यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस नेता और भोपाल से पराजित उम्मीदवार दिग्विजयसिंह द्वारा साध्वी प्रज्ञा की जीत को गोडसे की विचारधारा वालों की जीत बताने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही. शर्मा ने कहा कि ऐसे लोग जो हमेशा हिंसा और अशांति को हवा देने का काम करते रहे हैं, खुद को शांतिदूत बता रहे हैं, जो हास्यास्पद है.
शर्मा ने कहा कि भोपाल का चुनाव वास्तव में ऐसे दलों और नेताओं की हार है, जो राष्ट्र के विरोधियों, देश के टुकड़े-टुकड़े करने के नारे लगाने वालों, आतंकवादियों और हिंसा फैलाने वालों को सम्मान देते रहे हैं. शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी और अहिंसा के उनके सिद्धांत के अनुयायी होने का दावा करने वाले ये फर्जी लोग हमेशा हिंसा को हवा देते रहे हैं. 1984 के सिख दंगों से लेकर मुजफ्फरपुर, मेरठ और पता नहीं कितने दंगों में इन्होंने हजारों निर्दोष लोगों का खून बहाया है, पता नहीं कितने मासूमों की बलि ली है. शर्मा ने कहा कि देश के सैकड़ों निरपराध नागरिकों का खून बहाने वाले, जाकिर नाईक जैसे लोगों की तरफदारी करने वाले इन नेताओं को किसी और पर टिप्पणी करने का अधिकार ही नहीं है.
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