मध्यप्रदेश पुलिस ऐसे अपराधियों का कर रही डेटा एकत्रित
भोपाल। एडीजी सायबर सेल योगेश देशमुख ने बताया कि तकनीक का इस्तेमाल लोगों के जीवन को सुविधाजनक बना रहा है, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यह उनके लिए खतरा भी है। मानव दुर्व्यापार में लिप्त लोग तकनीक के प्रयोग को अधिक सुरक्षित मानते हैं। वह तकनीक का उपयोग करने में शातिर हैं और आसानी से नागरिकों को अपने जाल में फंसा लेते हैं। मध्यप्रदेश पुलिस लगातार ऐसे अपराधियों का डेटा बेस के आधार पर रणनीति तैयार कर मानव दुर्व्यापार रोक रही है।
एडीजी योगेश देशमुख ने यह बात आज राजधानी भोपाल में ’सायबर इनेबल्ड ह्युमन ट्रेफिकिंग’’ विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि हमारे पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को दक्ष बनाया जा रहा है, ताकि वे समन्वय स्थापित कर सायबर अपराधियों को पकड़कर पीड़ितों को न्याय दिला सके। हालांकि मानव दुर्व्यापार रोकने के लिए नागरिकों को भी जागरूक होने की आवश्यकता है। प्रज्जवला की प्रोजेक्ट एडवाइजर डॉ. सुनीथा कृष्णन ने कहा कि तकनीक का उपयोग कर मानव दुर्व्यापार में लिप्त आरोपी, पीड़ित को गुमराह कर अपने झांसे में फंसाते हैं या लालच देकर उन्हें शोषण की ओर धकेला जाता है। यह केवल महिलाओं और बच्चों के साथ नहीं बल्कि पुरुष वर्ग के साथ भी हो रहा है। पहले यह माना जाता था कि केवल गरीब, अशिक्षित, विशेष समुदाय या जाति के लोगों के साथ इस तरह की घटनाएं होती हैं, जबकि हर आयु, लिंग, वर्ग और समुदाय के लोगों के साथ मानव दुर्व्यापार संबंधी अपराध बढ़ रहे हैं।
कोरोना के बाद से अचानक बढ़े मामले
प्रज्जवला टीम की प्रोजेक्ट क्वार्डिनेट स्वस्ति राणा ने कहा कि मानव दुर्व्यापार के लिए तकनीक का उपयोग अधिक बढ़ा है। दरअसल ऑनलाइन क्लासेस के लिए बच्चों के हाथ में मोबाइल पहुंच गया, जिसका फायदा उठाकर मानव दुर्व्यापार करने वालों ने बच्चों को शिकार बनाना शुरू किया। हमारी संस्था 11 राज्यों में शोध कर रही है, जिसके बाद सरकार के साथ मिलकर मानव दुर्व्यापार रोकने में नेशनल एक्शन प्लान बनाने में मदद मिलेगी।
अकेलापन महसूस करने वाली महिलाएं रहती हैं टारगेट
प्रज्जवला की रिसर्च ऑफिसर ताबिश अहसान ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को गुमराह कर मानव दुर्व्यापार की ओर धकेला जाता है। इनमें विशेषकर अकेलापन महसूस करने वाली महिलाएं और युवतियां मानव तस्करों के टारगेट पर होती हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी महिलाओं की भावनाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से समझते हुए पहले तो उनसे दोस्ती की जाती है और जीवनभर उनका साथ निभाने का झांसा देकर उन्हें मानव दुर्व्यापार का शिकार बनाया जाता है।
जल्द अमीर बनने का दिखाते हैं सपना
प्रज्जवला के लीगल एक्सपर्ट आदिरा श्रीनिवासन ने मानव दुर्व्यापार के तीन अंतर्राष्ट्रीय मामलों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि अधिकतर ऐसे मामलों में जल्दी अमीर बनाने का झांसा देकर लोगों को फंसाया जाता है। कई बार पूरा परिवार झांसे में आ जाता है। उन्होंने शोषण के लिए ऑस्ट्रिया, अमेरिका में शोषण के मामलों और इंडोनेशिया में ऑर्गन की तस्करी के लिए लोगों को शिकार बनाने के बारे में जानकारी दी।
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