मंगलवार, 14 मई 2019

परिणाम से पहले मतदान की समीक्षा करेंगे कमलनाथ

प्रत्याशियों और विधायकों की राजधानी में 21 को बुलाई बैठक
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने लोकसभा के मतदान के बाद परिणाम आने से पहले प्रत्याशियों और लोकसभा क्षेत्रों के कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई है. इस बैठक में वे मतदान की समीक्षा कर यह जानेंगे कि कहां पर किस तरह के परिणाम आ रहे हैं. साथ ही कुछ स्थानों पर प्रत्याशियों द्वारा विधायकों के साथ तालमेल न होने की शिकायतें भी कमलनाथ को मिली हैं, इस पर भी वे चर्चा करेंगे.
मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने 21 मई को प्रदेश के सभी लोकसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों और कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई है. प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में यह बैठक दो अलग-अलग चरणों में होगी. पहले प्रत्याशियों के साथ बैठक होगी, जिसमें उनके लोकसभा क्षेत्र की स्थिति और परिणाम का आकलन किया जाएगा. इसके साथ ही प्रत्याशियों से मुख्यमंत्री यह भी जानेंगे कि किस विधायक ने किस तरह से चुनाव में काम किया और किस विधायक ने पार्टी प्रत्याशी से दूरी बनाए रखी. 
प्रत्याशियों के साथ बैठक के बाद कांग्रेस के विधायकों के साथ कमलनाथ की बैठक होगी. इस बैठक वे विधायकों से उनके क्षेत्र में हुए मतदान की स्थिति का आकलन करेंगे और परिणाम के बारे में जानकारी लेंगे. साथ ही जिन विधायकों की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची है, उन्हें नसीहत भी दी जाएगी. यहां उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने चुनाव के पहले ही मंत्रियों और कांग्रेस विधायकों को जिम्मेदारी सौंप कर साफ कह दिया था कि यह चुनाव उनके लिए महत्वपूर्ण है. इस चुनाव के बाद उनके कार्य का आकलन किया जाएगा.
मंत्रिमंडल विस्तार की भी चल पड़ी अटकलें
मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने की अटकलें भी चल पड़ी है. बताया जाता है कि वे परिणाम आने  के बाद वे नाराज विधायकों को महत्व दे सकते हैं. साथ ही बसपा और सपा की नाराजगी को भी दूर कर सकते हैं.  परिणाम आने के बाद जिन मंत्रियों के क्षेत्रों में आशा के अनुरुप  परिणाम नहीं आए उन मंत्रियों की मंत्रिमंडल से छुट्टी भी हो सकती है.  मंत्रियों को मुख्यमंत्री ने चुनाव के पूर्व साफ कहा था कि कांग्रेस उनके  विधानसभा क्षेत्रों के अलावा प्रभार वाले जिलों में हर हाल में जीतनी चाहिए. अगर ऐसा नहीं हुआ तो मंत्रिपद से उन्हें हाथ धोना पड़ेगा. वहीं नाराज चल रहे निर्दलीय विधायकों की नाराजगी को भी वे परिणाम आने के बाद दूर करने का काम करेंगे.

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