सोमवार, 30 अप्रैल 2018

मध्यप्रदेश में ढ़ाई साल में मरे 74 बाघ

 सेवानिवृत्त वन सेवा के अधिकारी ने उठाए सवाल
मध्यप्रदेश में ढ़ाई साल में 74 बाघों की मौत हो गई. बाघों की मौत मामले की सिस्टम परिवर्तन अभियान के अध्यक्ष और भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी आजाद सिंह डबास ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को पत्र लिखकर मांग की है कि वन्य प्राणियों की हो रहे शिकार के तथ्यों को वन विभाग छीपा रहा है. उन्होंने प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक जितेन्द्र अग्रवाल पर इस मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है.
सिस्टम परिवर्तन अभियान के अध्यक्ष और भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी आजाद सिंह डबास ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में ढ़ाई साल में प्रदेश में 74 बाघों की मौत पर चिंता जताई है. उन्होंने बाघों की गणना में हेराफेरी किए जाने का आरोप लगाया है.  डबास ने लिखे पत्र में कहा है कि राज्य में वर्ष 2016 में 33 और वर्ष 2017 में 30 बाघों की मौत हुई. वहीं इस वर्ष अब तक 11 बाघों की जान जा चुकी है, जबकि जिम्मेदार वन विभाग के अफसर इन मौतों को सामान्य मौत बताने पर तुले हुए हैं.
उन्होंने कहा कि  विगत कुछ दिनों से कान्हा, पन्ना टाईगर रिजर्व से बाघों के आपसी संघर्ष की खबरें आ रही हैं. इससे एक बात तो साफ हो जाती है कि टाईगर रिजर्व में कोर एरिया के बाहर जो बफर जोन बनाए गए हैं, वह सिर्फ कागजों तक सीमित हैं. बफर जोन में न तो पर्याप्त संख्या में शाकाहारी जानवर मौजूद है और न  ही पीने के पानी का इंतजाम है. डबास ने कहा, बफर क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में घास भी उपलब्ध नहीं है, जिससे मजबूर होकर बाघ को कोर एरिया में जाना पड़ता है और आपसी संघर्ष की स्थिति पैदा होती है.
डबास ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में टाईगर रिजर्व की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए वन विभाग के अफसरों पर अपनी जिम्मेदारी का ठीक तरह से निर्वहन न करने का आरोप लगाया है और साथ ही वास्तविकता के खुलासे के लिए जांच की मांग की. उन्होंने वन्य प्राथियों के अवैध शिकार को लेकर पत्र में लिखा है कि विभाग वन क्षेत्रों में पेट्रोलिंग की कमी, अधीनस्थ स्टाफ का वनों के अंदरुनी क्षेत्रा में नहीं रहना, ग्रामीणों से जीवंत संपर्क न होने से सूचना तंत्र का कमजोर होना, वन क्षेत्रों में में शिकार के मुख्य कारण बताए हैं. उन्होंने कहा कि कान्हा और पेंच से बाघत्तें के नोरादेही अभयारण्य में भेजने की भी खबरें इन दिनों आ रही है, लेकिन यह कोई नहीं पूछ रहा है कि इस अभयारण्य में 15-20 वर्ष पूर्व करीब 20 टाईगर होते थे वे कहां गए और इस स्थिति के लिए कौन जिम्मेदार है. इसी तरह करीब 10 वर्ष पूर्व पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघों की शून्य होने की स्थिति पर भी वन विभाग का अमला पर्दा डाल रहा है.

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