गुरुवार, 23 मई 2019

बरकरार रही शिवराज की लोकप्रियता

कैलाश विजयवर्गीय का बढ़ेगा कद
मध्यप्रदेश में भाजपा के पक्ष में जिस तरह से परिणाम आए, उसके बाद यह साबित हो गया कि प्रदेश में शिवराज की लोकप्रियता अब भी बरकरार है. शिवराज सिंह ने मैदान में जिस तरह से सभाएं ली और नेताओं की नाराजगी को नकार कर कार्यकर्ताओं का उत्साह बरकरार रखा उसने जीत में बड़ी भागीदारी की है. वहीं प्रदेश के वरिष्ठ नेता और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयर्गीय का कद भी इस जीत के बाद संगठन में बढ़ने की बात सामने आ रही है. वे जरुर पश्चिम बंगाल में थे, मगर इंदौर में उनकी टीम ने भाजपा की जीत बरकरार रखने में सफलता हासिल की है.
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद यह माना जा रहा था कि शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता प्रदेश में घट रही है. इसके चलते उनका विरोध भी संगठन में होने लगा था, साथ ही उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर प्रदेश से बाहर राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की कवायद भी होने लगी थी, मगर शिवराज प्रदेश से बाहर नहीं गए, इसके बाद संगठन ने लोकसभा चुनाव में उन्हें जिम्मेदारी सौंपी और संकेत दिए कि जीत का रिकार्ड भाजपा को तोड़ना है. इसके बाद शिवराज सिंह ने जमकर मेहनत की और प्रदेश भर में लगातार सभाएं कर लोगों की बीच पहुंचे साथ ही निराश कार्यकर्ताओं में जोश भरा. इसके चलते कई स्थानों पर नाराज नेताओं की नाराजगी के बाद भी भाजपा को सफलता हासिल हुई. करीब एक दर्जन लोकसभा सीटों पर भाजपा को अपनों से ही खतरा था, मगर चुनाव के परिणामों ने साफ संदेश दिया कि राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के साथ-साथ प्रादेशिक संगठन अब भी प्रदेश में मजबूत है. 
शिवराज सिंह के अलावा राज्य के वरिष्ठ नेता और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल के प्रभारी होने के कारण वैसे तो राज्य में सक्रिय नजर नहीं आए, मगर वे प्रदेश स्तरीय बैठकों में कई बार शामिल हुए और चुनावी रणनीति की बिसात भी बिछाई. इंदौर से जब  सुमित्रा महाजन का टिकट काटकर शंकर लालवानी को दिया गया तो यह कहा जा रहा था कि वे नाराज है, मगर कैलाश की टीम यहां लगी रही. एक अवसर तो ऐसा भी आया जब पश्चिम बंगाल में उन्होंने अपनी टीम के कई सदस्यों को बुला लिया, तब कहा जा रहा था कि भाजपा यहां कमजोर होगी, मगर विजयवर्गीय ने अपनी अधूरी टीम शंकर के साथ लगाए रखी. परिणामों के बाद यह माना जा रहा है कि कैलाश विजयर्गीय का कद अब राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ना तय है. संगठन के कुछ नेता तो उन्हें मोदी मंत्रिमंडल का सदस्य भी मान रहे हैं.


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