बंटा गुर्जर समाज, भड़ाना ने बनाया त्रिकोणीय मुकाबला
मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल के मुरैना संसदीय क्षेत्र में फिर बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा गर्माया है. इस बार बसपा प्रत्याशी का इसे लेकर विरोध है. बसपा प्रत्याशी करतार सिंह भड़ाना के मैदान में उतरते ही यहां गुर्जर समाज बंट गया है. इसके चलते कांग्रेस को अब यहां पर नाराज बसपा के मतदाताओं पर उम्मीद बंधी है. साथ ही कांग्रेस की नजरें यहां के ब्राह्मण मतदाताओं पर टिक गई हैं.
मुरैना संसदीय क्षेत्र में जातिवाद हमेशा हावी रहा है. यहां पर ब्राह्मण, गुर्जर और बसपा का वोट बैंक परिणाम को पलटता रहा है. इस बार लोकसभा चुनाव में जातिगत समीकरणों को साधते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने प्रत्याशी घोषित किए थे. 2009 में चुनाव जीते केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर मशक्कत के बाद फिर भाजपा का टिकट यहां पा गए, इसके बाद कांग्रेस ने यहां पर विधानसभा चुनाव हारे रामनिवास रावत पर भरोसा जताया. दोनों ने मैदान में सक्रियता दिखाई ही थी कि बसपा ने अपना प्रत्याशी बदलकर यहां पर करतार सिंह भड़ाना को मैदान में उतार दिया. भड़ाना के मैदान में उतरने से फिर यहां जातिगत समीकरण बिगड़ा है. भड़ाना खुद गुर्जर समाज से आते हैं, लिहाजा उन्होंने गुर्जर समाज को बांट दिया, लेकिन उनके लिए मुसीबत बन गए बसपा के नाराज मतदाता. मुरैना संसदीय क्षेत्र में हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए बसपा नेताओं ने अपनी जमावट तेज कर दी है और कांग्रेस के पक्ष में बसपा के नाराज मतदाताओं को लाने का काम शुरु कर दिया. इसके अलावा कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में हाल ही में कांग्रेस में वापस आए चौधरी राकेश सिंह और बसपा के बलवीर दंडोतिया ने ब्राह्मण समाज को अपने पक्ष में करने की कवायद की है. कांग्रेस की इस रणनीति ने भाजपा प्रत्याशी नरेन्द्र सिंह तोमर और बसपा के करतार सिंंह भड़ाना की मुश्किलें बढ़ा दी है. यहां पर मुकाबला तो त्रिकोणीय हो गया है, मगर माहौल अभी किसके पक्ष में है, यह कोई नहीं जानता. मगर जातिगत समीकरण एक बार फिर यहां पर परिणाम को प्रभावित करेगा.
अनूप और अशोक चल रहे हैं नाराज
भाजपा के वर्तमान सांसद अनूप मिश्रा टिकट काटे जाने से और पूर्व सांसद अशोक अर्गल टिकट न मिलने से यहां पर नाराज चल रहे हैं. दोनों ही नेता प्रचार और जनसंपर्क में भी नजर नहीं आ रहे हैं, इसके चलते उनके समर्थक भी निराश है. इन नेताओं की नाराजगी नरेन्द्र सिंह तोमर के लिए परेशानी खड़ी कर रही है. अर्गल मुरैना से चार बार सांसद रहे हैं, 2009 में परिसीमन के बाद उन्हें भाजपा ने भिंड से प्रत्याशी बनाया था, मगर 2014 में उनका टिकट काट दिया था. इसके बाद इस बार उन्होंने भिंड से टिकट की मांग की थी, मगर उन्हें टिकट नहीं दिया गया. वहीं अनूप मिश्रा अपना टिकट कटने से नाराज चल रहे हैं.
मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल के मुरैना संसदीय क्षेत्र में फिर बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा गर्माया है. इस बार बसपा प्रत्याशी का इसे लेकर विरोध है. बसपा प्रत्याशी करतार सिंह भड़ाना के मैदान में उतरते ही यहां गुर्जर समाज बंट गया है. इसके चलते कांग्रेस को अब यहां पर नाराज बसपा के मतदाताओं पर उम्मीद बंधी है. साथ ही कांग्रेस की नजरें यहां के ब्राह्मण मतदाताओं पर टिक गई हैं.
मुरैना संसदीय क्षेत्र में जातिवाद हमेशा हावी रहा है. यहां पर ब्राह्मण, गुर्जर और बसपा का वोट बैंक परिणाम को पलटता रहा है. इस बार लोकसभा चुनाव में जातिगत समीकरणों को साधते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने प्रत्याशी घोषित किए थे. 2009 में चुनाव जीते केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर मशक्कत के बाद फिर भाजपा का टिकट यहां पा गए, इसके बाद कांग्रेस ने यहां पर विधानसभा चुनाव हारे रामनिवास रावत पर भरोसा जताया. दोनों ने मैदान में सक्रियता दिखाई ही थी कि बसपा ने अपना प्रत्याशी बदलकर यहां पर करतार सिंह भड़ाना को मैदान में उतार दिया. भड़ाना के मैदान में उतरने से फिर यहां जातिगत समीकरण बिगड़ा है. भड़ाना खुद गुर्जर समाज से आते हैं, लिहाजा उन्होंने गुर्जर समाज को बांट दिया, लेकिन उनके लिए मुसीबत बन गए बसपा के नाराज मतदाता. मुरैना संसदीय क्षेत्र में हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए बसपा नेताओं ने अपनी जमावट तेज कर दी है और कांग्रेस के पक्ष में बसपा के नाराज मतदाताओं को लाने का काम शुरु कर दिया. इसके अलावा कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में हाल ही में कांग्रेस में वापस आए चौधरी राकेश सिंह और बसपा के बलवीर दंडोतिया ने ब्राह्मण समाज को अपने पक्ष में करने की कवायद की है. कांग्रेस की इस रणनीति ने भाजपा प्रत्याशी नरेन्द्र सिंह तोमर और बसपा के करतार सिंंह भड़ाना की मुश्किलें बढ़ा दी है. यहां पर मुकाबला तो त्रिकोणीय हो गया है, मगर माहौल अभी किसके पक्ष में है, यह कोई नहीं जानता. मगर जातिगत समीकरण एक बार फिर यहां पर परिणाम को प्रभावित करेगा.
अनूप और अशोक चल रहे हैं नाराज
भाजपा के वर्तमान सांसद अनूप मिश्रा टिकट काटे जाने से और पूर्व सांसद अशोक अर्गल टिकट न मिलने से यहां पर नाराज चल रहे हैं. दोनों ही नेता प्रचार और जनसंपर्क में भी नजर नहीं आ रहे हैं, इसके चलते उनके समर्थक भी निराश है. इन नेताओं की नाराजगी नरेन्द्र सिंह तोमर के लिए परेशानी खड़ी कर रही है. अर्गल मुरैना से चार बार सांसद रहे हैं, 2009 में परिसीमन के बाद उन्हें भाजपा ने भिंड से प्रत्याशी बनाया था, मगर 2014 में उनका टिकट काट दिया था. इसके बाद इस बार उन्होंने भिंड से टिकट की मांग की थी, मगर उन्हें टिकट नहीं दिया गया. वहीं अनूप मिश्रा अपना टिकट कटने से नाराज चल रहे हैं.

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