाए, जिसके चलते कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा.

मिर्ची बाबा के चित्र को दी प्रतिकात्मक जल समाधि



भाजपा कार्यकर्ताओं ने मिर्ची बाबा को सांकेतिक जल समाधि दी. मिर्ची बाबा ने दिग्विजय सिंह के हारने पर जल समाधि लेने का बयान दिया था, जिसको लेकर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने राजधानी भोपाल के शीतलदास की बगिया में तालाब में मिर्ची बाबा के होर्डिंग को डुबोकर जल समाधि दी और  प्रदर्शन किया. 
कार्यकर्ताओं की मांग है की या तो मिर्ची बाबा जल समाधि लें, या जनता से माफी मांगे. बता दें बाबा के वचन नहीं निभाने पर हरिद्वार के निरंजनी अखाड़े ने भी उन्हें अखाड़े से बाहर कर दिया है.  इस अवसर पर सद्भावना अधिकार मंच के संयोजक  दुर्गेश केसवानी ने कहा कि झूठ और अधर्म के सहारे मिर्ची बाबा ने भोपाल के मतदाताओं को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास किया. जिस प्रकार कमलनाथ सरकार अपने झूठे वचनों के सहारे प्रदेश में सरकार बनाने में सफल हुई वैसी ही कांग्रेस ने पाखण्डी बाबाको भोपाल बुलवाकर जनता को भ्रमित करना चाहा, परन्तु भोपाल की जनता ने कांग्रेस और बाबा को स्थान दिखा दिया है.  महेश शर्मा ने कहा कि सनातन काल से सामान्यजन में संतों के प्रति आदर और सम्मान का भाव रहा है. 

कैलाश को गले लगा रो पड़े शिवराज सिंह


मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भोपाल स्थित निवास पर आज मुख्यमंत्री कमलनाथ और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय सहित भाजपा एवं कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर चौहान के पिता के निधन पर सांत्वना दी. जब विजयवर्गीय चौहान के निवास पर पहुंचे तो शिवराज सिंह उनसे गले लगकर फफक-फफक कर रो पड़े.
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पिता प्रेम सिंह चौहान का कल शनिवार को निधन हो गया था. वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे. आज रविवार को उनके शव को जनता के दर्शन के लिए शिवराज सिंह चौहान के भोपाल स्थित बंगले पर रखा गया था. बड़ी संख्या में कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने वहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की. इसी दौरान कैलाश विजयवर्गीय भी शिवराज सिंह चौहान के भोपाल के बंगले पर पहुंचे तो कैलाश विजयवर्गीय को देखते ही शिवराज सिंह चौहान उनके गले लगे और फफक-फफक रो पड़े. इस दृश्य को जिसने भी देखा उसकी आंखे नम हो गई. 
चौहान के पिता को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ भी शिवराज के निवास पर पहुंचे, उन्होंने वहां जाते ही शिवराज के कंधे पर हाथ रखा और दूसरे हाथ से शिवराज के हाथों को थामा और उन्हें ढ़ांढ़स बंधाया. इस मौके पर शिवराज की पत्नी साधना सिंह भी वहीं मौजूद थी. चौहान के निवास पर आज दिग्विजय सिंह, उमाभारती, प्रभात झा, प्रहलाद पटेल के अलावा भाजपा और कांग्रेस के अलावा अन्य राजनीतिक दलों एवं सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने पहुंचकर चौहान के पिता के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन कर अपनी श्रद्धांजलि दी.

प्रवक्ताओं के टीवी डिबेट्स पर लगाएं रोक



लोकसभा चुनाव में भिंड संसदीय क्षेत्र से हारे कांग्रेस प्रत्याशी देवाशीष जरारिया ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मांग की है कि वे कांग्रेस प्रवक्ताओं के टीवी डिबेट्स में शामिल होने पर रोक लगाएं. जरारिया ने इस आशय का पत्र राहुल गांधी को लिखा है.
भिंड संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे देवाशीष जरारिया ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को एक पत्र लिखा है. पत्र में  उन्होंने लिखा है कि ‘मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं कि सभी विपक्षी दलों को अपने प्रवक्ता पद समाप्त कर देने चाहिए या उनका दायित्व बदल देना चाहिए और कोई आधिकारिक प्रवक्ता को किसी भी टीवी चैनल की बहस पर नहीं भेजना चाहिए. अगर कोई समसामयिक मुद्दा उठाना हो तो वरिष्ठ नेताओं को केवल प्रेस कांफ्रेंस करनी चाहिए. उन्होंने पत्र में लिखा है कि मीडिया पर विपक्षी दलों के लिए कोई स्पेस नहीं है. अत: वहां जाना स्वयं को नुकसान पहुंचाने जैसा ही है.’  देवाशीष का तर्क है कि उन्होंने 5 सालों में 600 से ज्यादा नेशनल चैनल की डिबेट्स में हिस्सा लिया है, जिसमें देश के नेशनल मीडिया एकपक्षीय माहौल बनाते है'.
उल्लेखनीय है कि उत्तरप्रदेश समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं पर इस तरह की रोक लगाई गई है. अखिलेश यादव ने इस संबंध में इलेक्ट्रानिक मीडिया के सभी ब्यूरो प्रमुखाओं को पत्र लिखकर मांग भी की है कि वे टीवी डिबेट्स में सपा के प्रवक्ताओं को न बुलाएं.
वापस किया प्रवक्ता पद
देवाशीष ने पत्र में लिखा है कि मैं एक कांग्रेसी होने के नाते और सच्चे भारतीय होने के नाते गांव-गांव, शहर-शहर जनता से संवाद करना पसंद करुंगा, लेकिन प्रोपेगंडा चलाने वाले गोदी मीडिया के टीवी डिबेट्स पर मैं नहीं जाऊंगा. उन्होंने कहा कि इस पत्र पर मैं आपका जवाब अपेक्षित रखता हूं और जवाब मिलने तक ससममान मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता पद को वापस करता हूं. उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि अगर पार्टी को पद देगी तो मैं उसके साथ कांग्रेस की विचारधारा को गांव-गांव, शहर-शहर पहुंचाने के लिए काम करूंगा. 

मंत्रियों ने कहा मोदी अंडर करंट को नहीं भांप पाए

 मुख्यमंत्री कमलनाथ मंत्रियों के साथ किया हार पर मंथन

मध्यप्रदेश में कांग्रेस को मिली हार के बाद आज मुख्यमंत्री कमलनाथ को मंत्रियों ने बताया कि मोदी अंडर करंट के चलते कांग्रेस प्रत्याशियों को हार मिली है. बैठक में हार के कारणों को लेकर मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों से अलग-अलग चर्चा की.
राज्य मंत्रालय में आज मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अनौपचारिक बैठक कर अपने मंत्रियों से प्रदेश में कांग्रेस को मिली हार को लेकर मंथन किया. इस दौरान सभी मंत्रियों ने हार का कारण मोदी अंडर करंट बताया.  मंत्रियों ने कहा कि मोदी लहर को वे भांप नहीं पाए. राज्य के 5 मंत्री ही अपने क्षेत्रों में कांग्रेस प्रत्याशियों को भाजपा से ज्यादा मत दिला पाए हैं, जो मुख्यमंत्री के लिए चिंता का कारण बन गए हैं. इसके अलावा 19 ऐसे विधायक हैं, जिनके क्षेत्रों में कांग्रेस प्रत्याशियों को बढ़त मिली है. इस लिहाज से माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे, जिसमें निर्दलीय विधायकों के साथ-साथ कुछ वरिष्ठ विधायकों को भी वे शामिल कर सकते हैं. 
मंत्रियों की बैठक के बाद राज्य के गृह मंत्री बाला बच्चन ने स्वीकार किया कि राज्य में कांग्रेस को मिली करारी हार को लेकर मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से चर्चा की और कांग्रेस प्रत्याशियों को मिली हार के कारणों को जाना. अधिकांश मंत्रियों ने उन्हें बताया कि मोदी अंडर करंट के चलते देशभर में आए नतीजों की तरह मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस के खिलाफ परिणाम आए हैं. उन्होंने बताया कि  मंत्रियों से कहा गया है कि वे अब तेजी से विकास के कामों में जुट जाएं.
यह ताकत, बहुमत की है सरकार, चलेगी 10 साल
राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने कैबिनेट  की अनौपचारिक बैठक के बाद कहा कि भाजपा सरकार गिराने को लेकर अनर्गल बातें कर रही है. भाजपा जब चाहे, जहां चाहे, हम बहुमत साबित करेंगे. पटवारी ने कहा कि यह ताकत की सरकार है, बहुमत की सरकार है. पांच नहीं, पूरे दस साल चलेगी. उन्होंने बताया कि बैठक में कांग्रेस को मिली हार के कारणों पर मंथन किया गया, साथ ही वचनपत्र में की गई घोषणाओं को समय पर पूरा करने को मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों से कहा.
बहुमत सिद्ध कर चुके हैं और आगे भी कर देंगे
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ अकील ने कहा कि मंत्रिमंडल की अनौपचारिक बैठक में लोकसभा चुनाव में मंत्रियों की कार्यप्रणाली और सरकार की योजनाओं पर चर्चा की गई.साथ ही कर्जमाफी को लेकर मंत्रियों से फीडबैक लिया. बहुमत सिद्ध करने को लेकर आरिफ अकील ने कहा कि सरकार पूरे पांच साल चलेगा. हमने पहले भी बहुमत सिद्ध किया और जरुरत पड़ी तो आगे भी बहुमत सिद्ध करेंगे. प्रदेश कांग्रेस संगठन में बदलाव को लेकर उन्होंने कहा कि यह संगठन को तय करना है, सरकार को नहीं.

शनिवार, 25 मई 2019

4 अंतर्विरोध के कारण कभी भी गिर सकती है सरकार

 शिवराज ने कहा भाजपा नहीं रखती जोड़-तोड़ में विश्वास

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भाजपा कभी भी जोड़-तोड़ में विश्वास नहीं रखती है. प्रदेश की कांग्रेस सरकार अंतर्विरोध के कारण  गिर जाए, तो कुछ नहीं कहा जा सकता है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह बात आज राजधानी में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही.  प्रदेश और पूरे देश में भाजपा की ऐतिहासिक जीत पर उन्होंने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि लगातार दूसरी बार कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष भी औपचारिक तौर पर नहीं बना पाएगी. इस बार के चुनाव में जातिवाद, पंथवाद और राजतंत्रवाद खत्म होकर सिर्फ मोदीवाद की जीत हुई. उन्होंने कहा कि मोदीवाद का अर्थ है सबका साथ, सबका विकास.  कांग्रेस को मिली करारी हार को लेकर उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस के लिए आत्मचिंतन का समय है. चौहान ने कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि कांग्रेस सरकार वातानुकूलित भवनों में रही तो कब उनके पांव के नीचे से जमीन खिसक जाएगी, उन्हें पता ही नहीं चलेगा. वैसे भाजपा जोड़-तोड़ में विश्वास नहीं रखती है. शिवराज ने कहा कि कांग्रेस अंतर्विरोध के चलते कब गिर जाए, कुछ कह नहीं सकता. हमारी दिलचस्पी कांग्रेस की सरकार को गिराने में नहीं है.
कांग्रेस सरकार द्वारा पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर खजाना खाली छोड़ कर जाने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि भाजपा ने भरा-पूरा प्रदेश छोड़ा था. हर साल बजट प्रस्तुत किया जाता था. कांग्रेस की ओर से प्रचारित न्याय योजना पर उन्होंने कहा कि जनता हर चीज को ध्यान से देखती है. दल जो लिखेंगे, उसे पूरा करना ही होगा.
लोकसभा चुनाव के आए परिणामों को लेकर उन्होंने कहा कि  छिंदवाड़ा में थोड़ी मेहनत और हो जाती तो 29 की 29 सीट जीत जाते. ऐसी विजय, विजय नहीं कहलाती इसका अर्थ है जो किया आपने किया. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा यह चुनाव अभुत्वपूर्व रहा, चुनाव में लोग कह रहे थे मोदी लहर नहीं है. मगर प्रचार के दौरान मैंने मोदी लहर देखी. कांग्रेस इस बार भी औपचारिक रूप से नेता विपक्ष नहीं बना पाएगी.
अब नहीं चलेंगे राजा-महाराजा
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जनता अब जान चुकी है, चुनाव में  अब राजा-महाराजा नहीं चलेंगे. ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिली करारी हार को लेकर उन्होंने कहा कि सिंधिया में राजा-महाराजा वाला घमंड है, वे अपने आपको महाराजा बुलाना ज्यादा पसंद करते हैं, लेकिन अब जनता समझदार हो गई है. बाबाओं को लेकर शिवराज ने तंज कसा कि बाबाओं को राजनीति से दूर रखना जरुरी है. बाबाओं से देश को बचाना होगा. पे्रस से मिलिए कार्यक्रम में उन्होंने नवनिर्वाचित सांसदों को सलाह भी दी कि वे जमीन से जुड़कर चलें, जनता से जो वादे चुनाव में किए उन्हें पूरा करें.

सपा-बसपा का खिसका जनाधार

 दो प्रत्याशियों को मिले एक लाख से ज्यादा वोट, गिरा मत प्रतिशत भी

मध्यप्रदेश में मायावती और अखिलेश का गठजोड़ भी मोदी की सुनामी में अपना जनाधार खो गया. गठजोड़ के चलते दोनों ने अपने-अपने प्रत्याशी मैदान में उतार थे, मगर  वे अपना और पार्टी का जनाधार ही नहीं बचा पाए. गठजोड़ का फायदा भी भाजपा को मिला. बसपा और सपा दोनों ही दो प्रत्याशी ऐसे रहे जिन्हें एक लाख से अधिक वोट हासिल हुए, वहीं दोनों ही दलों का मत प्रतिशत भी गिरा है.  
राज्य में बसपा और सपा ने गठबंधन के तहत सभी 29 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था. सपा ने दो स्थानों टीकमगढ़ और खजुराहो में अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, जबकि 27 लोकसभा क्षेत्रों में बसपा के प्रत्याशी मैदान में थे. इनमें से दो स्थानों गुना और राजगढ़ में बसपा के प्रत्याशियों ने एनवक्त पर कांग्रेस का समर्थन कर मैदान छोड़ दिया था. गठबंधन के तहत दोनों ही दलों को अच्छे परिणाम की उम्मीद थी, मगर दोनों ही दल परिणाम आने के बाद अपना जनाधार खोते नजर आए. हालात कुछ ऐसे बने की बसपा जिसका विंध्य और ग्वालियर-चंबल में खासा प्रभाव पिछले चुनावों में देखा गया, वह प्रभाव भी नजर नहीं आया. बसपा के मुरैना से प्रत्याशी भड़ाना ऐसे रहे जिन्हें सबसे ज्यादा 1,29, 380 मत हासिल हुए. हालांकि वे भी चुनाव हार गए. इसके अलावा सतना में बसपा के अच्छेलाल कुशवाह को 1,09961 मत हासिल हुए. इन दो प्रत्याशियों के अलावा किसी भी बसपा प्रत्याशी को 1 लाख से ज्यादा मत हासिल नहीं हो सके. रीवा जहां पर लोकसभा चुनाव में बसपा अब तक दो बार खाता खोलकर संसद तक पहुंची थी, वहां पर उसके प्रत्याशी विकास पटेल को 91126 वोट ही हासिल हुए. इसी तरह बालाघाट में बसपा ने सपा प्रत्याशी कंकर मुंजारे को अपने पाले में लाकर अपने चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतारा. यहां भी बसपा को नुकसान ही हुआ. मुंजारे को 85,155  वोट ही हासिल हुए. इसी तरह सपा ने टीकमगढ़ में भाजपा के पूर्व विधायक आर.डी.प्रजापति को मैदान में उतारा उन्हें मात्र 42585 और खजुराहो में वीरसिंह पटेल को      40029 वोट ही हालिस हुए. 
दोनों का गिरा मत प्रतिशत
बसपा और सपा दोनों ही दलों का मत प्रतिशत भी इस चुनाव में गिरा है. बसपा को 2.38 प्रतिशत मत हासिल हुए हैं, जबकि 2014 के चुनाव में उसे 3.80, 2009 में 5.85, 2004 में 4.75, 1999 में 5.23, 1998 में 8.7, 1996 में 8.18 और 1991 के लोकसभा चुनाव में बसपा को 3.54 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे. इसी तरह समाजवादी पार्टी को इस चुनाव में 0.22 प्रतिशत वोट हासिल हुए हैं. सपा को 2014 में 0.75, 2009 में 2.83, 2004 में 3.19, 1999 में 1.37, 1998 में 0.65 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे.

गोयल के बाद लक्ष्मण ने उठाए प्रदेश नेतृत्व पर सवाल


मध्यप्रदेश में कांग्रेस को मिली हार के बाद कांग्रेस के कोषाध्यक्ष गोविंद गोयल के बाद अब दिग्विजय सिंह के भाई और चाचौड़ा के विधायक लक्ष्मण सिंह ने हार को लेकर प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने नेतृत्व में बदलाव करने की बात कही है.
लक्ष्मण सिंह ने आज ट्वीट के जरिए अपनी बात कही. उनके इस ट्वीट के बाद कांग्रेस में फिर हड़कंप मच गया है. सिंह ने ट्वीट कर कहा कि ‘कांग्रेस पार्टी के सभी कार्यकर्ता भाईयों, बहनों निराश न हो, जब मनुश्य पुनर्जन्म ले सकता है, तो अपनी पार्टी भी पुन्ह जीवित होगी, बस आपश्यकता है तो सही व्यक्ति को संगठन का काम देना.’ सिंह ने सीधे तौर पर तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पर निशाना नहीं साधा, मगर इशारों-इशारों में वे अपनी बात कह गए. सिंह के पहले कल शुक्रवार को कांग्रेस के कोषाध्यक्ष गोविंद गोयल ने भी कमलनाथ पर हमला बोला था और उनके काम का लेखा-जोखा तक मांगा था. इन दोनों नेताओं द्वारा हार के बाद जिस तरह से सोशल मीडिया में अपनी बात कहकर विरोध जताया  गया, उससे कांग्रेस नेताओं की चिंंता भी बढ़ गई है. 
पहले भी बोल चुके हैं हमला
लक्ष्मण सिंह ने पहली बार सरकार और प्रदेश नेतृत्व को लेकर सवाल उठाया हो, ऐसा नहीं है, वे पूर्व में भी अपनी बात इसी तरह रखकर सरकार का विरोध जताते रहे हैं. सिंह के अलावा उनकी पत्नी भी ट्वीट के जरिए पहले मंत्रिमंडल गठन को लेकर ट्वीट के जरिए मुख्यमंत्री कमलनाथ पर निशाना साध चुकी हैं.

भोपाल में सईद को ‘साहब’, लादेन को ‘जी’ कहने वाले हारे: शर्मा


 भोपाल लोकसभा क्षेत्र में जीत तो भाजपा की हुई है, लेकिन इसमें हार उन लोगों की हुई है, जो हाफिज सईद जैसे आतंकियों को ‘साहब’ कहते हैं, जो लोग ओसामा बिन लादेन जैसे विश्वस्तरीय आतंकवादी को ‘जी’   कहकर सम्मान देते हैं. 
यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस नेता और भोपाल से पराजित उम्मीदवार दिग्विजयसिंह द्वारा साध्वी प्रज्ञा की जीत को गोडसे की विचारधारा वालों की जीत बताने पर प्रतिक्रिया व्यक्त  करते हुए कही. शर्मा ने कहा कि ऐसे लोग जो हमेशा हिंसा और अशांति को हवा देने का काम करते रहे हैं, खुद को शांतिदूत बता रहे हैं, जो हास्यास्पद है.
शर्मा ने कहा कि भोपाल का चुनाव वास्तव में ऐसे दलों और नेताओं की हार है, जो राष्ट्र के विरोधियों, देश के टुकड़े-टुकड़े करने के नारे लगाने वालों, आतंकवादियों और हिंसा फैलाने वालों को सम्मान देते रहे हैं. शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी और अहिंसा के उनके सिद्धांत के अनुयायी होने का दावा करने वाले ये फर्जी लोग हमेशा हिंसा को हवा देते रहे हैं. 1984 के सिख दंगों से लेकर मुजफ्फरपुर, मेरठ और पता नहीं कितने दंगों में इन्होंने हजारों निर्दोष लोगों का खून बहाया है, पता नहीं कितने मासूमों की बलि ली है.  शर्मा ने कहा कि देश के सैकड़ों निरपराध नागरिकों का खून बहाने वाले, जाकिर नाईक जैसे लोगों की तरफदारी करने वाले इन नेताओं को किसी और पर टिप्पणी करने का अधिकार ही नहीं है.

सिंधिया की हार, मंत्री ने ईवीएम को बताया जिम्मेदार

मध्यप्रदेश में गुना संसदीय सीट से चुनाव हारे चार बार के सांसद ज्योरादित्य सिंधिया की हार को लेकर खूब चर्चा है, मगर लोग यह समझ नहीं पा रहे कि सिंधिया हारे किन कारणों से. वहीं आज सिंधिया समर्थक राज्य के राजस्व मंत्री गोविंद राजपूत ने सिंधिया की हार के लिए ईवीएम को जिम्मेदार ठहराया है.
राजपूत ने कहा कि पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि देश और प्रदेश में ईवीएम ही कांग्रेस की हार के लिए जिम्मेदार है. गुना से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ही जीत तय थी, मगर ईवीएम का खेल उन्हें हार की ओर ले गया. राजपूत ने कहा कि अगर देश में लोकतंत्र को जिंदा रखना है तो ईवीएम की बजाय बैलेट पैपर से मतदान कराए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि ईवीएम से चुनाव कराना बंद नहीं होगा तो देश में भाजपा को चुनाव हराना भी मुश्किल होगा. राहुल गांधी के इस्तीफे की पेशकश को लेकर उन्होंने कहा कि जिस तरह से शरीर में आत्मा होती है , जान होती है. ठीक उसी तरह से गांधी परिवार कांग्रेस की आत्मा है, उन्हें इस्तीफा नहीं देना चाहिए.
सरकार को कोई खतरा  नहीं
राजस्व मंत्री राजपूत ने एक सवाल के जवाब में कहा कि लोकसभा चुनाव के परिणाम कांग्रेस के अनुकूल नहीं रहे हैं, मगर सरकार  को इससे कोई खतरा नहीं है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सारे विधायक एकजुट हैं और रविवार को होने वाली विधायक दल की बैठक में हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी, साथ ही संगठित रहकर सरकार को स्थायी रुप से चलाने के लिए सभी विधायकों को मैदान में रहकर काम करने को कहा जाएगा.

शुक्रवार, 24 मई 2019

गांधी के हत्यारे की विचारधारा जीती, शांति दूत हारा

 दिग्विजय सिंह ने कहा कांग्रेस के पास सत्य और अहिंसा का रास्ता

भोपाल से कांग्रेस के प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस बार चुनाव में देश में महात्मा गांधी  के हत्यारे की विचारधारा जीती है और शांति दूत को हार मिली है. उन्होंने कहा कि भोपाल की जनता से जो वादा किया है वे उसे अब भी पूरा करेंगे.
सिंह ने आज पत्रकारों से  चर्चा करते हुए यह बात कही. मतगणना  के बाद सिंह आज मुख्यमंत्री निवास   पहुंचे थे और करीब 20 मिनट तक उनकी चर्चा मुख्यमंत्री कमलनाथ से हुई. इस चर्चा में  भाजपा द्वारा बार-बार सरकार गिराए जाने को लेकर की जा रही बयानबाजी पर मंथन दोनों नेताओं के बीच हुआ है. इस दौरान उनके साथ राजगढ़ से हारी कांग्रेस प्रत्याशी मोना सुस्तानी भी रही. इसके बाद दोपहर को दिग्विजय सिंंह मीडिया से रुबरु हुए. उन्होंने चुनाव में मिली हार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस बार चुनाव में गांधी के हत्यारे की विचारधारा जीत गई है और शांति दूत हार गया है. सिंह ने कहा कि यह सबसे बड़ी चिंता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास एक ही रास्ता है सत्य और अहिंसा का. सिंह ने कहा कि देश को यह बताना कि मोदी ही देश को सुरक्षित रख सकते हैं, यह गलत है. उनकी सरकार में जितने सैनिक शहीद हुए  उतने कभी नहीं हुए.
उन्होंने कहा कि मैं चुनाव हारा हूं. राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. मैंने जो भोपाल की जनता के साथ वादा किया है, मैं उस वादे को अब भी पूरा करूंगा. उन्होंने कहा कि मेरा यह प्रयास रहेगा कि मैं भोपाल में जनता के बीच रहकर उनके काम में मदद कर सकूं.
कौन सी जादू की छड़ी है इनके पास
दिग्विजय सिंह ने कहा कि इनके पास कौन सी जादू की छड़ी है जो इन्हें पहले ही परिणाम बता देती है. सिंह ने कहा कि 2014 के चुनाव में इन्होंने दावा किया कि 280 पार इस बार दावा किया कि 300 पार, परिणाम भी उसे के अनुरुप. उन्होंने कहा कि ऐसी कौन सी जादू की छड़ी है इनके पास जो इन्हें लक्ष्य पूरा करा देती है.

हारे दिग्विजय ने बढ़ाए वोट, हार का अंतर भी हुआ कम

भोपाल में कांग्रेस को बीते चुनाव की अपेक्षा पांच फीसदी से ज्यादा मिले वोट
मध्यप्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट पर कांग्रेस को हार तो मिली, मगर उसे इस बात का संतोष भी जरुर हुआ कि यहां पर उसका वोट 2014 के लोकसभा चुनाव की अपेक्षा 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है. बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को यहां पर 30.39 फीसदी वोट मिले थे, जबकि इस चुनाव में 35.63 फीसदी वोट हासिल हुए हैं.
राज्य की भोपाल संसदीय सीट पर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और भाजपा की प्रज्ञा सिंह ठाकुर के मैदान में उतरने से देशभर की नजरें टिकी थी. मोदी की सुनामी में कांग्रेस, भाजपा की गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर जीत तो हासिल नहीं कर पाई, मगर हार का अंतर कुछ कम करने में कामयाब रही. वहीं कांग्रेस को 2014 की अपेक्षा इस चुनाव में 5 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल हुए. 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पी.सी.शर्मा को उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें भाजपा के आलोक संजर ने चुनाव हराया था. उस चुनाव में कांग्रेस को 343482 मत हासिल हुए थे और शर्मा यह चुनाव 370696 अंतर से हार गए थे. इस चुनाव में कांग्रेस को मिले मतों का प्रतिशत 30.39 था. जबकि भाजपा के आलोक संजर को 714178 मत हासिल हुए थे. मतों का यह प्रतिशत 63.19 था. 
इस बार कांग्रेस के दिग्विजय सिंह को 501660 मत हासिल हुए. मतों का प्रतिशत 35.63 रहा है. जबकि भाजपा की प्रज्ञा सिंह ठाकुर को यहां पर 866482 मत हासिल हुए और वे 61.54 प्रतिशत मत पाकर जीत हासिल कर गई. आलोक संजर को 2014 में मिले मतों से इस बार प्रज्ञा को मत भी ज्यादा मिले हें. आलोक संजर को 2014 के चुनाव में 714178 मत मिले थे, तब भाजपा प्रत्याशी को मिले मतों का प्रतिशत 63.19 था.
नोटा को मिले 5 हजार से ज्यादा मत
भोपाल संसदीय क्षेत्र में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) को 5430 मतदाताओं ने पसंद किया. इनमें 17 पोस्टल वोट भी शामिल हैं. भोपाल  संसदीय क्षेत्र में भाजपा और कांगे्रस के अलावा कुल 30 प्रत्याशी मैदान में थे. भाजपा और कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा वोट बहुजन समाज पार्टी के माधौ सिंह अहिरवार को 11277 वोट मिले हैं. उनके वोटों का प्रतिशत 0.8 रहा है. बसपा के बाद सपाक्स पार्टी की प्रत्याशी वीणा घाणेकर को 3264 मत हासिल हुए. उन्हें 0.23 प्रतिशत वोट मिले हैं.
औरंगाबाद से आकर लड़े चुनाव, मिले 12 सौ वोट

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल संसदीय सीट पर जब भाजपा ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर को मैदान में उतारा और उन्होंने महाराष्ट्र एटीएस प्रमुख स्वर्गीय हेमंत करकरे को लेकर बयान दिया तो उससे आहत होकर पुलिस सेवा के अधिकारी रहे रियाजुद्दीन देशमुख ने भोपाल से निर्दलीय रुप में पर्चा भर दिया था. रियाजुद्दीन, हेमंत करकरके को अपना आदर्श मानते है,  वे औरंगाबाद से भोपाल संसदीय क्षेत्र में मैदान में उतरे, मगर उन्हें मात्र 1251 मत ही हासिल हुए. रियाजुद्दीन को 0.09 प्रतिशत मत मिले. 

हार पर घमासान, कोषाध्यक्ष ने कमलनाथ के काम पर उठाए सवाल


मध्यप्रदेश में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद अब घमासान मचने लगा है. चुनाव परिणाम आने के बाद आज दूसरे दिन कांग्रेस के कोषाध्यक्ष गोविंद गोयल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से उनके कामों की रिपोर्ट मांगी है.
कांग्रेस कोषाध्यक्ष ने आज सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री कमलनाथ पर सवाल उठाए. उनके द्वारा उठाए गए सवालों से पार्टी सियासी हलचल मच गई है. गोयल ने सोशल मीडिया के जरिए कमलनाथ के कामों पर सवाल उठाए और उनसे उनके कामों की रिपोर्ट मांगने की बात कही. गोयल ने फेसबुक पर लिखा है  ‘कमलनाथ ने कहा था कि मैं अब पीसीसी अध्यक्ष पद पर समय नहीं दे पाऊंगा, जिन्होंने माह में केवल एक घंटे समय देकर पीसीसी संभालने की बात कही उनसे काम की रिपोर्ट मांगी जानी चाहिए.’ गोयल ने फेसबुक पर दूसरी पोस्ट में यह भी लिखा है कि  ‘प्रदेश में हार के लिए राहुल गांधी नहीं, बल्कि प्रदेश के बड़े नेता ही जिम्मेदारी है.’ 
गोयल द्वारा फेसबुक पर लिखी इन बातों के बाद सियासी हलचल मचना शुरु हो गया. बड़े नेता तो इस मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं, मगर छोटे कार्यकर्ताओं का गोयल को खासा समर्थन मिला है. गोयल द्वारा की गई इस पोस्ट के बाद यह बात साफ हो गई है कि विधानसभा चुनाव में जिस तरह से कांग्रेस ने एकजुटता के साथ चुनाव लड़ा था, वैसा चुनाव इस बार लोकसभा का नहीं लड़ा. गोयल सहित कई नेताओं को भी इसी तरह का मलाल है. यहां उल्लेखनीय है कि गोयल भोपाल से दिग्विजय सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने पर नाराज भी हुए थे, फिर उन्हें मना भी लिया गया था. हालांकि गोयल को दिग्विजय सिंह का समर्थक ही माना जाता है. 

समाधी लेने वाले स्वामी वैराग्यानंद को ढ़ूंढ रहे लोग


मध्यप्रदेश की भोपाल सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह को मिली हार के बाद लोगों ने महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद की खोज शुरु कर दी है.सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर कई तरह के कमेंट भी किए जा रहे हैं. एक युवक ने तो उनका मोबाइल नंबर तलाश लिया और उनसे चर्चा कर यह भी पूछ लिया कि वे कब  जल समाधी ले रहे हैं. इस पर महामंडलेश्वर नाराज हो गए. युवक द्वारा की गई बातचीत का आडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जो चर्चा का विषय भी बन गया है.
 दरअसल महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद ने दावा किया था कि अगर दिग्विजय सिंह भोपाल से चुनाव नहीं जीते तो मैं जल समाधि ले लूंगा. उन्होंने यह भी कहा है कि मैं दिग्विजय की जीत के लिए 5 मई को 5 किलो लाल मिर्च हवन करेंगे. उन्होंने यहां अनुष्ठान भी किया था. अब उनके इसी बयान को लेकर सोशल मीडिया पर लोग बाबा के लिए तलाशी अभियान चलाए हुए हैं. सोशल मीडिया पर तरह-तरह की पोस्ट बाबा के लिए किए जा रहे हैं.
 कांग्रेस के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह के हारने पर समाधि लेने का वादा करने वाले महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद महाराज अब दिग्विजय की हार पर तिलमिला रहे है एक शख्स की उनसे फोन पर हुई बातचीत का आडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस आडियो में  स्वामी वैराग्यानंद से युवक पूछ रहा है कि वे  दिग्विजय सिंह की हार पर जल समाधि लेने की बात कहते हुए बड़े-बडे दावे कर रहे थे और इसके बावजूद दिग्विजय सिंह हार गए. अब आप ही बताईये साधु संत अगर इसी तरह से  राजनीतिक लोगों के पक्ष विपक्ष में झूठे दावे करेंगे तो संत समाज की मर्यादा कैसे बचेगी. साथ ही युवक उनसे यह पूछता सुनाई दे रहा है कि वे वचन के अनुसार कब जलसमाधी ले रहे हैं. आडियो में बाबा और युवक के बीच लंबी चर्चा ँ हुई है, इस चर्चा में बाबा युवक पर नाराज भी होते सुनाई दे रहे हैं, मगर वे युवक को यह नहीं बता रहे है कि वे अपना वचन पूरा करेंगे या फिर नहीं. युवक द्वारा महामंडलेश्वर से चर्चा का जब आडियो वायरल किया और इसकी जानकारी स्वामी वैराग्यानंद को लगी तो इसके बाद उन्होंने अपना मोबाइल ही बंद कर लिया. 

कांग्रेस विधायकों के साथ 26 को बैठक करेंगे मुख्यमंत्री


मध्यप्रदेश में कांग्रेस को मिली हार के बाद अब मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधायकों की बैठक 26 मई को बुलाई है. बैठक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में होगी. इसके अलावा वे दो दिन रविवार और सोमवार को अपने मंत्रिमंडल के साथ भी बैठक करेंगे. 
मध्यप्रदेश में कांग्रेस को मिली हार के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 26 मई को प्रदेश के सभी कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई है. इस बैठक में सभी विधायकों के हर हाल में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं. विधायकों को भेजे गए निर्देश में साफ कहा गया है कि उन्हें रविवार और सोमवार दोनों ही दिन भोपाल में रहना है. इन दोनों ही दिन मुख्यमंत्री राजधानी भोपाल में अपने मंत्रिमंडल की बैठक भी लेंगे. सूत्रों की माने तो   पहले दिन अनौपचारिक कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों से उनके क्षेत्र में पार्टी के कारण पूछे जा सकते हैं. यह बैठक 11 बजे से रखी गई है, रविवार की छुट्टी और बिना एजेंडे के होने के कारण यह बैठक मुख्यमंत्री निवास में होने की उम्मीद है. 
जानकारी के अनुसार आचार संहिता के कारण दो महीने नहीं हो सकी कैबिनेट की बैठक 25 मई को संभावित मानी जा रही थी. मगर चुनाव परिणामों के बाद यह बैठक एक दिन टल गई है. वहीं अब एक की बजाय लगातार दो दिन कैबिनेट की बैठक आयोजित की जाएगी. कैबिनेट की यह बैठकें लगातार 26 एवं 27 मई को होगी. सूत्रों के मुताबिक पहले दिन की बैठक बिना एजेंडे के होगी. मुख्यमंत्री कमलनाथ इस बैठक में लोकसभा चुनाव के परिणामों की समीक्षा करेंगे, अगले दिन कैबिनेट एजेंडे पर चर्चा होगी.

गुरुवार, 23 मई 2019

अपने घरों में दिग्गज हुए धराशाही


मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपना ही पिछला रिकार्ड तोड़ दिया है. भाजपा ने इस चुनाव में पहली बार 29 में से 28 सीटों पर बढ़त बनाई और जीत की ओर कदम बढ़ाया. भाजपा की इस जीत के चलते कांग्रेस के दिग्गजों को अपने घरों में ही हार का मुंह देखना पड़ा है. 
एग्जिट पोल के बाद भी कांग्रेस द्वारा मध्यप्रदेश में एक दर्जन सीटों पर किए जा रहे जीत के दावे आज फिर धराशाही हो गए. आज सुबह जब राज्य के सभी 51 जिला मुख्यालयों पर मतगणना शुरु हुई तो बालाघाट और गुना संसदीय क्षेत्र में जरुर कांग्रेस के प्रत्याशियों को कुछ समय के लिए बढ़त मिली, मगर दोपहर होते-होते यहां के रुझान भी भाजपा के पक्ष में चले गए. भाजपा के पक्ष में गए रुझानों के चलते भोपाल में दिग्विजय सिंह पिछड़े ही साथ ही कांग्रेस के दिग्गज नेता गुना से ज्योरादित्य सिंंधिया, रतलाम-झाबुआ से कांतिलाल भूरिया, खण्डवा से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, मुरैना से रामनिवास रावत, सीधी से अजय सिंह, मंदसौर से मीनाक्षी नटराजन, जबलपुर से विवेक तन्खा, खजुराहो से कविता सिंह, इंदौर से पंकज संघवी जैसे नेता भी हार की ओर बढ़ते चले गए. कांगे्रस प्रत्याशी अपनी हार तो कबूल करते नजर आए, मगर वे यह नहीं समझ पाए कि परिणाम एकदम कैसे विपरीत हुए. अधिकांश प्रत्याशियों ने कहा कि परिणाम उनकी उम्मीद से विपरीत रहे. 
राजधानी भोपाल सहित राज्य के सभी मतगणना केन्द्रों पर दोपहर के बाद माहौल भी बदला नजर आया. अधिकांश मतगणना केन्द्रों से कांग्रेस प्रत्याशी अपने घरों की ओर वापस जाते नजर आए और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जोश भी निराशा में बदलता गया. कई स्थानों पर तो मतगणना केन्द्रों पर भाजपा के कार्यकर्ता और पदाधिकारी कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से ज्यादा संख्या में उपस्थित रहे. प्रदेश में यह पहला अवसर है जब लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को इस तरह की बुरी हार का सामना करना पड़ा है. बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस गुना और छिंदवाड़ा में जीती थी, मगर इस बार गुना भी उसके हाथ से फिसल गया.
दिग्विजय को लगा दोहरा झटका
मध्यप्रदेश की भोपाल संसदीय सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी दिग्विजय सिंह जब प्रज्ञा सिंह ठाकुर से पिछड़ते नजर आए तो उनके समर्थकों में मायूसी छाई रहे. वैसे वे भी अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ मतगणना स्थल पर पहुंचे थे और पूर्व मंत्री उमांशकर गुप्ता के साथ बैठे थे. मगर जब मतगणना के रुझानों में वे भाजपा प्रत्याशी से पिछड़ते नजर आए तो निराश भी हुए. सिंह को भोपाल के अलावा उनके अपने गढ़ राजगढ़ संसदीय क्षेत्र में भी कांग्रेस प्रत्याशी मोना सुस्तानी के पिछड़ने से लगा. सिंह को कांग्रेस ने भोपाल से मैदान में उतारा था, जिसके चलते वे भोपाल तक की सीमित होकर रह गए थे. साथ उनकी पुत्र जयवर्धन सिंह और भाई लक्ष्मण सिंह ने समर्थकों के साथ भोपाल में डेरा जमाए रखा जिसके चलते राजगढ़ संसदीय क्षेत्र में सिंह ताकत के साथ ध्यान  नहीं दे पाए और दोनों ही स्थानों पर भाजपा से कांग्रेस पिछड़ती चली गई. 
विधानसभा के बाद अब लोकसभा भी हारे
कांग्रेस ने सीधी में भाजपा की रीति पाठक के खिलाफ कांग्रेस के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह को मैदान में उतारा था. इसी तरह मुरैना में रामनिवास रावत को मैदान में उतारा. दोनों ही प्रत्याशी विधानसभा चुनाव में हार चुके थे. इसके बाद भी कांग्रेस ने इन पर भरोसा जताया और उनकी पसंद के क्षेत्र से मैदान में उतारा, मगर कांग्रेस को यहां पर कोई सफलता हासिल नहीं हुई. दोनों ही स्थानों पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा. रावत ने प्रयास तो खूब किए, मगर उनका प्रयास यहां सफल नहीं हुआ. रावत ने इस बार भाजपा के नाराज चल रहे नेताओं को अपने साथ लिया, मगर यहां उनका गणित नहीं बैठा. वैसे ही अजय सिंह भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरे थे, मगर उन्हें इस बार भी निराशा ही हाथ लगी. अजयसिंह पिछला लोकसभा चुनाव भी सतना से गणेश सिंह से हार चुके थे.
संघवीं और अशोक सिंह को फिर हाथ लगी निराशा
इंदौर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के अलावा पूर्व में विधानसभा चुनाव हारे पंकज संघवी और ग्वालियर से तीन बार लगातार लोकसभा चुनाव हारे अशोक सिंह पर दाव खेला वह भी मोदी सुनामी में असफल ही रहा. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के मैदान में न होने से पंकज संघवी पर कांग्रेस को भरोसा था. यहां पर कमलनाथ मंत्रिमंडल के तीन मंत्रियों जीतू पटवारी, सज्जन सिंह वर्मा और तुलसी सिलावट पूरी ताकत से मैदान में थे. इसी तरह ग्वालियर में महल के अलावा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर और इमरती देवी  को जिम्मेदारी दी गई थी. मंत्रियों का प्रभाव भी जनता पर बेअसर दिखाई दिया. साथ ही यह पहला अवसर भी रहा, जब ग्वालियर के मतदाता ने महल को अस्वीकार किया.

गढ़ों को बचाने में रहे सफल

देश में चली मोदी सुनामी में कांग्रेस के नकुलनाथ ही एक ऐसे प्रत्याशी रहे जिन्होंने अपने पिता कमलनाथ के गढ़ को बचाने में सफलता हासिल की. वहीं  केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह, पूर्व प्रदेश  अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने भाजपा के गढ़ों को बचाने में कामयाबी पाई और चुनाव में अच्छे अंतर से विजय भी हासिल की.
मध्यप्रदेश मेंं मुख्यमंत्री कमलनाथ अपना गढ़ कायम रखने में सफल होते हुए नजर आ रहे हैं. उनका अभेद किला छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर उनके बेटे एवं कांग्रेस उम्मीदवार नकुलनाथ भाजपा उम्मीदवार नत्थनशाह कवरेती पर बढ़त बनाई और अंत तक वे आगे रहे. वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधानसभा का पहला उपचुनाव लड़ा. कमलनाथ भाजपा उम्मीदवार विवेक साहू को हराकर चुनाव जीते. हालांकि उनके चुनाव पर भी मोदी लहर हावी दिखाई दी. कमलनाथ की जीत बहुत बड़ी नहीं रही और वे अपने बेटे को भी बड़े अंतर से नहीं जीता पाए.
वहीं भाजपा की ओर से इस बार कई स्थानों पर भीतरघात को लेकर यह माना जा रहा था कि भाजपा के सामने अपने गढ़ों को बचाने का संकट है, मगर मोदी की सुनामी ने भाजपा के इन गढ़ों को बचाने में सफलता हासिल की. केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ग्वालियर से चुनाव न लड़कर मुरैना से चुनाव लड़े. उनका यहां विरोध भी हुआ. वर्तमान सांसद अनूप मिश्रा और पूर्व सांसद अशोक अर्गल नाराज रहे और घरों में बैठे रहे, मगर वे  तोमर चुनाव जीत गए. इसी तरह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की राह में पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस रोड़ा मानी जा रही थी, मगर मोदी की सुनामी में नंदकुमार सिंह फिर से एक बार चुनाव जीत गए और भाजपा की इस परंपरागत सीट पर कब्जा बरकरार रखा. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के सामने कांग्रेस के विवेक तन्खा थे. मुकाबले को कड़ा माना जा रहा था, मगर राकेश सिंह ने एक बार फिर यहां पर तन्खा को पीछे किया और भाजपा के गढ़ को बनाए रखा.
टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र में केन्द्रीय मंत्री वीरेन्द्र खटीक और दमोह से पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल को भाजपा ने मैदान में उतारा था. दोनों ही स्थानों पर भाजपा को अपनों से ज्यादा खतरा था, मगर आज जब मतगणना शुरु हुई इसके बाद से दोनों ही प्रत्याशियों ने अपने प्रतिद्वंदियों पर बढ़त बनाई जो अंतिम राउंड तक बरकरार रही. सीधी से रीति पाठक का भी जमकर विरोध हुआ था, कुछ पदाधिकारियों ने तो पदों से इस्तीफा भी दे दिया था, मगर यहां पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभा के बाद जो माहौल बदला उसका परिणाम आज मतगणना के दौरान दिखा और भाजपा को यहां भी सफलता हासिल हुई. रीति पाठक ने कांग्रेस के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह को शिकस्त दी. इसके अलावा पूर्व केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंंह कुलस्ते का मण्डला में इस बार जमकर विरोध हुआ, चुनाव प्रचार के दौरान सिर्फ शिवराज सिंंह चौहान ही उनके क्षेत्र में सभा लेने गए थे, राष्ट्रीय  नेताओं ने उनके क्षेत्र से इस बार दूरी बनाए रखी, मगर कुलस्ते भी भाजपा के इस गढ़ को बचाने में सफल रहे.

बरकरार रही शिवराज की लोकप्रियता

कैलाश विजयवर्गीय का बढ़ेगा कद
मध्यप्रदेश में भाजपा के पक्ष में जिस तरह से परिणाम आए, उसके बाद यह साबित हो गया कि प्रदेश में शिवराज की लोकप्रियता अब भी बरकरार है. शिवराज सिंह ने मैदान में जिस तरह से सभाएं ली और नेताओं की नाराजगी को नकार कर कार्यकर्ताओं का उत्साह बरकरार रखा उसने जीत में बड़ी भागीदारी की है. वहीं प्रदेश के वरिष्ठ नेता और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयर्गीय का कद भी इस जीत के बाद संगठन में बढ़ने की बात सामने आ रही है. वे जरुर पश्चिम बंगाल में थे, मगर इंदौर में उनकी टीम ने भाजपा की जीत बरकरार रखने में सफलता हासिल की है.
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद यह माना जा रहा था कि शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता प्रदेश में घट रही है. इसके चलते उनका विरोध भी संगठन में होने लगा था, साथ ही उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर प्रदेश से बाहर राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की कवायद भी होने लगी थी, मगर शिवराज प्रदेश से बाहर नहीं गए, इसके बाद संगठन ने लोकसभा चुनाव में उन्हें जिम्मेदारी सौंपी और संकेत दिए कि जीत का रिकार्ड भाजपा को तोड़ना है. इसके बाद शिवराज सिंह ने जमकर मेहनत की और प्रदेश भर में लगातार सभाएं कर लोगों की बीच पहुंचे साथ ही निराश कार्यकर्ताओं में जोश भरा. इसके चलते कई स्थानों पर नाराज नेताओं की नाराजगी के बाद भी भाजपा को सफलता हासिल हुई. करीब एक दर्जन लोकसभा सीटों पर भाजपा को अपनों से ही खतरा था, मगर चुनाव के परिणामों ने साफ संदेश दिया कि राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के साथ-साथ प्रादेशिक संगठन अब भी प्रदेश में मजबूत है. 
शिवराज सिंह के अलावा राज्य के वरिष्ठ नेता और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल के प्रभारी होने के कारण वैसे तो राज्य में सक्रिय नजर नहीं आए, मगर वे प्रदेश स्तरीय बैठकों में कई बार शामिल हुए और चुनावी रणनीति की बिसात भी बिछाई. इंदौर से जब  सुमित्रा महाजन का टिकट काटकर शंकर लालवानी को दिया गया तो यह कहा जा रहा था कि वे नाराज है, मगर कैलाश की टीम यहां लगी रही. एक अवसर तो ऐसा भी आया जब पश्चिम बंगाल में उन्होंने अपनी टीम के कई सदस्यों को बुला लिया, तब कहा जा रहा था कि भाजपा यहां कमजोर होगी, मगर विजयवर्गीय ने अपनी अधूरी टीम शंकर के साथ लगाए रखी. परिणामों के बाद यह माना जा रहा है कि कैलाश विजयर्गीय का कद अब राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ना तय है. संगठन के कुछ नेता तो उन्हें मोदी मंत्रिमंडल का सदस्य भी मान रहे हैं.


बुधवार, 22 मई 2019

कटनी जिले में परिणाम सबसे पहले आने की संभावना

 आयोग ने की मतगणना की सभी तैयारियां पूरी, सुबह 8 बजे एक साथ शुरु होगी मतगणना

मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर कल 23 मई को होने वाली मतगणना की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है. मतगणना सभी 29 लोकसभा क्षेत्रों में एक साथ सुबह 8 बजे शुरु होगी. सबसे पहले कटनी जिले का चुनाव परिणाम आने की संभावना है, यहां की मतगणना प्रदेश के अन्य जिलों से पहले हो जाएगी. जबकि भोपाल सहित प्रदेश के करीब 20 संसदीय क्षेत्रों का परिणामों की घोषणा समय लगने की संभावना जताई जा रही है.
यह जानकारी मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव ने दी. उन्होंने बताया कि  कटनी में मतगणना के लिए 24 टेबल लगाई गई हैं. इसलिए यहां काउटिंग जल्दी पूरी हो जाएगी. यहां का परिणाम भी सबसे पहले घोषित किया जा सकता है. राव ने बताया कि मतगणना सुबह 8 बजे से सभी 51 जिला मुख्यालयों में स्थित मतगणना केन्द्रों पर शुरु होगी. शांतिपूर्वक एवं पारदर्शी तरीके से मतगणना संपन्न कराने के लिए जिलों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली गई है. आयोग के निर्देशों के अंतर्गत जिस मतगणना कक्ष में डाक मतपत्रों की गणना होगी, वहां पर ईव्हीएम में दर्ज मतों की गणना डाक मतपत्रों की गणना प्रारंभ होने के 30 मिनिट बाद प्रारंभ की जाएगी. शेष मतगणना कक्षों में ईव्हीएम की मतगणना निर्धारित समय सुबह 8 बजे से प्रारंभ होगी.
पोस्टल बैलेट की गणना रिटर्निंग आॅफिसर मुख्यालय के 29 मतगणना स्थलों पर की जाएगी. पृथक से नियुक्त सहायक रिटर्निंग आफिसर पोस्टल बैलेट की गणना करेंगे. सभी ईव्हीएम की मतगणना पूर्ण होने के उपरान्त प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के 5 व्हीव्हीपैट को रैण्डम पद्धतिसे चुना जाकर उनकी पर्चियों की गणना की जाएगी. इन पांच व्हीव्हीपैट की पर्चियों की गणना क्रमबद्ध तरीके से (एक के बाद एक) की जाएगी.
9 हजार सुरक्षा कर्मी तैनात
प्रदेश में सभी मतगणना स्थल पर त्रि-चक्रीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है. सुरक्षा व्यवस्था के लिए समस्त मतगणना स्थल पर कुल 9 हजार सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं. मतगणना स्थल पर आने वाले कर्मचारियों, मतगणना अभिकर्ता$ओं एवं मतगणना से संबंधित अन्य व्यवस्थाओं के लिए नियुक्त किए गए सभी व्यक्तियों को जांच के बाद ही मतगणना स्थल में प्रवेश दिया जाएगा. मतगणना परिसर, स्ट्रांग रूम से मतगणना कक्ष तक ईव्हीएम मशीन के लाने-ले जाने वाले मार्ग एवं मतगणना कक्ष में कुल 1800 सीसीटीव्ही कैमरे लगाए गए हैं. इनमें 3 कैमरे मतगणना कक्ष में, न्यूनतम 10 कैमरे मशीन के परिवहन मार्ग में एवं 5 कैमरे मतगणना स्थल परिसर की निगरानी के लिए लगाए गए हैं. ये कैमरे वायर द्वारा कंट्रोल रूम से कनेक्ट होंगे. मतगणना की वेबकास्टिंग नहीं की जाएगी. 
वोटर हेल्प लाइन मोबाइल एप से ले सकेंगे जानकारी
मतगणना के प्रत्येक चरण के परिणामों  की जानकारी के लिए 'वोटर हेल्प लाइन' मोबाइल एप तैयार किया गया है. इसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं. साथ ही भारत निर्वाचन आयोग के सुविधा पोर्टल पर भी मतगणना की जानकारी दर्ज की जाएगी. इसके अतिरिक्त भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से भी परिणाम की जानकारी प्राप्त की जा सकेगी. प्रत्येक मतगणना कक्ष में लगाए गए बोर्ड पर भी परिणामों की जानकारी अंकित की जाएगी.

मतगणना आज, खत्म होगा इंतजार

भोपाल, छिंदवाड़ा और गुना पर टिकी रहेगी नजरें

मध्यप्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों पर कल 23 मई की सुबह 8 बजे से मतगणना शुरु होगी. मतगणना को लेकर आज भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेताओं ने सभी संसदीय क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं और प्रत्याशियों से चर्चा कर मतगणना स्थल पर तैनात रहने को कहा. कल गुरुवार को होने वाली मतगणना के दौरान राजधानी भोपाल के अलावा छिंदवाड़ा और गुना संसदीय क्षेत्र के परिणामों पर लोगों की नजरें टिकी रहेंगी.
मध्यप्रदेश में चार चरणों में हुए मतदान के बाद कल 23 मई की सुबह 8 बजे से सभी लोकसभा क्षेत्रों में एक साथ मतगणना होगी. राज्य निर्वाचन आयोग ने मतगणना की सभी तैयारियां पूरी कर ली है. आयोग के मुताबित परिणाम देर रात तक घोषित होने की संभावना है, हालांकि राज्य निर्वाचन पदाधिकारी व्ही.एल.कांताराव ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि राज्य के कटनी जिले का परिणाम सबसे पहले और इंदौर का परिणाम बाद में आने की संभावना है. मतगणना के लिए राज्य के सभी 51 जिला मुख्यालय पर बनाए गए 51 मतगणना स्थलों पर कुल 292 मतगणना कक्ष बनाए गए हैं. मतगणना स्थलों पर अधिक डाक मतपत्र होने के कारण उनकी गणना के लिए आयोग से अनुमोदन के बाद अलग से 19 कक्ष बनाए गए हैं. ईव्हीएम मतों की मतगणना के लिए प्रदेश में कुल 292 कक्ष बनाए गए हैं. पोस्टल बैलेट की गणना के लिए बनाए 19 मतगणना कक्ष सहित कुल 311 कक्षों में कुल 3 हजार 409 टेबल लगाई गई हैं. मतगणना के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो इसके लिए सुरक्षा के पूरे इंतजाम भी किए गए हैं. आयोग के निर्देश पर सभी मतगणना स्थलों पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.
इन सीटों पर टिकी रहेगी नजर
राज्य में वैसे तो लोगों को सभी 29 सीटों के परिणाम का इंतजार रहेगी, मगर राजधानी भोपाल में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह और भाजपा की प्रज्ञा सिंह ठाकुर के परिणामों के अलावा छिंदवाड़ा में नकुलनाथ एवं स्वयं विधानसभा उपचुनाव लड़े कमलनाथ के परिणाम का इंतजार रहेगा. इसके अलावा गुना में सांसद ज्योरादित्य सिंंधिया, मुरैना में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और सीधी में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के परिणामों पर लोगों की नजरें टिकी रहेंगी.
कांग्रेस को 9 सीटें जीतने का भरोसा, 5 पर मुकाबला
कांग्रेस द्वारा सभी 29 लोकसभा सीटों में से 9 पर जीत का भरोसा जताया जा रहा है, जबकि 5 सीटों पर भाजपा से उसका कड़ा मुकाबले का आकलन है, यहां परिणाम कांग्रेस अपने पक्ष में भी मान रही है. कांग्रेस द्वारा मंगलवार को प्रत्याशियों, विधायकों और पदाधिकारियों की हुई बैठकों में समीक्षा के बाद यह बात सामने आई कि वह 9 लोकसभा सीटों पर जीत की स्थिति में हैं. इन लोकसभा सीटों में छिंदवाड़ा, गुना, ग्वालियर, सतना, खुजराहो, बालघाट मण्डला, मुरैना और सीधी बताई गई हैं. वहीं 5 सीटों भोपाल, जबलपुर, शहडोल, टीकमढ़ और देवास में कांग्रेस मुकाबला कड़ा मान रही है. इन सीटों में से कुछ पर उसे कांग्रेस के पक्ष में परिणाम आने की उम्मीद है. वहीं भाजपा की ओर से शुरु से ही यह दावा किया जा रहा है कि वह 25 से 27 सीटें जीत रही है. वहीं एग्जिट पोल के बाद भाजपा के कुछ पदाधिकारी सभी 29 सीटों पर जीत का दावा भी करते नजर आ रहे हैं.

चुनाव खत्म, अब तो कर्जमाफी की सच्चाई स्वीकारें शिवराज

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखा पत्र

मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव के समाप्त होने के बाद भी किसान कर्ज माफी का मुद्दा गर्माया हुआ है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान को एक पत्र लिखकर कहा कि चुनाव समाप्त हो गया है, कर्जमाफी को अब तो वे स्वीकार करें. पत्र में उन्होंने दावा किया है कि सरकार ने 21 लाख किसानों का कर्ज माफ कर दिया है.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने पत्र में कहा कि चुनाव आचार संहिता लागू होने तक 21 लाख किसानों का कर्ज माफ हो चुका था और चुनाव प्रक्रिया खत्म होते ही किसान कर्ज माफी का सिलसिला फिर शुरू हो जाएगा.  मुख्यमंत्री कमलनाथ ने  पूर्व मुख्यमंत्री चौहान को पत्र लिखकर कहा कि 17  दिसंबर 2018 को पदभार ग्रहण करते ही सबसे पहला आदेश किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ करने का जारी किया गया. उसके बाद किसानों के खाते में कर्ज माफी की राशि को पहुंचाना शुरू कर दिया गया. इसके साथ ही 22 फरवरी से किसानों को कर्ज माफी के प्रमाण पत्र भी बांटे जाने लगे.
चौहान ने लोकसभा चुनाव के दौरान कमलनाथ सरकार पर किसानों का कर्ज माफ करने का वादा पूरा न करने का आरोप लगाया था. इसका जवाब देते हुए कमलनाथ ने अपने पत्र में लिखा है, लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले 10 मार्च तक 21 लाख किसानों का कर्ज माफ किया जा चुका है. 4.83 किसानों के खातों में कर्ज माफी की राशि चुनाव आयोग से अनुमति मिलने के बाद डाली गई.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने चुनाव खत्म होने के बाद शिवराज सिंह चौहान से उम्मीद जताई है कि वे किसानों का कर्ज माफ किए जाने की सच्चाई को अब स्वीकार करेंगे, जो चुनाव के दौरान अस्वीकार करते रहे. उन्होंने दावा किया है कि चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद कर्ज माफी की प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी. इसके लिए कमलनाथ ने चौहान से सहयोग और शुभकामनाएं भी मांगी हैं.
उल्लेखनीय है कि चुनाव के दौरान शिवराज सिंह चौहान द्वारा कर्ज माफी को छलावा करार दिए जाने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक सभा में चौहान के भाई और परिजनों के कर्ज माफी आवेदन दिखाकर हमला बोला था. साथ ही 21 लाख किसानों का ब्यौरा भी चौहान के घर भेजा था. 
परिणाम बताएंगे कौन सच्चा है: शिवराज
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा लिखे पत्र पर कहा कि कल 23 मई को लोकसभा चुनाव के आने वाले परिणाम ही यह बता देंगे कि कौन सच्चा है. उन्होंने कहा कि किसानों के साथ धोखा हुआ है. उन्होंने पूछा कि कहां गए 10 दिनों में किसानों का कर्ज माफ करने वाले. शिवराज ने कहा कि किसानों के साथ कांग्रेस ने धोखा किया है. पहले कहा सभी किसानों का कर्ज माफ होगा, इसके बाद अब यह कहने लगे अल्पकालीन फसली किसानों का ऋण माफ होगा. शिवराज ने कहा कि पता नहीं कौन अधिकारी है जो मुख्यमंत्री को इस तरह की सलाह दे रहा हैै.
झूठ बोल रही कांग्रेस: नरोत्तम मिश्रा
मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र के बाद पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री पर पलटवार किया है. मिश्रा ने कहा कि किसान कर्ज माफी को लेकर कांग्रेस झूठ बोल रही है.कांग्रेस सरकार द्वारा किसानों के साथ छलावा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पत्र में लिखी सभी बातें असत्य हैं. मिश्रा ने कहा कि  उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कर्ज माफी के नाम पर पहले दिन से ही झूठ बोला है. कांग्रेस को उसके इस झूठ का जवाब कल 23 मई को चुनाव परिणाम आने के साथ मिल जाएगा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश में 24 सीटें हार रही हैं. ईवीएम को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस को किसी पर भरोसा नहीं है. न तो उसे ईवीएम पर भरोसा है और न ही संविधान और लोकतंत्र पर. कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट पर भी भरोसा नहीं है, उसे अगर भरोसा है तो बस इटली पर.

मंगलवार, 21 मई 2019

भीख मंगवाने वाले दो गिरोह पकड़ाए



राजधानी में आज भीख मंगवाने वाले दो गिरोहों को पकड़ा है.  इन गिराहों से 44 बच्चों को 7 पुरुषों और 15 महिलाओं को भी पकड़ा है.
राजधानी में आज जिला प्रशासन, क्राइम ब्रांच और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रुप से की गई कार्रवाई में ये दो गिरोह पकड़ाए है.  इन गिराहों से 44 बच्चों को 7 पुरूष और 15 महिलाओं के साथ पकड़ा गया है.  जानकारी के अनुसार 26 बच्चों 3 पुरूष और 9 महिलाएं जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के सीआई कालोनी क्षेत्र से जबकि 18 बच्चे, 4 पुरूष और 7 महिलाएं अशोका गार्डन क्षेत्र से पकड़े गए हैं. कई दिनों की मेहनत के बाद पुलिस चाइल्ड लाईन और महिला बाल विकास के अधिकारियों की संयुक्त कार्यवाही में इन बच्चों-महिलाओं को पकड़ा गया है. मौके से पकड़े गए सभी व्यक्तियों से सघन पूछताछ जारी है.  
सीआई कालोनी से रेसक्यू किए गए बच्चों के साथ पकड़े गए व्यक्तियों ने बताया कि इन्हें  हैदराबाद से लगभग दो माह पूर्व यहां लाकर दो कमरों में रखा गया था तथा उनसे भीख मंगवाई जा रही थी. ये सभी बच्चे सक्षम हैं, लेकिन इनका अक्षम हुलिया बनाकर इनसे भीख मंगवाई जा रही थी. इनके पास से ट्रायसिकल भी बरामद की गई है. इसी तरह अशोका गार्डन से रेसक्यू बच्चों को भी अक्षम हुलिया बनाकर भीख मंगवाई जा रही थी. ये कानपुर से यहां कुछ माह पहले आए है. बच्चों की उम्र 3 से 15 वर्ष के बीच होना पाया गया है. एक एनजीओ द्वारा दी गई सूचना के आधार पर जहांगीराबाद डीएसपी  सलीम खान, महिला एवं बाल विकास की संयुक्त संचालक स्वर्णिमा शुक्ला के अलावा बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाईल्ड हेल्प लाईन की अर्चना सहाय की संयुक्त टीम द्वारा उक्त दोनों स्थानों पर छापामार कार्यवाही की गई. 
अब तक मिले 5 सौ बच्चे
भोपाल संभाग की कमिश्नर कल्पना श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक विभिन्न धार्मिक स्थलों के बाहर, ट्रेफिक सिग्नल, रेल्वे स्टेशन तथा बस स्टैंड से बाल भिक्षावृत्ति करते हुए लगभग 500 बच्चे पाए गए हैं. खुशहाल नौनिहाल अभियान की कार्य योजना के तहत पकड़े गए बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा तथा पुनर्वास के कार्य जारी हैं और प्रत्येक बच्चे के आधार पर इस कार्य की आनलाईन मानीटरिंग भी की जा रही है.

सतर्क रहकर शंका होने पर तुरंत करें शिकायत


मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज प्रत्याशियों के साथ राजधानी भोपाल में की बैठक में कहा कि वे मतगणना के दौरान सतर्क रहें और शंका होने पर इसकी तुरंत शिकायत करें. हर चरण की मतगणना को गंभीरता से लें और मतगणना स्थल पर अपने कार्यकर्ताओं की तैनाती सुनिश्चित करें. 
लोकसभा चुनाव की मतगणना के पहले आज मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सभी 29 संसदीय क्षेत्रों के प्रत्याशियों की बैठक आज बुलाई थी. यह बैठक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में संपन्न हुई. बैठक में उन्होंने सभी प्रत्याशियों को मतगणना के दौरान सतर्क रहने की बात कही. उन्होंने मतगणना के प्रत्येक चरण में सतर्क रहने की समझाइश देते हुए कहा कि कोई भी शंका होने पर तत्काल आपत्ति जताने और शिकायत करने में पीछे न रहें. बैठक में प्रदेश के प्रभारी महासचिव दीपक बावरिया, चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख सुरेश पचौरी भी विशेष रूप से मौजूद रहे. 
प्रत्याशियों के साथ ही मुख्यमंत्री ने पार्टी के विधायकों और जिलाध्यक्षों को भी बुलाया है, इनसे मुख्यमंत्री अलग से चर्चा उन्होंने की और उनके क्षेत्रों में हुए मतदान का फीडबेक भी लिया. इस दौरान  वरिष्ठ नेताओं ने प्रत्याशियोंं को मतगणना से जुड़ी बातों का उल्लेख करते हुए कहा कि कोई भी एजेंट अंत तक टेबल न छोड़ने की बात कही. मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेताओं ने साफ कहा कि  ईवीएम के नंबरों का मिलान करने के बाद ही मतगणना शुरू कराएं. एजेंट के हस्ताक्षर का मिलान करें और हर राउंड का सर्टिफिकेट लेने के बाद ही आगे की मतगणना कराएं. प्रत्याशियों की इस बैठक में प्रदेश के चारों बड़े नेता पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भोपाल, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव खंडवा और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह  उपस्थित नहीं थे. सिंधिया विदेश में हैं तो अजय सिंह की माताजी का निधन गत दिनों हुआ है, जबकि भोपाल के प्रत्याशी दिग्विजय सिंह दिल्ली में थे वे आज शाम को वापस भोपाल लौटेंगे.

बहुमत साबित करने की मांग को लेकर अकेले पड़े भार्गव



मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर कांग्रेस द्वारा बहुमत साबित करने की मांग को लेकर अकेले पड़ गए हैं. भाजपा संगठन ने उनका साथ नहीं दिया है. वहीं कोई भी नेता उनके समर्थन में सामने नहीं आया है.
लोकसभा चुनाव के लिए आए एग्जिट पोल के बाद भाजपा की ओर से सोमवार को सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कमलनाथ सरकार पर हमला बोला. उन्होंने मांग कर डाली की कांग्रेस सरकार को विधानसभा का विशेष सत्र लाकर बहुमत साबित करना चाहिए. इसके लिए उन्होंने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र भी लिखने की बात भी कही. मगर भार्गव के इस बयान से पूरी भाजपा  अलग नजर आई. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंंह चौहान ने तो भार्गव की बात का जिक्र किया और न ही इस मुद्दे पर किसी तरह की कोई टिप्पणी की. वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह भी इस मुद्दे पर मौन रहे. मामला कुछ ऐसा तूल पकड़ा की बात पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तक पहुंचा दिया गया.  शाह ने भी इस पर आपत्ति जताई और कहा कि संगठन और राष्ट्रीय इकाई को भरोसे में लेकर नेता प्रतिपक्ष को  कोई बात कहनी चाहिए थी. बताया जाता है कि प्रदेश के नेताओं द्वारा की गई शिकायत के बाद शाह ने नेता प्रतिपक्ष को इस मामले में बयानबाजी से बचने की सलाह दी है. सूत्रों के अनुसार प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी आलाकमान से नेता प्रतिपक्ष द्वारा एग्जिट पोल ने नतीजों के आधार पर ही बहुमत साबित करने की चुनौती पर ऐतराज जताया है. इसके अलावा प्रदेश भाजपा के कई और नेता भी इससे खुश नहीं हैं.
पत्र में जिक्र नहीं किया बहुमत साबित करने का
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की नाराजगी और प्रदेश के नेताओं द्वारा नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव द्वारा दिए गए बहुमत साबित करने के बयान के बाद उनसे दूरी बनने के चलते भार्गव को अपनी बात से हटना पड़ा. यही वजह रही है कि उन्होंने राज्यपाल को जो पत्र लिखा उसमें कहीं भी यह जिक्र नहीं किया कि विशेष सत्र में कांग्रेस को बहुमत साबित करना चाहिए, बल्कि उन्होंने पत्र में लिखा है कि तात्कालिक महत्व के विषयों पर चर्चा की आवश्यकता बताते हुए विशेष सत्र बुलाया जाए. भाजपा में ही उनकी इस मांग को लेकर असहमति नजर आई है.

सरकार गिराने विधायकों को 50 करोड़ का आफर दे रही भाजपा

 जनसंपर्क मंत्री ने कहा भाजपा के 25 विधायक हमारे संपर्क में

देश में लोकसभा चुनाव के एक्जिट पोल आने के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए भाजपा नेताओं द्वारा लगातार बयानबाजी की जा रही है, वहीं कांग्रेस की ओर से एक मंत्री ने यह आरोप लगाया है कि भाजपा द्वारा कांग्रेस के विधायकों को उनका समर्थन पाने के लिए 50 करोड़ रुपए तक के आफर दिए जा रहे हैं. वहीं राज्य के जनसंपर्क मंत्री ने भी दावा किया है कि भाजपा के 25 विधायक कांग्रेस के संपर्क में हैं.
राज्य में कमलनाथ सरकार को भाजपा द्वारा वैसे तो सरकार बनने के बाद से ही लंगड़ी सरकार की उपमा दी जा रही है और भाजपा द्वारा सरकार के कभी भी गिर जाने की बात कही जा रही थी. मगर अब यह मामला लोकसभा चुनाव के एक्जिट पोल आने के बाद और गर्मा गया है. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव द्वारा विधानसभा सत्र बुलाकर कांग्रेस को बहुमत साबित करने की बात कहने के बाद इस मामले को लेकर अब कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जहां बहुमत साबित करने के लिए तैयार होने की बात कही तो वहीं राज्य के मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने यह आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा कांग्रेस विधायकों को 50 करोड़ रुपए तक का प्रलोभन दिया जा रहा है. भाजपा द्वारा सरकार गिराने के लिए विधायकों की खरीद फरोख्त तक किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने यह दावा भी किया कि हमारे कोई भी साथी भाजपा के इस प्रलोभन में आने वाले नहीं है. तोमर ने कहा कि भाजपा के मंत्री व्यापमं घोटाले सहित अन्य घोटालों में फंसे हैं, इसके चलते वे इस तरह के कार्य कर रहे हैं.
यहां उल्लेखनीय है कि राज्य में कमलनाथ सरकार के गठन के साथ ही इस तरह के बयानबाजी भी की गई थी. पूर्व में कांग्रेस के राष्ट्रीय महामंत्री और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी भाजपा पर इस तरह के आरोप लगा चुके हैं. हालांकि मुख्यमंत्री कमलनाथ बहुमत साबित करने को तैयार होने की बात कह रहे हैं, वे कह चुके हैं कि कांग्रेस पहले भी चार बार विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर चुकी है, फिर भी वह इसके लिए तैयार है. मुख्यमंत्री भी यह आरोप लगाया है कि भाजपा के मंत्री और विधायक घोटालें की जांच से बचने के लिए यह सब कर रहे हैं.
भाजपा के 25 विधायक हमारे संपर्क में 
राज्य के जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने यह दावा किया है कि  भाजपा के 25 विधायक कांग्रेस के संपर्क में हैं. 23 तारीख को लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद जब देश में भाजपा की सरकार नहीं बनेगी तो ये 25 विधायक हमारे साथ आएंगे. शर्मा ने कहा कि भाजपा के कहने पर कांग्रेस ने विधानसभा में पहले भी बहुमत साबित किया है, भाजपा द्वारा केवल अधिकारियों में डर बैठाने के लिए यह सब कुछ किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भाजपा की इस तरह बातों से न तो अधिकारियों पर कोई असर पड़ेगा और न ही कांग्रेस और उसके कार्यकर्ताओं में किसी तरह का कोई भय है.
खुलेगी सुनील जोशी हत्याकांड की फाइल
भोपाल से भाजपा की प्रत्याशी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की मुसीबत बढ़ती नजर आ रही है. राज्य के कानून और जनसंपर्क मंत्री पी.सी.शर्मा ने मीडिया से चर्चा करते हुए इस बात के संकेत दिए हैं कि सुनील जोशी हत्याकांड की फाइल सरकार खोलने का मन बना चुकी है. शर्मा ने कहा कि इस मामले में प्रज्ञा सिंह ठाकुर की भूमिका की जांच होगी. उन्होंने कहा कि शहीद हेमंत करकरे और नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने जैसे बयान देने को लेकर प्रज्ञा द्वारा दिए गए बयान उनकी विचारधारा को प्रकट करते हैं. उनकी इस सोच को देखते हुए हमें लगता है कि वे हत्याकांड में शामिल हो सकती है, इसलिए हम सुनील जोशी हत्याकांड की  फाइल खोलने का मन बना चुके हैं.

मनोरंजन का जरिया एक्जिट पोल


मध्यप्रदेश में एग्जिट पोल पर नई बहस छिड़ गई है. राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसे मनोरंजन का जरिया बताया है, तो इस पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ पर निशाना साधा और कहा कि जल्द ही उनके मुगालते दूर हो जाएंगे.
राज्य में एग्जिट पोल के आने के बाद से भाजपा नेताओं में खुशी दिखाई दे रही है, वहीं कांग्रेस इस पोल को नकार रही है. कांग्रेस नेताओं द्वारा लगातार इन पोलों को गलत बताया जा रहा है. इसके चलते आज प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में राजीव गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मीडिया से चर्चा करते हुए एक टिप्पणी कर दी, जिसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उन पर कटाक्ष करने से नहीं चूके. 
दरअसल मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि एग्जिट पोल तो केवल मनोरंजन का जरिया है, जिस पर भाजपा जश्न मना रही है. इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री कहा कि  राजीव गांधी  ने देश को नई दिशा दी. आज लैपटाप मोबाइल ये सब राजीव गांधी की सोच थी, जब राजीव गांधी कम्प्यूटर और आईटी लाए थे तो लोग हंसते थे. लोग कहते थे ये बेकार है, लेकिन आज पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का ही ये काम है, जिसके कारण देश की पहचान दुनिया में बनी.
वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा एग्जिट पोल पर की गई टिप्पणी पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कटाक्ष किया है. उन्होंने  एनडीए की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली  रवाना होने से पहले कहा कि कांग्रेस इसे जो माने वह उसका काम है. उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ पर  निशाना साधते हुए कहा है कि 23 तारीख को मुख्यमंत्री सहित सबके मुगालते दूर हो जाएंगे. उन्होंने आज फिर दावा है कि भाजपा 300 और एनडीए 350 से ज्यादा सीट लाकर सरकार बनाएगी.  
मोदी के लिए हवन
एक्जिट पोल के बाद राजधानी भोपाल में भाजपा समर्थको के बीच नरेंद्र मोदी को लेकर बहुत अधिक उत्साह दिखाई दे रहा है. फिर एक बार मोदी सरकार की उम्मीद लेकर आज राजधानी भोपाल में भाजपा के समर्थकों ने हवन-यज्ञ किया. मोदी समर्थको का इस यज्ञ का केवल कहना था कि हमारा एक मात्र उद्देश्य था कि एक बार फिर केंद्र में भाजपा सरकार आए और प्रधानमंत्री मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बने. यज्ञ करने वाले लोगों का यह भी कहना है कि देश में मोदी जैसा प्रधानमंत्री कभी कोई नहीं हो सकता है.