प्रधानमंत्री से चर्चा के बाद तय होगा सांसद रहे या फिर विधायक
मध्यप्रदेश में कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में भाजपा ने करारी हार तो दे दी, मगर उसके एक विधायक के जीतने से खुद भाजपा के लिए संकट खड़ा हो गया है. भाजपा अपने विधायक से अगर इस्तीफा दिलाती है तो कांग्रेस स्वत: ही 115 विधायकों के साथ बहुमत में आ जाएगी. कांगे्रस के लिए यह स्थिति छह माह के लिए बनेगी. इसके बाद उपचुनाव होने पर फिर कांग्रेस पर संकट बरकरार रहेगा.
मध्यप्रदेश में भाजपा ने रतलाम-झाबुआ से विधायक जी.एस.डामोर को मैदान में उतारा था. डामोर ने कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया को हरा कर चुनाव जीत लिया. पहले तो भाजपा जीत की खुशी मना रही थी, मगर जब लगातार राज्य की कांग्रेस सरकार को गिराने की बात भाजपा नेताओं द्वारा तेज की गई तो यह बात उसके लिए मुसीबत बनती नजर आने लगी. संख्या बल के हिसाब से देखा जाए तो कांग्रेस के पास वर्तमान में 114 विधायक है, जबकि भाजपा के 109 विधायक है. इस स्थिति में डामोर विधायकी छोड़कर सांसद बनते हैं तो यह भाजपा के लिए मुसीबत खड़ी करने वाली बात होगी. भाजपा का एक विधायक कम होते ही संख्याबल 229 के हिसाब से कांग्रेस स्वत: ही 115 विधायकों के साथ बहुमत में आ जाएगी. इस स्थिति में भाजपा के कांग्रेस की सरकार गिराने के मंसूबे को झटका लगेगा. हालांकि यह स्थिति छह माह याने उपचुनाव तक के लिए रहेगी. इसके बाद फिर कांग्रेस के लिए संकट खड़ा हो सकता है.
यहां उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं और वर्तमान में उसे एक निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल ने समर्थन दिया है, जिसे मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. इसके अलावा सपा के एक, बसपा के दो और निर्दलीय तीन का भी कांग्रेस को समर्थन मिला हुआ है.
डामोर मिल चुके हैं मोदी से
विधायक से सांसद बने जी.एस.डामोर को लेकर भाजपा नेता चिंतित नजर आने लगे हैं. वैसे डामोर के पास अभी फैसला लेने के लिए करीब 12 दिन का समय है. वे किस सदन में जाना चाहते हैं. डामोर इस मुद्दे को लेकर एक बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर चुके हैं. फिलहाल मोदी ने इस मामले में उन्हें कोई जवाब नहीं दिया है और शांत रहने को कहा है. डामोर का कहना है कि राष्ट्रीय संगठन जो आदेश करेगा, वे उसके अनुरुप फैसला लेंगे. वहीं प्रदेश संगठन इस मामले को लेकर चिंतित जरुर है, मगर राष्ट्रीय नेतृत्व के फैसले का इंतजार वह भी कर रहा है.
तकनीकी पक्ष पर विचार के बाद लेंगे फैसला
डामोर के मामले को लेकर प्रदेश संगठन भी तकनीकी पक्ष की जानकारी ले रहा है. खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि इस मामले में तकनीकी पक्ष की जो राय सामने आएगी, उसके हिसाब से हम कुछ कहने की स्थिति में है.फिलहाल हमारे पास 12-13 दिन हंै, इस मुद्दे पर विचार करने के. राष्ट्रीय नेतृत्व से भी इस मामले को लेकर मंथन किया जाएगा. 30 मई को प्रधानमंत्री की शपथ के बाद ही पार्टी इस मुद्दे पर अपना फैसला लेगी.
मध्यप्रदेश में कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में भाजपा ने करारी हार तो दे दी, मगर उसके एक विधायक के जीतने से खुद भाजपा के लिए संकट खड़ा हो गया है. भाजपा अपने विधायक से अगर इस्तीफा दिलाती है तो कांग्रेस स्वत: ही 115 विधायकों के साथ बहुमत में आ जाएगी. कांगे्रस के लिए यह स्थिति छह माह के लिए बनेगी. इसके बाद उपचुनाव होने पर फिर कांग्रेस पर संकट बरकरार रहेगा.मध्यप्रदेश में भाजपा ने रतलाम-झाबुआ से विधायक जी.एस.डामोर को मैदान में उतारा था. डामोर ने कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया को हरा कर चुनाव जीत लिया. पहले तो भाजपा जीत की खुशी मना रही थी, मगर जब लगातार राज्य की कांग्रेस सरकार को गिराने की बात भाजपा नेताओं द्वारा तेज की गई तो यह बात उसके लिए मुसीबत बनती नजर आने लगी. संख्या बल के हिसाब से देखा जाए तो कांग्रेस के पास वर्तमान में 114 विधायक है, जबकि भाजपा के 109 विधायक है. इस स्थिति में डामोर विधायकी छोड़कर सांसद बनते हैं तो यह भाजपा के लिए मुसीबत खड़ी करने वाली बात होगी. भाजपा का एक विधायक कम होते ही संख्याबल 229 के हिसाब से कांग्रेस स्वत: ही 115 विधायकों के साथ बहुमत में आ जाएगी. इस स्थिति में भाजपा के कांग्रेस की सरकार गिराने के मंसूबे को झटका लगेगा. हालांकि यह स्थिति छह माह याने उपचुनाव तक के लिए रहेगी. इसके बाद फिर कांग्रेस के लिए संकट खड़ा हो सकता है.
यहां उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं और वर्तमान में उसे एक निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल ने समर्थन दिया है, जिसे मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. इसके अलावा सपा के एक, बसपा के दो और निर्दलीय तीन का भी कांग्रेस को समर्थन मिला हुआ है.
डामोर मिल चुके हैं मोदी से
विधायक से सांसद बने जी.एस.डामोर को लेकर भाजपा नेता चिंतित नजर आने लगे हैं. वैसे डामोर के पास अभी फैसला लेने के लिए करीब 12 दिन का समय है. वे किस सदन में जाना चाहते हैं. डामोर इस मुद्दे को लेकर एक बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर चुके हैं. फिलहाल मोदी ने इस मामले में उन्हें कोई जवाब नहीं दिया है और शांत रहने को कहा है. डामोर का कहना है कि राष्ट्रीय संगठन जो आदेश करेगा, वे उसके अनुरुप फैसला लेंगे. वहीं प्रदेश संगठन इस मामले को लेकर चिंतित जरुर है, मगर राष्ट्रीय नेतृत्व के फैसले का इंतजार वह भी कर रहा है.
तकनीकी पक्ष पर विचार के बाद लेंगे फैसला
डामोर के मामले को लेकर प्रदेश संगठन भी तकनीकी पक्ष की जानकारी ले रहा है. खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि इस मामले में तकनीकी पक्ष की जो राय सामने आएगी, उसके हिसाब से हम कुछ कहने की स्थिति में है.फिलहाल हमारे पास 12-13 दिन हंै, इस मुद्दे पर विचार करने के. राष्ट्रीय नेतृत्व से भी इस मामले को लेकर मंथन किया जाएगा. 30 मई को प्रधानमंत्री की शपथ के बाद ही पार्टी इस मुद्दे पर अपना फैसला लेगी.
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